Thumbnail for योग निद्रा | आनन्दमूर्ति गुरुमाँ | Yoga Nidra | Guided Meditation by Anandmurti Gurumaa (Hindi) by Anandmurti Gurumaa

योग निद्रा | आनन्दमूर्ति गुरुमाँ | Yoga Nidra | Guided Meditation by Anandmurti Gurumaa (Hindi)

Anandmurti Gurumaa

40m 3s815 words~5 min read
YouTube auto captions
Transcript source

YouTube auto captions

This transcript was extracted from YouTube's auto-generated caption track. The transcript below is server-rendered so it can be read, searched, cited, and shared without opening the original YouTube player.

Timestamped outline
[0:06]Section 1

अब आप योग निद्रा के लिए तैयार हो जाइए। शवासन में लेट जाइए। सिर से पैर तक एक सीध में रहें। पैरों में थोड़ा अंतर रखें। दोनों हाथ कमर के बगल...

[3:13]Section 2

मेरे निर्देशों का बौद्धिक विश्लेषण नहीं करना, विचार नहीं करना, सिर्फ आदेश का पालन। पूरी तरह से मानसिक विश्राम पाने के लिए, तुम सोच छोड़ द...

[4:58]Section 3

अपनी चेतना को सिर से पैर तक घुमाइए। और मानसिक मन ही मन ओम का उच्चारण करें। पूर्ण स्थिर रहें, शरीर के प्रति जागरूक। और मन ही मन ओम कहें।

[8:23]Section 4

अपने आप को सजग बनाए रखिए। पर एकाग्रता का अभ्यास नहीं करना, सिर्फ सजग। अब आप अपने दाहिने हाथ पर अपनी मानसिक सजगता को ले जाइए, दाहिना हाथ।...

[24:24]Section 5

अब नाभि की गति के साथ श्वास की गिनती गिनना बंद करें और अपने ध्यान को छाती पर ले आइए। छाती की तरफ ध्यान ले आइए।

[39:51]Section 6

अब सभी प्रयासों को शिथिल करो, मन को बहिर्मुख बनाओ। श्वास पर ध्यान लाओ।

Pull quotes
[0:06]अब आप योग निद्रा के लिए तैयार हो जाइए। शवासन में लेट जाइए। सिर से पैर तक एक सीध में रहें। पैरों में थोड़ा अंतर रखें। दोनों हाथ कमर के बगल में सीधे रखें। हथेलियां ऊपर की ओर खुली रहें।
[0:46]एक बार अच्छी तरह से शरीर की स्थिति को व्यवस्थित कर लीजिए। पूरी तरह आराम की स्थिति में आइए। योग निद्रा का अभ्यास शुरू हो जाने के बाद शरीर को किसी तरह भी हिलाना डुलाना नहीं है।
[1:18]आंखें बंद रखिए और जब तक खोलने को न कहा जाए आंखें न खोलें। अब गहरी श्वास लीजिए और अनुभव कीजिए कि शारीरिक और मानसिक थकान दूर होती जा रही है।
[3:13]मेरे निर्देशों का बौद्धिक विश्लेषण नहीं करना, विचार नहीं करना, सिर्फ आदेश का पालन। पूरी तरह से मानसिक विश्राम पाने के लिए, तुम सोच छोड़ दो। सिर्फ मेरी आवाज को सुनते रहना। और जैसा कहूं करते जाना।
Use this transcript
Related transcript hubs

[0:06]अब आप योग निद्रा के लिए तैयार हो जाइए। शवासन में लेट जाइए। सिर से पैर तक एक सीध में रहें। पैरों में थोड़ा अंतर रखें। दोनों हाथ कमर के बगल में सीधे रखें। हथेलियां ऊपर की ओर खुली रहें।

[0:46]एक बार अच्छी तरह से शरीर की स्थिति को व्यवस्थित कर लीजिए। पूरी तरह आराम की स्थिति में आइए। योग निद्रा का अभ्यास शुरू हो जाने के बाद शरीर को किसी तरह भी हिलाना डुलाना नहीं है।

[1:18]आंखें बंद रखिए और जब तक खोलने को न कहा जाए आंखें न खोलें। अब गहरी श्वास लीजिए और अनुभव कीजिए कि शारीरिक और मानसिक थकान दूर होती जा रही है।

[1:46]शरीर शिथिल, शरीर विश्राम में, परम विश्राम में।

[2:04]केवल विश्राम की भावना को जगाइए। ठीक वैसे मानो आप रात सोने के लिए बिस्तर पर जा रहे हैं। जब शरीर शिथिल हो जाता है, तब नींद आने लगती है। पर आपको अभी सोना नहीं है, पूर्णतः जागरूक रहना है। याद रहे सोना नहीं है, जागृत रहना है। अब आप संकल्प करें मैं सोऊंगा नहीं, मैं जागृत रहूंगा।

[3:00]मैं सोऊंगा नहीं, मैं जागृत रहूंगा।

[3:13]मेरे निर्देशों का बौद्धिक विश्लेषण नहीं करना, विचार नहीं करना, सिर्फ आदेश का पालन। पूरी तरह से मानसिक विश्राम पाने के लिए, तुम सोच छोड़ दो। सिर्फ मेरी आवाज को सुनते रहना। और जैसा कहूं करते जाना।

[3:50]यदि अभ्यास के बीच कोई विचार आएं, आने दे, पर निर्देशों का पालन करते रहें।

[4:03]अपने आप को शांत और स्थिर रखें।

[4:13]पूरी तरह शांत।

[4:20]लेटते ही योग निद्रा प्रारंभ नहीं करनी है, अभी सिर्फ विश्राम का अनुभव लें।

[4:31]हाथ, पैर, गर्दन अडोल। शरीर शिथिल, श्वास गहन। सारे शरीर को आंतरिक रूप से शिथिल करें।

[4:58]अपनी चेतना को सिर से पैर तक घुमाइए। और मानसिक मन ही मन ओम का उच्चारण करें। पूर्ण स्थिर रहें, शरीर के प्रति जागरूक। और मन ही मन ओम कहें।

[5:36]भीतर चलें। संपूर्ण शरीर का ध्यान करें, संपूर्ण शरीर। आप योग निद्रा का अभ्यास करने जा रहे हैं। फिर से एक बार संकल्प करें, मैं सजग हूं। और मैं योग निद्रा का अभ्यास करने जा रहा हूं। फिर से दोहराएं, मैं सजग हूं। मैं योग निद्रा का अभ्यास करने जा रहा हूं।

[6:32]अब योग निद्रा का अभ्यास शुरू होता है। यह समय है संकल्प करने का। ऐसा संकल्प जो आपके विकास एवं रचनात्मक भाव से प्रेरित हो। यह संकल्प आपके स्वभाव व प्रकृति के अनुकूल छोटा, सरल और स्पष्ट भाषा में होना चाहिए।

[7:12]जो भी संकल्प चुनें उसे तीन बार कहें, मन ही मन। योग निद्रा में किए गए यह संकल्प निश्चित पूरे होंगे। आत्मविश्वास के साथ संकल्प करें।

[7:41]अब हम चेतना को क्रमशः शरीर के विभिन्न भागों में तेजी से घुमाएंगे। जितना संभव हो सके, उतनी जल्दी से चेतना को शरीर के एक भाग से दूसरे भाग में ले जाना है।

[8:07]शरीर के इन अंगों का नाम मानसिक रूप से दोहराइए और साथ ही शरीर के उस भाग के प्रति सजग हो जाएं।

[8:23]अपने आप को सजग बनाए रखिए। पर एकाग्रता का अभ्यास नहीं करना, सिर्फ सजग। अब आप अपने दाहिने हाथ पर अपनी मानसिक सजगता को ले जाइए, दाहिना हाथ। दाएं हाथ का अंगूठा, पहली उंगली, दूसरी उंगली, तीसरी उंगली, चौथी उंगली। हथेली।

[9:05]हथेली के प्रति सजग हो जाओ। हथेली का पिछला भाग, कलाई, कोहनी, कोहनी से नीचे की भुजा, कोहनी से ऊपर की भुजा, कंधा, बगल।

[9:27]दाईं कमर, दायां नितंब, दाईं जांघ।

[9:39]दायां घुटना, दाईं पिंडली, टखना, एड़ी, दाएं पैर का तलवा, पंजा, दाएं पैर का अंगूठा, पहली उंगली, दूसरी उंगली, तीसरी उंगली, चौथी उंगली।

[10:09]बाएं हाथ पर अब अपनी सजगता को ले जाइए, बाएं हाथ का अंगूठा, पहली उंगली, दूसरी, तीसरी उंगली, चौथी। बाएं हाथ की हथेली, हथेली का पिछला भाग, कलाई, कोहनी, कोहनी से ऊपर की भुजा, कोहनी से नीचे की बांह, पूरी बाईं बांह, कंधा, बाईं बगल, बाईं कमर, बाईं जांघ, बायां घुटना, बाईं पिंडली, टखना, एड़ी, बाएं पैर का तलवा, पैर का पंजा, अंगूठा, पहली उंगली, दूसरी उंगली, तीसरी उंगली, चौथी उंगली।

[15:43]सीना, निचला होंठ, ऊपर का होंठ, आंखें, मस्तक, सिर, एड़ी। पांव की एड़ी। अब सीधे ऊपर, नाक, सिर, होंठ। फिर नीचे आ जाइए, दाएं पांव का अंगूठा, बाएं पांव का अंगूठा। दोनों पांव की उंगलियां। सीना, निचला होंठ, ऊपर का होंठ, आंखें, मस्तक, सिर।

[24:24]अब नाभि की गति के साथ श्वास की गिनती गिनना बंद करें और अपने ध्यान को छाती पर ले आइए। छाती की तरफ ध्यान ले आइए।

[24:48]हर श्वास-प्रश्वास के साथ आपकी छाती ऊपर-नीचे होती है।

[28:30]अब आप गिनती गिनना रोकें, नासिका छिद्रों में चेतना को ले आएं।

[28:40]जो श्वास-प्रश्वास आप नाक से ले रहे हैं और छोड़ रहे हैं उसके प्रति सजग हो जाओ।

[39:06]आपका शरीर पूर्ण विश्राम की स्थिति में जमीन पर लेटा है। अपनी चेतना को सिर से पैर तक घुमाओ।

[39:51]अब सभी प्रयासों को शिथिल करो, मन को बहिर्मुख बनाओ। श्वास पर ध्यान लाओ। आपका शरीर पूर्ण विश्राम की स्थिति में जमीन पर लेटा है। अपनी चेतना को सिर से पैर तक घुमाओ।

[39:51]अब सभी प्रयासों को शिथिल करो, मन को बहिर्मुख बनाओ। श्वास पर ध्यान लाओ।

Need another transcript?

Paste any YouTube URL to get a clean transcript in seconds.

Get a Transcript