[0:00]एक आदमी एक सुनसान द्वीप पर फंसा हुआ था। हर दिन वो समुद्र किनारे लकड़ियों से एक बड़ा एसओएस सिग्नल बनाता था। यही उसकी जिंदगी की आखिरी उम्मीद थी।
[0:09]वो बस एक ही चीज के भरोसे जिंदा था, घर जाने की उम्मीद। तभी अचानक एक दिन उसे मलबे में दबा हुआ एक बंद बॉक्स मिला। जब उसने उसे खोला तो उसके अंदर सोने की बहुत सारी ईटें थी।
[0:20]उसी वक्त दूर समंदर में एक जहाज दिखाई दिया। उसे तुरंत आग जलानी चाहिए थी, लेकिन वो रुक गया।
[0:26]एक तरफ उम्मीद का जहाज था और दूसरी तरफ सोना और उसने गलत चुन लिया। वो आग की तरफ नहीं गया बल्कि सोने की ईंटों को उठाकर उन्हीं लकड़ियों के ऊपर रखने लगा जिनसे उसे आग जलाकर सिग्नल देना था।
[0:37]और इसी बीच जहाज धीरे-धीरे दूर चला गया। कुछ दिन बाद जब रेस्क्यू वाले लोग वहां पहुंचे तो उन्हें सिर्फ एक शव मिला जिसके हाथों में अब भी सोना था और पीछे वो लकड़ियां जो उसे बचा सकती थी सोने के नीचे दब चुकी थी।
[0:50]कई बार जिंदगी में हम भी यही गलती करते हैं। जहां हमें उम्मीद को पकड़ना चाहिए वहां हम लालच को पकड़ लेते हैं।
[0:57]और सच यह है जिस चीज को हम सबसे कीमती समझते हैं वही कभी-कभी हमारी सबसे बड़ी बर्बादी बन जाती है।



