[0:00]तुम्हारे पास चार सेकंड है, ये बताओ कि इस फोटो में कितनी रेड बॉल्स हैं?
[0:07]अब अगर मैं तुमसे ये पूछूं कि इस फोटो में कितनी ब्लू बॉल्स थी, तो क्या तुम बता पाओगे? बिल्कुल भी नहीं, क्योंकि उस वक्त तुम्हारा ब्रेन सिर्फ रेड बॉल्स को ढूंढने में लगा हुआ था, ना कि ब्लू बॉल्स में। इससे तुम्हें यह तो समझ आ गया होगा कि तुम अपने ब्रेन को जैसा बोलोगे वह वैसा ही काम करेगा। अब अगर तुम हर वक्त यही सोचते रहोगे कि मेरी लाइफ ही खराब है, मैं लाइफ में कुछ नहीं कर सकता, तो धीरे-धीरे यह चीजें पॉसिबल होने लगेंगी। लेकिन अगर तुम यह सोचो की लाइफ में हर चीज पॉसिबल है, मैं कुछ भी कर सकता हूं, तो धीरे-धीरे तुम्हारा ब्रेन उसी तरफ काम करना शुरू कर देगा और यह चीज रियल में होने लगेगी। और इसी को लॉ ऑफ अट्रैक्शन कहते हैं। इसलिए कभी भी नेगेटिव मत सोचो। खुद पर डाउट मत करो क्योंकि तुम एक ऐसी चाबी हो जो हर ताले को खोल सकती है। तो बी पॉजिटिव एंड बिलीव योरसेल्फ



