Thumbnail for *INDIA's BIGGEST* Mysterious CASE | (2001) Haryana [4K] by BADMASH icON

*INDIA's BIGGEST* Mysterious CASE | (2001) Haryana [4K]

BADMASH icON

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[0:01]Section 1

वो साल था 2001, हिसार, हरियाणा। बरवाड़ा नाम का एक गांव, जहां इलाके के एक्स एमएलए रेलुराम पूनिया की कोठी थी। घर इतना आलीशान था कि रेलुराम...

[1:11]Section 2

23 अगस्त सन 2001, उस दिन रेलुराम की बेटी प्रियंका का बर्थडे था। हिसार के उस घर में उस कोठी में फुल रौनकें-शौनकें थी। प्रियंका के बर्थडे क...

[2:28]Section 3

फिर सुबह होती है। देखिए, सुबह का वहां का रूटीन था, जो काम करने वाली होती हैं, कोई नौकर-चाकर, ड्राइवर, उनका आना-जाना शुरू हो जाता है। घर क...

[10:09]Section 4

देखिए रेलुराम की बेटी प्रियंका का बर्थडे पड़ता था 24 अगस्त को। तो हर साल 24 अगस्त के दिन ही पार्टी होती थी। लेकिन इस बार एक दिन पहले 23 अ...

[19:26]Section 5

झूला झुला कर उसे जोर-जोर से दीवार में पटक-पटक कर, दीवार में भिड़ा-भिड़ा कर आगे आप खुद समझदार हो। इसके बाद दोनों सुनील की वाइफ यानी सोनिया...

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[2:28]सोनिया ने कहा मुझे नहीं पता। मुझे किसी ने सर पर जोर से मारा और मैं बेहोश हो गई और उसके बाद मैंने कुछ नहीं देखा। यह भी नहीं पता कितने लोग थे, कौन थे, क्यों किया?
[2:28]वह बोलती है हां, यह डायरी मेरी है। इस डायरी में नॉर्मल चीजें लिखी हुई हैं। फिर पुलिस सोनिया से पूछती है कि क्या यह हैंडराइटिंग भी तुम्हारी है?
[2:28]यह इंडिया के सबसे पॉपुलर गेमिंग प्लेटफॉर्म पर मिल जाएगा। Trusted by millions of players everyday.
[2:28]यहां न्यू वायरल गेम्स आते रहते हैं। अभी ट्राई करना चाहते हो, तो कमेंट में लिंक है, ओपन द फाइल, रजिस्टर करो एंड एन्जॉय द गेम। कहानी उस जमाने की है, जिस वक्त शायद आप में से कुछ लोगों का जन्म भी नहीं हुआ होगा।
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[0:01]वो साल था 2001, हिसार, हरियाणा। बरवाड़ा नाम का एक गांव, जहां इलाके के एक्स एमएलए रेलुराम पूनिया की कोठी थी। घर इतना आलीशान था कि रेलुराम जी की गाड़ी घर की दूसरी मंजिल तक जाती थी, वो भी सीधा बेडरूम के अंदर। पूरे हरियाणा में इस घर के चर्चे थे और लोग दूर-दूर से इस घर को देखने आया करते थे।

[0:34]अब इस कहानी में मैं आगे बढूं, उससे पहले मैं बता दूं, जब मैं इस घटना पर रिसर्च कर रहा था, पता नहीं कैसे पर इस घटना की असल तस्वीरें मेरे सामने आ गई। दो-तीन दिन तक मुझसे खाना भी नहीं खाया गया। मेरा मन ही नहीं किया खाना खाने का। सर पकड़ लिया था मैंने अपना और आंसू आते-आते ही रह गए बस। पहले तो मुझे लगा शायद यह स्टोरी फेक हो सकती है। पर नहीं, काश ये फेक होती, लेकिन इस स्टोरी ने दिमाग घुमा दिया। अगर आप इस केस को डिटेल में स्टडी करना चाहते हो तो ये 300-400 पन्नों की पीडीएफ फाइल है, जाकर इसे पढ़ लेना दिमाग के फ्यूज उड़ जाएंगे।

[1:11]23 अगस्त सन 2001, उस दिन रेलुराम की बेटी प्रियंका का बर्थडे था। हिसार के उस घर में उस कोठी में फुल रौनकें-शौनकें थी। प्रियंका के बर्थडे की तैयारी फुल जोरों-शोरों से होती है। रेलुराम पूनिया रईस आदमी थे, विधायक रह चुके थे, शानो-शौकत और पूरा दबदबा। पार्टी का खाना-वाना घर पर ही बनता है, म्यूजिक का इंतजाम होता है और केक-वेक मंगवाया जाता है। वो म्यूजिक सिस्टम फुल आवाज पर चलता है। उस पार्टी में रेलुराम पूनिया जी के फैमिली के सारे लोग मौजूद थे। पर बाहर के किसी को भी नहीं बुलाया था, सिर्फ फैमिली-फैमिली वाले थे। रेलुराम पूनिया, उनकी सेकंड वाइफ, बेटा सुनील और सुनील की वाइफ शकुंतला और उनके तीन बच्चे। खुद प्रियंका और प्रियंका की बहन सोनिया। देखिए, कुल मिलाकर नौ लोग उस घर में मौजूद थे। रात को हवेली की फर्स्ट फ्लोर पर नाच-गाना चल रहा था। म्यूजिक बज रहा है, सब लोग खुश हो रहे हैं, कुछ झूम रहे हैं। इसी बीच खाना-वाना खाने के बाद, जब रात के करीब 10-11 बजते हैं तो सभी लोग सोने के लिए अपने-अपने रूम्स में चले गए। लेकिन म्यूजिक बंद नहीं हुआ। म्यूजिक सारी रात फुल वॉल्यूम पर बजता रहा।

[2:21]और सुबह होने से पहले म्यूजिक भी अपने आप बंद हो गया।

[2:28]फिर सुबह होती है। देखिए, सुबह का वहां का रूटीन था, जो काम करने वाली होती हैं, कोई नौकर-चाकर, ड्राइवर, उनका आना-जाना शुरू हो जाता है। घर का दरवाजा खुला हुआ था। जब वो अंदर गए तो अंदर का मंजर ही कुछ इस तरह का था, इतना खौफनाक! पूरा फर्स्ट और सेकंड फ्लोर खून से सना हुआ था। ब्लड ही ब्लड चिपका हुआ था। हर किसी के सर से खून बहकर जमीन के रास्ते दीवार पर, फर्श पर, बेड पर कोई जगह नहीं थी। पहला विटनेस जो उस घर में घुसा था, वो घर के अंदर से चीखता हुआ बाहर निकला। उसके बाद पूरा गांव इकट्ठा हो गया। पुलिस को खबर दी जाती है, रेलुराम पूनिया की पूरी फैमिली को किसी ने मौत के घाट उतार दिया वो भी बहुत ही बेरहमी के साथ। पूर्व विधायक थे, इलाके में उनका असर था, पूरा दबदबा था। थोड़ी ही देर में पूरे जिले के आला पुलिस अफसर भागे-भागे रेलुराम पूनिया के घर पहुंचे। जिस पुलिस अफसर ने भी घर के अंदर जाने की गलती की, वो कांपता हुआ बाहर निकला। ऐसा दृश्य देखने के लिए कोई भी पुलिस वाला तैयार नहीं था। क्योंकि ना तो ऐसा कुछ 2001 में कभी किसी ने देखा था। यह पहली बार था, जो अंदर गया उसकी रूह कांप गई। पुलिस ने लाशों को गिनना शुरू किया तो वह देखते हैं करीब नौ लोगों की लाशें वहां पड़ी हुई थी। शुरू में पुलिस ने यही सोचा के बड़े नेता है, बहुत सी दुश्मनियां होती हैं या किसी बड़ी गैंग ने चोरी के इरादे से घर के हर सदस्य को मार डाला। एंबुलेंस भी तब तक आ चुकी थी। फिर सारी लाशों को उठाने का काम शुरू किया गया। अब सभी लाशों को धीरे-धीरे उठाकर एंबुलेंस में लादा जा रहा था। जब बारी रेलुराम पूनिया जी की छोटी बेटी सोनिया की आई। सोनिया को पुलिस ने उठाना शुरू किया, तो अचानक उन्हें लगा इसकी सांस चल रही है। उसकी बॉडी भी गर्म थी और नब्ज भी चल रही थी। तो फौरन उसे हॉस्पिटल लेकर भागा जाता है। तो पुलिस वालों की कोशिश रहती है, इसे जल्द से जल्द बचा लिया जाए। उनके मन में था चलो, रेलुराम जी का कोई एक जना तो बचा। हॉस्पिटल में उसका इलाज शुरू हुआ। जख्म उस पर भी बहुत गहरे थे। उधर डेड बॉडीज भी हॉस्पिटल में पहुंच गई। पुलिस अब अंदाजा लगाने में लगी हुई थी कि यह कर कौन सकता है? इतना बड़ा कांड आखिर किया किसने? इसके बाद जांच शुरू हुई। वहां से केक और रात का खाना, बर्थडे पार्टी, नौकरों से पूछताछ, सब कुछ होता है। सब बताते हैं कि रात को बहुत ही खुशगवार माहौल था। सब अच्छे से हंस-खेलकर बात कर रहे थे। प्रियंका मैडम का बर्थडे था। फिर पुलिस दुश्मनों की लिस्ट निकालती है, कहीं कोई पॉलिटिकल दुश्मन तो नहीं, कोई जमीन, जायदाद, प्रॉपर्टी का, फैक्ट्रियों का या बिजनेस से रिलेटेड। पूरा दिन ऐसे ही निकल जाता है। उधर सोनिया हॉस्पिटल में है, कोई पूछताछ नहीं, क्योंकि वह अभी भी बेहोश थी। फिर अगले दिन 25 अगस्त को पुलिस की पूरी टीम और फॉरेंसिक यूनिट उस घर में पहुंचती है। उधर हॉस्पिटल में सोनिया जब थोड़ा बहुत होश में आती है, तो पुलिस उससे पूछने की कोशिश करती है आखिर हुआ क्या, क्या हुआ रात को? सोनिया ने कहा मुझे नहीं पता। मुझे किसी ने सर पर जोर से मारा और मैं बेहोश हो गई और उसके बाद मैंने कुछ नहीं देखा। यह भी नहीं पता कितने लोग थे, कौन थे, क्यों किया? फिर पुलिस ने सोचा जब बाद में ठीक हो जाएगी तब ढंग से बात करेंगे। उधर पुलिस और फॉरेंसिक की टीम हवेली पर थी। इन्वेस्टिगेशन चालू थी। हर एक चीज, हर एक डिटेल को छानबीन करती है। एक-एक दस्तावेज को चेक किया जाता है और फिर इसी दौरान पुलिस को एक डायरी में से एक लेटर मिलता है। जैसे ही पुलिस वाले वो लेटर पढ़ते हैं उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। घर के नौकरों ने बताया कि यह डायरी सोनिया मैडम की है। उसके बाद वह डायरी और वह लेटर पुलिस अपनी जेब में डाल के सीधा हॉस्पिटल पहुंचते हैं। अब 24 घंटे बीत चुके थे और सोनिया ठीक-ठाक बात करना चालू हो चुकी थी। पुलिस ने सोनिया से सिर्फ एक सवाल पूछा, क्या यह डायरी तुम्हारी है? वह बोलती है हां, यह डायरी मेरी है। इस डायरी में नॉर्मल चीजें लिखी हुई हैं। फिर पुलिस सोनिया से पूछती है कि क्या यह हैंडराइटिंग भी तुम्हारी है? वह बोली हां। उसके बाद पुलिस ने उस लेटर को उठाकर सोनिया के सामने कर दिया। इसका मतलब यह लेटर भी तुमने ही लिखा है। अब सोनिया की हवा टाइट हो गई। उस डायरी में जो लेटर लिखा हुआ था, वह लेटर सोनिया ने संजीव को लिखा हुआ था, अपने ही पति को और उस लेटर में यह लिखा हुआ था, ध्यान से सुनना। मैं अपने घर वालों से इतनी नफरत करती हूं। अब इनमें से मैं किसी को भी जिंदा नहीं छोडूंगी और इन सब को मार दूंगी। तुम साथ दो या ना दो, मैं यह अकेले करूंगी। अब जब पुलिस ने यह लेटर पढ़ा तो उन्हें लगा भई, कातिल तो घर का ही है। हम पागलों की तरह बाहर झक मार रहे थे। पुलिस इस दौरान सोनिया से पूछती रही, लेकिन वह मानने को तैयार ही नहीं थी। फिर सोनिया के पति संजीव को ढूंढा गया। वह दिल्ली में था, पता नहीं छिपकर बैठा हुआ था। पुलिस ने उसे दबोच लिया और फिर उसकी ऐसी रेल बनाई कि उस संजीव ने सारी कहानी उगल दी। फिर सोनिया और संजीव का आमना-सामना करवाया गया। तो सोनिया यहां टूट गई। उसके बाद जो उन दोनों ने कहानी सुनाई और 23 अगस्त की रात आखिर हुआ क्या था? उस रात की वह मिस्ट्री अब धीरे-धीरे पुलिस वालों को समझ आने लगी। पहले तो आप अपने दिमाग को इसके लिए तैयार कर लो। क्या पता शायद आप भी अपने सर को पकड़ लो, क्योंकि अगर एक बार आपने सुन लिया तो आप चाहकर भी इस कहानी को अपने दिमाग से नहीं निकाल पाओगे। खाना-वाना पहले ही खा लो, बाद में मन नहीं करेगा। ऐसे पछताते फिरोगे। खैर आज की वीडियो लंबी होने वाली है। और मैं पूरी कोशिश करूंगा इसमें ज्यादा एडिटिंग, साउंड इफेक्ट्स और विजुअल्स ना लगाने की, ताकि आपका पूरा फोकस इस कहानी को समझने में लगे। चाहो तो आप अपनी आंखें बंद करके भी इस स्टोरी को सुन सकते हो। मेरा स्टोरी सुनाने का तरीका ही कुछ इस तरह का होगा कि सारे विजुअल्स आपका दिमाग खुद बनाने लग जाएगा। अपने आप आपके दिमाग में तस्वीरें बनती जाएंगी, तो खुद को आज की मिस्टीरियस स्टोरी के लिए रेडी कर लो। तब तक एक शॉर्ट ब्रेक लेते हैं आज के स्पॉन्सर के लिए। आगे बढ़ने से पहले चिकन रॉड पायरेट एडिशन गेम के बारे में सुनो। फेवरेट गेम है। इसमें चिकन को शार्क से बचाना है। You are always one second away from a massive win and this tension makes it so addictive. यह इंडिया के सबसे पॉपुलर गेमिंग प्लेटफॉर्म पर मिल जाएगा। Trusted by millions of players everyday. यहां न्यू वायरल गेम्स आते रहते हैं। अभी ट्राई करना चाहते हो, तो कमेंट में लिंक है, ओपन द फाइल, रजिस्टर करो एंड एन्जॉय द गेम। कहानी उस जमाने की है, जिस वक्त शायद आप में से कुछ लोगों का जन्म भी नहीं हुआ होगा।

[8:36]कहानी है रेलुराम पूनिया जी की, जो 1996 में हरियाणा में एमएलए रह चुके थे और हरियाणा के हिसार इलाके के कई रईसों में इनका नाम शामिल था। हालांकि रेलुराम पूनिया मिडिल क्लास फैमिली से थे। शुरुआती दिनों में रेलुराम जी ने एक ट्रक क्लीनर के तौर पर अपना करियर शुरू किया। फिर काले तेल के धंधे में ऐसी छलांग मारी कि देखते ही देखते नोटों की गट्टियां जमा होने लगी, करोड़ों कमाए। हिसार में बड़ी-बड़ी जमीनें, हरियाणा के अलग-अलग दूसरे शहरों में फैक्ट्रियां, दिल्ली में मकान, दुकानें, फरीदाबाद में भी इनकी बहुत सारी जमीनें थी। मतलब करोड़ों की संपत्ति और हिसार के जिस घर में, जिस कोठी में यह वारदात हुई, वह घर ही ऐसा था कि लोग दूर-दूर से उसे देखने आते थे और देखते ही रह जाते थे। क्योंकि उस जमाने में ये हिसार तो क्या पूरे हरियाणा में इकलौता ऐसा घर था, जिसकी दूसरी मंजिल के बेडरूम तक सीधा कार जाती थी। पूरे हरियाणा में उस वक्त ऐसी कोई भी कोठी नहीं थी, जिसमें जो है वो गाड़ी सीधे बेडरूम तक जाती हो। शौक की कोई कीमत नहीं और ऊपर से जाट। देखिए रेलुराम जी की दो शादियां हुई। पहली ओमवी देवी से जिनसे उनका एक बेटा हुआ सुनील। और दूसरी शादी कृष्णा देवी से जिनसे दो बेटियां हुई, प्रियंका और सबसे छोटी बेटी सोनिया। जो उनका बेटा सुनील था, उसकी शादी शकुंतला से हुई। आगे उनके तीन छोटे-छोटे मासूम से बच्चे, चार साल का लोकेश, दो साल की शिवानी और कुछ 30 से 40 दिनों की नन्ही प्रीति हुई। एक खुशहाल संपन्न परिवार, ऊपर से सब कुछ परफेक्ट। लेकिन अंदर ही अंदर कुछ सड़ रहा था।

[10:09]देखिए रेलुराम की बेटी प्रियंका का बर्थडे पड़ता था 24 अगस्त को। तो हर साल 24 अगस्त के दिन ही पार्टी होती थी। लेकिन इस बार एक दिन पहले 23 अगस्त को ही उसका बर्थडे मनाने का फैसला लिया गया और यह फैसला लिया रेलुराम जी की सबसे छोटी बेटी सोनिया ने। क्योंकि 24 अगस्त को उसे कोई काम था। देखिए सोनिया दिल्ली में अपने पति संजीव के साथ रहती थी। 21 और 22 अगस्त के दौरान सोनिया अपने पति के साथ टाटा सूमो में बैठकर हिसार पहुंची। संजीव ने सोनिया से कहा अभी यहां आए ही हैं तो तुम्हारी बड़ी बहन प्रियंका को भी साथ ले चलते हैं। फिर सोनिया अपनी सिस्टर को लेने विद्या देवी जिंदल स्कूल में चली गई। अब तीनों जब अपनी टाटा सूमो से घर पर पहुंचे। तो सोनिया घर वालों से बात करती है कि हम प्रियंका का बर्थडे 23 अगस्त को ही मनाएंगे, 24 को मुझे काम है। घर वालों ने कहा चलो, कोई बड़ी बात नहीं है, 23 को मना लेते हैं। तो घर में ही खाना-वाना बनता है, म्यूजिक का इंतजाम किया जाता है। म्यूजिक फुल वॉल्यूम पर फिर केक-वेक मंगवाया जाता है और उस दिन हवेली में परिवार के सारे लोग मौजूद थे। टोटल नौ लोग थे, रेलुराम पूनिया, उसकी वाइफ, उनका बेटा सुनील, बहू शकुंतला, तीनों बच्चे, चार साल का लोकेश, दो साल की शिवानी और एक डेढ़ महीने की नन्ही प्रीति। फिर खुद प्रियंका, सोनिया और उसका हसबैंड संजीव। अब जा के होते हैं कुल 10 लोग। देखिए सोनिया का तो सभी नौकरों को पता था कि घर आई है, लेकिन संजीव का नहीं पता था कि वो भी घर आया है। क्योंकि रास्ते में उसकी तबीयत खराब हो गई थी, तो वह पिछली सीट पर लेटकर सो गया। तो कुल मिला के 23 अगस्त की उस रात को कुल 10 लोग वहां मौजूद थे। अब सूरज ढल चुका था और अंधेरे ने अपने पैर जमा लिए। बर्थडे पार्टी अपने शबाब पे जश्न एंड म्यूजिक बज रहा था। सब खुश थे। क्योंकि बहुत ही लंबे वक्त के बाद पूरी फैमिली इकट्ठा हुई थी। म्यूजिक पर कुछ झूम रहे थे तो कुछ लोग खाना-वाना बना रहे थे। देखिए रेलुराम जी को सोने से पहले खीर खाना बहुत अच्छा लगता था और हर रोज की तरह उस रात भी खीर बननी थी। इसी बीच खाना-वाना खाने के बाद रात के करीब 10-11 बजते हैं, तो आज सोनिया किचन में जाकर सबके लिए खीर बनाती है। लेकिन वो उस खीर में धीरे से नींद की दवा मिला देती है। सोनिया के दिमाग में आखिर चल क्या रहा था? बेहोशी की दवा मिलाने के बाद वह सबको खीर बांटती है। यहां तक कि वह एक-डेढ़ महीने की जो नन्ही सी बच्ची थी उसकी प्यारी भतीजी, उसको भी वह छिप-छिपाते हुए खीर खिला देती है। खीर खाने के बाद अब धीरे-धीरे सबको नींद आने लगती है। म्यूजिक चल रहा था, सब लोग नाच रहे थे। फिर एक-एक कर सभी अपने रूम्स में जाने लगे। पूरा घर बेहोश हो जाता है, सिर्फ दो लोगों को छोड़ के। एक सोनिया और दूसरा उसका पति संजीव। सोनिया थोड़ा देर इंतजार करती है क्योंकि अभी भी कुछ लोग जाग रहे थे। टटोलती है, देखिए पूनिया फैमिली दो फ्लोर पर रहती थी। कुछ लोग ऊपर फर्स्ट फ्लोर पर और कुछ लोग उससे भी ऊपर सेकंड फ्लोर पर और कुछ लोग फर्स्ट फ्लोर पर अभी भी अपनी बाकी बची हुई खीर खा रहे थे। देखिए, खीर खाने के करीब 25 से 30 मिनट बाद सोनिया और संजीव एक-एक कर सभी सदस्यों को जाकर टटोलने लगे। चेक करने लगे कौन होश में है कौन नहीं। उन्हें लगा शायद अब सभी बेहोश हो चुके हैं। इसके बाद सोनिया संजीव को कहती है, तुम अपना रिवॉल्वर निकालो और इन सबको गोली मार दो। संजीव ने कहा बावली रिवॉल्वर में सिर्फ छह गोली हैं और बंदे आठ हैं। और बाकी बचे दो को कैसे मारोगे? गोली की आवाज सुनकर अगर कोई जाग गया तो और गोली से वह पक्का मर जाएंगे इसकी कोई गारंटी नहीं है। सब इंजर्ड भी हो सकते हैं और यह लोग तो ऑलरेडी बेहोश हैं, तो पता कैसे चलेगा कि यह मरे हैं या नहीं। सोनिया इतना ज्यादा डेस्परेट थी अपने सभी घर वालों को मारने के लिए, तो फिर वह अपने ही पति पर गुस्सा निकालने लग जाती है। तुम किसी काम के नहीं हो, नामर्द हो। सोनिया को इतना ज्यादा गुस्सा आया कि वह तुरंत बाहर गई और म्यूजिक की वॉल्यूम की नॉब को घुमाकर फुल वॉल्यूम पर कर दिया। जिसके बाद वह भागकर नीचे गई और फिर सीधा संजीव के पास। संजीव सोनिया का यह रूप देख पहले तो डर गया। वो दरवाजे पर खड़ी थी और उसके हाथ में एक लोहे की रॉड थी। संजीव पहले तो घबरा गया कहीं यह कहीं मुझे ही ना मार दे। फिर वह गुस्से से संजीव को बोलती है, यह रिवॉल्वर साइड पर रखो और यह रॉड पकड़ो। अब घर के हर मेंबर के सर पर दो-चार बार जोर-जोर से मारो। सबकी खोपड़ी खोल दो, फोड़ डालो। फिर इनके बचने की कोई गुंजाइश नहीं है। देखिए जो यह संजीव था, यह जूडो का चैंपियन था। लेकिन सबसे बड़ी दिक्कत तो यह थी कि जो सोनिया का भाई सुनील था, वह कुछ ज्यादा ही हट्टा-कट्टा और लंबा-चौड़ा था, ऊपर से जाट। तो वह अकेले इन दोनों से मुकाबला भी कर सकता था। सोनिया को पता था अगर यह देसी खून यह सांड उठ गया तो जूडो-वूडो की चैंपियनशिप धरी रह जाएगी। पर वह उस वक्त बेहोश था। तो सोनिया ने संजीव को कहा रुको-रुको, इसे सबसे लास्ट में मारेंगे। अगर वह नहीं मरा, वह बीच में जाग गया तो सारा का सारा प्लान चौपट हो जाएगा। अब वक्त हो चला था 11-सवा11 के बीच का। सबसे पहले सोनिया अपने पिता के रूम में जाती है। रेलुराम जी अपने रूम में बेहोश पड़े हुए थे। वह संजीव को लोहे की रॉड थमा देती है। फिर अपने पति को कहती है मारो सर पे, लेकिन संजीव के हाथ-पैर कांपने लगे। उसकी हिम्मत नहीं पड़ती। उसने पहले कभी मर्डर नहीं किया था और अब वह अपने ससुर को मारने जा रहा था। तो वह मार नहीं पा रहा था। सोनिया उसको पीछे से उकसा रही थी, मारो तुम्हें क्या हुआ, तुम बुजदिल हो, यह हो, वो हो, नामर्द हो, तुमसे एक छोटा सा काम नहीं होता। अगर आज हमने इन्हें नहीं मारा तो कल यह हमें मार देंगे। एक बेटी अपने बाप का मर्डर करने के बाद बधाइयां दे रही है वह भी अपने ही पति को। आई डोंट नो यह मोटिवेशन कहां से आया। इसके बाद यह दोनों दूसरे रूम में घुसते हैं जहां सोनिया की अपनी सगी मां बेहोश पड़ी हुई थी।

[16:09]उसने संजीव को कहा अब इसे भी रॉड मारो। संजीव फिर घबरा जाता है। लेकिन वह उसे फिर से उकसाती रहती है। उसे फिर से गुस्सा दिलाती है। उसके बाद जब तक वह अपनी सास को रॉड नहीं मारता, तब तक सोनिया खुद अपनी मां के मुंह पर तकिया रख के एक-दो मिनट तक गला घोंटने की कोशिश करती है। अब अब उसे यह नहीं पता चल रहा था कि मां मर चुकी है या जिंदा है। फिर थोड़ी देर बाद कुछ मिनट और तकिया मुंह पर रख कर फिर तकिया हटाती है। फिर संजीव को कहती है, अब तो मार दो। अब वह रॉड उठाता है और सोनिया की मां के सर पर दे मारता है जिससे खोपड़ी का चूरा बन गया। दो साल की शिवानी जो अपनी दादी के साथ ही सोई हुई थी, यानी सोनिया की अपनी खुद की भतीजी, गलती से उसके भी रोड लग जाती है जिससे वह उठकर रोने लगती है। वह रो रही है। लेकिन सोनिया ने उसके हाथ पकड़े और संजीव ने उस रॉड से उस नन्ही परी का भी सर कुचल दिया। अब सोनिया फिर से संजीव को बधाई देती है। सोनिया का दिल अब दिल नहीं रहा था, वह पत्थर बन चुका था। अब यह सिलसिला यहां खत्म नहीं हुआ था। इसके बाद यह दोनों नर पिशाच बच्चों के कमरे में घुस गए। आज उस रूम में सोनिया की सिस्टर प्रियंका और सोनिया का चार साल का भतीजा लोकेश सोया हुआ था। सबसे पहले उन्होंने रॉड से प्रियंका पर वार किए और फिर चार साल के लोकेश को सोचो, उसकी खुद की मौसी, उसे एक दिन इतनी बेरहमी से, इतनी बेरहमी से रॉड सोचकर ही रूह कांप जाती है। संजीव मारता रहा और सोनिया बकायदा खड़ी हुई है, इंश्योर करने के लिए कि यह मरे हैं या नहीं। तो इन सब का मर्डर हो चुका है। अब तीन बचे थे, उसका भाई सुनील, उसकी भाभी शकुंतला और अब सोनिया और उसका पति सेकंड फ्लोर पर पहुंचे। क्योंकि अब सबसे मुश्किल काम करना बाकी था, सुनील के कमरे में घुसना। दोनों धीरे-धीरे दबे पैर सुनील के कमरे में एंटर किए। उन्होंने देखा सुनील बेहोश पड़ा हुआ है। सोनिया ने धीरे से चुपके से वहां सो रही डेढ़ महीने की प्रीति को अपनी गोदी में उठाया है। देखिए, वह नन्ही सी प्रीति अभी 30 से 40 दिनों की थी। उसने तो अभी दुनिया भी नहीं देखी थी। खैर सोनिया ने उसे उठाकर थोड़ा दूर साइड पर रख दिया। ताकि उसके रोने की आवाज ना पहुंचे। सुनील हट्टा-कट्टा था, उसने कहा कहीं यह जाग ना जाए। सबसे पहले हम इसके हाथ-पैर बांध देते हैं, फिर उसके बाद मारेंगे। धीरे-धीरे दोनों सुनील के हाथ-पैर बांधने में कामयाब रहे। फिर सोनिया संजीव को कहती है, सुनील को बहुत ज्यादा मारना और जोर-जोर से मारना। क्योंकि यह हट्टा-कट्टा है, तो इसके बचने की कोई भी गुंजाइश नहीं बचनी चाहिए। अब दोनों को डर भी लग रहा था कि मारेंगे तो या जाग ना जाए। देखिए, यह जो संजीव है, इसका बाद में इंटरव्यू भी हुआ था। जिसमें उसने कहा इतने जानों को मारने के बाद उसका दिमाग काम करना भी बंद कर गया था। उसे लगा अब जो करना था जो हो गया वह हो गया, अब पीछे नहीं हट सकते। अब हमने अगर किसी को भी छोड़ा तो हम फसेंगे। यह सोचते हुए वह सुनील के सर पर जोर-जोर से वार करने लगा और पागलों की तरह बस मारे जा रहा था। सुनील का सर फट चुका था। उसके उसके बाद सोनिया ने उस डेढ़ मंथ की नन्ही प्रीति को अपनी गोदी में उठाया, फिर उसे उसकी टांगों से पकड़कर

[19:26]झूला झुला कर उसे जोर-जोर से दीवार में पटक-पटक कर, दीवार में भिड़ा-भिड़ा कर आगे आप खुद समझदार हो। इसके बाद दोनों सुनील की वाइफ यानी सोनिया अपनी भाभी शकुंतला जो कि उसी बेड पर बेहोश पड़ी हुई थी। तो शकुंतला को उसके हस्बैंड सुनील की मौजूदगी में मारा है। अब सोनिया अपनी भाभी के सर पर सेम रॉड से वार करती है। और फिर संजीव अब यह था उस घर का आठवां और आखिरी कत्ल। इस कत्लेआम को करने में दोनों ने दो घंटे का वक्त लिया। इन्हें दो घंटे लगे पूरा वंश खत्म करने में। 11:00 बजे से यह सिलसिला शुरू हुआ था और अब 2:00 बज चुके थे। पर कहानी यहां खत्म नहीं होती। असल कहानी तो अब शुरू होने वाली है। खैर अभी तो आपको यह भी पता नहीं चला होगा कि सोनिया ने आखिर अपने परिवार वालों के साथ ऐसा किया क्यों? उसकी नफरत का कोई तो कारण होगा। इसकी हम आगे बात करेंगे। खैर रात के 2:00 बज चुके थे। म्यूजिक अभी भी चालू था। जिसके बाद सोनिया ने छत पर चढ़कर पटाखे चलाए। अब यह उसने अपनी खुशी में चलाए या प्लान का ही यह एक उनका एक पार्ट था। ताकि दुनिया को लगे कि सभी अभी भी पार्टी कर रहे हैं। ताकि किसी को शक ना हो। आई डोंट नो। लेकिन दोनों को अभी भी कोई चैन नहीं मिला। क्योंकि इसके बाद वह बारी-बारी से फिर हर लाश के पास जाते और बार-बार से उन लाशों को चेक करते रहे। क्योंकि यह भी अब एक डर था कि कहीं कोई बेहोशी में कोई चीख ना पड़े। तो म्यूजिक सिस्टम पूरी साजिश के तहत लाई गई थी। उसका वॉल्यूम बहुत तेज था ताकि घर के बाहर किसी को चीख तक की आवाज ना सुनाई दे। गाने बजते रहे और उस म्यूजिक की वॉल्यूम के साथ एक-एक कर घर के आठ लोगों को उसी घर की बेटी अपने पति के हाथों मारती जा रही थी। और हर कत्ल के बाद वह अपने पति से हाथ मिलाती, उसे बधाइयां देती, उसे मुबारकबाद देती और दोनों खुश हो जाते हैं। हालांकि संजीव थोड़ा सा डरा-सहमा हुआ था, लेकिन वह उस वक्त जो सिचुएशन था। संजीव के हिसाब से उसने अपने इंटरव्यू में बताया उसे ऐसा लग रहा था। जैसे कि उस वक्त सोनिया अपने आपे में ही नहीं थी। वह कोई और ही इंसान बन चुकी थी। उसमें अपने घर वालों को लेकर इतनी नफरत थी कि उसकी आंखें बड़ी-बड़ी हो चुकी थी। खोली हुई और वह हर रॉड जब लोहे का सर पर पड़ता था तो वह अपने उन फैमिली मेंबर्स को ऐसे घूर रही थी कि जैसे कि यह फौरन मर जाएं। मानो जैसे वह खा जाएगी। तो संजीव ने कहा कि एक-दो बार तो सोनिया की आंखें देख वह खुद भी डर गया था। यह पता नहीं यह कैसी औरत है। अब उस घर में आठ लाशें थी और दो जिंदा लोग संजीव और सोनिया। फिर उन्हें याद आया अब दुनिया को क्या बताएंगे कि यह कैसे हुआ, किसने किया? पकड़े जाएंगे तो बचने के लिए सोनिया ने संजीव से कहा कि वह उसको रॉड मारे। पर ऐसा मारे कि वह इंजर्ड हो जाए ना कि मर जाए। एक तो प्लानिंग और दूसरी हिम्मत। फिर संजीव ने उसी सेम रॉड से जिससे उसने आठ कत्ल किए, वह सोनिया के ऊपर दे मारी। सोनिया इंजर्ड हो गई और नीचे गिर गई या गिरने का नाटक करने लगे। उसके बाद उसी रात को छिपते-छिपाते संजीव उस घर से निकल गया, बिना नौकरों की नजर में आए। और उधर सोनिया वहां लेटकर मरने की एक्टिंग करने लगी। फिर सुबह होती है। उसके बाद जो हुआ घर के नौकर, ड्राइवर और बाद में पुलिस भी पहुंचती है। यह सारी स्टोरी आप शुरू में सुन चुके हो। पुलिस को सोनिया की डायरी मिली और लेटर। संजीव दिल्ली से पकड़ा गया। फिर सोनिया भी टूट गई और तोते की तरह सब कुछ बोल दिया। लेकिन यह सब स्टोरी एक तरफ, लेकिन उसने यह सब किया क्यों? पहले इसके बारे में सुनो। इसके बाद कोर्ट रूम में क्या हुआ, अगर आपने वह सुन लिया तो आपका कलेजा मुंह को आ जाएगा। क्योंकि असली किस्सा तो अब शुरू होने वाला है। स्टे ट्यून।

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