[0:00]टाइटैनिक कभी आइसबर्ग की वजह से डूबा ही नहीं था। हां जी? 10 अप्रैल 1912, दुनिया का सबसे बड़ा मूविंग ऑब्जेक्ट समंदर में उतारा जाता है। उस टाइम का सबसे महंगा, मोस्ट लग्ज़ूरियस और हिस्ट्री का सबसे एडवांस्ड शिप, जिसे दुनिया में अनसिंकेबल का टैग मिला, वो अपने पहले सफर पर निकलता है। यह डूब नहीं सकता, ऊपर वाला भी इसे नहीं डूबा सकता। इसमें कई बड़े बिजनेसमैन, सेलिब्रिटीज खुद टाइटैनिक के वाइस प्रेसीडेंट और क्रू स्टाफ को मिलाकर टोटल 2200 पैसेंजर्स ट्रैवल कर रहे थे। जिन्हें छह दिनों में लंदन से न्यू यॉर्क ले जाने की रिस्पांसिबिलिटी शिप के कैप्टन एडवर्ड जॉन स्मिथ पर थी। सफर शुरू होता है और पहले दो दिन तक तो ये सफर बिल्कुल नॉर्मल चलता है। समुंदर को इतना शांत मैंने पहले कभी नहीं देखा था सर। लेकिन तीसरे दिन जहाज के रेडियो स्टेशन को पहला इमरजेंसी सिग्नल मिलता है। जिसमें उन्हें इन्फॉर्म किया जाता है कि आगे एक आइसबर्ग है, तो अपनी स्पीड स्लो कर ले। कैप्टन एडवर्ड बात को सीरियस तो लेते हैं, लेकिन बिना स्पीड स्लो किए बस शिप को थोड़ा डाइवर्ट कर देते हैं। गति और दिशा बनाए रखो, मिस्टर लाइटहॉलर। वो इस आइसबर्ग से तो बच जाते हैं, लेकिन पांचवें दिन उन्हें दूसरी बार इमरजेंसी सिग्नल मिलता है एक और बड़े आइसबर्ग के बारे में। एडवर्ड इसे सुनते तो हैं पर शिप की स्पीड कम नहीं करते। पूरे दिन में उन्हें लगभग छह और ऐसे वॉर्निंग सिग्नल्स दिए जाते हैं। पर एडवर्ड को अपनी शिप की स्ट्रेंथ और उसकी क्वालिटी पर इतना भरोसा होता है कि वो इन्हें पूरी तरह से इग्नोर करके स्पीड से चलते जाते हैं। हम तेजी से बढ़ रहे हैं। उसका रिजल्ट रात के 11:30 बजे टाइटैनिक एक मैसिव आइसबर्ग से टकरा जाता है। शिप में मल्टीपल डिस्ट्रक्शंस होते हैं। मिनटों के अंदर शिप डूबने लग जाता है। लोग बचने के लिए लाइफ पोर्ट्स पर भागते हैं और लगभग 2:30 घंटे के अंदर-अंदर टाइटैनिक 1500 लोगों को लेकर डूब जाता है। जिनमें से एक होते हैं खुद कैप्टन एडवर्ड स्मिथ, जिनको इस पूरे डिजास्टर का ऑफिशियल कल्प्रिट माना गया है। और जिसने दुनिया को यह बता दिया कि फर्क नहीं पड़ता आप कितनी ऊंचाई पर खड़े हो, अगर उस चीज का ओवरकॉन्फिडेंस है ना तो आपको डूबते देर नहीं लगेगी। जिंदगी में भी कई बार हम टाइटैनिक बन जाते हैं। हमें सिग्नल्स मिल रहे होते हैं कि तुझे अभी एक ब्रेक लेना चाहिए। या फिर कुछ लोग हैं जिनसे तुझे दूर होना ही सही है या फिर तेरे को करियर शिफ्ट लेना चाहिए। पर हम इग्नोर करते हैं। और जब टाइम हाथ से निकल जाता है, डूबते टाइटैनिक की जगह हमारी लाइफ डूब रही होती है। वन सिंगल चांस प्लीज। तब समझ आता है कि अगर सही वक्त पर सही स्टेप्स ले लिए होते तो आज अफसोस से मरना नहीं पड़ता।
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