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हर सुबह मेडिटेशन की आदत बनाओ | Osho Hindi Speech Power Of Meditation

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[0:00]हर दिन सुबह मेडिटेशन करने की आदत डालो क्योंकि सुबह का ध्यान सिर्फ एक अभ्यास नहीं। यह तुम्हारे पूरे जीवन की दिशा बदलने वाला अनुभव है। सुबह का समय सबसे शुद्ध होता है, सबसे शांत होता है। उस समय प्रकृति भी जाग रही होती है, पक्षियों की आवाज में भी एक संगीत होता है। हवा में भी एक नई ताजगी होती है और अगर तुम उस समय अपने भीतर उतर जाओ तो तुम अपनी आत्मा की सबसे गहरी आवाज सुन सकते हो। ध्यान का मतलब कोई कठिन साधना नहीं है, ध्यान का मतलब है बस जाग जाना। ध्यान का मतलब है कुछ देर के लिए भागदौड़ से बाहर आ जाना। ध्यान का मतलब है अपने मन के शोर को देखना और उसके पार जाना। तुम रोज सुबह उठते हो, शरीर तो जाग जाता है लेकिन आत्मा अभी भी सोई रहती है। इसलिए जीवन में बेचैनी रहती है, तनाव रहता है, डर रहता है। सुबह का ध्यान तुम्हें भीतर से जगाता है, ये तुम्हें शांति देता है, स्पष्टता देता है और सबसे बड़ा उपहार देता है स्वयं से मिलने का अवसर। आज इंसान की सबसे बड़ी समस्या यही है कि वह बाहर तो बहुत कुछ कर रहा है। लेकिन भीतर वह खाली है, वह दौड़ रहा है, भाग रहा है, कमाने में लगा है, लोगों को खुश करने में लगा है, लेकिन खुद को भूल गया है। ध्यान तुम्हें याद दिलाता है कि तुम सिर्फ शरीर नहीं हो, तुम सिर्फ नाम नहीं हो, तुम सिर्फ संसार का हिस्सा नहीं हो। तुम चेतना हो और चेतना को जागना जरूरी है। सुबह का ध्यान जैसे सूर्य की पहली किरण होती है, जो अंधकार को मिटा देती है। अगर तुम सुबह ध्यान कर लेते हो तो पूरा दिन तुम्हारे लिए अलग हो जाता है। तुम्हारी ऊर्जा बदल जाती है, तुम्हारी सोच बदल जाती है, तुम्हारा व्यवहार बदल जाता है। ध्यान कोई धर्म नहीं है, ध्यान कोई पूजा नहीं है, ध्यान कोई नियम नहीं है। ध्यान तो जीवन की सबसे सरल प्रक्रिया है, बस शांत बैठना, सांस को देखना, अपने भीतर उतरना। लेकिन मन कहेगा कल से करेंगे, मन कहेगा आज समय नहीं है, मन कहेगा अभी नींद आ रही है, लेकिन याद रखना मन कभी नहीं चाहेगा कि तुम ध्यान करो। क्योंकि ध्यान का मतलब है मन का अंत, ध्यान का मतलब है मन के जाल से मुक्त होना। इसलिए रोज सुबह खुद से कहना बस 10 मिनट। शुरू में 10 मिनट ही सही, लेकिन उस 10 मिनट में तुम अपने पूरे जीवन की शुरुआत कर रहे हो। सुबह ध्यान करने से तुम्हारे भीतर एक स्थिरता आती है। तुम छोटी-छोटी बातों पर परेशान नहीं होते, लोग वही रहते हैं, परिस्थितियां वही रहती हैं, लेकिन तुम बदल जाते हो। तुम्हारे भीतर एक केंद्र बन जाता है और जिसके भीतर केंद्र है, वही जीवन को सही ढंग से जी सकता है। ध्यान तुम्हें वर्तमान में लाता है। इंसान या तो बीते हुए कल में जीता है या आने वाले कल में खोया रहता है। ध्यान तुम्हें अभी में लाता है। अभी में ही जीवन है, अभी में ही आनंद है, अभी में ही परमात्मा है। हर सुबह ध्यान को अपनी आदत बना लो। जैसे तुम रोज नहाते हो वैसे ही ध्यान करो, क्योंकि शरीर की सफाई से ज्यादा जरूरी है मन की सफाई। शरीर पर धूल लगती है, लेकिन मन पर विचारों की धूल जमती रहती है। ध्यान उस धूल को हटाता है, ध्यान तुम्हें हल्का करता है, ध्यान तुम्हें मुक्त करता है और याद रखना, ध्यान का परिणाम तुरंत दिखाई नहीं देता। लेकिन धीरे-धीरे तुम्हारा पूरा अस्तित्व बदल जाता है। जैसे बीज मिट्टी में दबा होता है, तुम उसे रोज देखो तो कुछ नहीं दिखता। लेकिन समय के साथ वही बीज वृक्ष बन जाता है। ध्यान भी वही बीज है, रोज सुबह उसका जल देना, रोज सुबह खुद को कुछ क्षण देना। क्योंकि जो इंसान खुद को समय नहीं देता, वह जीवन में कभी सच्चा आनंद नहीं पा सकता। सुबह का ध्यान तुम्हें दूसरों से नहीं जोड़ता, सुबह का ध्यान तुम्हें खुद से जोड़ता है। और जिसने खुद को जान लिया, उसने संसार को जान लिया। जिसने खुद को समझ लिया, वह कभी दुखी नहीं हो सकता। दुख बाहर से नहीं आता, दुख भीतर के अज्ञान से आता है। ध्यान उस अज्ञान को मिटा देता है। तो आज से निर्णय करो हर सुबह ध्यान करूंगा, चाहे दुनिया कुछ भी कहे, चाहे मन लाख बहाने बनाए, लेकिन तुम अपने भीतर उतरोगे। क्योंकि जीवन की सबसे बड़ी यात्रा बाहर नहीं है। जीवन की सबसे बड़ी यात्रा भीतर है और सुबह का ध्यान उस यात्रा की पहली सीढ़ी है। हर दिन सुबह मेडिटेशन करने की आदत डालो, क्योंकि यह आदत तुम्हें भीड़ में भी अकेला नहीं होने देगी। शोर में भी शांत रखेगी, कठिन समय में भी मजबूत बनाएगी। ध्यान तुम्हें जीवन का असली स्वाद देगा, ध्यान तुम्हें स्वयं का प्रकाश देगा और एक दिन तुम जानोगे जिसे तुम बाहर खोज रहे थे वह सब भीतर ही था।

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