[0:01]STUDY IQ IAS अब तैयारी हुई अफोर्डेबल। लॉर्ड कर्जन 1899 टू 1905 वेलकम टू स्टडी आईक्यू। मेरा नाम है आदेश सिंह।
[0:22]दोस्तों आज हम बात करने वाले हैं एक ऐसे वॉइस रॉय की, जिनका मानना था कि उनका जन्म इंडिया का वॉइस रॉय बनने के लिए ही हुआ है। वॉइस रॉय बनने से पहले ही लॉर्ड कर्जन इंडिया के बारे में बहुत कुछ जानते थे। वो इससे पहले कई बार इंडिया आ भी चुके थे। 1899 में इंडिया के वाइसरॉय की पोस्ट पर अपॉइंटमेंट लॉर्ड कर्जन के लिए किसी सपने के पूरा होने जैसा था। आइए जानते हैं लॉर्ड कर्जन कैसे अपने इस सपने को सच्चाई में बदलते हैं और इंडिया आने के बाद वो क्या-क्या करते हैं।
[0:57]इंट्रोडक्शन दोस्तों, इंडिया का वाइसरॉय बनना अपने आप में एक बहुत बड़ा टास्क तो था ही। इसके अलावा 1896-97 के फेमिन और उसके बाद ब्यूबोनिक प्लेग ने प्रॉब्लम्स और ज्यादा बढ़ा दी थी। रेवेन्यूज कम होते जा रहे थे। इसके साथ ही एडमिनिस्ट्रेटिव मशीनरी को भी समय के साथ बदलने की जरूरत महसूस हो रही थी। और ब्रिटिशर्स के लिए इससे भी ज्यादा गंभीर समस्या थी उस समय के इंडिया का पॉलिटिकल क्लाइमेट। क्योंकि इंडियंस में अवेयरनेस आ रही थी और वो अब ब्रिटिशर्स से ये सवाल करने लग गए थे कि उन्हें इंडिया पर रूल करने का अधिकार आखिर किसने दिया? ऐसी सिचुएशन में इंडिया में अपने टास्क का एक बहुत क्लियर कट कॉन्सेप्शन लॉर्ड कर्जन के दिमाग में था। वो पूरी तरह कन्विंस्ड थे कि एडमिनिस्ट्रेटिव मशीनरी को तुरंत ही एक थरर रिफॉर्म की जरूरत थी। शायद ही गवर्नमेंट का ऐसा कोई डिपार्टमेंट या ब्रांच हो जिसमें लॉर्ड कर्जन ने कोई रिफॉर्म ना किया हो। तो आइए जानते हैं उनके रिफॉर्म्स के बारे में। सबसे पहले बात करते हैं उनके पुलिस रिफॉर्म्स की। पुलिस रिफॉर्म्स दोस्तों, रिफॉर्म्स के लिए कर्जन का मेथड था एक एक्सपर्ट कमीशन को अपॉइंट करना। ये कमीशन डिपार्टमेंट की वर्किंग की पूरी जांच करती थी और फिर इसकी रिपोर्ट के आधार पर जरूरी रिफॉर्म्स के लिए कानून बना दिया जाता था। 1902 में सर एंड्रू फ्रेजर की अध्यक्षता में पुलिस कमीशन को अपॉइंट किया जाता है। कमीशन अपनी रिपोर्ट 1903 में सबमिट कर दी है, जिसमें पुलिस फोर्स के इम्प्रूवमेंट के लिए कई सारे सुझाव दिए गए थे। जैसे कि सभी रैंक्स की सैलरी इंक्रीज करना, सभी प्रोविंसेस में पुलिस फोर्स की स्ट्रेंथ को बढ़ाना, ऑफिसर्स और कांस्टेबल्स दोनों के लिए ही ट्रेनिंग स्कूल्स खोलना, हायर रैंक्स के लिए प्रमोशन की जगह डायरेक्ट रिक्रूटमेंट करना, प्रोविंशियल पुलिस सर्विस को सेटअप करना, सेंट्रल डिपार्टमेंट ऑफ क्रिमिनल इंटेलिजेंस को क्रिएट करना एटसेट्रा एटसेट्रा। कमीशन के ज्यादातर सुझावों को एक्सेप्ट करके इम्प्लीमेंट कर दिया जाता है। ये तो बात हुई पुलिस रिफॉर्म्स की। आइए अब बात करते हैं कर्जन के एजुकेशनल रिफॉर्म्स की। एजुकेशनल रिफॉर्म्स दोस्तों लॉर्ड कर्जन का मानना था कि इंडिया में एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस पॉलिटिकल रेवोल्यूशनरीज को जन्म देने वाली फैक्ट्रीज बन गई हैं। इसके साथ ही एजुकेशन सिस्टम के खराब होते स्टैंडर्ड्स और उसमें बढ़ते इनडिसिप्लिन ने कर्जन को परेशान किया हुआ था। इसलिए 1902 में वो यूनिवर्सिटी कमीशन को अपॉइंट करते हैं। कमीशन के रेकमेंडेशंस के आधार पर 1904 में इंडियन यूनिवर्सिटीज एक्ट पास किया जाता है। इस एक्ट के द्वारा यूनिवर्सिटीज के ऊपर गवर्नमेंट कंट्रोल को बढ़ा दिया गया था। एजुकेटेड इंडियंस ने कमीशन के रिपोर्ट और इस एक्ट का काफी विरोध भी किया था। इस तरह लॉर्ड कर्जन कोशिश करते हैं कि एजुकेशन सिस्टम को इंडियन नेशनलिज्म को सपोर्ट करने से रोका जाए। लेकिन तब तक शायद देर हो चुकी थी। नेशनलिज्म का जिन चिराग से बाहर आ चुका था। और यूनिवर्सिटीज पर कंट्रोल कर लेने से उसको चिराग में वापस नहीं भेजा जा सकता था। बल्कि इस एक्ट ने तो आग में घी डालने का ही काम किया। स्टूडेंट्स और उनके नेशनलिज्म की मिसाल हम अगले वीडियो में स्वदेशी मूवमेंट में देखेंगे। अब बात करते हैं कर्जन के इकोनॉमिक रिफॉर्म्स की। इकोनॉमिक रिफॉर्म्स दोस्तों लॉर्ड कर्जन के इकोनॉमिक रिफॉर्म्स में आते हैं उनके फेमिन, लैंड रेवेन्यू, इरिगेशन, एग्रीकल्चर, रेलवेज, टैक्सेशन और करेंसी एटसेट्रा से रिलेटेड लेजिसलेशंस। आइए एक-एक करके इनके बारे में जानते हैं। फेमिनस सबसे पहले बात करते हैं फेमिनस की। 1899-1900 में फेमिन से साउथ, सेंट्रल और वेस्टर्न इंडिया का एक बड़ा हिस्सा प्रभावित हुआ था। इस दौरान लॉर्ड कर्जन ने अकाल से प्रभावित लोगों की हर संभव मदद की थी। हम कह सकते हैं कि ये पहले ऐसे वाइसरॉय थे जिन्होंने फेमिन की समस्या को ह्यूमेन टच के साथ टैकल करने की कोशिश की थी। कल्टिवेटर्स को रेवेन्यू पेमेंट से भी एक्जेंप्ट कर दिया गया था और फेमिन खत्म होने के बाद 1901 में सर एंथनी मैकडोनेल की प्रेसिडेंसी में फेमिन कमीशन अपॉइंट की गई थी। इसका काम था फेमिन के समय लिए गए मेजर्स की जांच करना कि ये मेजर्स कितने प्रभावी रहे और आगे फेमिन की सिचुएशन को किस तरह बेटर हैंडल किया जा सकता है। कमीशन 1901 में ही अपनी रिपोर्ट सबमिट कर देती है। कमीशन का कहना था कि फेमिन के समय जो रिलीफ डिस्ट्रीब्यूट की गई थी वो बहुत ज्यादा थी। इसके साथ ही ऐसे मेजर्स पर जरूरत से ज्यादा एम्फसिस किया गया था जिनकी जरूरत ही नहीं थी। कमीशन एबल बॉडीड पर्सन के लिए टास्क फोर्स से पेमेंट करने का सुझाव देती है। साथ ही फॉरडर फेमिन से डील करने के लिए रूल्स भी तैयार करती है। ये तो बात हुई लॉर्ड कर्जन के फेमिन रिलीफ मेजर्स की। आइए अब बात करते हैं उनके एग्रीकल्चर रिलेटेड रिफॉर्म्स की। एग्रीकल्चर, लैंड रेवेन्यू एंड इरिगेशन। लॉर्ड कर्जन रेवेन्यू एडमिनिस्ट्रेशन को इम्प्रूव करने के लिए 16th जनवरी 1902 को लैंड रेजोल्यूशन इंट्रोड्यूस करते हैं। इसमें लैंड रेवेन्यू के लिए तीन प्रिंसिपल्स फिक्स किए जाते हैं। जो थे, पहला कि रेवेन्यू को हमेशा ग्रेजुअली ही इंक्रीज किया जाएगा। दूसरा प्रिंसिपल था कि रेवेन्यू कलेक्ट करते समय एग्रीकल्चर को कोई नुकसान ना हो। इसका पूरा ध्यान रखा जाए। और तीसरा था कि ड्राउट या और किसी मुश्किल के समय पेसेंट की तुरंत हेल्प की जाए। इरिगेशन रिलेटेड रिफॉर्म्स के लिए 1901 में सर कॉलिन स्कॉट मोनक्रिएफ के चेयरमैनशिप में कमीशन फॉर्म की जाती है। कमीशन आने वाले 20 सालों में इरिगेशन के ऊपर 4.5 करोड़ अतिरिक्त खर्च करने का सुझाव देती है। कर्जन के समय में झेलम कनाल को कंप्लीट करने के साथ अपर झेलम और लोअर बड़ी दोआब कनाल्स का काम भी शुरू हो जाता है। इसके साथ ही 1904 में कोऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटीज एक्ट के द्वारा कल्टिवेटर्स के लिए सस्ते रेट्स पर लोन देने का प्रोविजन किया गया था। इंडियन एग्रीकल्चर और लाइव स्टॉक के इंप्रूवमेंट के लिए लॉर्ड कर्जन इंस्पेक्टर जनरल के अंडर इंपीरियल एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट भी सेटअप करती है। जिसका काम कल्टिवेशन के साइंटिफिक मेथड्स को प्रमोट करना था। इस तरह लॉर्ड कर्जन इंडिया में एग्रीकल्चर और पेजेंट्स की कंडीशन को इंप्रूव करने की कोशिश करते हैं। एग्रीकल्चर रिफॉर्म्स के बाद आइए जानते हैं रेलवे रिलेटेड रिफॉर्म्स के बारे में। रेलवेज
[7:34]दोस्तों लॉर्ड डलहौजी द्वारा इंट्रोड्यूस किए जाने के बाद से ही रेलवेज का प्रचार प्रसार बहुत तेजी से इंडिया में हो रहा था। इसको और आगे ले जाने का काम करते हैं लॉर्ड कर्जन। कर्जन रेलवे के डेवलपमेंट पर खास ध्यान देते हैं। उनके समय में रेलवे की एक्जिस्टिंग लाइंस को इंप्रूव किया जाता है। और साथ ही नई लाइंस पर भी काम शुरू किया जाता है। रेलवे की वर्किंग और एडमिनिस्ट्रेशन पर एडवाइस देने के लिए इंग्लैंड से रेलवे एक्सपर्ट मिस्टर थॉमस रॉबर्टसन को बुलाया जाता है। रॉबर्टसन के अनुसार रेलवे की कंडीशन अनसैटिस्फेक्ट्री थी और इसमें ऊपर से लेकर नीचे तक रिफॉर्म की जरूरत थी। यह कहते हैं कि रेलवे लाइंस को कमर्शियल एंटरप्राइजेज की तरह बिल्ड किया जाना चाहिए। इसके साथ ही रेलवे एडमिनिस्ट्रेशन से जुड़े सभी मैटर्स को देखने के लिए एक रेलवे बोर्ड सेटअप करने का सुझाव भी देते हैं। लॉर्ड कर्जन कमीशन की रेकमेंडेशंस को एक्सेप्ट कर लेते हैं और रेलवे का मैनेजमेंट जिसे अभी तक पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट देखता था रेलवे बोर्ड को ट्रांसफर कर दिया जाता है। अब बात करते हैं टैक्सेशन और करेंसी रिलेटेड मेजर्स की। करेंसी एंड टैक्सेशन दोस्तों 1899 के इंडियन कॉइनेज एंड पेपर करेंसी एक्ट के द्वारा ब्रिटिश करेंसी को इंडिया में लीगल टेंडर डिक्लेअर कर दिया जाता है। और 1 पाउंड की कीमत ₹15 के बराबर रखी जाती है। इसके साथ ही कर्जन सॉल्ट टैक्स का रेट भी कम करते हैं 2.5 पर मॉन्ड के रेट को कम करके 1 एंड अ थर्ड पर मॉन्ड कर दिया जाता है। दोस्तों ये थे लॉर्ड कर्जन के इंपॉर्टेंट इकोनॉमिक रिफॉर्म्स। अब हम जानते हैं उनके समय में होने वाले आर्मी रिफॉर्म्स के बारे में। आर्मी रिफॉर्म्स लॉर्ड कर्जन के समय में हुए आर्मी के रीऑर्गेनाइजेशन का श्रेय जाता है लॉर्ड किचनर को। ये 1902 से लेकर 1908 तक इंडिया के कमांडर इन चीफ रहे थे। इंडियन आर्मी को दो कमांड्स में डिवाइड कर दिया जाता है। नॉर्दर्न कमांड और सदर्न कमांड। नॉर्दर्न कमांड का हेड क्वार्टर मुरी में और सदर्न कमांड का हेड क्वार्टर्स पूना में था। आर्मी की हर डिवीजन में तीन ब्रिगेड्स बनाई जाती हैं। जिसमें दो ब्रिगेड्स इंडियन बटालियन की और एक ब्रिगेड इंग्लिश बटालियन की होती थी। इसके साथ ही ऑफिसर्स को ट्रेन करने के लिए क्वेटा में ट्रेनिंग कॉलेज भी सेटअप किया जाता है। ब्रिटिश ट्रूप्स को बेटर आर्म्स की सप्लाई शुरू होती है। इसके अलावा आर्मी की हर बटालियन को एक सिवियर टेस्ट पास करना होता था। जिसका नाम रखा गया था द किचनर टेस्ट। आर्मी के रीऑर्गेनाइजेशन का एक मतलब ये भी था कि इस डिपार्टमेंट का खर्चा और ज्यादा बढ़ जाता है। दोस्तों लॉर्ड कर्जन ने एंशिएंट मोन्यूमेंट्स के लिए भी एक एक्ट पास किया था। आइए जानते हैं उसके बारे में। एंशिएंट मोन्यूमेंट्स एक्ट 1904 लॉर्ड कर्जन हिस्ट्री के स्टूडेंट रहे थे और आर्कियोलॉजी में उनका डीप इंटरेस्ट था। इसीलिए इंडिया के हिस्टोरिकल मोन्यूमेंट्स को रिपेयर, रिस्टोर और प्रोटेक्ट करने के लिए वो 1904 में एंशिएंट मोन्यूमेंट्स एक्ट पास करते हैं। हिस्टोरिकल बिल्डिंग्स की रिपेयर के लिए 50,000 पाउंड्स की अमाउंट सेंशन कर दी जाती है। कर्जन इंडियन स्टेट्स पर भी प्रेशर डालते हैं कि वो अजंता एलोरा और सांची स्तूपा जैसे इंडिया के रिच हेरिटेज को प्रिजर्व करने का काम करें। 1904 का ये एक्ट इंडिया में आज भी मोन्यूमेंट कंजर्वेशन के लिए एक बेड रॉक की तरह माना जाता है। दोस्तों इन सभी रिफॉर्म्स के अलावा लॉर्ड कर्जन ने 1899 में कलकत्ता कॉरपोरेशन एक्ट भी पास किया था। इस एक्ट के द्वारा कर्जन लोकल सेल्फ गवर्नमेंट के फील्ड में किए गए लॉर्ड रिपन के काम को अनडू करना चाहते थे। ये एक्ट कॉरपोरेशन में इलेक्टेड मेंबर्स की स्ट्रेंथ को कम कर देता है जिससे कलकत्ता कॉरपोरेशन और उसकी कमिटीज में ब्रिटिश एलिमेंट की मेजोरिटी बनी रहती है। इंडियन मेंबर्स एक्ट से खुश नहीं थे और 28 मेंबर्स अपना विरोध दिखाने के लिए रिजाइन भी कर देते हैं। लेकिन कर्जन पर इनकी प्रोटेस्ट का कोई असर नहीं पड़ता। बल्कि वो तो अपने काम से इतने खुश थे कि 1903 में एक बैंक्वेट में कहते हैं कि वाइसरॉय की पोस्ट से रिटायर होने के बाद वो कलकत्ता का मेयर बनना पसंद करेंगे। ये एक्ट अकेला ऐसा काम नहीं था कर्जन का जिसने इंडियंस को प्रोटेस्ट करने के लिए मजबूर किया हो। उनका सबसे कंट्रोवर्शियल डिसीजन तो बंगाल का पार्टिशन था। तो आइए उसके बारे में जानते हैं। पार्टिशन ऑफ बंगाल 1905 दोस्तों 1905 में बंगाल प्रेसिडेंसी का पार्टिशन कर्जन के सबसे ज्यादा क्रिटिसाइज होने वाले मूव्स में से एक था। इसका विरोध ना सिर्फ बंगाल में बल्कि पूरे भारत में किया जाता है। आइए समझते हैं कर्जन ने ये डिसीजन आखिर क्यों लिया था। बंगाल प्रोविंस उस समय इंडिया का सबसे ज्यादा पापुलेशन वाला प्रोविंस था। लगभग 8 करोड़ की जनसंख्या थी बंगाल की, जिसमें आज का वेस्ट बंगाल, बिहार, छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्से, ओडिसा, असम और आज का बांग्लादेश भी शामिल था। कर्जन कहते हैं कि पार्टिशन का एम इतने बड़े प्रोविंस के एडमिनिस्ट्रेशन को इजी बनाना है। लेकिन उनका एक्चुअल मोटिव तो बंगाल प्रोविंस से उठ रही लाउड पॉलिटिकल वॉइसेस को क्रश करना था और उनके बीच रिलीजियस ट्राइफ और अपोजिशन को जन्म देना था। इसे समझने के लिए पार्टिशन के प्लान को समझना जरूरी है। प्लान के अकॉर्डिंग 3.1 करोड़ की पापुलेशन के साथ ईस्ट बंगाल एंड असम को एक नया प्रोविंस बनना था। इसमें मुस्लिम हिंदू पापुलेशन का रेशो 3:2 था। वेस्टर्न बंगाल प्रोविंस में हिंदू मेजोरिटी रहने वाली थी। नेशनलिस्ट लीडर्स कहते हैं कि ये स्कीम लोगों को रिलीजियस के बेसिस पर डिवाइड करने के लिए बनाई गई थी। इससे मुस्लिम्स को हिंदू के अगेंस्ट खड़ा कर दिया जाएगा और उनकी ये बात बेबुनियाद नहीं थी। यह साबित होता है ईस्टर्न बंगाल के लेफ्टिनेंट गवर्नर की एक डेक्लेरेशन से। जिसमें वो कहते हैं कि उनकी दो वाइव्स में से मोहमदन वाइफ उनकी फेवरेट है। इवन लॉर्ड कर्जन भी ईस्टर्न बंगाल के टूर के समय कहते हैं कि पार्टिशन का एक एम मोहमदन प्रोविंस क्रिएट करना भी है। इसके साथ ही ये लिंग्विस्टिक बेसिस पर भी डिवाइड एंड रूल की पॉलिसी थी। क्योंकि प्लान के अकॉर्डिंग वेस्ट बंगाल में बंगालीज माइनॉरिटी बना दिए गए थे। बंगाल पार्टिशन के विरोध में एक बड़ा मूवमेंट खड़ा हो जाता है। जिसे हम स्वदेशी मूवमेंट के नाम से जानते हैं। कर्जन के इस डिसीजन ने हिंदूज और मुस्लिम्स को डिवाइड करने का काम भी किया था। ईस्टर्न बंगाल के मुस्लिम्स को एक मुस्लिम मेजॉरिटी प्रोविंस के पॉलिटिकल और मटेरियल एडवांटेजेस का विजन दिखाकर अपनी तरफ किया जाता है। लॉर्ड कर्जन तो 1905 में ही इंडिया से वापस चले जाते हैं। लेकिन उनके डिसीजन के अगेंस्ट प्रोटेस्ट आने वाले कई साल तक चलते हैं। कंक्लूजन दोस्तों लॉर्ड कर्जन एक ग्रेट इंपीरियलिस्ट थे। वो इंडिया में ब्रिटिश कंट्रोल को और ज्यादा स्ट्रांग करना चाहते थे। उनके ज्यादातर रिफॉर्म्स और एक्ट्स इसी मोटिव को फुलफिल करने के लिए थे। इसके साथ ही इंडियंस को लेकर उनका ओपिनियन बहुत ही खराब था। वो इंडियंस की इंसल्ट करने और उनकी डीपेस्ट फीलिंग्स को हर्ट करने का कोई भी मौका नहीं जाने देते थे। एक ओकेजन पर उन्होंने बंगालीज को डरपोक, हवाबाज और बस दिखावा करने वाला देशभक्त तक कह दिया था। वो इंडियन नेशनल कांग्रेस के प्रेसिडेंट से मिलने से भी इंकार कर देते हैं। और कांग्रेस की एक्टिविटीज को लेटिंग ऑफ गैस की तरह कैरेक्टरराइज करते हैं। इस तरह के इंपॉलिटिक अट्रेंसेज और इंपीरियलिस्ट डिजाइंस की वजह से कर्जन इंडिया के पॉलिटिकल अनरेस्ट को बस्टिंग पॉइंट तक पहुंचा देते हैं। और इससे शुरुआत होती है इंडिया में पॉलिटिकल मूवमेंट के एक बिल्कुल नए फेस की। कर्जन की टिरनी की वजह से ही इंडियंस में नेशनहुड के और भी स्ट्रांग सेंस का जन्म होता है। इस तरह देखा जाए तो कर्जन इंडिया के बेनिफैक्टर प्रूव होते हैं। भले ही उनकी इंटेंशन कभी भी ऐसी ना रही हो। STUDY IQ IAS अब तैयारी हुई अफोर्डेबल।



