[0:00]पिछले महीने एक ईमेल आई 23 साल की लड़की से, नाम बदल लूंगा, उनको रिया बुलाते हैं। रिया लिखती है कि मैं बी.कॉम ऑनर्स कर रही हूं दिल्ली यूनिवर्सिटी से। टॉप कॉलेज नहीं है लेकिन बुरा कॉलेज भी नहीं है। उन्होंने बोला कि सर मैंने वो सब किया जो मुझे बोला गया था करने के लिए। 11th में कॉमर्स ली क्योंकि साइंस नहीं लेना चाहती थी, मैथ्स में रुचि थी और भैया जो थे वो सीए थे। 12th में अच्छे नंबर आए, बी.कॉम ऑनर्स मिला दिल्ली यूनिवर्सिटी में, बढ़िया सा कॉलेज है। To give you a sense, इस कॉलेज में घुसने के लिए बी.कॉम ऑनर्स आपको 95 से 96 परसेंट बेस्ट ऑफ 4 चाहिए। तो बुरा कॉलेज नहीं है। साथ-साथ सीए फाउंडेशन की भी तैयारी करी। दो बार अटेम्प्ट मारा नहीं हो पाया। तो सोचा कोई बात नहीं बी.कॉम ऑनर्स कर लेती हूं, कुछ एक-दो साल के बाद एमबीए ट्राई करूंगी। That will fix her life. 2024 में मेरी ग्रेजुएशन हुई है। 9 महीने हो चुके हैं। 47 एप्लीकेशन्स LinkedIn पे भर चुकी हूं। 4 इंटरव्यू कॉल्स आए हैं। 2 ऑफर मिले हैं। एक डेटा एंट्री रोल ₹12,000 पर मंथ। एक अकाउंट असिस्टेंट की पोजीशन ₹15,000 पर मंथ। मेरे पीजी का रेंट सर ₹8,000 है। मैं दिल्ली से नहीं हूं और मुझे कोई आइडिया नहीं है कि मुझे जिंदगी में अब क्या करना चाहिए। और सच बोलूं तो मुझे भी नहीं पता था कि मैं रिया को क्या बोलूं। क्योंकि कायदे से रिया ने कुछ गलत नहीं किया। समाज ने परिवार ने एक रास्ता दिखाया। वह रास्ता काफी सही रास्ता था काफी साल तक। उसी रास्ते पे वो चली कामयाब भी रही, अंटिल उसे यह रियलाइज हुआ कि वह रास्ता कहीं ले जा ही नहीं रहा है उसे। यह वीडियो रिया के लिए है और वो लाखों कॉमर्स ग्रेजुएट्स के लिए हैं जो बी.कॉम कर रहे हैं, बीबीए कर रहे हैं, बीएमएस कर रहे हैं। क्योंकि उन्हें बोला गया था कि कॉमर्स सेफ है, कॉमर्स प्रैक्टिकल है और ये भी बोला गया था कि कोई बात नहीं अगर सीए नहीं बने, एक डिसेंट सी जॉब आ जाएगी। एक-दो साल वहां काम करो फिर एमबीए करो और लाइफ सेट हो जाएगी। और अब वह 2025-2026 में ग्रेजुएट कर रहे हैं और उन्हें ये दिख चुका है कि यह सच नहीं है। लोग इंजीनियरिंग क्राइसिस की बात कर रहे हैं, AI क्राइसिस की बात कर रहे हैं लेकिन देश का थर्ड हाईएस्ट ग्रेजुएट नंबर जनरेटर, कॉमर्स, उसके बारे में कोई बात ही नहीं कर रहा है। 45 लाख स्टूडेंट्स हैं जो अभी कॉमर्स पढ़ रहे हैं एज आई स्पीक। उनके साथ अगले एक साल में क्या होने वाला है? जानेंगे इस वीडियो में।
[2:03]सबसे पहले नंबर्स को समझने की कोशिश करते हैं। गवर्नमेंट की जो हायर एजुकेशन रिपोर्ट है वो बताती है कि कॉमर्स इज द थर्ड हाईएस्ट ग्रेजुएट्स जनरेटर इन द कंट्री। आर्ट्स पहला है अराउंड 34% इनरोलमेंट, साइंस सेकंड है अराउंड 15% और कॉमर्स इज थर्ड अराउंड 13.3%। इंजीनियरिंग, जो सबको लगता है बहुत बड़ा है, इज एक्चुअली द फोर्थ, 11.8%। अब यह 13.3% शेयर ट्रांसलेट्स टू 45 लाख स्टूडेंट्स पर ईयर। ये स्टूडेंट्स हैं जो बी.कॉम पास, बी.कॉम ऑनर्स, बीबीए, बैचलर ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, बीएमएस ये सब कर रहे हैं। सॉरी, ये पर ईयर नहीं था। ये टोटल एट एनी गिवन पॉइंट। हर साल पर ईयर जो एक्चुअली है वो करीब 7.5 लाख, 7.5 लाख। 7.5 लाख ग्रेजुएट स्टूडेंट्स हर साल निकलते हैं। करीब 13,700 प्लस कॉलेजेस हैं इस देश में जहां बी.कॉम की डिग्री मिल सकती है। 4,700 है जो बीबीए प्रोवाइड करते हैं या ऑफर करते हैं। to give you a sense of comparison, इंजीनियरिंग कॉलेजेस इस देश में 6-7,000 है। तो कॉमर्स कॉलेजेस आर एक्चुअली मच हायर देन इंजीनियरिंग कॉलेजेस। अब ये जो स्केल है ये भी अनफॉर्चूनेटली थोड़ा सा पुराना डेटा है। AISHE, जो रिपोर्ट जनरेट करती है जिससे हमने ये नंबर्स निकाले हैं, दिस इज फ्रॉम 2021-2022। पिछले चार साल से ये रिपोर्ट अपडेट नहीं हुई है एट लीस्ट व्हेन इट कम्स टू कॉमर्स। सो वी आर एक्चुअली रनिंग ब्लाइंड। ये नंबर बहुत ज्यादा भी हो सकता है, थोड़ा सा कम भी हो सकता है, किसी को कोई हमें कोई आईडिया नहीं है। बट स्टिल एट एनी पॉइंट ऑफ टाइम, अगर 45 लाख स्टूडेंट्स कॉमर्स कर रहे हैं, द नंबर इज नॉट ट्रिवियल। अब आते हैं सबसे डरावने नंबर पे, व्हिच इज प्लेसमेंट्स एंड जॉब्स। Wheebox एक इंडिया स्किल्स रिपोर्ट हर साल निकालती है। It basically measures employability of every category। कॉमर्स स्टूडेंट्स की करंट एंप्लॉयबिलिटी 48% है। What does this mean? जब कंपनीज हायर करती हैं और उनसे पूछा जाता है कि यार जिन स्टूडेंट्स को आप हायर कर रहे हो और जिन स्टूडेंट्स को आप नहीं हायर कर रहे हो, कितने लोग हैं जो आपको लगता है एंप्लॉयबल है? कि आप उनको एक जॉब दे सकते हो, फिर उनको ट्रेनिंग के बाद, थोड़े से सुपरविजन के बाद, प्रोबेशन के बाद वगैरह वो अपना काम कर सकते हैं। That number is 48%। मतलब कॉर्पोरेट एंप्लॉइज ये बोल रहे हैं, 52%, मोर देन हाफ ऑफ कॉमर्स ग्रेजुएट्स आर नॉट एंप्लॉयबल। बाकी स्ट्रीम से कंपेयर करें? यह नंबर अभी एमबीए ग्रेजुएट्स के लिए करीब 71% है, इंजीनियरिंग के लिए करीब 65% है, बीएससी के लिए अराउंड 51%। बी.कॉम एवरेज 48%, और BA 47%। वाओ। बी.कॉम 48% एंप्लॉयबिलिटी, BA 47%। किसी ने शायद आपसे बोला था ना कि कॉमर्स जो है वो बहुत ज्यादा अट्रैक्टिव एंप्लॉयबिलिटी जनरेटर स्ट्रीम है ऐज कंपेयर टू आर्ट्स।
[4:49]1% डिफरेंस है इन टर्म्स ऑफ एंप्लॉयबिलिटी। अब इसकी वजह से सैलरी का सीन क्या चल रहा है? आइए देखते हैं। एक टियर 2, टियर 3 कॉलेज का बी.कॉम। कोई सीए नहीं है, कोई एमबीए नहीं है। दे ऑन एन एवरेज कैन एक्सपेक्ट ₹1.5 लाख से ₹2.5 लाख पर ईयर का पैकेज। मतलब 12 से 15 हजार पर मंथ। बीबीए फ्रेशर्स, सिमिलर कॉलेज ₹2-3.5 लाख। इसी की वजह से ऑन एन एवरेज हमारे देश की अनएंप्लॉयबिलिटी इज अराउंड 10% और सो। ऊपर नीचे होती रहती है बट द ग्रेजुएट अनएंप्लॉयमेंट रेट इज 29%। क्योंकि इन्होंने ग्रेजुएशन कर लिया, वक्त बिताया, पैसे बताए। तो दे ऑलमोस्ट फील कि यार 12-15,000 की नौकरी करने से बेटर जॉब नहीं करें। And that’s why surprisingly, we are producing far more unemployable graduates than we have ever produced in this country’s history. अब ये जो चीजें है ना ये ऑलमोस्ट सबको पता है। मैं आपको कुछ नया नहीं बता रहा हूं। तो इसीलिए हर एक कॉमर्स ग्रेजुएट का एक प्लान होता था। एक कन्वेयर बेल्ट प्लान। कि जी हम बी.कॉम करेंगे। बी.कॉम के साथ-साथ सीए की तैयारी करेंगे। या अगर वह नहीं हो पाएगा तो बी.कॉम करते-करते ही जल्दी से एमबीए तैयारी करेंगे और कैट, मैट, ZAT, वेट वो सब क्लियर करके एमबीए कर लेंगे। तो चलिए इस प्लान का भी आउटकम देख लेते हैं क्या होता है। शुरू करते हैं सीए से। CA is the gold standard for commerce students। एंड अंडरस्टैंडेबली सो, एक चार्टर्ड अकाउंटेंट की अहमियत बहुत है इस देश में। लेट्स लुक एट द नंबर्स। हर साल करीब 10 लाख स्टूडेंट्स फाउंडेशन, इंटरमीडिएट और फाइनल के अक्रॉस। इसके अगेंस्ट हर साल करीब 32,000 नए सीए निकलते हैं। मतलब अ कन्वर्जन रेट ऑफ 3.2%। बट दिस इज एन एग्रीगेट नंबर। लेट्स ब्रेक इट डाउन एंड सी व्हाट हैपेंस। सीए फाउंडेशन का पास रेट इज बिटवीन 15 टू 28%। सीए इंटरमीडिएट दोनों ग्रुप मिला के उसका पास परसेंटेज इज अराउंड 5.5% टू 14%। और सीए फाइनल के दोनों ग्रुप मिला के इट्स अराउंड 11% टू 18%। मतलब 100 बच्चे सीए फाउंडेशन के लिए बैठते हैं। 3-5 स्टूडेंट्स अल्टीमेटली बिकम सीए स्टूडेंट्स। वक्त कहीं भी तीन से पांच साल के बीच में। मिनिमम तो 3 साल है लेकिन 3 साल में बहुत ही कम लोग क्लियर कर पाते हैं। ऑन एन एवरेज पांच है, कभी-कभी आठ भी लग जाते हैं। सो अ गुड पाथ इफ यू क्लियर इट। बट अगर ऑड्स 3% के हैं, देन यू माइट नॉट बी एबल टू क्लियर इट इवन इफ यू आर स्मार्ट। फिर आता है दूसरा पाथ, सीएमए और सीएस। सीएमए इज सर्टिफाइड मैनेजमेंट अकाउंटेंट। इसका इंटरमीडिएट का पास परसेंटेज इज एनीवेयर बिटवीन 11 टू 29% बेस्ड ऑन द ग्रुप। 5,000-5,500 सीएमए क्वालीफाई एव्री ईयर। सीएमए एग्जीक्यूटिव का पास रेट इज बिटवीन 8 टू 30% डिपेंडिंग ऑन द सिलेबस एंड द मॉड्यूल। On the other hand, the कंपनी सेक्रेटरीज जो हैं वो 3,000-5,000 हर साल क्वालीफाई करते हैं। सो इफ वी ऐड दीज़ 3 अप, सीए, सीएमएस और सीएस, द टोटल इज एनीवेयर बिटवीन 40,000-45,000 क्वालीफाई एव्री ईयर। 11 लाख ग्रेजुएट्स दिस ईयर, व्हिच मीन्स एप्रोक्सीमेटली 4% विल क्वालीफाई फॉर दीज़ 3 सर्टिफिकेशन्स। फिर बच्चे बोलते हैं कोई नहीं एमबीए कर लेंगे। सो लेट्स सी एमबीए। कैट 2024। करीब 2.93 लाख तो करीब 3 लाख स्टूडेंट्स बैठे उसके लिए। 5,500 सीटें अल्टीमेटली क्लियर हुई। 2% कन्वर्जन रेट टू गेट इनटू एन आईएम। बट लेट्स से चलो सबको आईएम में नहीं होता है। एक डिसेंट कॉलेज में हो गया। उसका रिटर्न ऑफ इन्वेस्टमेंट देख लेते हैं। टॉप आईएमस जो हैं उनकी एवरेज पैकेजेस बहुत बढ़िया है। 30, 35 इसके करीब लाख पर साल के। लेकिन टियर 2 एमबीए आते-आते ही दिस नंबर गोज डाउन टू 10 से ₹18 लाख पर एनम पैकेज। टियर 3 एमबीए ₹6-10 लाख वो भी अगर आप लकी हैं। अब इन्हीं टियर 3 एमबीए प्रोग्राम्स की फीस होगी ₹5-15 लाख टोटल फॉर 2 ईयर्स। तो मतलब आप ₹5-15 लाख रुपए खर्च कर रहे हैं और आपको ₹6-10 लाख की नौकरी मिल रही है। So आपका पेबैक पीरियड जो है वो आराम से 5-10 साल का होगा। उस दौरान आपको अपनी ईएमआई भरनी है, आपको अपने पीजी का खर्चा भरना होगा, आपको टू व्हीलर या गाड़ी लेनी पड़ेगी, हजार चीजें और हो जाएंगी। शादी का भी प्रेशर आ जाएगा। You can imagine that in ₹6-10 lakhs, with the education loan EMI and other EMIs, you are not living the life of what you imagined an MBA graduate would live. तो ये सब थकार के लोग बोलते हैं भैया मां-बाप सही थे। सरकारी नौकरी ही करनी चाहिए, बैंकिंग जॉब्स। तो PO जॉब्स के लिए प्रिपरेशन्स स्टार्ट। लेट्स सी PO जॉब्स एट एसबीआई। 2024-25 में 600 वैकेंसीज। पहले 2,000 थी। अब 600। एप्लीकेशन्स 8,40,000। तो मतलब करीब 1,400 लोगों में से 1 पर्सन सिलेक्ट होगा। आईबीपीएस का पीओ देख लेते हैं। 5,208 IBPS PO वैकेंसीज। 12,35,000 एप्लीकेशन्स। लेट्स सी PO ऑफ SSC CHSL। 1,211 SSC CHSL PO वैकेंसीज। 32,17,000 एप्लीकेशन्स। सो आउट ऑफ 2,650 पीपल, 1 विल बी सिलेक्टेड। आरबीआई ग्रेड बी देख लेते हैं। 94 पोस्ट। 5,00,000-8,00,000 एप्लीकेशन्स। मतलब 5,000-8,000 लोगों के बीच में 1 पर्सन सिलेक्ट होगा। तो जो लोग क्लियर भी कर लेते हैं वो 2-4 अटेम्प्ट तो आराम से देकर ही क्लियर होते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है कि ये जॉब्स बढ़ती जा रही हैं। ये भी कम हो रही हैं। पब्लिक सेक्टर के बैंक ब्रांचेस भी कम हो रहे हैं। डिजिटल बैंकिंग, ऑटोमेशन। तो चल क्या रहा है कन्वेयर बेल्ट पे? अ कॉमर्स ग्रेजुएट कैन गो इन दीज़ डायरेक्शन्स। सीए की दिशा है 3-5% का सक्सेस। एमबीए आईआईएमस की दिशा है 2% का सक्सेस। बैंकिंग एग्जाम्स की दिशा जहां हजारों लोगों में से एक सिलेक्ट होगा। और 11 लाख लोग इस कन्वेयर बेल्ट पे चढ़ चुके हैं। इस साल उतरने वाले हैं। तो सबसे पहला सवाल हाउ डिड वी अराइव हियर? ये मेरा मानना है और ऑफ कोर्स आई एम नॉट एन एक्सपर्ट हियर। बट एक बी.कॉम का करिकुलम अपग्रेड ही नहीं हुआ है। वो 1990s की चीजें अभी भी पढ़ा रहे हैं। तो फाइनेंशियल अकाउंटिंग, बिज़नेस इकोनॉमिक्स, बिज़नेस लॉ, अब ये सब एक्चुअली बहुत जरूरी चीजें हैं। ऑन पेपर तो बहुत इंपोर्टेंट लगती हैं लेकिन थ्योरिटिकल नॉलेज और प्रैक्टिकल एप्लीकेशन में इतना बड़ा अंतर आ चुका है दैट मोस्ट ऑफ दीज स्टूडेंट्स आर नॉट एंप्लॉयबल। They have no idea। दूसरी चीज पिछले 2-3 सालों में बहुत ज्यादा हुआ है, AI इज एक्चुअली ईटिंग अप कॉमर्स जॉब्स। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की रिपोर्ट थी व्हिच इज द फ्यूचर ऑफ जॉब्स। उसमें उन्होंने बताया था दे बेसिकली रैंकड ऑल द जॉब्स दैट आर मोस्ट लाइकली अफेक्टेड बाय AI। अकाउंटिंग, बुक कीपिंग, पेरोल प्रोसेसिंग। दीज़ वेर वन ऑफ द हाईएस्ट अफेक्टेड जॉब्स मोस्ट लाइकली टू बी रिप्लेस्ड बाय AI कंप्लीटली। McKinsey एस्टीमेट्स दैट 42% ऑफ ऑल फाइनेंस जॉब्स विल बी ऑटोमेटेड। कंपनीज का सर्वे हुआ फाइनेंस फंक्शंस में स्पेसिफिकली एंड 58% रिपोर्टेड दैट दे हैव स्टार्टेड यूजिंग AI एंड ऑटोमेशन टू रिप्लेस पीपल। तो ये देखिए ना जूनियर कॉमर्स ग्रेजुएट क्या करता है? यही बेसिक बुक कीपिंग, अकाउंटिंग, लेजर, बैलेंस, इनवॉइसिंग, पेमेंट्स। ऑल ऑफ दिस हैज नाउ बीन ऑटोमेटेड। और तीसरी चीज व्हिच अनफॉर्चूनेटली दिस कंट्री सफर्स फ्रॉम एंड इट्स नो फॉल्ट ऑफ योर्स इज मैसिव सप्लाई। 11 लाख लोग अगर मार्केट में हर साल जुड़ रहे हैं और देयर इज नो डिमांड टू अब्सॉर्ब दोज़ पीपल। कहां से 11 लाख लोगों के लिए उनकी स्किल लेवल पे नौकरियां आएंगी। So I find it fascinating जब बच्चे ईमेल करते हैं कि सर बी.कॉम करूं या बीबीए। एंड आई एम लाइक, ये ना रॉन्ग डिबेट है। बिकॉज़ कंपनीज डोंट केयर। कंपनीज आपकी डिग्री देखकर आपको हायर नहीं कर रही हैं अब। दे आर लुकिंग एट द स्किल्स। दे आर लुकिंग एट व्हाट यू नो। दे आर लुकिंग एट व्हाट यू कैन डू फ्रॉम डे वन विदाउट एनी ट्रेनिंग, एनी असिस्टेंस। एंड अगर आपको बेसिक चीजें नहीं पता है तो कोई फर्क नहीं पड़ता है कि आपने बीबीए करा है। एंड अगर आपको सारी चीजें पता हैं तो तब भी कोई फर्क नहीं पड़ता है कि आपने सिर्फ बी.कॉम ही किया है। You can get hired if you know everything and you will never have a job even if you have the best degree। तो आपके ऑप्शन्स क्या हैं? बिकॉज़ दैट्स दी इंटेंट ऑफ दिस वीडियो। नंबर एक ऑप्शन। बिकम द टॉप 5%। 11 लाख स्टूडेंट्स में से टॉप 5% हमेशा हायर होंगे। दे कैन गो व्हेरएवर दे वांट टू। अब वो टॉप 5% की परिभाषा क्या है? समबडी हु कैन डू फाइनेंशियल मॉडलिंग। समबडी हु अंडरस्टैड्स कि डिस्काउंटेड कैश फ्लोज क्या होते हैं एंड वो एक्सेल पे प्लॉट हो सकता है। ऐसा इंसान जो चैट जीपीटी, कोपायलट, क्लाउड यूज करके प्रोग्रामिंग भी कर सकता है। समवन हु कैन फाइल जीएसटी ऑन जीएसटी पोर्टल्स। सबसे बढ़िया बात पता है क्या? इन सारी चीजों को जानने के लिए आपको दो साल की और डिग्री नहीं चाहिए। You don’t have to go to any college, you don’t have to spend money। ऑल दिस इज अवेलेबल। इट्स अवेलेबल ऑन YouTube, इट्स अवेलेबल इन चीप कोर्सेज, इट्स अवेलेबल इन योर नेटवर्क, इट्स अवेलेबल इन एन इंटर्नशिप, इट्स अवेलेबल इन प्रोजेक्ट्स। You need the passion to learn, friends. There are many people out there to teach। दूसरा ऑप्शन कॉमर्स से पिवट मारिए। Now I know that I’m saying something that will not make your parents happy, maybe you won’t be happy, the world will laugh at you, but consider this choice. देखिए कॉमर्स डिग्री आपको अगर आपने वाकई में अच्छे से करा है, इट गिव्स यू समथिंग वैल्यूएबल। पैसे कैसे काम करते हैं? बिज़नेस कैसे काम करते हैं? इकोनॉमिक्स कैसे काम करते हैं? ये यूजलेस स्किल्स नहीं है। ये बहुत रियल वर्ल्ड स्किल्स हैं। They are incredibly useful in different spheres. They are incredibly useful in sales, in business development, in operations, in consulting, in logistics, in e-commerce. In fact, you will see कम से कम मेरी लाइफ में तो ये ट्रू है, very successful people with commerce degree, but doing nothing related to commerce. They have learnt something from commerce, then they applied it somewhere else. The worst thing you can do is B.Com graduate बनकर, B.Com की जॉब्स के लिए अप्लाई करके and wait for a year or two for that job. टेक अ पिवट, लर्न दोज़ स्किल्स, गो इन अ डिफरेंट डायरेक्शन। ऑप्शन 3 खुद का कुछ बनाइए। ये सबसे ग्लैमरस प्लान लगता है लेकिन सबसे ज्यादा मुश्किल है। इसलिए सोच समझ के करिएगा। शार्क टैंक देखकर बहुत लोग उड़ रहे हैं कि यार ये तो बहुत ही बढ़िया चीज है, दे विल स्टार्ट देयर ओन बिजनेस। फट जाती है। बट यू कुड कंसीडर दिस। यू कुड बिकम अ फ्रीलांसर। बिल्ड इन इंडिया, मेक इन इंडिया, सेल आउटसाइड ऑफ इंडिया। आप स्टार्टअप्स के लिए, स्मॉल बिजनेस के लिए बुक कीपिंग कर सकते हैं। यू कुड फाइल जीएसटी फॉर देम। यू कुड बिकम अ फ्रैक्शनल अकाउंटेंट। यू कुड बिकम अ फ्रैक्शनल CFO विद द राइट एक्सपीरियंस। यू कुड स्टार्ट योर ओन स्टार्टअप। यू अंडरस्टैंड फाइनेंस, यू अंडरस्टैंड टैक्सेस, यू अंडरस्टैंड मनी फ्लो, यू अंडरस्टैंड इकोनॉमिक्स, यूज दैट। Fintech इज अनदर डायरेक्शन। कंसीडर देम एज व्हेर यू कैन वर्क। इन सारी चीजों में ना एक चीज हमेशा ध्यान रखिएगा दोस्त। अगर आप एक कॉमर्स ग्रेजुएट हैं, सीए अटेम्प्ट मारा नहीं हुआ, सीएस मारा नहीं हुआ, सीएमएस मारा नहीं हुआ, एमबीए अच्छा नहीं हुआ। आपको लग रहा है कि आपकी जिंदगी बर्बाद हो चुकी है, कुछ नहीं होगा। You still have a really, really long life। गिव अप मत मारिएगा। दुनिया ऐसी लगेगी कि खत्म हो रही है, जिंदगी ऐसी लगेगी कि कहीं नहीं जा रही है। एंड दैट मे बी ट्रू फॉर अ शॉर्ट पीरियड ऑफ टाइम। बट इट्स नॉट गोइंग टू बी ट्रू फॉरएवर। जब तक आप खुद पे विश्वास रखेंगे ना, आपको कोई नहीं हरा सकता। लेकिन जिस दिन आपने खुद पे विश्वास छोड़ दिया, फिर सब खत्म। तो जब मैं देखता हूं ना कि लोग एग्जाम के पीछे इतनी जान दे देते हैं, एग्जाम के पीछे डिप्रेशन में चले जाते हैं, देयर मेंटल हेल्थ इज कंप्लीटली रुइंड, देयर फैमिलीज आर डिस्ट्रॉयड, देयर रिलेशनशिप्स आर ब्रोकन। I just want you to step back and realize that this is just one exam. This is नॉट योर लाइफ। This is नॉट योर एक्जिस्टेंस। This is just one exam। इस एग्जाम को क्लियर करना आपकी जिंदगी की जीत नहीं होगी। वो तो सिर्फ शुरुआत है दोस्त। आप सीए बन भी गए, आप एमबीए कर भी गए, आप सीएस बन भी गए। That is not success. That is just the start of another life, another journey, another path. So please इसको अंत कभी मत बनाइएगा। और ये अपने आप से कभी मत कहिएगा कि अगर ये क्लियर नहीं हुआ और मैं सिर्फ एक कॉमर्स ग्रेजुएट रह गया, then I won’t be able to do anything in life. बिकॉज दैट्स नॉट ट्रू। आई एम टेलिंग यू दैट्स नॉट ट्रू। I’m super thrilled to announce my new latest project India Genius Challenge। ये एक नेशन वाइड हंट है भारत के ब्राइटेस्ट यंग स्टूडेंट्स का, एज्ड बिटवीन 13 टू 15 ईयर्स। एक ऑनलाइन राउंड फॉलोड बाय द नेशनल फाइल्स दैट विल हैपन इन दिल्ली जहां सबसे ब्राइटेस्ट स्टूडेंट्स को मिलेंगी ₹10 लाख की स्कॉलरशिप। ऑनलाइन राउंड्स में डेली, वीकली, मंथली विनर्स अनाउंस होंगे। उनको मिलेंगे iPhones, iPads, PS5s, books, trophies, certificates and a lot more. All leading to the national finals happening in Delhi। प्लीज अगर आप किसी 13 से 15 साल के बच्चे को जानते हैं, आपके परिवार में कोई है या आप खुद वो हैं देन लॉग ऑन टू indiageniuschallenge.com एंड स्टार्ट प्लेइंग द चैलेंज।



