[0:00]ये बात है कुरान ये कोई कुरान नहीं है, ये बस झूठी शायरी है, मोहम्मद की शायरी. ये बात है उस आग की जो लगाएगी एक बीवी अपने शौहर के लिए. मोहम्मद के दर्द से मुझे सुकून मिलता है. गुलामों, ये कांटे उसके घर के सामने बिछा दो. ये कहानी है उस इंसान की जिसने रसूल अल्लाह को भरे बाजार में रुसवा किया. मक्का वालों इसकी बात मत सुनना, यह मेरा भतीजा मोहम्मद है और ये दीवाना है दीवाना. वह देखो पागल आदमी. यह बात है सूरह लहब की. तब यदा अबी लहब व तब. अक्सर मुस्लिम फैमिलीज में बच्चों को कुरान का रट्टा लगवा दिया जाता है. मतलब पता हो ना हो, चारों कुल सूरह लहब याद होनी चाहिए. तबत यदा अबी लहब व तब. शायद इसी वजह से आज कुरान हमारे घरों में तो है लेकिन दिलों में नहीं. क्या है सूरह लहब? सुना अबू मनार अल्लाह ने अबू लहब का नाम लेकर सूरा नाजिल की है. खुदा की पनाह है भई. कौन थी उम्मे जमील जिसका जिक्र अल्लाह ने इस सूरत में किया है? अबीहा बा जी सुना आपने कौन सी बात? उम्मे जमील का हार उसके गले की रस्सी बनेगा आखिरत में.
[1:30]और ऐसा क्या कर दिया इन दोनों मियां बीवी ने कि अल्लाह ने कुरान में अबू लहब का नाम लेकर इन्हें क्रिटिसाइज किया है? उसका अल्लाह हमें आग का अज़ाब देगा. कहता है मैं लकड़ियां उठाऊंगी अपने सर पर. और सबसे ज्यादा इंपोर्टेंट, कैसे ये सूरत लिविंग प्रूफ है कुरान के मिराक्लस होने का? जानेंगे इस वीडियो में. वम्रतूहम्मा लतलहतब, फ़ीजी दिहा हबलुम् मिन मसद. सूरह लहब मक्का में उस वक्त नाजिल हुई जब अबू लहब ने जुल्म की सारी हदें पार कर दी. वो अल्लाह के नबी को परेशान करता, उनको गालियां देता, उन्हें भरे बाजार रुसवा करता. मेरे भतीजे ने बाप दादा का मजहब छोड़ दिया है. कहता है उस एक खुदा को मानो इससे घटिया बात मैंने आज तक नहीं सुनी. ताज्जुब है ये बात तो नहीं. मगर इस सब की शुरुआत उस सुबह हुई जब सूरज की किरणें मक्का की जमीन को चूम रही थीं. ऊंट रेतीले मैदानों में दौड़ पड़े थे. कोई सुबह-सुबह खुद को शीशे में निहार रहा था, कोई नाश्ता कर रहा था तो कोई अभी बिस्तर पर अंगड़ाइयां ले रहा था. यहां हार गूंथे जा रहे हैं और इन्हें दिन भर बिस्तर तोड़ना है और काम ही क्या है. ए जी अब सोते ही रहोगे क्या? लेकिन कोई था जो सफा के पहाड़ पर चढ़ रहा था. बाबा वो पहाड़ पर कौन है? मोहम्मद. ये वो पहाड़ था जिस पर चढ़कर मक्का वाले एक दूसरे को इकट्ठा करते, कोई खास बात बताते. सफा के पहाड़ पर चढ़कर अल्लाह के नबी ने एक गहरी सांस ली और फिर जोर से पुकारा या सबाहा.
[3:19]यह अजान नहीं थी ना ही किसी सौदागर की सदा, यह खतरे की पुकार थी. इसका मतलब था कि ए लोगों उठो और मेरी बात सुनो तुम पर एक खतरा आन पड़ा है. लगता है कोई मुसीबत आई है. लोग अपने घरों से अपनी दुकानों से अपनी बातों से निकल पड़े और फिर जब सब लोग सफा के पहाड़ के नीचे जमा हो गए तो अल्लाह के नबी ने उन सब को एक नजर देखा. और फिर इनसे एक सवाल पूछा. के ए लोगों, अगर मैं तुमसे कहूं कि इस पहाड़ के पीछे दुश्मन की फौज तुम पर हमला करने आ रही है, क्या तुम मेरा यकीन करोगे? लोग चिल्ला उठे. हां बिल्कुल करेंगे क्योंकि आप सच्चे हैं. आप अमीन हैं. आप सिद्दीक हैं. आप मोहम्मद हैं. इन सब लोगों के जवाब सुनकर अल्लाह के नबी एक लम्हे के लिए रुके और फिर उन्होंने इन सब से कहा कि ए लोगों मैं तुम्हें खबरदार करता हूं उस आने वाले अज़ाब से जो बड़ा सख्त है. और इबादत करो उस एक रब की जो सारी कायनात का मालिक है. यह बात सुनकर अचानक वहां की हवा बदल गई. उनके चेहरों पर चीखता सन्नाटा छा गया. वो सब एक दूसरे को हैरानी से देखने लगे. यह क्या कह रहे हैं? ताज्जुब है ये बात तो नहीं है तो क्या अपने बाप दादा का दिन छोड़ दें. अपने खुदाओं को नाराज कर दे. और फिर एक आदमी खड़ा हुआ. गुस्से और नफरत से भरा हुआ. वो चिल्लाया. भतीजे, तब बन लगा अलिहाजा ज माता ना. अरबी की इस इबारत का मतलब था कि तिया नाश हो तेरा टूट जाए तेरे हाथ. क्या तूने हमें इसीलिए यहां जमा किया है? ये आदमी और कोई नहीं बल्कि रसूल अल्लाह का चाचा अबू लहब था. उसकी बद्दुआ आसमान से टकराकर वापस उस पर आ गिरी. उसके नसीब के पन्नों में जहन्नुम का अज़ाब हमेशा के लिए लिख दिया गया. लेकिन अल्लाह ने अभी अपने नबी को ये बात नहीं बताई. स्कॉलर्स कहते हैं कि अगर यह सूरत इस वक्त नाजिल हो जाती तो मक्का के लोग कहते, उस पर कैसे भरोसा करें? वह अपनों की बुराई करता है. असल में उस दौर में मक्का में चाचा का दर्जा बाप के बराबर होता है. स्पेशली जब जब सगे वालिद का इंतकाल हो चुका हो. वक्त गुजरता रहा. अल्लाह के नबी जगह-जगह घूम घूमकर एक अल्लाह की इबादत करने का मैसेज पहुंचाते रहे. लेकिन अबू लहब वो आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पीछे-पीछे जाता. अब ये कौन सी नई शायरी ले आया है. यहां तक कि वह बाजार के शरीफ लड़कों को मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पीछे लगा देता और उनसे कहता कि इनको पत्थर मारो. मारो मारो मारो. लेकिन इसका जुल्म यहीं नहीं रुका. इसकी बीवी यानी रसूल अल्लाह की चाची उम्मे जमील जो कमाल की खूबसूरत औरत थी. आप सब तो मक्का के बड़े सरदार हैं फिर अहमद का बॉयकॉट क्यों नहीं करते? सही कहा. बॉयकॉट करो उसका. हां बॉयकॉट करो उसका. सही कहा. हां बायकॉट करो उसका. और हद तो जब हो गई जब इसने अपने दोनों बेटों को ये हुकुम दिया कि वो अपनी बीवियों को तलाक दें. क्योंकि इन दोनों की बीवियां आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बेटियां थी. उम्मे कुलसुम और रुकैया रज़ियल्लाहु ताला अन्हा. तुम्हारा चेहरा भी मुझ पर हराम है अगर तुमने अपनी बीवियों को तलाक नहीं दिया. बाबा हम आज ही उन्हें तलाक देते हैं. दिन शाम में ढल गए शामें रातों में ढल गई लेकिन अबू लहब के जुल्म में कोई कमी ना आई. ए मक्का वालों मेरे भतीजा दीवाना हो गया है दीवाना. इसकी बात मत सुनना. और जब इसके जुल्म की इंतहा हद से पार हो गई. तब अल्लाह सुभानहु ताला ने नबूवत के 10वें साल में सूरह लहब को नाजिल किया. अबू हादी हमें वो सूरा तो सुनाओ जो नबी पर नाजिल हुई है. बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम. तबत यदा अबी लहब व तब मा अग्ना अन्हू मालूहु व मा कसबा सयस्ला नारन जात लहब वम्रतुहू हम्मालतलहतब फ़ीजी दिहा हबलुम् मिन मसद.
[7:46]आइए अब इस सूरत को सिनेमैटिक अंदाज़ से समझते हैं आसान तरीके से. तो पहली आयत है तबबत यदा अबी लहब व तब. पहली आयत में अल्लाह ने कहा कि टूट गए दोनों हाथ अबू लहब के और बर्बाद हो गया वो. अब यहां पर दो बातें हैं जो नोट करने वाली हैं. पहली बात यह है कि यह जो पूरी आयत है यह आयत असल में पास्ट टेंस में बात कर रही है. यानी ऐसा नहीं कि अबू लहब के हाथ टूटेंगे, असल में उसके हाथ टूट चुके जिस लम्हे उसने नबी-ए-पाक की शान में गुस्ताखी की, उसी लम्हे उसके हाथ टूट गए. तो यह काम 100% हो चुका है, उसके हाथ टूट चुके हैं. लेकिन अबू लहब फिर भी बाज ना आया जब यह सूरत नाजिल हुई तो वो लोगों से कहता. वह कहता है मेरे हाथ टूट गए. कहां टूटे मेरे हाथ सही सलामत तो हैं. हम जंग-ए-बदर के बाद जब आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की जिंदगी को देखेंगे तब हमें पता चलेगा कि कितनी बुरी तरह वो मरा और किस तरह से आयत बिल्कुल सच्ची साबित हो गई. अब यहां पर नोट करने वाली दूसरी बात है, बहुत इंपोर्टेंट बात है. कि हाथों की ही क्यों बात हो रही है? यह क्यों कहा जा रहा है कि हाथ टूट गए. यह क्यों नहीं कहा जा रहा कि सर टूट गया, पैर टूट गया, हार्ट फेल हो गया. क्यों नहीं कहा जा रहा. मैं कहता हूं इसके लिए ना आप ये सीन देखिए.
[9:17]चलिए इस सीन को एक बार फिर से देखते हैं. इस सीन में आपने नोटिस किया होगा कि कैसे एक सिपाही ने एक फाइटर ने अपने हाथ में एक तलवार ली हुई है और दूसरे हाथ में खुद को बचाने के लिए उसके पास शील्ड है एक ढाल है. तो अगर किसी इंसान के दोनों हाथ टूट जाएंगे तो क्या होगा. ना तो वो वार कर सकेगा और ना ही अपना बचाव कर सकेगा. तो फिर इन द एंड आप बर्बाद हो जाओगे खत्म हो जाओगे और अगला हमला फिर आप ही के ऊपर होगा. बिल्कुल इसी तरह हम अबू लहब की जिंदगी में देखते हैं, उसका माल, उसके बेटे, उसके कनेक्शन, उसके ताल्लुकात, उसकी पावर सब के सब बर्बाद हो गए. कोई भी उसके काम नहीं आया और हम आगे जाकर देखते हैं कि जब वो मरा तो इतनी बुरी मौत मरा इतनी बुरी मौत मरा कि कोई उसे छूने वाला नहीं था, कोई दफनाने वाला नहीं था. कई दिनों तक उसकी लाश सड़क पर सड़ती रही लोग परेशान होते रहे. यहां तक कि उसके अपने लड़कों ने भी उसे छूने से घर में रखने से मना कर दिया. अरे अबू लहब के बेटो अपने बाप की लाश तो ठिकाने लगाओ. बदबू से लोग उल्टी कर रहे हैं. अब आते हैं आयत नंबर दो पर. मा अग्ना अन्हू मालुहू व मा कसबा. ना ही उसका कोई माल उसके काम आया ना ही उसकी कोई औलाद उसके काम आई. असल में यह आयत जवाब है उस बात का जो अबू लहब अक्सर लोगों से कहा करता था. अगर वह सच्चा है दे दूंगा मालो दौलत अल्लाह को और बचा लूंगा खुद को जहन्नुम से. अब यहां नोट करने वाली बात यह है कि यह जो कस का लफ्ज है इसका मतलब होता है कमाई के अर्निंग के. कभी-कभी लोगों के पास बड़ा पैसा होता है बाप-दादा ने उनके कमा के छोड़ा हुआ होता है. पर यह कस का लफ्ज इस्तेमाल किया जाता है अपनी कमाई के जो आपने खुद कमाई है. आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की एक हदीस है जिसमें वो कहते हैं कि इंसान की सबसे बेहतर कमाई उसकी औलाद है. और जिस तरह से हम देखते हैं कि उसकी औलाद उसके काम नहीं आई. अगली आयत की तरफ बढ़ते हैं आयत नंबर तीन. सयस्ला नारन जात लहब. के अबू लहब जहन्नुम की आग में जलाया जाएगा. जो भड़क रही होगी शोले वाली आग होगी.
[11:21]अब हम बढ़ते हैं चौथी आयत की तरफ जो है. वम्रतूहम्मा लतलहतब. और इस आयत का मतलब है कि उसकी बीवी अपने सर पर ईंधन उठाई होगी. ईंधन क्या कि वो लकड़ियां ढो रही होगी जहन्नुम के अंदर. इसका काम यह होगा कि जलना तो है ही है और साथ में आपको जाना है इसको जाना है और जाकर यह लकड़ियां लेकर आएगी और उस आग के अंदर लकड़ियां डालेगी. तो जब हम आग में लकड़ियां डालते हैं तो क्या होता है आग और तेज होती है. तो अपनी आग यह खुद-ब-खुद जलाएगी. लेकिन यहां मजे की बात यह है कि अल्लाह ताला यह भी कह सकते थे कि वो जहन्नुम में जलेगी, वह जहन्नुम का अज़ाब जिंदगी भर झेलती रहेगी. यही क्यों कहा कि वह लकड़ियां लेकर आएगी. देखिए यहां समझने की बात यह है कि वो अपनी जिंदगी में क्या करती थी. आप फिक्र ना करें अब जो मैं कहती हूं वो करते जाएं बस. तो वो इस दुनिया में अपने हस्बैंड की नफरत को फ्यूल करती थी, उस आग को बढ़ाने में उसका साथ देती थी. इसी वजह से अल्लाह सुभानहु ताला ने आखिरत में उसका अज़ाब यह रखा है कि जाओ जाके लकड़ियां उठा के लेकर आओ ढो अपने सर पे और अपनी आग को खुद भड़काओ. अब यहां पर एक और जरूरी बात है बहुत ही इंपोर्टेंट बात है जब भी आप नमाज में इस सूरत को रिसाइट करें तो ऐसा नहीं कि आप गए वम्रतूहम्मा लतलहतब. हममा एक पावरफुल लफ्ज है बहुत ही ज्यादा उसके अंदर असर है वेट है तो आप जब भी पढ़ेंगे आप को उस पर जोर देना है. वम्रतूहम्मा लतलहतब. आयत नंबर पांच की तरफ बढ़ते हैं जो है. फ़ीजीदिहा हबलुम् मिन मसद. और इसके गले में मूज की रस्सी होगी यानी नारियल की छाल वाली रस्सी होगी. यहां पर जीदिहा का जो लफ्ज है इस लफ्ज का इस्तेमाल होता है खूबसूरत गर्दन के लिए. ऐसी गर्दन जो जेवर से लदी हुई हो. कमाल की बात यह है मजे की बात यह है कि रस्सी का जिक्र क्यों है और गर्दन का जिक्र क्यों है? तो इसके पीछे की बात यह है कि उम्मे जमील एक खूबसूरत सा अपने गले में हार पहना करती थी. वो मक्का वालों से कहती थी अपने नौकरों से कहती थी, आम लोगों से कहती थी. मेरे गले का यह हार मैं उसको दूंगी जो मोहम्मद के खिलाफ खड़ा होगा मेरा साथ देगा. और इसी वजह से यहां यह मेंशन किया गया है कि उसके गले में मूज की रस्सी होगी, बल वाली रस्सी होगी, तकलीफ देने वाली रस्सी होगी उसकी उस गले में जिसमें वो हर वक्त हार पहने रहती थी. यह थी सूरह लहब की अंडरस्टैंडिंग. अब सबसे जरूरी बात यह है कि समझना यह है कि आज हमारी जिंदगी में इसका क्या रेलेवेंस है.
[14:00]जो मैं समझाऊं उस वक्त से बताता हूं कि सबसे पहली बात तो यह कि यह सूरत इसलिए नाजिल की गई है कि वो जो अल्लाह के नबी का दुश्मन है, वो अल्लाह का दुश्मन है. जिस स्पीड से वो अल्लाह के नबी की तरफ बढ़ रहा था जुल्म करने के लिए उससे कहीं गुना ज्यादा स्पीड से अल्लाह का अज़ाब अबू लहब की तरफ आ रहा था और आ चुका था उसे खबर नहीं थी.
[14:23]अब आते हैं दूसरे रिलेवेंस की तरफ जो मैं समझाऊं जो आज हम अपनी जिंदगी में अप्लाई कर सकते हैं. देखिए मियां बीवी एक दूसरे का साया होते हैं, दोस्त दोस्त भाई भाई एक दूसरे का साया होते हैं. अब कई बार क्या होता है कि हमारा दोस्त किसी की चुगली करता है. तुझे पता है ऐसा हो गया. अबे नहीं क्या बात कर रहा है. और और और बता. अक्सर मियां बीवी में भी ऐसा होता है. अपनी जिंदगी को छोड़कर दूसरों की जिंदगी में बड़ा झांकते हैं. अरे फलाने की लड़की भाग गई तुम्हें पता चला. तो अब यह जो वाइफ है या जो हस्बैंड है इसे क्या चाहिए उसे गाइड करें. अरे यार ऐसा नहीं करो. लेकिन हम लोग क्या करते हैं. खाली भागी है. अपनी मां का जेवर तक ले गई है. उस बात में और लुकमा लगा देते हैं. उसको और फ्यूल करते हैं. तो याद रखिए कि जब आप बुराई का साथ देते हो ना तो जो काम बुरा करने वाले का है. वही अंजाम उस बुराई को इनिशिएट करने वाले का है बढ़ावा देने वाले का है आइडिया देने वाले का है. उम्मीद करता हूं कि बात समझ आई होगी. वीडियो पसंद आई होगी. इसके अलावा आपसे एक गुजारिश है एक इल्तजा है एक रिक्वेस्ट है कि अगर हो सके तो हमारी इस कम्युनिटी को ज्वाइन कीजिए. अक्सर लोग पूछते हैं भाई आपकी वीडियो देखकर बड़ा अच्छा लगा ऐसी वीडियो और बनाइए अगली वीडियो कब आ रही है. मैं अकेला बंदा हूं यार नौकरी करता हूं फिर थोड़ा सा वक्त चुरा के यह youtube की वीडियोस बनाता हूं. अगर आप कम्युनिटी ज्वाइन करेंगे तो मैं अपनी टीम को बढ़ा सकता हूं और लोगों को शामिल कर सकता हूं जिससे हम जल्द से जल्द और ज्यादा और बेहतर वीडियोस प्रोड्यूस कर पाएंगे. शायद बहुत ज्यादा हम पूरे कुरान को मुकम्मल करें. अभी मेरा मकसद यह है कि मैं कुरान की आखरी 10 सूरते बनाऊं. उसके बाद फिर हम और टॉपिक्स को भी एक्सप्लोर करेंगे. कई लोगों के लिए मुश्किल होती है तो इस क्यूआर कोड को आप स्कैन करके कम्युनिटी को ज्वाइन कर सकते हैं. इसकी कीमत शायद आपके एक वक्त की बिरयानी से भी कम है. शायद आपके एक बर्गर से भी कम है. शायद आपकी एक आइसक्रीम से भी कम है. जजाकल्लाह खैर अस्सलाम वालेकुम. तबत यदा अबी लहब व तब.



