[0:00]नमस्कार दोस्तों, पिछली बार जब मैंने धुरंधर फिल्म पर वीडियो बनाया था तब मैंने कहा था कि इस फिल्म के डायरेक्टर आदित्य धर बीजेपी के चाटूकार हैं। आज मैं इस चीज के लिए माफी मांगना चाहूंगा। मुझे नहीं लगता दोस्तों कि ये बीजेपी के चाटुकार हैं। अब मुझे लगता है कि ये महा चाटुकार हैं। ये इस लेवल के चाटुकार हैं कि नॉर्थ कोरिया का डिक्टेटर किम जोंग उन भी जेलेस फील करेगा इन्हें देखकर। सोचेगा काश मुझे भी आदित्य धर जैसा कोई मिल जाता। धुरंधर 2 कोई एंटरटेनमेंट के मकसद से बनाई गई फिल्म नहीं है। ये बीजेपी की सबसे एक्सपेंसिव इलेक्शन एडवर्टाइजमेंट है वो भी एक इंटरवल के साथ। नॉर्मली एड्स को स्किप किया जाता है, लेकिन इस ऐड को ₹500 देकर आप खुद थिएटर में देखने जा सकते हो। और ये मैं नहीं कह रहा हूं खुद बीजेपी के चीफ मिनिस्टर कह रहे हैं। आसाम के सीएम हेमंत बिस्वा शर्मा ने पब्लिकली बोला, जो लोग धुरंधर देखने जा रहे हैं, वो बीजेपी को वोट करेंगे। जो धुरंधर देखने जा रहे हैं, वो लोग बीजेपी बीजेपी को वोट डालने वाला है। अच्छा है मेरे लिए। बीजेपी का ऑफिशियल हैंडल खुद फिल्म के गानों को मोदी के प्रमोशनल मटेरियल के तौर पर यूज कर रहा है। अब बात सिर्फ यहीं तक होती तो फिर भी ठीक था, लेकिन इस फिल्म में इतने झूठ भरे हैं, इतने झूठ भरे हैं कि इसके जरिए देश का इतिहास रीराइट करने की कोशिश की जा रही है। एक बड़े स्केल पे लोगों को ब्रेन वॉश करने की कोशिश की जा रही है। और कमाल की बात यह है कि यह उन इवेंट्स को झुठला रही है जो लोगों ने खुद जिए हैं। ऐसा करना ना सिर्फ देश की इंसल्ट है बल्कि सभी देशवासियों का अपमान करना है। और इस सब के पीछे मकसद सिर्फ एक नरेंद्र मोदी की एडवर्टाइजमेंट।
[1:35]हर अच्छी एडवर्टाइजमेंट में दोस्तों एक डिस्क्लेमर होता है। वो छोटे-छोटे अक्षरों वाली लाइन जो स्क्रीन के नीचे फ्लैश होती है, जिसे कोई पढ़ता नहीं है। या फिर वो तेजी से पढ़े जाने वाली लाइन। धुरंधर का डिस्क्लेमर भी कुछ ऐसा ही है। फिल्म कहती है कि यह एक फिक्शनल वर्क है इंस्पायर्ड बाय रियल लाइफ इवेंट्स। और कहा जाता है आपसे कि एनी रेसेंबलेंस टू एक्चुअल पर्सन्स इज प्युरली कोइंसिडेंटल। यह कहना ही अपने आप में एक साफ झूठ है। मतलब आप नरेंद्र मोदी का असली चेहरा और असली फुटेज इस्तेमाल करोगे। दाऊद इब्राहिम और बाकी गैंगस्टर्स का असली नाम यूज करोगे और फिर कहोगे कि यह तो सब इत्तेफाक है। ऐसे तो मैं भी कह दूं ये कार्टून शेयर करके कि ये फिक्शनल वर्क है इंस्पायर्ड बाय रियल लाइफ इवेंट्स और अगर आपको किसी का भी चेहरा मिलता-जुलता लग रहा है किसी से ये सिर्फ इत्तेफाक की बात है। प्योरली कोइंसिडेंटल। असलियत में ये डिस्क्लेमर एक लीगल चीट कोड है और इसी की आड़ में ऑडियंस को मैनिपुलेट किया जाता है। ताकि आपको पता ही ना चल पाए कि सच्चाई कहां खत्म हुई और इमेजिनरी कहानी कहां से शुरू हुई। यहां लिखी गई है फ्रेश टोमेटो केचप। सो ऐसा लग सकता है कि ये फ्रेश टोमेटो केचप है, लेकिन अगर आप पैकेज को घुमाओ ये सिर्फ ब्रांड नेम है एंड डस नॉट रिप्रेजेंट इट्स ट्रू नेचर। किसी भी ऐड का सबसे पावरफुल टूल यही होता है। फाइन प्रिंट में छुपा हुआ झूठ। आदित्य धर ने इस इंस्पायर्ड बाय रियल इवेंट्स वाली व्हाइट वॉशिंग में इतनी एक्सपर्टीज डेवलप कर ली है कि अगर ओसामा बिन लादेन जिंदा होता और उसे अपनी पब्लिक इमेज सुधारनी होती तो आदित्य धर उसके लिए फिल्म बनाता। ओसामा द मिसअंडरस्टूड फिलेंथ्रोपिस्ट, डायरेक्टेड बाय आदित्य धर। इंस्पायर्ड बाय रियल इवेंट्स बट एनी रेसेंबलेंस इज प्युरली कोइंसिडेंटल।
[3:08]हर स्मार्ट ऐड अपना प्रोडक्ट बेचने से पहले ऑडियंस का मूड सेट करती है। परफ्यूम एड्स में रोमांटिक म्यूजिक बचता है। कार एड्स में खुली सड़कें दिखती हैं। और बीजेपी की इस ऐड में मुसलमानों को बारबेरिक दिखाया जाता है। फिल्म के शुरू में ही एक सीन है जहां पाकिस्तान में एक सिख आदमी को फेक ब्लास्फेमी चार्जेस पर जिंदा जला दिया जाता है। मॉब जो वहां मौजूद है वो सर तन से जुदा के नारे लगा रहा होता है। पॉइंट ये नहीं है कि पाकिस्तान में असल में ऐसी घटनाएं होती हैं या नहीं। पॉइंट ये है कि अगर बीजेपी की एडवर्टाइजमेंट करनी है तो उसमें मूड सेट हिंदू-मुसलमान के बीच नफरत फैलाकर ही किया जाएगा। क्योंकि इस सीन को अगर आप फिल्म से निकाल भी देते तो उससे स्टोरी लाइन पर कोई फर्क नहीं पड़ता। कैरेक्टर डेवलपमेंट पर कोई फर्क नहीं पड़ता। यह सीन उतना ही अनइंपॉर्टेंट है जितना फिर हेराफेरी फिल्म में डोमिनोज पिज्जा वाला सीन। वहां पर सिर्फ उसे इस पिज्जा ब्रांड को प्रमोट करने के लिए ऐड किया गया था और यहां पर सिर्फ नफरत प्रमोट करने के लिए। साइकोलॉजी में इसे इमोशनल प्राइमिंग कहा जाता है। पहले इमोशन जनरेट करो फिर उस इमोशन के ऊपर अपना नैरेटिव बनाओ। ये टेक्नीक ऐसी है जैसे कोई हलवाई पहले आपको एक तीखी मिर्च खिलाए, इतनी तीखी कि आपकी जुबान जल जाए। फिर उसके बाद आपको मिठाई खरीदनी ही पड़ेगी क्योंकि आपका मुंह जल रहा होगा। आदित्य धर ने इसी तरीके से ऑडियंस की जुबान जला दी ताकि बाद में जो भी प्रोपेगेंडा परोसा जाए वो सीधा हजम कर ले।
[4:28]अब देखिए फिल्म की सबसे मजेदार प्रोपेगेंडा ट्रिक। धुरंधर टू के विलन की जिम्मेदारी सिर्फ विलेन बनने की नहीं। इन बेचारों को हर सीन में मोदी की तारीफ भी करनी पड़ रही है। दाऊद इब्राहिम का कैरेक्टर कहता है जब से ये चाय वाला आया है हमारे लोगों में डर बढ़ गया है। सोच कर देखो इंडिया का मोस्ट वांटेड गैंगस्टर बैठकर प्रधानमंत्री की इफेक्टिवनेस का रिव्यू दे रहा है। जैसे ये कोई स्विगी डिलीवरी ड्राइवर हो। फाइव स्टार्स बहुत इफेक्टिव हाईली रेकमेंडेड वाह मोदी जी वाह। लेकिन सीरियसली ये प्रोपेगेंडा टेक्नीक कितनी शातिर है इसे समझना जरूरी है। अगर फिल्म का हीरो मोदी की तारीफ करता तो उससे ज्यादा असर नहीं पड़ता। लेकिन अगर फिल्म का सबसे बड़ा विलन मोदी की तारीफ कर रहा है तो ऑडियंस अलग लेवल पर कन्विंस्ड होती है। इमेजिन करो अगर एवेंजर्स में थैनोस कहता अरे ये स्पाइडरमैन को जब से मैंने देखा है ना तब से तो मेरे हाथ कांपने लगे हैं। आपके दिमाग को ऑटोमेटिकली लगने लगता कि स्पाइडरमैन सबसे पावरफुल हीरो है एवेंजर्स का। हालांकि ऐसी लाइनें विलन्स से बुलवाना बहुत ही स्टुपिड चीज है। अजीबोगरीब लगती है। लेकिन एट द एंड ऑफ द डे याद रखिए इस फिल्म का मकसद हमजा को बेचना नहीं है बल्कि मोदी को बेचना है। एक चीज नोटिस की आपने मैंने इस वीडियो में जो भी कुछ आपको अभी तक बताया है ओपनिंग हुक से लेकर एक के बाद एक एविडेंस प्रेजेंट करना सब एक सिंगल स्टोरी लाइन में। इसके पीछे भी टेक्नीक्स इन्वॉल्वड है। बस फर्क यह है कि आप इन टेक्निक्स को किस काम में लगाते हो। झूठा प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए या जनता तक सच पहुंचाने के लिए। इस पावर का अगर ऑनेस्टली इस्तेमाल किया जाए तो एक YouTube चैनल के माध्यम से आप लाखों लोगों की जिंदगियां बदल सकते हो। अगर आपने भी कभी सोचा है दोस्तों सोशल मीडिया पर अपना करियर कैसे बनाया जाए तो मैंने इस पर एक पूरा कोर्स बनाया है। The YouTube ब्लूप्रिंट। ये 7 1/2 घंटे का एक पूरा सिस्टम है जो आपको A to Z सब कुछ सिखाता है। निश कैसे ढूंढें, स्क्रिप्ट कैसे लिखें। फोन से वीडियोस को शूट और एडिट कैसे करें। मोनेटाइजेशन के सारे रास्ते एडसेंस से लेकर ब्रांड डील्स तक। और सबसे इंपॉर्टेंट चीज लोग आपके वीडियोस क्यों देखें इस चीज को क्रैक कैसे करें। मैंने अपने 12 साल के एक्सपीरियंस में जो भी कुछ सीखा है इस कोर्स में सब कुछ सिखाया गया है। हजारों लोग इसे ले चुके हैं और इसकी एवरेज रेटिंग 4.9 आउट ऑफ फाइव है। सबसे अच्छी बात यह है कि मैं आपको कोई महंगी इक्विपमेंट खरीदने को नहीं कहूंगा। सिर्फ आपका स्मार्टफोन काफी है। जॉइन करने का लिंक नीचे डिस्क्रिप्शन में और इस क्यूआर कोड में मिल जाएगा और आप में से पहले हजार लोगों के लिए एक स्पेशल डिस्काउंट। अगर आप कूपन कोड यूज़ करोगे धर 42 DHAR 42 तो आपको 42 परसेंट का डिस्काउंट मिलेगा। जल्दी से जाकर चेक आउट कर सकते हो। एडवर्टाइजमेंट की दुनिया में हर एक ऐड एजेंसी को क्लाइंट एक ब्रीफ देता है। अच्छी एजेंसी उस ब्रीफ को सटल तरीके से एग्जीक्यूट करती है कि ऑडियंस को पता ना चले कि उन्हें क्या बेचा जा रहा है। लेकिन आदित्य धर की एजेंसी ने इस चीज को सीधे-सीधे दिखा दिया। फिल्म में 2014 में नरेंद्र मोदी की ओथ सेरेमनी दिखाई जाती है वो भी रियल फुटेज के साथ। उसी वक्त एक आईएसआई से जुड़ा मेजर इकबाल अपने घर आता है और उसके पिता उसे कहते हैं कि तूने तो बोला था इस बार भी तेरी मर्जी के लोग इलेक्शन जीतेंगे। तूने अमेरिका के डॉलर भर-भर के इंडिया के एनजीओ मीडिया, सोशलिस्ट और यूनिवर्सिटीज सबको दिलवाए, लेकिन फिर भी वह लोग जीत गए। अब वैसे तो ये डायलॉग आईएसआई ऑफिसर ने बोला है, लेकिन अगर यही डायलॉग न्यूज़ चैनल पर बैठा कोई बीजेपी स्पोक्सपर्सन बोल रहा होता तो आप फर्क नहीं बता पाते। क्योंकि ये फिल्म लिटरली आईएसआई ऑफिसर्स के मुंह से संबित पात्रा के टॉकिंग पॉइंट्स बुलवा रही है। विदेशी ताकतें भी ऐसी हैं जिनके आंखों में वो खटक रहे हैं। नमस्ते, बिस्कुट खाओ। आदित्य धर ने यहां पर व्हाट्सएप फॉरवर्ड को अपना सिनेमैटिक यूनिवर्स दे दिया है। अगर फिल्म की शुरुआत में ये इंस्पायर्ड बाय रियल इवेंट्स की जगह इंस्पायर्ड बाय व्हाट्सएप फॉरवर्ड लिखता तो ज्यादा सच होता। इस चीज को रियलिटी से मैच करके देखो। फिल्म कहती है कि अमेरिका मोदी को प्रधानमंत्री नहीं बनने देना चाहता था। लेकिन 2014 में जिस दिन इलेक्शन रिजल्ट्स आए उसी दिन यूएस के प्रेसिडेंट बराक ओबामा ने मोदी को पर्सनली कॉल करके बधाई दी थी। व्हाइट हाउस में इन्वाइट किया था। अब कहोगे शायद इलेक्शन जीतने के बाद वो पलट गए होंगे, लेकिन ये खबर देखो। फरवरी 2014 में इलेक्शन रिजल्ट से तीन महीने पहले यूएस एंबेसडर खुद गुजरात जाकर मोदी से मुलाकात कर रही थी। यानी अमेरिका पहले से ही मोदी के साथ काम करने की तैयारी कर रहा था। और अमेरिका तो छोड़िए 2018 में पाकिस्तान के फॉर्मर आईएसआई हेड लेफ्टिनेंट जनरल असद दुर्रानी ने खुद कहा कि आईएसआई मोदी को प्रधानमंत्री के तौर पर प्रेफर करता है। ये देखो आर्टिकल में क्या लिखा है। मोदी के जीतने पर पाकिस्तान का रिएक्शन था कि इट सर्वड इंडिया राइट। लेट मोदी टेक केयर ऑफ इंडिया, डिस्ट्रॉय इट्स इमेज, एंड पॉसिबली डिस्ट्रॉय इट्स इनर बैलेंस। यानी असल में आईएसआई चीफ ने कहा कि उसे मोदी पसंद है और फिल्म में क्या दिखाया जा रहा है ठीक इसका उल्टा। लेकिन इस डायलॉग में सबसे बड़ा प्रोपेगेंडा यह है कि आईएसआई इंडिया की एनजीओ मीडिया यूनिवर्सिटीज और सोशलिस्ट को फंड कर रहा था। यह एग्जैक्टली वही नैरेटिव है जो बीजेपी की सरकार इस्तेमाल करती है सिविल सोसाइटी की आवाज को दबाने के लिए। बीजेपी ने इसी व्हाट्सएप नैरेटिव के बेसिस पर एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया को 2020 में बंद कर दिया। न्यूज़ क्लिक के जर्नलिस्ट के घरों पर 2023 में रेड्स करवाए। 2014 के बाद से 20,000 से ज्यादा एनजीओस के फॉरेन फंडिंग लाइसेंसेस कैंसिल करवाए हैं जिनमें ग्रीनपीस इंडिया तक भी शामिल है। यह वही एनजीओ हैं जो आपकी साफ हवा के लिए आवाज उठाते हैं, अरावली हिल्स के लिए आवाज उठाते हैं, हसदेव जंगल के लिए आवाज उठाते हैं। लेकिन आदित्य धर इस लेवल का आदमी है कि इसने देश के खिलाफ जाते हुए इन सभी एनजीओस यूनिवर्सिटीज को बदनाम किया। अरे ये तो छोड़िए इसने सोशलिस्ट शब्द को भी आईएसआई फंडेड बता दिया। वो शब्द जो भारत के संविधान में लिखा है इंडियन कॉन्स्टिट्यूशन के प्रीएमबल में लिखा हुआ है।
[9:41]फिल्म में दिखाया जाता है कि जो लोग मोदी का विरोध करते हैं वो फॉरेन फंडेड है, लेकिन एक्चुअल डाटा एग्जैक्टली इसकी उल्टी कहानी बताता है। साल 2002 में द फॉरेन एक्सचेंज ऑफ हेट नाम से एक रिपोर्ट सामने आई और इसमें दिखाया गया कि आईडीआरएफ नाम की एक अमेरिकन ऑर्गेनाइजेशन सिस्टमैटिकली यूएस डोनर्स का पैसा आरएसएस एफिलिएटेड ऑर्गेनाइजेशंस को भेज रही थी। इसके अलावा 2001 से 2012 के बीच में यूएस बेस्ड पांच चैरिटीज ने 55 मिलियन डॉलर से भी ज्यादा संघ से जुड़ी ऑर्गेनाइजेशंस को दिए। और सबसे इंटरेस्टिंग बात देखिए अल जजीरा की इस रिपोर्ट के अनुसार कोविड-19 के दौरान यूएस गवर्नमेंट के फेडरल रिलीफ फंड्स में से 833,000 डॉलर भी राइट विंग ग्रुप्स को गए। लेकिन ये ट्विस्ट आदित्य धर की फिल्म में कभी नहीं आएगा।
[10:28]अब आते हैं इस फिल्म के सबसे बड़े झूठ पर एक ऐसा फैसला जो बीजेपी के खुद के सपोर्टर्स जस्टिफाई नहीं कर पाते। उसे आदित्य धर ने नेशनल सिक्योरिटी मास्टर स्ट्रोक में कन्वर्ट कर दिया। फिल्म में दिखाया जाता है कि पाकिस्तान ने पहले 11,000 करोड़ की फेक करेंसी इंडिया भेजी और दोबारा 60,000 करोड़ की फेक करेंसी भेज रहा था वो भी यूपी इलेक्शन को फंड करने के लिए। इंटेलिजेंस एजेंसीज ने ये बात प्रधानमंत्री को ब्रीफ करी और प्रधानमंत्री ने देश बचाने के लिए नोटबंदी कर डाली। फीलिंग प्राउड ऑफ आवर अननोन मैन ऑफ कोर्स ऑफ कोर्स अब हमें पता चलता है कि डिमॉनेटाइजेशन क्यों हुई थी, वो भी पता चला। अब वैसे तो आप इस चीज को थोड़ा लॉजिकली सोचोगे तो खुद ही आपको लगेगा कोई सेंस है इस बात का। इतनी छोटी सी चीज के लिए कोई इतना बड़ा एक्शन लेता है क्या ये तो वही बात हो गई कि घर में चूहे को पकड़ने के लिए आपने अपने पूरे घर को आग से जला दिया। सच बात ये है कि आरबीआई की 2017-18 की एनुअल रिपोर्ट के अनुसार डिमोनेटाइज किए गए 15.41 लाख करोड़ रुपयों में से 15.31 लाख करोड़ रुपय वापस आ गए थे एक साल के अंदर-अंदर। और ये देखिए आरबीआई ने कहा कि उस साल उन्होंने सिर्फ ₹43 करोड़ की फेक करेंसी डिटेक्ट करी। सिर्फ ₹43 करोड़ यानी कि फिल्म में दिखाए हुए ₹60,000 करोड़ ₹11,000 करोड़ ये सिर्फ आदित्य धर की बनावटी कहानियां है। नेशनल ब्यूरो ऑफ इकोनॉमिक रिसर्च की स्टडी के अनुसार डिमोनेटाइजेशन ने इंडिया की इकोनॉमिक एक्टिविटी को नवंबर-दिसंबर 2016 में कम से कम 3 परसेंटेज पॉइंट्स कम कर दिया। इंडिया के जीडीपी पर इसका बहुत बुरा असर पड़ा जिसका इंपैक्ट अगले कई सालों तक दिखता रहा। एटीएम लाइंस और कैश क्राइसिस की वजह से कम से कम 80 से ज्यादा लोग मारे गए। कोई बैंक्स के बाहर लाइन में खड़ा-खड़ा गिर कर मर गया तो कोई एटीएम के पास हार्ट अटैक से मर गया। बैंक एंप्लॉइज ओवर वर्क से मारे गए। कोई हॉस्पिटल में इलाज नहीं करवा पाया क्योंकि कैश नहीं था। ये सब लोगों ने अपनी आंखों से होते हुए देखा। बीजेपी के कट्टर सपोर्टर्स भी इसे डिफेंड नहीं कर पाते और आदित्य धर इसे अपने पापा की महानता बता रहे हैं। सच बात तो ये है कि अगर सही में मोदी ने इस कारण से नोटबंदी करी होती तो इसका क्रेडिट लेने सबसे पहले वो आगे खड़े होते। मतलब सोच कर देखो जिस इंसान ने वॉर नहीं रुकवाई वो वॉर रुकवाने का क्रेडिट ले रहा है। वॉर रुकवा दी पापा। जो इंसान पुलवामा के शहीद जवानों के नाम पर वोट मांग रहा है वो इस चीज के लिए क्रेडिट ना ले ऐसा हो सकता है क्या। मैं मेरे फर्स्ट टाइम वोटर से कहना चाहता हूं कि आपका पहला वोट कुलगामा में जो वीर शहीद हुए। उन वीर शहीदों के नाम आपका वोट समर्पित हो सकता है। पतांजलि के गुलाब शरबत बोतल में लिखा ही नहीं है कि कितना शुगर है, लेकिन उनके वेबसाइट में लिखा है 99 परसेंट शुगर है। किसी भी ऐड की सबसे पावरफुल टेक्नीक इस चीज में नहीं होती कि आपको क्या दिखाया जा रहा है, बल्कि इसमें होती है कि आपसे क्या छुपाया जा रहा है। इसलिए नोटिस करने वाली बात यहां यह है कि आदित्य धर अपनी इस प्रोपेगेंडा फिल्म में आपको क्या नहीं दिखाते। 25 दिसंबर 2015, प्रधानमंत्री मोदी ने पाकिस्तान का सरप्राइज विजिट किया। ये इंडिया के किसी भी प्राइम मिनिस्टर की 10 साल बाद पाकिस्तान यात्रा थी। इससे पहले सिर्फ प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी 2004 में पाकिस्तान गए थे। मनमोहन सिंह अपने 10 सालों के कार्यकाल में कभी पाकिस्तान नहीं गए। नवाज शरीफ के घर पर दोनों लीडर्स ने करीब 90 मिनट बैठक की और साथ में खाना खाया। फिल्म में आपको नहीं दिखाया गया है क्योंकि ये फिल्म के नैरेटिव के खिलाफ जाता है। जो प्रोडक्ट आपको बेचने की कोशिश की जा रही है उस प्रोडक्ट के खिलाफ जाता है। इसी विजिट के आठ दिन बाद सेकंड जनवरी 2016 को पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन पर टेरर अटैक होता है। पाकिस्तान से आए आतंकवादियों ने इंडियन आर्मी की यूनिफॉर्म पहनकर बेस पर हमला किया। सात इंडियन सिक्योरिटी पर्सनल शहीद होते हैं। यह कहानी भी आपको फिल्म में नहीं मिलेगी क्योंकि इस ऐड कैंपेन में फिट नहीं होती। इसी तरीके से है फरवरी 2019 में पुलवामा हमला। 40 से ज्यादा सीआरपीएफ के जवान शहीद हुए। एनएसए अजीत डोबाल जिन पर फिल्म का मेन कैरेक्टर बेस्ड है 2019 में ये एनएसए थे। 11 इंटेलिजेंस इनपुट्स आ चुके थे कि कुछ होने वाला है लेकिन एक्शन नहीं लिया गया। ये सब आपको इसलिए नहीं दिखाया जाएगा क्योंकि आप प्रोडक्ट खरीदोगे ही नहीं ऐड देखने के बाद। अब सोच कर देखो अगर कोई भी फिल्म मेकर यही सेम टेक्निक्स का इस्तेमाल नरेंद्र मोदी के खिलाफ इस्तेमाल करे तो क्या होगा। गलवान के रियल फुटेज आपको दिखाई जाती है जहां 2020 में चाइना ने 20 इंडियन सोल्जर्स को मारा। फॉर्मर आर्मी चीफ की किताब का रियल कोट इस्तेमाल किया जाता है। प्रधानमंत्री ने आर्मी चीफ को क्लियर ऑर्डर्स देने की बजाय कहा जो उचित समझो वो करो। प्रधानमंत्री का ऑल पार्टी मीटिंग वाला स्टेटमेंट दिखाया जाता है ना कोई घुसा है और फिर ये दिखाया जाता है कि ये स्टेटमेंट ऑफिशियल वीडियो से हटवा दिया गया। इस सारे सच के बीच में अब थोड़ा सा झूठ घोल दो। कहो कि चाइना के साथ सीक्रेट डील हुई थी बीजेपी की। कह दो कि इलेक्ट्रोल बंड्स के जरिए इन्हें फॉरेन फंडिंग मिली थी देश के खिलाफ जाने के लिए। और बाद में इंस्पायर्ड बाय रियल इवेंट्स का डिस्क्लेमर लगा दो। मैं यहां इलेक्शन कमीशन और सुप्रीम कोर्ट से सवाल करना चाहूंगा क्या देश में इस तरीके की फिल्में बनाना अलाउड है। जहां पर किसी नेशनल पॉलिटिकल पार्टी को एंटी नेशनल दिखा दिया जाए। क्या ऐसा कंटेंट बनाना अलाउड है जहां पर आप सच के साथ झूठ घोल दो किसी पॉलिटिकल लीडर को प्रमोट करने के लिए और किसी दूसरे को बदनाम करने के लिए। अगर अलाउड है तो हैरान मत होना अगर फ्यूचर में इन्हीं टेक्निक्स का इस्तेमाल करके कोई फिल्म या कोई कंटेंट सोशल मीडिया पर बीजेपी को देशद्रोही घोषित कर दे। अब आते हैं इस ऐड के सबसे डिस्टर्बिंग सीन पर और ये जेन्युइनली डिस्टर्बिंग है क्योंकि ये रियल लोगों की रियल मौत को एंटरटेनमेंट की तरह पेश करता है। फिल्म में अतीक अहमद पर बेस्ड आतिफ अहमद का कैरेक्टर जेल से बाहर आता है। मीडिया को इंटरव्यू दे रहा है और तभी उसे गोली मार दी जाती है। और तो और फिल्म का कैरेक्टर मेजर इकबाल इसे पाकिस्तान में टीवी पर बैठकर लाइव देखता है। एक क्लीन इंटेलिजेंस ऑपरेशन। अब रियल लाइफ में क्या हुआ था 15 अप्रैल 2023 को आतिफ अहमद और उनके भाई अशरफ को पुलिस कस्टडी में लाइव टेलीविजन पर जर्नलिस्ट बनकर आए तीन हमलावरों ने गोली मार दी थी। अतीक अहमद ने कई दिन पहले सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन दायर की थी कि उसे फेक एनकाउंटर में मारा जाएगा। और ऐसा जब एक्चुअली में हुआ तो ये साफ तौर पर यूपी गवर्नमेंट का लॉ एंड ऑर्डर फेलियर दिखाता है। अब यकीन नहीं करोगे दोस्तों पार्लियामेंट में लोकसभा में नरेंद्र मोदी, अमित शाह और ओम बिरला ने उन्हें श्रद्धांजलि दी थी। श्री अतीक अहमद का निधन 15 अप्रैल 2023 को 60 वर्ष की आयु में प्रयागराज में हुआ। अब यह सवा दिवंगत आत्माओं में के प्रति मोहन रहेगी। अगर ये एक इंटेलिजेंस ऑपरेशन था तो पार्लियामेंट में ट्रिब्यूट क्यों दिया गया। यहीं पर आदित्य धर की पीक डिटेलिंग की पीक डिटेल निकल जाती है। फिल्म में मेजर इकबाल 2023 की हत्या को टीवी पर बैठकर देख रहा है, लेकिन रियल लाइफ में जिस पर्सन पर मेजर इकबाल का कैरेक्टर बेस्ड है वो 2011 में ही मारा जा चुका था। ये सीधे तौर पर इतना झूठ दिखाने की क्या जरूरत पड़ी असल में दोस्तों आदित्य धर की ये बिजनेस रिक्वायरमेंट थी। आदित्य धर को विलन को जिंदा रखना जरूरी था ताकि वो अपनी क्लाइंट ब्रीफ की रिक्वायरमेंट्स को फुलफिल कर सके। जिस प्रोडक्ट को यहां बेच रहा है उसका नैरेटिव अच्छे से बनाया जा सके। यही है इस फिल्म की असलियत दोस्तों यह फिल्म ना सिर्फ भारत के इतिहास को रीराइट करने की कोशिश है, बल्कि ये आपकी जिंदगी को रीराइट कर रही है। जब कोई फिल्म 1947 के बारे में झूठ बोलती है तो वेरिफाई करना मुश्किल होता है क्योंकि उस दौर में आप जिंदा नहीं थे। लेकिन 2016, 2019, 2023 ये सब आपकी आंखों के सामने हुआ है। आपने एटीएम के बाहर लाइनें देखी हैं, पुलवामा हमले की सच्चाई देखी है और ये फिल्म अब आपसे कह रही है कि जो आपने देखा है वो सच नहीं था। असलियत में नोटबंदी एक मास्टर प्लान था। असलियत में यूपी इलेक्शंस पाकिस्तान हार रहा था। असलियत में कस्टोडियल किलिंग एक इंटेलिजेंस ऑपरेशन था। साइकोलॉजी में इसे गैस लाइटिंग कहते हैं जब कोई आपको कन्विंस करने की कोशिश करें कि आपकी अपनी मेमोरी गलत है। आपने अपनी आंखों से जो देखा वो सच नहीं था और जब ये गैस लाइटिंग बड़े स्केल पर हो, बड़े पर्दे पर हो लाखों लोगों के साथ हो, ये सिर्फ एक फिल्म नहीं रहती। ये एक हथियार बन जाती है।
[18:22]आदित्य धर के ऐड का बजट अनलिमिटेड हो सकता है, लेकिन सच्चाई फ्री है और सच्चाई ज्यादा पावरफुल है। अगली बार जब आपसे कोई कहे कि धुरंधर पीक सिनेमा है तो उन्हें बस इतना बोलना कि ना भाई ये पीक सिनेमा नहीं ये पीक एडवर्टाइजमेंट है। एक ऐसी ऐड जिसे आपने ₹500 देकर खरीदा है जिसे डायरेक्ट किया है आदित्य धर ने और जहां बेचा जा रहा है एक प्रोडक्ट जिसका नाम है नरेंद्र मोदी।



