[0:00]जैसे इंसान जब पैदा होता है तो जानता है कि वह इंसान है। उसी प्रकार जब मैं पैदा हुई तो मुझे मालूम था मैं क्या और मेरे अंदर कौन सी शक्तियां।
[0:13]और ये भी मैं जानती थी कि मुझे कौन सा कार्य करना है।
[0:17]इसलिए मैं इस दुनिया में आई बचपन से ही मैं जानती थी। कार्य तो मैंने 47 साल की उम्र से शुरू किया।
[0:24]तब तक मैं बहुत लोगों से मिलती रहती थी। गांधी जी के पास भी मैं रहूं गांधी जी भी इवॉल्व थे।
[0:30]तो वो मुझसे कहते थे कि देखो बेटे अपना देश जब तक स्वतंत्र नहीं होता है तब तक यह कार्य शुरू नहीं हो सकता है क्योंकि हम परतंत्र हैं।
[0:38]और जब स्वतंत्रता आ जाएगी तब सब हो सकता है। वो मुझसे उनकी जो लिखा हुआ है ना भजनावली।
[0:47]वो भी मुझसे पूछ के लिखे कि कौन सा चक्र पहले फिर कौन सा चक्र बाद में उसके हिसाब से।
[0:52]और वो सर्व धर्म में विश्वास करते थे और सब धर्म का जो तत्व है सेंस है वो एक ही है।



