[0:00]धंधा करने के लिए जेब में गांधी नहीं दिल में आंधी होनी चाहिए तो देखो यह बिलिनियर अपने बेटे के स्विमिंग कोच को एक प्राइवेट लेसन देते हुए देखता है। तो फिर वो कोच से पूछता है, आप इस सिटी के बेस्ट कोच हो। तब भी स्टूडेंट्स उस दूसरे स्विमिंग पूल को क्यों चूज कर रहे हैं? तो कोच कहता है, सर मुझे नहीं पता। बिलिनियर बोलता है, मैं इसे ₹500 में ठीक कर दूंगा। कोच मन में सोचता है, बाप का पैसा है, चूतिए के पास मुझे ज्ञान दे रहा है। बट वो ऊपर-ऊपर से कह देता है, ठीक है आप करके दिखाओ। तो बिलिनियर एक वाइट बोर्ड, एक गोल्ड मार्कर और एक स्केल लाता है। और फिर कोच से बोलता है, आप बोर्ड को गेट के पास लगाओ। हर बच्चे का फर्स्ट नेम उनका लेवल और उनका पर्सनल बेस्ट टाइम लिखो। इसे हर हफ्ते अपडेट करो। पेरेंट्स सिर्फ बोर्ड चेक करने के लिए 10 मिनट पहले आने लगे। जब किसी बच्चे का टाइम हाफ अ सेकंड से भी इंप्रूव होता था, तो कोच उसे गोल्ड में सर्कल कर देता था। जिन बच्चों ने अपना नाम गोल्ड सर्कल में देखा वो फिर जबरदस्ती उस सेशन में आने लगे अपने पेरेंट्स को लेकर। फिर बिलिनियर ने एक चीज और ऐड की। हर बच्चे की बेस्ट स्विम की एक 30 सेकंड की क्लिप बनाकर हर महीने पेरेंट्स के फोन में डायरेक्ट भेजी जाने लगी। 16 में से 14 पेरेंट्स ने उसे 24 घंटे के अंदर Instagram पे पोस्ट कर दिया। फ्री की मार्केटिंग हो गई। और इसी प्रोसेस से एट स्टूडेंट्स से बढ़कर 35 स्टूडेंट्स हो गए। और फिर जब कोच के बैंक अकाउंट में पैसे ज्यादा आने लगे, तब उसने बिलिनियर से पूछा, क्या ये सब मार्केटिंग थी? बिलिनियर ने कहा, नहीं व्हाइट बोर्ड प्रूफ है। पेरेंट्स लेसन के लिए पैसा देते हैं। वो विजिबल प्रोग्रेस के लिए पे करते हैं। एक मां को दिखाओ कि उसके बच्चे ने 2 सेकंड से इंप्रूव किया है। वो आपको कभी छोड़ के नहीं जाएगी, कभी नहीं। जो दिखता है, वही बिकता है। इट्स सिंपल एज दैट। एंड देन बिलिनियर ने कहा, आप पहले स्विमिंग बेच रहे थे। अब आप वो ट्रांसफॉरमेशन बेच रहे हो, जिसे लोग मेजर कर सकते हैं। एक लेसन बुलाया जा सकता है, लेकिन आपके बच्चे के नाम के आगे एक गोल्ड सर्कल नहीं। बाकी अगर आपका कोई बिजनेस है तो यह स्ट्रेटेजी एक बार यूज करके जरूर देखना।
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