[0:00]एक दिन पानी अपने घनिष्ठ मित्र दूध से मिलने आया। दूध ने उसे खुशी से गले लगा लिया। उसी पल एक चमत्कार हुआ। पानी की कीमत अचानक बढ़ गई। वो हैरान होकर बोला, "दोस्त, ये क्या हुआ? मैं तो वही साधारण पानी हूं, पर तुमसे मिलते ही मैं अनमोल कैसे हो गया?" दूध मुस्कुराया और बोला, "दोस्त, तुम जब भी मेरे पास आते हो, अपना पूरा रंग, अपना पूरा अस्तित्व मिटा देते हो। अपने रूप का त्याग कर देते हो, तो मैं भी दोस्ती निभाता हूं और तुम्हें अपने बराबर अनमोल बना देता हूं।" पानी भावुक होकर बोला, "अगर तुमने मुझे इतना सम्मान दिया है, तो अब मेरी बारी है दोस्ती निभाने की। जब भी हमें आग पर रखा जाएगा, ताप बढ़ेगा तो मैं सबसे पहले खुद को भाप बनाकर उड़ा दूंगा।" दूध भी तुरंत बोला, "तुम मेरे लिए भाप बनकर उड़ जाओगे तो मैं भी तुम्हारे बिना कैसे रह पाऊंगा? मैं भी उफनकर बाहर आ जाऊंगा ताकि उस आग को बुझा दूं जो हमें अलग करने की कोशिश कर रही है।" यही प्रेम है, जहां एक त्याग करे तो दूसरा भी साथ निभाने के लिए हर सीमा पार कर दे। टेक करो इस रील को उस दोस्त को जिसके साथ आपकी कुछ ऐसी ही दोस्ती है।

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