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SUTAK SIDDHI Horror Story | Hindi Horror Stories | Scary Pumpkin | Animated Stories

Scary Pumpkin

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[0:10]रात के 11:30 बजे थे। हवेली के आंगन में रखे दिए, अचानक टिमटिमाए और एक-एक करके बुझ गए। हे भगवान ये कैसी आवाज थी?
[0:10]यह कोई नहीं जानता था। रात को चुपके-चुपके आंगन में जाती हो। अंधेरे में कुछ बड़बड़ाती रहती हो। लोगों ने तुम्हें नींबू और राख हाथ में लिए देखा है। कहीं ये सब काला काम तुम ही तो नहीं कर रही?
[0:10]क्योंकि उसकी आंखें और होंठ डर से खुले पड़े थे। कमला की मौत के बाद हवेली का सन्नाटा और गहरा हो गया था। लेकिन हर किसी के मन में एक ही सवाल था कि आखिर यह सब क्यों हुआ?
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[0:10]रात के 11:30 बजे थे। हवेली के आंगन में रखे दिए, अचानक टिमटिमाए और एक-एक करके बुझ गए। हे भगवान ये कैसी आवाज थी? रमेश भी घबराकर उठते हैं। दोनों अंधेरे में चारों तरफ देखने की कोशिश करते हैं। किचन से लगातार खड़खड़ाहट की आवाज आ रही थी। शारदा डरते-डरते अंदर गई। मिट्टी के बर्तन जमीन पर बिखरे पड़े थे। लेकिन वहां कोई नहीं था। ये सब अपने आप कैसे गिर गया? रमेश खिड़की के पास जाते हैं और बाहर झांकते हैं। बाहर आंगन में अंधेरा था। रमेश का दिल जोर से धड़क रहा था। कोई ऊपर वाली खिड़की से झांक रहा था। वे दोनों घबराए हुए तुरंत कमरे में लौटते हैं और मीरा के पास पहुंचते हैं। रमेश ने उसका माथा छुआ तो हाथ तपे अंगारे जैसे जल उठा। मां कोई मेरे बाल खींच रहा है। मीरा का चेहरा पसीने से भीगा होता है और तकिए पर टूटे हुए बाल बिखरे होते हैं। यह कोई साधारण घर नहीं था। यह थी पाटन की पुरानी हवेली जो पिछले 100 सालों से अपने रहस्यों के लिए जानी जाती थी। इस हवेली के बड़े-बड़े हिस्सों में अब चार परिवार रहते थे। रमेश और शारदा अपनी बेटी मीरा के साथ सुधीर अपने बूढ़े पिता के साथ जोशी जी अपनी पत्नी और दो बेटों के साथ। और कुछ ही महीनों पहले सबसे किनारे वाले हिस्से में रहने आई थी कमला। अकेली विधवा औरत। दिन में सब कुछ सामान्य दिखता, लोग काम पर जाते, बच्चे खेलते और हवेली किसी आम जगह की तरह लगती। लेकिन रात होते ही हवेली बदल जाती थी। दीवारों पर नमी से अजीब धब्बे बन जाते थे। गलियारों से धीमी-धीमी आवाजें सुनाई देती थी। हवेली में सालों से लोग रहते आए थे। छोटी-मोटी बातें तो पहले भी होती थी। लेकिन यह सब कुछ ही महीने पहले शुरू हुआ था। अजीब घटनाएं तेजी से बढ़ने लगी और सबसे डरावनी बात हर रात किसी न किसी के कमरे से अजीब आवाजें आती। और आज बर्तन गिरना, दिए बुझना और मीरा का बुखार यह इस डरावनी रात की बस शुरुआत थी। अब यह हवेली सिर्फ चार परिवारों का सहारा नहीं रह गई थी। यह धीरे-धीरे एक रहस्यमई जाल में बदल रही थी। हर रात, हर सुबह कुछ अजीब घटने लगा था जिसे कोई समझ नहीं पा रहा था। जोशी के घर में दूध उबाला जा रहा था। जोशी जी उबलते दूध का ढक्कन उठाते हैं तो अंदर पूरा दूध फट चुका था। यह कैसा अपशगुन है? हर सुबह दूध खट्टा क्यों हो जाता है? सिर्फ दूध ही नहीं हवेली में बना हर ताजा खाना कुछ ही देर में बासी हो जाता। सुबह की रोटियां दोपहर तक काली पड़ जाती और मीठे पकवान से अजीब सी सड़ी हुई गंध आने लगती। हवेली के आंगन में अजीब गोल निशान दिखाई देते हैं। यह देखो, राग से बने गोल निशान। जैसे किसी ने यहां कुछ लिखा हो। धीरे-धीरे इन अजीब घटनाओं ने हवेली के दूसरे हिस्सों को भी घेर लिया। रात को सुधीर के घर में उनके पिता की चारपाई अपने आप हिलने लगती है। कभी उनके तकिए के नीचे से मिट्टी निकलती और कभी दरवाजा बंद करने के बावजूद अंदर किसी के चलने की आहट सुनाई देती। कभी बाहर लाठी पटकने की आवाज सुनाई देती और फिर किसी के खांसने की आवाज। बाबा आप आराम से सो जाइए। बाहर कोई नहीं है। जोशी जी के घर में बच्चों के खिलौने अपने आप हिलते लकड़ी की गाड़ी अपने आप चलकर कमरे के कोने में जा रुकती। और कभी-कभी बच्चे रोते हुए कहते हैं पापा वहां अंधेरे में कोई खड़ा है। जब जोशी जी देखते हैं तो वहां कुछ नहीं था। सिर्फ अंधेरा फैला होता है। कमला अब अक्सर हवेली में हो रही अजीब चीजों के बारे में सबको बताने लगी। कल रात मैंने अपने कमरे के बाहर किसी औरत की पायल की आवाज सुनी। लेकिन जब दरवाजा खोला तो वहां कोई नहीं था। सिर्फ गीली मिट्टी के निशान थे मेरे दरवाजे तक। कमला की बातें सुनकर सब सहम जाते। लेकिन उसी पल लोग उसे देखकर सोचते कि बेचारी अकेली है शायद डर के मारे उसे यह सब सुनाई देता हो। अब हवेली का माहौल दिन-ब-दिन और डरावना होता जा रहा था। हर कोने में जैसे कोई अदृश्य ताकत झांक रही हो। कभी दरवाजे की चरमराहत होती कभी खिड़की अपने आप खुल जाती। अगली सुबह शारदा जब दरवाजा खोलने गई तो चौखट पर काले धब्बे बने हुए थे। गोल-गोल घुमावदार निशान जैसे किसी ने राख और हल्दी से तांत्रिक चिन्ह बनाए हो। यह यह यह किसने बनाया? मीरा अचानक से खांसते-खांसते गिर पड़ती है। लोग दौड़कर उसे संभालते हैं। मीरा फिर से अचानक बीमार पड़ गई। बुखार, कांपना और होंठों से बड़बड़ाहट जैसे कोई नाम ले रही हो। अब साफ है, हमारी बेटी की हालत का जिम्मेदार कोई है तो वो सामने वाली गली का तांत्रिक है। सभी लोग हवेली से बाहर देखते हैं। सामने वाली गली में एक जरजर झोपड़ी जहां से धुआं उठ रहा था। हां मैंने कई बार देखा है। वो रात को अजीब चीजें ले जाता है, मुर्गे, नींबू, हड्डियां सब यही सब कर रहा है। बाबा भैरवनाथ उम्र 70 साल से ऊपर सफेद बाल झुका हुआ शरीर और आंखों में अजीब सी चमक। भैरवनाथ पहले मंदिर का पुजारी था। लेकिन कुछ अनहोनी के बाद उसने मंदिर छोड़ दिया और तांत्रिक विद्या में उतर गया। अब उसकी झोपड़ी से हमेशा धुआं उठता। रात को अजीब मंत्र सुनाई देते और सुबह दरवाजे पर राख, खून और हड्डियों के टुकड़े बिखरे मिलते। लोगों का विश्वास था कि वो काला जादू करता है और उसकी नजरें कभी भी जिस पर पड़ जाएं उसका घर उजड़ जाता है। अब और बर्दाश्त नहीं होगा। जो भी मीरा के साथ हो रहा है। वही भैरवनाथ है। हमारे घर में दूध, खाना सब खराब होता है। बच्चों को भी डरावने सपने आते हैं और अब ये निशान ये सब उसी का काम है। ये उसी की काली विद्या है। सबका शक अब पूरी तरह से भैरवनाथ पर था। हवेली के लोग मान चुके थे कि वही इस डर का असली जिम्मेदार है। लेकिन असलियत अभी बहुत गहरी थी और वह किसी ने सोची भी नहीं थी। उस रात हवेली में सब लोग एक जगह इकट्ठा हुए थे। इतनी अनहोनी एक साथ कभी नहीं हुई थी। दूध फटना, खाना सड़ना, बच्चों का बीमार पड़ना, सबका गुस्सा अब डर से बड़ा हो चुका था। अब और बर्दाश्त नहीं, ये सब उसी भैरवनाथ की करतूत है। कल सुबह उसके दरवाजे पर चलेंगे। पर अगर उसकी नजर हम पर पड़ गई तो सुना है जिसने भी उसे ललकारा उसका घर तबाह हो गया। डरते रहेंगे तो यह खत्म नहीं होगा। आज मेरी बारी है। कल तुम्हारी भी आ सकते हैं। हमें जाना ही होगा। काफी देर तक बहस चलती रही। कोई कहता कि रात में ना जाएं, सुबह देखेंगे तो कोई कहता कि अगर उसने सुन लिया तो और बिगड़ जाएगा। लेकिन आखिरकार तय हुआ कि सुबह होते ही हवेली के सारे लोग भैरवनाथ के दरवाजे पर सवाल लेकर खड़े होंगे। सुबह जब सब लोग भैरवनाथ से जवाब लेने उसके घर पहुंचे तो वहां खामोशी नहीं चीखें गूंज रही थी। किसी औरत की तेज चीख हाय भगवान बाबा मर गए। भैरवनाथ जमीन पर पड़ा उसका चेहरा नीला पड़ चुका था और मुंह से सफेद झाग निकल रहा था। आंखें आधी खुली हुई चारों ओर राख बिखरी थी। देखा उसका तंत्र उसी पर पलट गया। बोला था ना काला जादू करने वाला अपने ही जाल में फसता है। अब हवेली पर से बला हट जाएगी। भीड़ में खड़े रमेश, जोशी और सुधीर उनके चेहरे पर हैरानी और थोड़ी राहत थी। गांव वालों ने मान लिया कि अब सब खत्म हो गया। भैरवनाथ को उसके कर्मों का फल मिला है। हवेली की मुसीबत भी अब मिट जाएगी। लेकिन सच्चाई यह थी कि असली खेल अब शुरू हुआ था और यह खेल भैरवनाथ का नहीं किसी और का था। भैरवनाथ की मौत के बाद भी अंधेरे का खेल अभी खत्म नहीं हुआ था। अचानक खिड़की धड़ाम से खुलती है और पर्दा उड़कर जलती दिए की लौ बुझा जाती है। कल रात मेरी खिड़की पर कोई जोर-जोर से दस्तक दे रहा था। डर के मारे मैं रात भर सो नहीं पाई। अगली सुबह सुधीर ने तकिए के नीचे हाथ डाला और फिर वही चीज निकली। लाल धागा, राख और कटा हुआ नींबू। हर रोज हर रोज ये क्यों मिलता है मेरे तकिए के नीचे। कौन कर रहा है ये सब? लेकिन सबसे बुरी हालत थी मीरा की उसका चेहरा अब बिल्कुल पीला पड़ चुका था। बाल झड़कर जमीन पर बिखर जाते। वह बुखार में तड़पती और कभी-कभी अचानक चीख उठती। सुधीर ने मजबूरी में डॉक्टर को फिर से हवेली बुलाया। बुखार तो है पर कोई दवा असर ही नहीं कर रही। यह बीमारी जैसी नहीं लगती। सब एक-दूसरे का चेहरा देखते हैं। आखिरकार सबने तय किया कि अब किसी तांत्रिक को बुलाया जाए। कोई साधारण बीमारी नहीं, हवेली पर बुरी नजर है। गांव के लोग एक बूढ़े तांत्रिक को हवेली लेकर आते हैं। हाथ में कमंडल और राख। यह हवेली साधारण जगह नहीं है। दीवारों पर धब्बे, खिड़कियों पर राख के निशान। यह सब सूतक सिद्धि का असर है। सब लोग फुसफुसाने लगे। सूतक सिद्धि, सूतक सिद्धि। हां सूतक सिद्धि, काले जादू की एक दुर्लभ विद्या है ये। इसमें किसी घर या जगह को अशुद्ध कर दिया जाता है। रातों-रात वहां का खाना-पीना सड़ने लगता है। बच्चे बीमार पड़ जाते हैं और धीरे-धीरे घर तबाही की ओर बढ़ता है। यह सब किसी इंसान की करतूत है और जब तक उस इंसान का पता नहीं चलेगा। हवेली का सूतक खत्म नहीं होगा। सब एक-दूसरे का चेहरा देखने लगते हैं। तांत्रिक के जाने के बाद हवेली का माहौल और जहरीला हो गया। अब सबको लगने लगा कि ये बला बाहर से नहीं घर के अंदर से आई है। लेकिन कौन है वह? यह कोई नहीं जानता था। रात को चुपके-चुपके आंगन में जाती हो। अंधेरे में कुछ बड़बड़ाती रहती हो। लोगों ने तुम्हें नींबू और राख हाथ में लिए देखा है। कहीं ये सब काला काम तुम ही तो नहीं कर रही? कमला चुप रहती है। बस ठंडी नजरों से शारदा को देखती है और वहां से चली जाती है। यह देखो, सुधीर के कमरे में सबूत मिला है। जमीन पर नींबू, राख और काले कपड़े पड़े रहते हैं। यह सामान मेरा नहीं है। किसी ने जानबूझकर मुझे फंसाने के लिए रखा है। सब एक दूसरे को शक की नजरों से देखते हैं। कोई कुछ कहता नहीं लेकिन माहौल और भी भारी हो जाता है। हर दिन किसी ना किसी पर शक जाता। कभी शारदा के कमरे में राख और बाल मिलते तो कभी जोशी जी के दरवाजे पर नींबू रखा होता। कभी सुधीर के तकिए के नीचे काला धागा निकलता तो कभी आंगन में राख के पैरों के निशान। हवेली अब एक रणभूमि बन चुकी थी। यहां कोई किसी पर भरोसा नहीं करता था। सब अपने-अपने कमरों तक सिमट गए। हवेली अब सिर्फ डर का घर नहीं बल्कि ये अब शक और अविश्वास की गहरी खाई बन चुकी थी। एक दूसरे के कमरों में अजीब चीजें मिलने के बाद सब एक दूसरे को शक से देखने लगे थे। इसलिए जोशी और सुधीर ने तय किया कि तांत्रिक को फिर से बुलाना ही पड़ेगा। अगले ही दिन वह तांत्रिक को ले आए। तांत्रिक ने उनकी सारी बातें सुनी और सबकी आंखों में देखा। यह सामान तुम में से किसी का भी नहीं है। इन्हें जानबूझकर रखा गया है ताकि शक तुम सब में फैलता रहे। यह किसी और का काम है और अब मुझे अंदाजा हो रहा है कि असली खेल कौन खेल रहा है। तांत्रिक पहले ही भैरवनाथ की मौत की असली वजह का पता लगा चुका था। दो दिन बाद अमावस्य की रात तांत्रिक छुपकर हवेली आया। उसने पहले से ही तैयारी कर रखी थी। सूतक सिद्धि तोड़ने के लिए विशेष साधन और मंत्र। काली अंधेरी रात में कुत्ते लगातार भौंक रहे थे। कमला अपने कमरे से निकली। उसकी चाल अजीब और आंखें सुर्ख़ लाल। वह आंगन की चौखट तक पहुंची ही थी कि तांत्रिक ने अपना मंत्र उस पर उलट दिया। पल भर में कमला जमीन पर गिर पड़ी। उसका शरीर ऐंठा हुआ, चेहरा अकड़ा हुआ और होंठ आधे खुले हुए। जैसे किसी ने अंदर से उसकी सांसें खींच ली हो। अचानक भौंकते कुत्ते एक साथ खामोश हो गए। अगली सुबह जब घर वाले बाहर आए तो कमला को देखकर सब सन्न रह गए। वो चौखट पर ऐसे पड़ी थी जैसे किसी अदृश्य बिजली ने उसे जकड़ लिया हो। कोई नहीं जान पाया कि कमला ने अपनी आखिरी सांस तक क्या देखा? क्योंकि उसकी आंखें और होंठ डर से खुले पड़े थे। कमला की मौत के बाद हवेली का सन्नाटा और गहरा हो गया था। लेकिन हर किसी के मन में एक ही सवाल था कि आखिर यह सब क्यों हुआ? कमला कौन थी? और उसके साथ क्या हुआ? लोग फुसफुसाने लगे। कोई कहता है कि कमला की मौत का राज जानना होगा। तभी तांत्रिक हवेली में आते हैं। उसकी मौत पर अफसोस करने का कोई मतलब नहीं। ये सब कमला का ही किया हुआ था। उसने सूतक सिद्धि साधी थी और उसी ने चलाकी से तुम सबका शक भैरवनाथ की तरफ मोड़ा। भैरवनाथ उसकी हकीकत जान चुका था। इसलिए वो उसका पहला शिकार बना। यह सुनकर सब दंग रह गए। औरतें मुंह पर हाथ रख लेती हैं। लेकिन कमला ऐसा क्यों करेगी? उसने हमें क्यों सताया? क्योंकि उसे किसी को खुश देखना पसंद नहीं था। उसके अपने जीवन से सुख शांति जा चुकी थी और अब वह चाहती थी कि कोई और भी सुखी ना रहे। उसे तुम सबकी खुशहाली छीनने थी और धीरे-धीरे इस हवेली पर कब्जा करना था। मैंने उसकी जिंदगी के बारे में सब पता लगाया है। उसके माता-पिता बचपन में ही गुजर गए थे। वो अकेली रह गई थी। और तभी उसने काला जादू सीखना शुरू किया। शादी के बाद उसका पति और सास-ससुर उसे रोकते थे। लेकिन उसने सबको इसी जादू से मार डाला। जहां-जहां भी वो रही वहां बर्बादी फैल गई। यह हवेली उसकी अगली शिकार थी। ये सुनकर सबके होश उड़ गए। जिस औरत को सबने एक बेचारी विधवा समझा था। असल में वही उनकी बर्बादी की जड़ थी। और अब उसकी मौत के साथ उसकी काली परछाई भी इस हवेली की दीवारों में हमेशा के लिए कैद हो गई थी। यह कहानी आपको अच्छी लगी हो तो हमें सब्सक्राइब करें हमारा। Instagram और Facebook पेज जरूर फॉलो करें। अगर आपके पास ऐसी ही कोई कहानी हो तो हमें कमेंट बॉक्स में भेजें।

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