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समाधि से लेकर जगतगुरु तक की यात्रा के ऐतिहासिक क्षण IIजगद्गुरु महायाेगी सिद्ध बाबा Hindi version

Himalayan Siddha Mahayog

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[0:02]Section 1

सीतानाथ समारम्भा रामानन्दार्य मध्यमा अस्मदाचार्य पर्यंतम वन्दे गुरु परम्पराम् जय सियाराम भगवत इच्छा तथा सद्गुरुदेव के आज्ञा अनुसार भगवन न...

[4:27]Section 2

आपने हिमालय के अति दुर्गम क्षेत्रों में पहुंचकर स्वास्थ्य शिविर तथा राम नाम साधना के प्रचार-प्रसार द्वारा हजारों लोगों को ईसाई बनने से बच...

[8:36]Section 3

उसी समय पर पर्यावरण संरक्षण तथा आत्मनिर्भरता के लिए हरित अभियान का संकल्प किया गया।

[9:55]Section 4

जसविदे स्नान, हेमाद्री संकल्प, मंडप प्रवेश, मंडप पूजा, वास्तु पूजा, आचार्यादि वर्ण, अरण मंतन, अग्नि स्थापना आदि संपन्न कर हवन आरंभ हुआ। य...

[17:15]Section 5

श्री राम तारक ब्रह्म महायज्ञ के समापन के पश्चात सदगुरुदेव को नेपाल के विभिन्न नगरों में स्वत स्फूर्त रूप से लाखों जनसागर द्वारा पुष्प वृष...

[20:51]Section 6

श्री रामकृष्णाचार्य भगवान की श्रीमन स्थ समर मंच स्थाहा महात्मनो मनि शन हा रामानंदा पद राम कृष्णम जगतगुरु आज से इनका नाम श्री कृष्णाचार्य...

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[8:36]उसी समय पर पर्यावरण संरक्षण तथा आत्मनिर्भरता के लिए हरित अभियान का संकल्प किया गया।
[16:42]उसी दिन देश देशांतर से पधारे हुए संत महात्माओं तथा भक्तजनों द्वारा सतगुरुदेव का दिव्य महाभिषेक भी किया गया तत्पश्चात कोटि दीप प्रज्वलित किए गए।
[17:15]श्री राम तारक ब्रह्म महायज्ञ के समापन के पश्चात सदगुरुदेव को नेपाल के विभिन्न नगरों में स्वत स्फूर्त रूप से लाखों जनसागर द्वारा पुष्प वृष्टि सहित नागरिक अभिनंदन किया गया।
[19:41]हिंदुतत्त्व रक्षण भक्षण त्रिदण्डम् धर्मदशाम प्रवर्तन चण्ड दण्डम् नास्तिक वाद वरुणा लय मंथ दण्डम् श्री राम भद्रसृते जयता त्रिदण्डम्।
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[0:02]सीतानाथ समारम्भा रामानन्दार्य मध्यमा अस्मदाचार्य पर्यंतम वन्दे गुरु परम्पराम् जय सियाराम भगवत इच्छा तथा सद्गुरुदेव के आज्ञा अनुसार भगवन नाम साधना के प्रचार में कटिबद्ध आप अनंत श्री विवशित जगद्गुरु महायोगी सिद्ध बाबा बाल्यावस्था से ही विरक्त साधु हैं।

[0:33]आपने भौतिक विज्ञान अंतर्गत वनस्पति शास्त्र साथ ही वेदांत सांख्य योग ज्योतिष आयुर्वेद नाड़ी विज्ञान स्वर विज्ञान आदि विषय का गहरतम अध्ययन किया है। श्रीमड़ी रामदास छावनी पिठाधिश्वर अनंत श्री भूषित नृत्य गोपाल दास जी महाराज की अनंत अनंत कृपा से आप लावित आप आद्य जगद्गुरु स्वामी रामानंदाचार्य भगवान प्रणित सुरत शब्द योग के मर्मज्ञ सिद्धि योगी हैं। इस साधना पद्धति को सिद्ध महायोग भी कहा जाता है। लगभग 300 वर्षों से विलुप्त प्राय इस साधना को गुरुजनों की कृपा और अपनी तपोबल से सांगोपांग प्राप्त कर इस दुष्कर कलिकाल में योग की अति उच्चतम भूमि समाधि अवस्था भी सहज ही प्राप्त करने में आप सफल रहे हैं। और इसी नितांत निजी साधना को नाम भक्ति उपासना में लोगों को प्रेरित करने की महनीय उद्देश्य के साथ समय-समय पर भारत के चेन्नई नेपाल के बरा क्षेत्र चतुरा धाम तथा नेपाल की सुंदर नगरी पोखरा आदि भिन्न-भिन्न स्थानों में बिना ऑक्सीजन 9-9 दिन तक समाधि में रहकर साधना की विशेषताओं को सार्वजनिक किया है। जो जनमानस में अत्यंत चर्चा का विषय बना हुआ है।

[3:52]आप आयुर्वेद रस मर्मज्ञ हैं। कैंसर आदि अनेकों दुसाध्य रोगों का निदान पारंपरिक उपचार पद्धति के माध्यम से करके आपने अनेक जनों को जीवन दान दिया है। 2008 के तत्कालीन नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्पकमल दाल प्रचंड द्वारा उद्घाटित बृहत स्वास्थ्य साधना शिविर आपकी सामाजिक सेवा भावना का ज्वलंत उदाहरण है।

[4:27]आपने हिमालय के अति दुर्गम क्षेत्रों में पहुंचकर स्वास्थ्य शिविर तथा राम नाम साधना के प्रचार-प्रसार द्वारा हजारों लोगों को ईसाई बनने से बचाया है। हजारों लोग आज आपकी प्रेरणा से साधना में लगे हुए हैं जिनको देखकर अपार आनंद की अनुभूति होती है। साथ ही जिन गौ माता का संरक्षण करने के लिए भारत कई पीढ़ियों से प्रयास करने पर भी सफलता नहीं पा रहा है।

[5:08]परंतु आपके प्रयासों में गाय को नेपाल के राष्ट्रीय पशु के रूप में पुनः संरक्षण प्रदान करने में सफलता मिली है। आज आपके संरक्षण में नेपाल भारत कनाडा अमेरिका ऑस्ट्रेलिया इंग्लैंड आदि देशों में राम नाम साधना के कार्यक्रम संचालित हैं। अनेकों साधक रोम-रोम में राम नाम का अजपा जाप और अनहत नाथ का श्रवण करने की अवस्था से अनुग्रहित है। स्वयं में निहित ब्रह्म विद्या प्रसारण द्वारा श्रीराम नाम भक्ति संसार तथा महायोग विस्तार करने के उपक्रम में आपके सत्संकल्प में वैश्विक इतिहास को देखा जाए तो काशी में जगद्गुरु स्वामी रामानंदाचार्य के प्राकट्य हेतु किए गए यज्ञ के पश्चात 705 वर्षों के बाद नेपाल के इतिहास में पहली बार श्री राम तारक ब्रह्म महायज्ञ की आयोजना जगद्गुरु श्री रामानंदाचार्य सेवा पीठ हनुमान मंदिर बराह चित्र चतुरा धाम में किया गया। यह बरा क्षेत्र चतुरा धाम अनेकों विशेषताओं से युक्त है। कहा जाता है कि भगवान श्री राम और शिवजी आपस में एक दूसरे से आलिंगन करते समय शिवजी के नेत्रों से जो प्रेमास्त्र गिरा उसी से रुद्राक्ष की उत्पत्ति इसी क्षेत्र में हुई है इसलिए यह रुद्राक्ष रण क्षेत्र कहलाता है। अतः भगवान श्री राम अपने बरा अवतार में पृथ्वी का उद्धार कर पृथ्वी के अनुरोध पर इसी क्षेत्र में विराजमान हैं इसलिए यह दिव्य धाम कहलाता है। श्वेत वारा कल्प के प्रथम मनंतर के मनु कुश ने इसी क्षेत्र से मानव सृष्टि का आरंभ किया था। यह क्षेत्र कौशल्या जी श्रृंगी ऋषि और विश्वामित्र जी की भी जन्मभूमि है। संत शिरोमणि तुलसीदास जी ने बाल्यकाल में श्रीरामचरितमानस की कथा का इसी भूमि में श्रवण किया था।

[7:13]इस प्रकार अनेकों महिमाओं से मंडित इस क्षेत्र को सर्वथा उपयुक्त जानकर आपने पीठ परिसर पर ही यज्ञ स्थल का चयन किया। यज्ञ से पूर्व आपने बारसों साधक साधिकाओं द्वारा एक वर्ष तक श्री राम तारक मंत्र राज की एक अरब 60 करोड़ संख्या में जापानुष्ठान संपन्न कराया। तत्पश्चात अनुष्ठान की पूर्णता हेतु विभिन्न प्रकार के 108 हवन कुंडों से युक्त विशाल यज्ञ मंडप में 16 करोड़ हवना चरण सहित अत्यंत दुर्लभ तथा ऐतिहासिक महायज्ञ संपन्न कराया। भक्त जनों के आवास हेतु भवन निर्माण अर्थ प्रदेश मुख्यमंत्री माननीय श्री श्रीधन राय द्वारा भवन सिला न्यास कराया तत्पश्चात 120 दिनों में 136 कमरों वाले तीन दिव्य भवनों का निर्माण संपन्न कर धर्मशाला की स्थापना की। ये दोनों ऐतिहासिक कार्यक्रमों का उद्घाटन नेपाल की प्रथम महिला राष्ट्रपति महामहिम विद्या देवी भंडारी जी के कर कमलों से संपन्न हुआ।

[8:36]उसी समय पर पर्यावरण संरक्षण तथा आत्मनिर्भरता के लिए हरित अभियान का संकल्प किया गया।

[9:09]इसी महायज्ञ के संदर्भ में 8 फरवरी 2019 के दिन शोभा यात्रा संपन्न किया गया।

[9:31]10 फरवरी 2019 के दिन प्रातः काल से ही बारसों साधक साधिकाओं द्वारा कलश यात्रा

[9:55]जसविदे स्नान, हेमाद्री संकल्प, मंडप प्रवेश, मंडप पूजा, वास्तु पूजा, आचार्यादि वर्ण, अरण मंतन, अग्नि स्थापना आदि संपन्न कर हवन आरंभ हुआ। यज्ञ अवधि के अवसर पर लाखों-लाख श्रद्धालु भक्तजनों ने आपसे प्रत्यक्ष कृपा एवं आशीर्वाद सहित यज्ञ दर्शन का शुभ अवसर प्राप्त किया। इस दुर्लभ विराट महायज्ञ के पुनीत अवसर पर पधारे हुए जगद्गुरु श्री रामानंदाचार्य पद प्रतिष्ठित अग्रदेव द्वाराचार्य पीठ रयवासा धाम सीकर राजस्थान भारत के पिठाधिश्वर डॉक्टर राघवाचार्य वेदांती जी महाराज द्वारा चतुर् संप्रदाय के विशिष्ट व्यक्तित्व मंडलेश्वर महामंडलेश्वर एवं जगद्गुरुओं की समुपस्थिति में उनकी सम्मति से 11 फरवरी 2018 के दिन महायज्ञ स्थल पर आश्रम को श्रीराम तारक ब्रह्म पीठ के रूप में घोषित किया।

[11:31]परम पूज्य प्रातः स्मरणीय परम वंदनीय सतगुरुदेव भगवान के चरण कमल में निवेदन करना चाहता हूं। 11 तारीख श्री अग्रदेवाचार्य पीठ पिठाधिश्वर जगद्गुरु श्री राघवनंदाचार्य जी के द्वारा यहां की गतिविधियों को देखते हुए श्री राम तारक ब्रह्म पीठ ये होना चाहिए इस प्रकार के आपने संबोधन किए थे। इसे आज श्री सतगुरुदेव भगवान के द्वारा प्रतिष्ठा और यह शिलालेख अभी तत्काल तैयार नहीं कर पाए इसलिए प्रतीक के रूप में जो लिपि पत्र को अनावरण करके आशीर्वाद के लिए अनुरोध करते हैं।

[16:42]उसी दिन देश देशांतर से पधारे हुए संत महात्माओं तथा भक्तजनों द्वारा सतगुरुदेव का दिव्य महाभिषेक भी किया गया तत्पश्चात कोटि दीप प्रज्वलित किए गए।

[17:15]श्री राम तारक ब्रह्म महायज्ञ के समापन के पश्चात सदगुरुदेव को नेपाल के विभिन्न नगरों में स्वत स्फूर्त रूप से लाखों जनसागर द्वारा पुष्प वृष्टि सहित नागरिक अभिनंदन किया गया।

[19:41]हिंदुतत्त्व रक्षण भक्षण त्रिदण्डम् धर्मदशाम प्रवर्तन चण्ड दण्डम् नास्तिक वाद वरुणा लय मंथ दण्डम् श्री राम भद्रसृते जयता त्रिदण्डम्।

[20:35]आज से इनका नाम श्री रामकृष्णाचार्य जी महाराज की।

[20:51]श्री रामकृष्णाचार्य भगवान की श्रीमन स्थ समर मंच स्थाहा महात्मनो मनि शन हा रामानंदा पद राम कृष्णम जगतगुरु आज से इनका नाम श्री कृष्णाचार्य नाम श्री गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामकृष्ण रामाचार्य होगा। अयोध्या धाम से लौटने के बाद रामानंदीय वैष्णव संघ द्वारा जानकी मंदिर प्रांगण जनकपुर धाम में तथा श्री वैष्णव आचार्य परिषद नेपाल द्वारा विराटनगर पाँचाली मंदिर में सद्गुरुदेव जगद्गुरु महाराज का भव्य अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया।

[26:31]इस प्रकार के दुर्लभ और ऐतिहासिक क्षण हम लोगों के लिए अत्यंत गौरव का विषय है। जात पाथ लिंग वर्ग क्षेत्र के भेदभाव से रहित होकर वैदिक सनातन संस्कृति के वसुदेव कुटुंबकम के मूल मर्म को लेकर सागरमाथा के शिखर से भगवन नाम का ध्वज फहराता रहे। जय सियाराम।

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