[0:00]कैसे अमेरिका और इजराइल ने Khamenei को एलिमिनेट किया? अमेरिका और इजराइल महीनों से Khamenei की डेली लाइफ को ट्रैक कर रहे थे। Khamenei तेहरान में बने Beit-e Rahbari कंपाउंड से ऑपरेट करते थे। जिसके नीचे उनकी सिक्योरिटी के लिए डीप अंडरग्राउंड बंकर्स बने हुए थे। इतने डीप कि उन तक पहुँचने के लिए एलिवेटर में भी 5 मिनट से ज़्यादा समय लग जाता था। बेसिकली, इन बंकर्स पे अटैक करना बेहद मुश्किल था। लेकिन US और इजराइल ने एक इंटरेस्टिंग पैटर्न ऑब्जर्व किया। दिन के दौरान Khamenei सेफ फील करते थे और अबव द ग्राउंड आ जाते थे। साथ ही साथ US और इजराइल को पता चला कि 28th फेब्रुअरी, यानि सैटरडे की सुबह Beit-e Rahbari में Khamenei की मीटिंग होने वाली है। यही इन्फॉर्मेशन पूरे ऑपरेशन की फाउंडेशन बनी। अब अटैक से कुछ दिन पहले US के 11 US F-22 Jets को इजराइल के Ovda Air Base पे भेजा गया। और इस मूवमेंट की खबर डेलीब्रेटली लीक की गई, ताकि ईरान का पूरा ध्यान केवल इस बेस को मॉनिटर करने पर लग जाए, जबकि रियल अटैक तो दूसरे बेसिस से होने वाला था। ऑल्सो, इतने बड़े अटैक के पहले, इजराइल के टॉप जनरल को मिलिट्री हेडक्वाटर्स पे होना चाहिए था। लेकिन वो एक रूटीन पब्लिक डिनर पे देखे गए। जनरल ने ऐसा किया, ताकि ईरान को अटैक की भनक ना लगे। लेकिन अगले दिन सुबह अटैक लॉन्च हुआ और सबसे पहले ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम्स को टारगेट किया गया। और ऐसा करने के लिए इनके पास कई ऑप्शंस थे। जैसे अमेरिका का EA-18G Growler Jet जो पावरफुल इलेक्ट्रॉनिक नॉइज़ ब्लास्ट करके रेडार सिस्टम्स को जैम कर सकता है। और US के पास तो ऐसे भी सिस्टम्स हैं, जो फॉल्स टारगेट्स क्रिएट करके एनिमी के एयर डिफेंस सिस्टम्स को ऐसे जेट्स पे फायर करवा सकते हैं जो रियलिटी में एक्जिस्ट ही नहीं करते। अब मेथड चाहे जो भी हो, रिजल्ट ये था कि ईरान का एयर डिफेंस सिस्टम ऑलमोस्ट कंप्लीटली फेल हो गया। रास्ता क्लियर होते ही इजराइली जेट्स ने Khamenei के कंपाउंड पे 30 बॉम्ब्स गिरा दिए। जिस कारण उनकी और करीब 40 और ऑफिसियल्स की जान चली गई।
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