Thumbnail for Thor की पूजा करने वाले Vikings कौन थे? Viking History | Tarikh E731 by The Lallantop

Thor की पूजा करने वाले Vikings कौन थे? Viking History | Tarikh E731

The Lallantop

13m 39s2,547 words~13 min read
YouTube auto captions
Transcript source

YouTube auto captions

This transcript was extracted from YouTube's auto-generated caption track. The transcript below is server-rendered so it can be read, searched, cited, and shared without opening the original YouTube player.

Use this transcript
Related transcript hubs

[0:00]दो नामों की कहानी सुनाते हैं आपको। नक्शे में आप देखेंगे तो यूरोप के पास ग्रीनलैंड और आइसलैंड दिखाई देते हैं। दिलचस्प बात यह है कि ग्रीनलैंड बर्फ से भरा है और आइसलैंड में ज्यादातर घास ही घास है। फिर इन दोनों को यह नाम क्यों मिला? एक योद्धा हुआ करता था आइसलैंड में बड़ा खूंखार। ऐसी मारकाट मचाई कि कबीले से निकाल दिया गया। उसने कहा कि तुम्हारी ऐसी कमतेसी खुद उत्तर की तरफ चला गया। कुछ वक्त बाद लौटा और लोगों से कहा कि मेरे साथ चले आओ। लोगों ने पूछा कि कहां? योद्धा ने जवाब दिया ग्रीनलैंड। अब इसमें योद्धा की चाल थी। दरअसल ग्रीनलैंड में सिर्फ बर्फ थी, लेकिन उसने उसे ग्रीनलैंड नाम दिया ताकि लोग समझे वहां हरियाली होगी। और इस तरह ग्रीनलैंड का नाम पड़ गया। दूसरा नाम ब्लूटूथ। फोन में पाए जाने वाली 21वीं सदी की इस टेक्नोलॉजी का नाम पड़ा है। नौवीं सदी के एक राजा के नाम पर। डेनमार्क के इस राजा का नाम था हेराल्ड ब्लूटूथ गोमरसन। कहते हैं राजा का एक दांत नीला पड़ गया। इसी कारण उसका नाम ब्लूटूथ पड़ा। एक और दिलचस्प बात यह है कि ब्लूटूथ टेक्नोलॉजी का यह नाम सिर्फ टेंपरेरी होने वाला था। लॉन्च की डेट तक दो नए नाम सोचे गए रेडियो वायर और पैन। इन दोनों में से पैन सिलेक्ट किया गया। यही नाम फाइनल भी होने वाला था कि पता चला पैन नाम दूसरी चीजों के लिए इंटरनेट पर पहले से इस्तेमाल हो रहा है। लिहाजा अंत में ब्लूटूथ नाम ही रहने दिया गया और आज भी हम इसे इसी नाम से बुलाते हैं इस टेक्नोलॉजी को। इन दो नामों की कहानियां आपने सुन ली। अब इनके बीच एक कनेक्शन बताते हैं। दरअसल इन दोनों नामों के पीछे जो लोग थे, वह एक खूंखार कबीले से ताल्लुक रखते थे। इन लोगों को आज हम वाइकिंग्स के नाम से जानते हैं। कौन थे वाइकिंग्स कहां से आए क्या करते थे क्यों करते थे? थॉर से इनका क्या रिश्ता था जानेंगे आज के एपिसोड में। साथ ही जानेंगे कहानी कुछ विख्यात वाइकिंग योद्धाओं की। इनमें से एक के बारे में कहा जाता है कि अमेरिका की खोज उसने की थी ना कि क्रिस्टोफर कोलंबस ने। नमस्ते मैं हूं निखिल और आप देख रहे हैं तारीख। उत्तरी यूरोप का इलाका स्कैंडिनेविया कहलाता है और यहां मौजूद स्वीडन नॉर्वे और डेनमार्क कहलाते हैं स्कैंडिनेवियन देश। इन्हीं में से आइसलैंड और नॉर्वे को जोड़ दें तो कहे जाएंगे नॉर्डिक कंट्रीज। वर्तमान में यह देश दुनिया के सबसे खुशहाल देश कहलाते हैं स्कूल फ्री अस्पताल फ्री निशुल्क बोलना चाहिए। और घर जैसी जेल यानी जेल जो होती है वहां जाकर भी आपको ऐसा लगेगा कि घर ही रहना है। साथ में ढेर सारा टैक्स यह स्कैंडिनेवियन देशों की पॉपुलर पहचान है। लगभग 1300 साल पहले जब मिडिल ईस्ट में इस्लाम का उभार हो रहा था स्कैंडिनेविया में एक लुटेरा कबीला पनप रहा था। यह वाइकिंग एज की शुरुआत थी। यह खूंखार योद्धाओं की एक टोली थी जो हमला कर लूटपाट मचाती थी और भाग जाती थी। वाइकिंग यह नाम आया कहां से इसे लेकर कई थ्योरीज हैं। एक थ्योरी कहती है कि नाम लैटिन के वाइक्स से निकला जिसका मतलब होता है गांव या बसाहट। वहीं दूसरी थ्योरी है एक जो कहती है कि वाइकिंग नाम नहीं एक वर्ब था क्रिया। वाइकिंग का मतलब था लूटने जाना। बहरहाल असलियत जो भी हो वाइकिंग्स आगे चलकर उन लोगों को कहा जाने लगा जो लूटपाट मचाते थे। लुटेरों की कहानी दुनिया भर में मौजूद है। इनमें ऐसा खास क्या खास यह था कि कुछ ही सालों में यह इतने ताकतवर हो गए कि यूरोप के ताकतवर राजाओं को तलवार की नोक पर रखना शुरू कर दिया। इन्होंने फ्रांस जर्मनी ब्रिटेन के बड़े-बड़े इलाके इन सब पर इन्होंने अपना कब्जा जमाया कभी ना कभी। यूरोप से यह आज के इस्तानबुल और ईरान तक पहुंच गए। वहीं पूर्व में इन्होंने आज के यूक्रेन तक पर कब्जा किया। आज का जो रशिया है उसका नाम निकला है रूस से। रूस असल में वह वाइकिंग्स थे जो बेलारूस यूक्रेन और रशिया में जाकर बसे और इन्होंने कीवन रूस नाम के एक नए राज्य की नीव रखी। वाइकिंग्स ने ग्रीनलैंड की खोज की और माना जाता है यह अमेरिका तक भी पहुंच गए थे।

[3:57]वाइकिंग्स की अधिकतर कहानियां लोक कथाओं के रूप में मिलती हैं जिन्हें सागा कहा जाता है। इनमें प्रमुख हैं किंग सागा जो स्कैंडिनेविया के राजाओं की कहानी है और आइसलेंडर सागा जो आइसलैंड में बसे वाइकिंग्स की कहानी बताती है। यह सागा लोक कथाओं और इतिहास का मिश्रण है। इनके अनुसार साल 793 में वाइकिंग्स ने अपनी पहली बड़ी रेड डाली। इंग्लैंड के उत्तर पूर्व में एक टापू है। लिंड्स फान इस टापू पर एक ईसाई मठ हुआ करता था। टापू पर लोग हर दिन की तरह अपने रोजमर्रा के काम पर लगे थे। उसी समय एक बड़ी सी नाव ने लिंडस फान के तट पर अपना डेरा डाला। तट के पास कुछ लोगों ने उन्हें देखा तो उन्हें लगा कि यह कोई भटकी हुई नाव होगी। लेकिन उनका अंदाजा बहुत गलत था। नाव से लोगों का शरीर, हुलिया, हेयर स्टाइल सब कुछ एकदम अलग था। टापू के लोग यह अंदाजा लगा ही रहे थे कि यह कौन है तभी उन लोगों पर हमला हो गया। हमलावरों ने आम लोगों के साथ मठ को भी लूटा और उसे तहस-नहस कर डाला। लिंड्स पान में सुरक्षा के कुछ खास इंतजाम नहीं थे क्योंकि इस वक्त तक ईसाई धर्म अधिकतर यूरोपीय देशों में फैल चुका था। अधिकतर लोग ईसाई थे इसलिए ईसाई मठ पर कोई हमला करेगा ऐसी उम्मीद किसी को थी नहीं। इसी के चलते लिंड्स फान पर हमले ने सबको सख्ते में डाल दिया। यह वाइकिंग्स की पहली बड़ी रेट थी और यहां से उनकी छवि लुटेरों वाली और हमलावरों वाली बनी और इसलिए इस पीरियड को एज ऑफ वाइकिंग्स की शुरुआत कहा गया। वाइकिंग्स रेड क्यों करते थे? जैसा पहले बताया कि शुरुआत स्कैंडिनेविया से इनकी हुई लेकिन वहां रहने वाले सारे लोग लूटमार करते हो ऐसा नहीं था। स्कैंडिनेविया में लोग छोटे-छोटे गुटों में रहते थे और अधिकतर लोग खेती या मछली पकड़कर अपना जीवन चलाते थे। इनका कोई एक राजा या एक लीडर नहीं था। अलग-अलग कबीलों के अपने-अपने सरदार होते थे। स्कैंडिनेविया एक बड़ा ठंडा इलाका था, इसलिए कई बार संसाधनों की कमी पड़ जाती थी। इसी चक्कर में इन लोगों ने वाइकिंग अभियान शुरू किए यानी नावों से दूसरे इलाकों में जाना लूटना और वापस आ जाना क्योंकि यहां कुछ था नहीं। कहानी कहती है कि वाइकिंग्स का एक सरदार रैगनर लॉथ ब्रॉक ने एक बार तय किया कि वह नाव लेकर यात्रा करेगा। रैगनर जब यह अभियान शुरू कर रहा था तब वहां के लोगों को लगा कि वह कभी वापस नहीं आ पाएगा या तो वह समुद्री तूफान से मरेगा या अगर कहीं किसी और इंसानी बस्ती में पहुंच गया तो वहां के लोग उसे मार डालेंगे। अब यह जो रैगनर था उसने सबको गलत साबित किया। वह सिर्फ समुद्री रास्ते से गया बल्कि खूब सारे धन दौलत लेकर के वापस भी आया लूटकर वापस आया। इसके बाद स्कैंडिनेविया के अलग-अलग सरदारों के बीच वाइकिंग अभियान चलाने की होड़ लग गई। शुरुआत में यह यूरोपीय जहाजों इंसानी बस्तियों और धर्मस्थलों को लूटते थे। जैसे-जैसे सफलता मिली इनकी हिम्मत बढ़ती गई।

[6:39]840 ईसवी में वाइकिंग्स ने फ्रेंकिया पर हमला किया। मैंने आज का फ्रांस और जर्मनी जो तब एक संयुक्त राज्य हुआ करता था। यहां के राजा लुई द पायस की मौत के बाद उनके बेटों में सत्ता के लिए संघर्ष शुरू हुआ। वाइकिंग्स ने इस लड़ाई का फायदा उठाकर फ्रांस में अपने स्थाई ठिकाने बना लिए। लगभग इसी समय इवार द बोनलेस नाम के एक वाइकिंग सरदार ने इंग्लैंड पर हमला किया और आज के यॉर्क शायर को अपना नया बेस बनाया। इसी प्रकार के हमले आयरलैंड स्कॉटलैंड स्पेन इटली और पुर्तगाल पर भी हुए और 870 ईसवी आते-आते वाइकिंग यूरोप में एक नई ताकत के रूप में उभरने लगे। यूरोप में अपने नए बेस से इन्होंने ईरान और आज के तुर्की में भी रेड मारी। तुर्की है। शुरुआत में यूरोप के राजाओं ने वाइकिंग से युद्ध किया, लेकिन वाइकिंग काफी खूंखार समझे जाते थे इसलिए कई लड़ाइयों के बाद भी उन पर पार ना पाया जा सका। अंत में यूरोप के राजाओं ने वाइकिंग से समझौते में ही भलाई समझी। साल 911 में फ्रांस और वाइकिंग्स के बीच एक डील हुई। डील में तय हुआ कि वाइकिंग्स लूटपाट नहीं करेंगे। बदले में उन्हें उत्तरी फ्रांस का एक बहुत बड़ा इलाका दिया गया। एक दिलचस्प ट्रिविया यह है कि फ्रांस में वाइकिंग्स को जो इलाका दिया गया उसे नाम मिला द लैंड ऑफ नॉटमैन। आगे चलकर इसी जगह सेकंड वर्ल्ड वॉर के ऑपरेशन ओवरलॉर्ड को अंजाम दिया गया जिसे डी डे या नॉर्मन डी लैंडिंग्स के नाम से जाना गया। डी डे ऑपरेशन ही वह पॉइंट था जहां से जर्मनी युद्ध में पिछड़ने लगा। डिसाइसिवली पिछड़ने लगा। बहरहाल वापस में कहानी पर लौटते हैं। वाइकिंग्स का इतिहास यूं तो बहुत व्यापक है, लेकिन एक कहानी का मेंशन जरूरी है। 950 ईसवी की बात है नॉर्वे में पैदाइश हुई एक लड़के की जिसने अपने लाल बालों के लिए एक नाम लिया एरिक्स द रेड। नाम के अनरूप ही एरिक गुस्सैल स्वभाव का था और उसके पिता भी उनके गुस्से के लिए बदनाम थे। एक बार एरिक के पिता ने कुछ लोगों की हत्या कर दी। अब यह एरिक जो था उसकी उम्र तब कुछ 10 साल रही होगी। एरिक के पिता को देश निकाला दिया गया और वह नॉर्वे से निकलकर जा बसे आइसलैंड में। पिता की मौत के बाद एरिक ने शादी की परिवार बसाया हालांकि पिता के अवगुण उसमें भी थे लिहाजा 980 ईसवी के आसपास पड़ोसियों के साथ झगड़ा होने पर उसने पड़ोसियों की हत्या कर दी। एरिक को घर छोड़ना पड़ा फिर नई जगह में भी उसका किसी शख्स से झगड़ा हुआ और कुछ रोज बाद उस शख्स के दो बेटे मरे हुए मिले। एरिक को एक बार फिर 3 साल के लिए देश निकाला दिया गया। इन झंझटों से तंग आकर एरिक ने फैसला किया कि बस बहुत हुआ। कहानी कहती है कि वह एक नाव पर सवार होकर आइसलैंड से उत्तर पश्चिम की तरफ चला गया। वापस आकर उसने लोगों को बताया कि क्या तुम छोटे से टापू पर रहते हो। उत्तर की तरफ से एक बहुत बड़ी जमीन है जहां हरियाली ही हरियाली है। उसने नई जमीन को नाम दिया ग्रीनलैंड और बहुत से लोगों को साथ लेकर ग्रीनलैंड में बस गया। ग्रीनलैंड में हालांकि हरियाली क भी नहीं था, लेकिन वो अलग बात है। इतना तय है कि ग्रीनलैंड पर पहली यूरोपियन कॉलोनी बसाने का श्रेय एरिक द रेड को जाता है। एरिक दरड़ के चार बच्चे थे। इनमें से दो की कहानी जानने लायक है। एक बेटा जिसका नाम था लीफ एरिक्सन और एक बेटी जिसका नाम था फ्रेडिस। अपने पिता की तरह लीफ एरिक्सन भी खोजी प्रवृत्ति का आदमी था। सागास ऑफ ग्रीनलैंडर्स के अनुसार एक बार नॉर्वे से ग्रीनलैंड की तरफ जाते हुए लीफ की नाव तूफान में भटक गई और एक नए इलाके में पहुंच गया। वो जहां उसे जंगली अंगूर गेहूं और मेपल के पेड़ मिले। लीफ एरिक्सन के लिए यह एकदम नया इलाका था इसलिए उसने इसे नाम दिया। विनलैंड और वहां मिली चीजों को लेकर वापस ग्रीनलैंड लौट गया। अब यह जो विन लेंड था, यह आज के नॉर्थ अमेरिका का तटीय इलाका है। कोस्टल एरिया 1960 में विन लेंड में वाइकिंग से जुड़े कुछ आर्कियोलॉजिकल अवशेष भी मिले जिनसे यह साबित हुआ कि क्रिस्टोफर कोलंबस से 500 साल पहले वाइकिंग्स ने अमेरिका की पहचान कर ली थी। अब सवाल यह कि अगर वाइकिंग्स ने अमेरिका की खोज कर ली थी तो उन्होंने इसे अपना ठिकाना क्यों नहीं बनाया? इस सवाल का जवाब मिलता है एरिक द रेड की बेटी फ्रेडिस की कहानी में। सागा ऑफ द ग्रीनलैंडर्स के अनुसार हुआ कुछ यूं कि अपने भाई लीफ एरिक्सन की विन लेंड से वापसी के बाद फ्रेडिस ने भी वहां जाने का प्लान बनाया। उसने दो और लोगों को अपने साथ इस अभियान में जोड़ा तय हुआ कि जो मिलेगा तीनों मिलकर बांट लेंगे, लेकिन जैसे ही यह तीनों विन लेंड पहुंचे एक बखेड़ा शुरू हुआ। बात यह थी कि लीफ एरिक्सन जब विन लेंड से लौटा वह यहां कुछ बने बनाए घर छोड़ गया था। लीफ ने अपने भाई से इन घरों को इस्तेमाल करने की परमिशन ली थी, लेकिन जब वह विन लेंड पहुंची उसने देखा कि उसके दो पार्टनर घरों पर कब्जा करके बैठ गए। बस फिर क्या था फ्रेडिस तम तमाते हुए अपने पति के पास गई और उससे कहा कि अगर मर्द हो तो अपनी पत्नी को इंसाफ दिलाओ। फ्रेडिस के पति ने फ्रेडिस के दोनों पार्टनर और बाकी लोगों को मार डाला। कैंप में सो रही पांच औरतों की हत्या खुद फ्रेडिस ने की। इस करतूत को छुपाने के लिए उसने सबको धमकी दी कि कोई यह बात उसके भाई को नहीं बताएगा। एक साल तक विन लेंड में रहने के बाद वह वापस लौटी और अपने भाई से कहा कि मेरे दोनों पार्टनर विन लेंड में ही रुक गए। कुछ वक्त बाद लीफ एरिक्सन को सच्चाई का पता चला। हालांकि अपनी बहन को वह मार नहीं सकता था इसलिए उसने फ्रेडिस को जाने दिया। इस पूरे घटनाक्रम से हालांकि एक चीज हुई। विन लेंड बदनाम हो गया और वाइकिंग्स ने वहां जाने का इरादा छोड़ दिया। बाद में कुछ इक्का दुक्का कैंपेन विन लेंड के लिए रवाना हुए, लेकिन नेटिव लोगों से तनातनी के चलते वाइकिंग्स वहां कभी सेटल नहीं हुए। वाइकिंग्स अपने समय के खूंखार योद्धा माने जाते थे लिहाजा हालिया समय में इन पर कई फिल्में और टीवी सीरीज बन चुकी हैं। हालांकि पॉपुलर कल्चर में वाइकिंग्स लंबे समय से मौजूद हैं। मार्वल की मूवीज में आप थॉर से परिचित होंगे तूफान का देवता थॉर जो एस गार्ड नामक साम्राज्य का युवराज है। थॉर उसके पिता ओडिन थॉर का भाई लोकी और एसगार्ड का रक्षक हेनडाल यह सभी असल में नॉर्थ गॉड कहलाते हैं यानी स्कैंडिनेवियन लोगों के देवता। शुरुआती वाइकिंग्स भी इन्हीं लोगों को मानते थे, लेकिन फिर 10वीं सदी में डेनमार्क में ईसाई धर्म का आगमन हुआ। ईसाई धर्म को अपनाने वाले पहले वाइकिंग राजा का नाम था हेराल्ड ब्लूटूथ गोमरसन जिसके नाम पर ब्लूटूथ टेक्नोलॉजी का नाम पड़ा। हेराल्ड के बाद स्कैंडिनेवियन देशों में ईसाई धर्म बढ़ता ही गया और 12वीं सदी आते-आते वाइकिंग पूरी तरह खत्म हो गए। यूरोप के तमाम देशों में आज भी वाइकिंग कल्चर के निशान दिखाई पड़ते हैं। एक साफ असर आप मॉडर्न इंग्लिश भाषा में देख सकते हैं अंग्रेजी के शब्द मसलन केक, फॉग, नेक, सीट, वांट वी यह सब वाइकिंग्स के आगमन के साथ इंग्लिश भाषा में जुड़े थे। विंडो शब्द का नॉर्स भाषा में मतलब होता था विंड आई यानी खिड़की हवा की आंख। इसके अलावा टू गो टू कम टू सिट टू लिसन टू इट ये सारे शब्द भी वाइकिंग्स के ही दिए हुए हैं। वाइकिंग्स के बारे में और जानने के लिए आप नील प्राइस की किताब चिल्ड्रन ऑफ ऐश एंड एल्फ अ हिस्ट्री ऑफ द वाइकिंग्स पढ़ सकते हैं या नेटफ्लिक्स पर द वाइकिंग सीरीज देख सकते हैं। उसमें कहानी को थोड़ा मसालेदार बनाने के लिए चीजें जोड़ी गई हैं, लेकिन हथियारों से लेकर पोशाक और नामों में मोटा माटी ठीक जानकारी आपको मिल जाएगी। इसी के साथ तारीख किस किसको हम खत्म करते हैं जिसे लिखा था मानुष ने और कैमरे पर रिकॉर्ड किया था आलोक ने आप देखते रहिए दिल ललन टॉप।

Need another transcript?

Paste any YouTube URL to get a clean transcript in seconds.

Get a Transcript