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Mrinali Dixit as a student speaker from the platform of 14th Bharatiya Chhatra Sansad.

Bharatiya Chhatra Sansad

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[0:03]नौजवानों के दिल में जलती आग हिंदुस्तान है, शत्रु के वक्ष स्थल पर करता नाद हिंदुस्तान है। यह शौर्य है, बलिदान है और त्याग हिंदुस्तान है।

[0:15]यहां उपस्थित सभी आदरणीय एवं माननियों को सादर चरण स्पर्श। एंड अ वेरी इंफिनिटिव वेलकम टू ऑल द नॉलेजेबल नोगल्स प्रेजेंट हियर।

[0:23]मेरा हृदय आज असमंजस में है कि मैं शुरुआत आखिर करूं कहां से? मैं शुरुआत करूं उस भारत से जहां 130 करोड़ लोग 22 भाषा और 1600 से अधिक बोलियों में बात करते हैं।

[0:35]जहां राजनीति मात्र सत्ता का खेल नहीं बल्कि विचारों की विविधता का दर्पण है, या उस भारत की सांस्कृतिक जटिलता से जहां 4000 जातियां, 25000 उपजातियां, 49 गोत्र और आठ प्रमुख धर्म हैं।

[0:48]जहां विचारों की क्रांति ने ना केवल भारत को बल्कि पूरे विश्व को दिशा दी। आनो भद्रा कृत वो यंतु विश्वता।

[0:56]या उस भारतीय दर्शन से जहां वाम को चंद्रमा कहा गया तो वही दाई दिशा को उन्होंने सूर्य बताया।

[1:03]जिस देश की पारंपरिक विरासत ने हमें अनगिनत नीतियां दी, सभा और समितियां दी उस देश की राजनीति आज मात्र दो प्रश्नों में उलझ कर या ओझल होती दिखाई दे रही है।

[1:14]आज आवश्यकता है हमें इसके मूल्य को समझने की।

[1:19]और इसके मूल्य को समझकर वामपंथ का सार है समानता जिस पर ऋग्वेद ने कहा समानो मंत्र समिति समानी अर्थात सभी के लिए समान अवसर और समान न्याय हो।

[1:31]आधुनिक भारत में भूमि सुधारों से लेकर शिक्षा के अधिकार तक वामपंथ ने गरीब और दबे कुचले लोगों की आवाज बनने का प्रयास किया।

[1:40]तो वहीं दक्षिण पंथ का सार है परंपरावाद जिस पर चाणक्य के अर्थशास्त्र ने कहा प्रजा सुखे सुखम राग्यः अर्थात प्रजा के सुख में ही राजा का सुख है जो कि हमारी संस्कृति और राष्ट्र की सुरक्षा को बढ़ावा देना रहा।

[1:53]आज हमें आवश्यकता है यह समझने की कि भारतीय राजनीति की जड़ें कितनी गहरी और समृद्ध रही हैं।

[2:01]यदि हम महाभारत महाकाव्य को ही देखें तो यक्ष ने युधिष्ठिर से पूछा कि राजा का धर्म क्या है जिस पर युधिष्ठिर ने जवाब दिया राजा का धर्म है न्याय और सबके हित में काम करना।

[2:13]यह ना तो लेफ्ट है ना राइट बल्कि भारत की मूल विचारधारा जो समाज के कल्याण को ही अपना वास्तविक धर्म मानती है।

[2:21]आज हमें आवश्यकता है 65% युवा ऊर्जा को एक दिशा देने की एक ऐसे भारत का निर्माण करने की जो भूगोल में, खगोल में, कला में, साहित्य में, विज्ञान में, अनुसंधान में, वाणिज्य में, पर्यावरण संरक्षण में मां भारती का सिरमौर बनकर विश्व गुरु के सिंहासन पर पुनः सिंहासना रूढ़ हो।

[2:41]क्यों? क्योंकि गौरवशाली था भूत, भविष्य भी महान है अगर संभाले हम उसे जो वर्तमान है। इसीलिए उठो जवान उठो जवान देश की वसुंधरा पुकारती यह देश है पुकारता पुकारती मां भारती।

[2:57]जय हिंद।

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