[0:01]जंगल के उस कुएं का जादू सबको बड़ा लुभाता था। सच्चे मन की सुनता बिगड़े काम बनाता था। राजू की उस नेक दुआ से चाची चलने लगी। खेतों में फिर हरियाली आई सबकी किस्मत जागी। साथ खड़े हों सब मिलजुलकर तो खुशियां घर आती हैं। एकता की ये सीख सुहानी सबको राह दिखाती हैं।
[0:31]कुकु टीवी गांव में एक उजला धूप वाला दिन था। पक्षी चहचहा रहे हैं। लोग अपने दिन की शुरुआत कर रहे हैं। और चारों तरफ हलचल हो रही है। राजू अपने दोस्तों भोला और बाकी बच्चों के साथ मैदान में खेल रहा है। वो अपने दोस्तों के साथ दौड़ते और खेलते हुए मजे कर रहा है। कुछ देर बाद वो थक जाता है। और सांस लेने के लिए एक पेड़ के नीचे रुक जाता है। वहीं उस पेड़ की छांव में एक बूढ़ा आदमी बैठा होता है। राजू उसे पहले भी कई बार देख चुका होता है। और आज वो उससे बात करने की कोशिश करता है। चाचा आप हमेशा इस पुराने पेड़ के नीचे ही क्यों बैठते हैं? आपको बोरियत नहीं होती? नहीं बेटा इस गांव की मिट्टी में बहुत सी कहानियां छुपी हैं। मैं उन कहानियों को याद करता हूं। तभी वहां भोला भी आ जाता है। और ये सब सुनने लगता है। हमें भी कोई कहानी सुनाइए ना चाचा कोई जादू वाली कहानी। जादू जादू तो हमारे गांव के उस पुराने कुएं में है। जो जंगल की तरफ है। पर वहां कोई जाता नहीं है। लोग कहते हैं कि वह कुआं बोलता है। राजू और भोला ये सुनकर तुरंत उत्सुक हो जाते हैं। क्या सच राजू फिर तो हमें वहां जाना चाहिए। हां चलते हैं मजा आएगा। पर ध्यान रखना बच्चों अकेले मत जाना जंगल काफी खतरनाक है। और वहां जंगली जानवर भी होते हैं। राजू और भोला सहमति में सिर हिलाते हैं। और वहां से चले जाते हैं। कुछ समय बाद राजू और भोला चाचा की बात को नजरअंदाज करते हुए जंगल पहुंच जाते हैं। वे घने पेड़ों से ढके संकरे रास्ते पर चलते रहते हैं। दोनों गहरे जंगल की ओर बढ़ते हुए उस जादुई कुएं को ढूंढने की कोशिश करते हैं। लेकिन उन्हें वो कहीं नहीं मिलता। राजू मुझे लगता है हमें वापस चलना चाहिए। जंगल में अकेले नहीं जाना चाहिए। डरपोक मत बनो भोलू चाचा ने कहा था कि कुआं जादुई है। सोचो अगर वो सच में बात करेगा तो कितना मजा आएगा। राजू भोला का हाथ पकड़ता है। और फिर उसे लेकर जंगल के अंदर की ओर बढ़ता है। थोड़ी देर बाद उन्हें पेड़ों के बीच छुपा हुआ एक कुआं नजर आता है। और वे तुरंत खुश हो जाते हैं। वे जल्दी से कुएं की ओर भागते हैं। और उत्सुकता से उसके चारों तरफ घूमने लगते हैं। राजू कुएं के किनारे झुककर अंदर देखता है। पानी बिल्कुल साफ दिखाई देता है। वहां ना रस्सी है ना चरखी जिससे पानी निकाला जा सके। राजू और भोला कुछ पल के लिए अपने प्रतिबिंब को देखते रहते हैं। तभी कुएं के अंदर से एक धीमी आवाज सुनाई देने लगती है। नन्हे बालक तुम यहां क्या लेने आए हो? क्या तुम्हें प्यास लगी है? राजू और भोला चौंक जाते हैं। और थोड़ा पीछे हट जाते हैं। राजू फिर से हिम्मत जुटाता है। और जवाब देने की कोशिश करता है। आप आप सच में बोल सकते हैं। चाचा सच कह रहे थे। मैं केवल उसे ही जवाब देता हूं जिसका मन साफ हो। बताओ राजू तुम्हें क्या चाहिए? राजू और भोला एक दूसरे की ओर देखते हैं। उनकी आंखों में झिझक साफ नजर आती है।
[4:36]मैं बस सोच रहा था कि अगर हमें कुछ चाहिए हो तो क्या हमें मांगना चाहिए? या मेहनत करनी चाहिए? मेहनत तो जरूरी है बेटा। लेकिन कभी-कभी भगवान हमारी सच्चाई देखकर हमें इनाम भी देते हैं। पर लालच कभी नहीं करना चाहिए। राजू सिर हिलाता है। और सुबह कुएं की आवाज को याद करता है। लेकिन उसने कोई इच्छा नहीं मांगी होती है। रात को चांदनी में कुआं चमक रहा होता है। जंगल शांत और बिल्कुल सुनसान लगता है। इसी बीच राजू वहां अकेला पहुंचता है। वो कुएं के पास जाता है और उसके किनारे खड़ा हो जाता है। और थोड़ी ही देर में कुआं फिर से बोलने लगता है। तुम फिर आ गए क्या तुमने सोच लिया है कि तुम्हें क्या चाहिए? सोना चांदी या महंगे खिलौने? नहीं कुआं महाराज मेरे दोस्त भोलू की मां बहुत बीमार है। वो चल नहीं सकती। क्या आप उन्हें ठीक कर सकते हैं? कुआं कुछ पल के लिए शांत रहता है। राजू को लगता है कि अब कोई जवाब नहीं मिलेगा। और वापस जाने लगता है। तभी एक चमत्कार होता है। कुएं से एक मिट्टी का घड़ा हवा में उठकर बाहर आ जाता है। ये पल बहुत ही अद्भुत लगता है। राजू अपनी आंखों पर विश्वास नहीं कर पाता। यह पानी ले जाओ और उसे पिला दो तुम्हारी सच्चाई ने मुझे खुश कर दिया है। तुमने अपने लिए कुछ नहीं मांगा। राजू घड़ा पकड़ता है और देखता है कि उसके अंदर का पानी साधारण सा लगता है। लेकिन वो अभी सुनी हुई बात पर भरोसा करने का फैसला करता है।
[6:26]अगली सुबह भोला अपने घर पर अपनी मां के पैरों की मालिश करता हुआ दिखाई देता है। उसकी मां बिस्तर पर लेटी होती हैं और हिल भी नहीं पा रही होती। तभी वहां राजू उसी घड़े के साथ पहुंचता है जो उसे पिछली रात मिला था। अरे राजू तुम यहां? हां सोचा विमला चाची को मिल लूं कैसी हो चाची? ठीक हूं बेटा कैसे हो तुम? ठीक हूं चाची बस आपके लिए कुछ लेकर आया था। यह क्या है बेटा? बस ऐसा समझ लीजिए कि यह एक दवाई है। आप इसे पीजिए। ये आपके लिए बहुत अच्छा रहेगा। विमला मुस्कुराती है। और घड़ा ले लेती है। भोला उनकी मदद करता है। और उन्हें वो पानी पिलाता है। पानी खत्म होने के बाद भोला घड़ा नीचे रख देता है। राजू बेटा ये तो साधारण पानी जैसा ही है। क्या इसमें तुमने कुछ मिलाया था? ऐसा ही कुछ शायद ठीक है। अब मैं चलता हूं। राजू यह कहकर वहां से चला जाता है। और फिर उसी दिन से विमला धीरे-धीरे ताकत वापस पाने लगती है। शुरू में उसे अपने पैरों में हल्की सी हलचल महसूस होने लगती है। अब वो अपने पैरों को खुद से हिला पाती है। भोला रोज उसकी मदद करता है। और उसे अभ्यास कराता है। हर गुजरते दिन के साथ वो थोड़ा और बेहतर हो जाती है। फिर एक दिन ऐसा आता है जब वह खड़े होने की कोशिश करती है। वो एक पल के लिए लड़खड़ाती है। लेकिन फिर खुद को संभाल लेती है। और धीरे-धीरे अपने कदम आगे बढ़ाने लगती है। और फिर एक दिन राजू अपने घर पर बैठकर पढ़ाई कर रहा होता है। तभी भोला अपनी मां विमला के साथ वहां आता है। विमला आगे बढ़ती है। और राजू को गले लगा लेती है। बेटा मुझे समझ नहीं आ रहा है तुम्हारा शुक्रिया अदा कैसे करूं? चाची यह तो मेरा फर्ज था। क्या मैं आपके बेटे जैसा नहीं? तीनों इस खुशी के पल को साथ में महसूस करते हैं। सभी बहुत खुश नजर आते हैं। तभी पास के गांव की चौपाल से कोई घोषणा सुनाई देती है। गांव के सभी लोग चौपाल पर इकट्ठा होते हैं। सरपंच चौपाल के बीच में बैठे होते हैं। राजू, भोला और विमला भी वहां पहुंचते हैं। और यह जानने की कोशिश करते हैं कि क्या हुआ है। हमारे पास पानी की कमी हो गई है। अगर दो दिन में पानी नहीं आया तो सारी फसल खराब हो जाएगी। सरपंच जी मैं उस जादुई कुएं से मदद मांग सकता हूं। वह बहुत दयालु है। सभी लोग हैरान नजर आते हैं। किसी को भी उस जादुई कुएं के बारे में कुछ नहीं पता होता। तभी वही चाचा भी वहां आ जाते हैं। जिन्होंने उन्हें इस बारे में बताया था। राजू सही कह रहा है लेकिन कुआं केवल तभी मदद करता है जब पूरा गांव एक साथ मिलकर प्रार्थना करे। ऐसा थोड़ी ना होता है। यह सब फिजूल की बातें हैं। हां और नहीं तो क्या? हमें इस तरीके के अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देना चाहिए। ऐसा नहीं है। राजू ने उस कुएं से मुझे भी जादुई जल पिलाया था। देखो आज उसी के बदौलत मैं फिर से चल सकती हूं। सरपंच जी गांव में अकाल पड़ने की नौबत आ चुकी है। कुछ ना करने से तो अच्छा होगा कि हम कम से कम एक कोशिश करें। सरपंच कुछ पल सोचते हैं। फिर वो मान जाते हैं। सभी गांव वाले भी सहमत हो जाते हैं। और अपने भले के लिए वहां जाकर प्रार्थना करने का फैसला करते हैं। और फिर अगले दिन पूरा गांव उस कुएं के पास पहुंचता है। सरपंच राजू के साथ मिलकर पूजा करते हैं। कुआं शांत दिखाई देता है। राजू आगे बढ़ता है। और फिर से कुएं के किनारे झुककर अंदर देखता है। हे जादुई कुएं हमारे गांव पर मुसीबत आई है हमें सोना या चांदी नहीं चाहिए हमें बस अपनी फसलों के लिए पानी चाहिए। कृपया हमारी मदद करें। मदद करें मदद करें कुआं हिलने लगता है। जमीन भी हिलने लगती है। लोग घबराकर इधर-उधर होने लगते हैं। कुछ पल बाद सब कुछ शांत हो जाता है। कुछ भी नहीं होता। गांव वालों को लगने लगता है कि यह कुआं बस चाचा और राजू की बनाई हुई एक कहानी है। वे सभी वहां से जाने लगते हैं। सरपंच जी बस कुछ देर और रुक जाइए। हम हमारे गांव के लिए मदद मांग रहे थे। अंधविश्वास का ढोंग नहीं कर रहे थे। सब लोग वहां से चले जाते हैं। और आखिर में केवल राजू भोला विमला और चाचा ही रह जाते हैं। फिक्र मत करो राजू मैं तुम पर भरोसा करता हूं चाहे कोई करे या ना करे। सभी लोग समझ नहीं पाते कि कुआं कुछ क्यों नहीं कर रहा। और वहीं सोचने लगते हैं। कुछ ही देर बाद उन्हें ऊपर से पानी की एक बूंद गिरती हुई दिखाई देती है। राजू ऊपर देखता है। और तभी हल्की बूंदा बांदी शुरू हो जाती है। जो धीरे-धीरे तेज बारिश में बदल जाती है। और तभी कुआं फिर से प्रतिक्रिया देने लगता है। नंदनपुर के निवासियों एकता में ही शक्ति है। जब तक तुम एक दूसरे की मदद करोगे यह पानी कभी खत्म नहीं होगा। राजू के चेहरे पर जीत की मुस्कान आ जाती है। दूसरी तरफ गांव के सभी लोग बारिश का आनंद लेने लगते हैं। ऐसा लगता है जैसे उन्हें लंबे समय से जो चाहिए था वो अब मिल गया है। लोग अपने खेतों की ओर दौड़ पड़ते हैं। और पानी के लिए नालियां बनाने लगते हैं। महिलाएं घरों से बर्तन निकालकर पानी इकट्ठा करने लगती हैं। धीरे-धीरे गांव का तालाब फिर से भरने लगता है। इसी के साथ राजू भोला विमला और चाचा भी जंगल से वापस गांव की ओर आ जाते हैं। हमें माफ करना राजू हमने तुम्हें गलत समझा। यह सब तुम्हारी वजह से ही हुआ है। राजू तुम सच में हीरो हो तुम्हारी वजह से सबको पानी मिला। नहीं सरपंच जी ये सब मेरी वजह से नहीं। यह हमारे गांव के एक और सच्चे मन की वजह से हुआ है। और मैं हीरो नहीं हूं भोलू असली जादू तो हमारी एकता में है। बिल्कुल सही कहा जो दूसरों का भला चाहता है उसका भला कुदरत खुद करती है। गांव के सभी लोग इस पल का आनंद लेते हैं। और खुशी-खुशी इसमें खो जाते हैं। कुआं अपनी जगह शांत खड़ा रहता है। और जब भी गांव वालों को जरूरत होती है उनकी मदद करता है। यहीं पर कहानी खत्म होती है।
[13:13]कुकू टीवी



