[0:01]कर्म फल जैसे करने वैसे भरनी। बेटा बनकर, बेटी बनकर, दामाद बनकर, और बहू बनकर कौन आता है? जिसका तुम्हारे साथ कर्मों का लेना-देना होता है। लेना-देना नहीं होगा तो नहीं आएगा।
[0:18]एक फौजी था। उसकी मां नहीं, बाप नहीं, शादी नहीं, बच्चे नहीं, भाई नहीं, बहन नहीं। अकेला ही कमा-कमा के फौज में जमा करता जा रहा था। तो थोड़े ही दिन में एक सेठ जी जो फौज में माल सप्लाई करते थे उनसे उनका परिचय हो गया और दोस्ती हो गई।
[0:39]सेठ जी ने कहा जो तुम्हारे पास पैसा है वह उतने के उतने ही पड़ा है, तुम मुझे दे दो। मैं कारोबार में लगा दूं तो पैसे से पैसा बढ़ जाएगा, इसलिए तुम दे दो। फौजी ने सेठ जी को पैसा दे दिया। सेठ जी ने कारोबार में लगा दिया।
[0:58]कारोबार उनका चमक गया, खूब कमाई होने लगी, कारोबार बढ़ गया। थोड़े ही दिन में लड़ाई लग गई। लड़ाई में फौजी घोड़ी पर चढ़कर लड़ने गया। घोड़ी इतनी बदतमीज थी कि जितने जोर से लगाम खींचे उतने ही तेज भागे।
[1:17]खींचते-खींचते उसके गलफड़ तक कट गए लेकिन वह दौड़ कर दुश्मनों के गोल में जाकर खड़ी हो गई। दुश्मनों ने वार किया, फौजी भी मर गया, घोड़ी भी मर गई। अब सेठ जी को मालूम हुआ कि फौजी मर गया तो सेठ जी बहुत खुश हुए कि उसका कोई वारिस तो नहीं है नहीं, अब यह पैसा देना किसको।
[1:38]अब मेरे पास पैसा भी हो गया, कारोबार भी चमक गया, लेने वाला भी नहीं रहा तो सेठ जी बहुत खुश हुए। तब तक कुछ ही दिन के बाद सेठ जी के घर में लड़का पैदा हो गया, अब सेठ जी और खुश, कि भगवान की बड़ी दया है।
[1:57]खूब पैसा भी हो गया, कारोबार भी हो गया, लड़का भी हो गया, लेने वाला भी मर गया सेठ जी बहुत खुश। वह लड़का होशियार था, पढ़ने में समझदार था। सेठ जी ने उसे पढ़ाया लिखाया जब वह पढ़ लिख कर बड़ा हो गया तो सोचा कि अब यह कारोबार संभाल लेगा, चलो अब इसकी शादी कर दें।
[2:20]शादी करते ही घर में आ गई बहू रानी, दुल्हन आ गई। उसने सोचा कि चलो, बच्चे की शादी हो गई अब कारोबार संभालेगा। लेकिन कुछ ही दिन के बाद बच्चे की तबीयत खराब हो गई। अब सेठ जी डॉक्टर के पास, हकीम के पास, वैद्य के पास दौड़ रहे हैं।
[2:42]वैद्य जी जो दे रहे हैं, दवा खिला रहे हैं, और दवा असर नहीं कर रही, बीमारी बढ़ती ही जा रही। पैसा बर्बाद हो रहा है, और बीमारी बढ़ती ही जा रही है, रोग कट नहीं रहा, पैसा खूब लग रहा है। अब अंत में डॉक्टर ने कह दिया कि लाइलाज मर्ज हो गया, इसको अब असाध्य रोग हो गया, यह बच्चा 2 दिन में मर जाएगा।
[3:10]डॉक्टर के जवाब देने पर सेठ जी निराश होकर बच्चे को लेकर रोते हुए आ रहे थे, रास्ते में एक आदमी मिला। कहां अरे सेठ जी क्या हुआ बहुत दुखी लग रहे हो? सेठ जी ने कहा, यह बच्चा जवान था, हमने सोचा बुढ़ापे में मदद करेगा।
[3:30]अब ये बीमार हो गया शादी होते ही। हमने इसके लिए खूब पैसा लगा दिया, जिसने जितना मांगा उतना दिया लेकिन आज डॉक्टरों ने जवाब दे दिया, अब यह बचेगा नहीं। असाध्य रोग हो गया, लाइलाज मर्ज है। अब ले जाओ घर 2 दिन में मर जाएगा।
[3:51]आदमी ने कहा अरे सेठ जी, तुम क्यों दिल छोड़ रहे हो। मेरे पड़ोस में वैद्य जी दवा देते हैं। दो आने की पुड़िया खाकर मुर्दा भी उठकर खड़ा हो जाता है। जल्दी से तुम वैद्य जी की दवा ले आओ।
[4:06]सेठ जी दौड़ कर गए, दो आने की पुड़िया ले आए और पैसा दे दिया। पुड़िया ले आए बच्चे को खिलाई बच्चा पुड़िया खाते ही मर गया। बच्चा मर गया अब सेठ जी रो रहे हैं, सेठाने भी रो रही और घर में बहू रानी और पूरा गांव भी रो रहा।
[4:27]गांव में शोर मच गया कि बहुरानी, सेठ की कमर जवानी में टूट गई, सब लोग रो रहे हैं तब तक एक महात्मा जी आ गए उन्होंने कहा भाई क्यों रोना-धोना। लोग बोले इस सेठ का एक ही जवान लड़का था वह भी मर गया इसलिए सब लोग रो रहे हैं।
[4:48]सब दुखी हो रहे हैं। महात्मा बोले सेठ जी रोना क्यों, सेठ महात्मा जिसका जवान बेटा मर जाए वह रोएगा नहीं तो क्या करेगा महात्मा तो सेठ - हां, कारोबार के लिए पैसा मिला था तो खुशी तो थी।
[5:07]महात्मा अरे उस दिन तो आपकी खुशी का ठिकाना ही नहीं था। सेठ किस दिन? महात्मा -अरे जिस दिन फौजी मर गया, सोचा कि अब तो पैसा भी नहीं देना पड़ेगा माल बहुत हो गया, कारोबार खूब चमक गया, अब देना भी नहीं पड़ेगा बहुत खुश थे।
[5:43]सेठ हां महाराज! खुश तो था। महात्मा और उस दिन तो आपकी खुशी का ठिकाना ही नहीं था, पता नहीं कितनी मिठाइयां बट गई। सेठ किस दिन? महात्मा अरे जिस दिन लड़का पैदा हुआ था। सेठ महाराज लड़का पैदा होता है तो सब खुश होते हैं, मैं भी हो गया तो क्या बात।
[6:06]महात्मा उस दिन तो खुशी से आपके पैर जमीन पर नहीं पड़ते थे। सेठ किस दिन? महात्मा अरे जिस दिन बेटा ब्याने जा रहे थे। सेठ महाराज बेटा ब्याहने जाता है तो हर आदमी खुश होता है तो मैं भी खुश हो गया।
[6:27]महात्मा तो जब इतनी बार खुश हो गए तो जरा सी बात के लिए रो क्यों रहे हो सेठ महाराज यह जरा सी बात है। जवान बेटा मर गया यह जरा सी बात है। महात्मा- अरे सेठ जी वही फौजी पैसा लेने के लिए बेटा बनकर आ गया।
[6:44]पढ़ने में, लिखने में, खाने में, पहनने में और शौक में, श्रृंगार में, जितना लगाना था लगाया। शादी ब्याह में सब लग गया। और ब्याज दर ब्याज लगाकर डॉक्टरों को दिलवा दिया। अब जब दो आने पैसे बच गए, वह भी वैद्य जी को दिलवा दिए और पुड़िया खाकर चल दिया।
[7:05]अब कर्मों का लेना देना पूरा हुआ। सेठ - जी ने कहा :- हमारे साथ तो कर्मों का लेन-देन था। चलो हमारे साथ तो जो हुआ सो हुआ। लेकिन वह जवान बहुरानी घर में रो रही है, जवानी में उसको धोखा देकर, विधवा बना कर चला गया, उसका क्या जुर्म था कि उसके साथ ऐसा गुनाह किया।
[7:24]महात्मा बोले - यह वही घोड़ी है। जिसने जवानी में उसको धोखा दिया। इसने भी जवानी में उसको धोखा दे दिया। वेद शास्त्र और पुराणों के साथ-साथ सभी साधु संतों का कहना है कि यह संसार कर्मों का लेखा जोखा है इसमें जो जीव चैतन्य है वह समझदारी से भवसागर पार हो जाएगा।
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