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Aspirants Season 3 Web Series (2026) Explained In Hindi || Aspirants Web Series Explained in Hindi

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[0:03]दिल्ली का राजेंद्र नगर, जहां हर गली में सपना पलता है और हर कमरे में कोई ना कोई अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी परीक्षा की तैयारी कर रहा होता है.
[0:03]यहीं से शुरू हुई थी चार दोस्तों की कहानी, एक सपना, एक लक्ष्य और एक उम्मीद यूपीएससी.
[0:03]फिर समय बदला, परीक्षाएं खत्म हुई और सपनों ने हकीकत का रूप ले लिया, कोई बन गया सिस्टम का हिस्सा.
[0:03]तो कोई जिंदगी की दूसरी राह पर निकल गया, तो कोई अब भी समाज को बदलने की कोशिश कर रहा है.
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[0:03]दिल्ली का राजेंद्र नगर, जहां हर गली में सपना पलता है और हर कमरे में कोई ना कोई अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी परीक्षा की तैयारी कर रहा होता है. यहीं से शुरू हुई थी चार दोस्तों की कहानी, एक सपना, एक लक्ष्य और एक उम्मीद यूपीएससी. फिर समय बदला, परीक्षाएं खत्म हुई और सपनों ने हकीकत का रूप ले लिया, कोई बन गया सिस्टम का हिस्सा. तो कोई जिंदगी की दूसरी राह पर निकल गया, तो कोई अब भी समाज को बदलने की कोशिश कर रहा है. लेकिन असली परीक्षा तो अब शुरू हुई है, क्योंकि जब दोस्तों के बीच सत्ता, जिम्मेदारियां और आरोप आ जाए, तब हर फैसला सिर्फ एक फैसला नहीं रहता. बल्कि वह बन जाता है, रिश्ते की सबसे बड़ी कसौटी, तो आज की इस वीडियो में हम जानेंगे एस्पिरेंट सीजन थ्री की पूरी कहानी. एक ऐसी कहानी जहां पुराने सपने, अधूरी बातें और सच्चाई की लड़ाई में इन चार दोस्तों की जिंदगी को फिर से बदलने वाली है. तो वेब सीरीज की शुरुआत में हम दो आदमियों को देख पाते हैं जिन्हें एक सुपारी मिली है जो यहां पर किसी कार के आने का इंतजार कर रहे थे. जैसे ही कार उनके सामने आती है तो वो कार को रोककर उस बंदे पर गन तान देते हैं. वो कौन है ये तो नहीं बताया गया, लेकिन हमें जल्दी पता चल जाएगा कि आखिरकार वो कौन है. जो इसके बाद कहानी जो है वो फ्लैशबैक में जाती है जहां हम देखते हैं कि अभिलाष जो है वो आरएस ऑफिसर बन चुका था जिसका मतलब इंडियन रेवेन्यू सर्विस होता है. अभिलाष यहां अपना एक छोटा सा इंटरव्यू दे रहा होता है जहां वह बताता है कि उसका एक लास्ट अटेम्प्ट अभी भी बचा है लेकिन वह उसे नहीं देना चाहता है. जब उससे पूछा जाता है कि आखिरकार वो क्यों नहीं देना चाहता है तो अभिलाष कहता है कि उसका मन नहीं है लेकिन इंटरव्यूअर को यह बात पसंद नहीं आती. वो कहते हैं कि हम इस लाइन को काट देंगे क्योंकि इस वीडियो को बहुत सारे एस्पिरेंट्स देखने वाले हैं और अगर वो यह बात सुनेंगे तो उनका कॉन्फिडेंस जो है वो लो हो जाएगा. आगे हम देखते हैं अभिलाष और दीपा को, अभिलाष जो है वो डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट मतलब कि डीएम बन चुका है. तो वही दीपा जो है वह एक एसपी बन चुकी है, दोनों ही रिलेशनशिप में है और दोनों ही एक दूसरे से प्यार करते हैं. वो चाहते हैं कि यह बात अब वो अपने-अपने घरवालों को बताते हैं लेकिन वो सही समय का इंतजार कर रहे हैं. अब आगे हम देखते हैं अभिलाष, गुरु, धैर्य और दीपा को जो कि साथ में ही दिवाली मना रहे थे. वो यहां पर एसके के बारे में भी बात कर रहे थे कि वो कोचिंग के साथ-साथ कभी भी बन चुका है और वह अपनी नई बुक पब्लिश करने जा रहा है जिसका नाम पुनः मधुशाला है. गुरु यहां अभिलाष को बताता है कि एसके अभी भी तुझसे गुस्सा है क्योंकि उसने दो बार तुझे कोचिंग इंस्टिट्यूट में बुलाया है लेकिन तू दोनों बार वहां नहीं गया था. लेकिन अभी सब कुछ ठीक करने का मौका है, उसकी बुक पब्लिश होने वाली है और तेरे रिलेशनशिप को बताने के बहाने से हम वहां जा सकते हैं. जिसके बाद वो लोग संदीप भैया के बारे में बात करते हैं. गुरु कहता है कि क्या संदीप भैया ने सचमुच ही यह सब कुछ गलत किया है तो यहां पर अभिलाष कहता है कि संदीप भैया ने सचमुच बहुत गलत किया है. उन्होंने हमारे ऊपर फेक एलिगेशंस लगाए हैं जिस वजह से मेरे ऊपर इंक्वायरी बैठी है तो वहीं जो टेंडर तू डिजर्व करता है वो टेंडर भी तेरे हाथों से छिन गया है. और जो अज्ञात लेटर उन्होंने भेजा है उसमें उन्होंने धैर्य का नाम लगाया है. ये उन्होंने बहुत ही गलत किया है. तब यहीं पर दीपा जो है वह मजाक-मजाक में धैर्य से कहती है कि क्या तुमने सचमुच ही तो वह लेटर नहीं भेजा था. लेकिन यहां पर गुरु भड़क जाता है और वो कहता है कि अगर हमें कोई लेटर भेजना होता तो हम सीधा मुंह पर भेजते. तब अभिलाष कहता है कि यार वो मजाक कर रही है. जब से वो एसपी बनी है तब से वो थोड़ी टिपिकल टाइप की पुलिस ऑफिसर बन चुकी है. अब आगे कहानी जो है वो फ्लैशबैक में जाती है जहां हम राधा मैम और उनके स्टूडेंट को देख पाते हैं जिनमें से कोई आईएएस बना है तो कोई आईआरएमएस तो कोई आईआरएस. राधा मैम इन सभी से रैंक इंप्रूव करने के लिए कह रही थी. कुछ तो इसके लिए मान रहे थे लेकिन अभिलाष जो है वो कहता है कि वो आईआरएस में खुश है. साथ ही अभिलाष देखता है कि जिस रेस्टोरेंट में वो लोग बैठे हुए हैं वहीं पर एक लड़का और एक लड़की जो है वो दिन में ही शराब पी रहे थे. यहीं पर राधा मैम यह भी बताती है कि अब उनकी न्यू कोचिंग जो है वो मुखर्जी नगर में शिफ्ट हो गई है. अगर तुम लोगों को मिलने के लिए आना हो तो वहीं आना. जिसके बाद हम देखते हैं कि अभिलाष जो है वो यहां के मैनेजर से मिलता है और उनसे कहता है कि आप लोग नियम का उल्लंघन कर रहे हैं. क्योंकि दिन में शराब देना अलाउड नहीं है लेकिन आप लोग दिन में ही शराब देखकर इल्लीगल काम कर रहे हैं. अगली बार उसने देखा तो वो कंप्लेंट करेगा. अब आगे हम देखते हैं कि राधा मैम और अभिलाष जो है वो साथ में ही कार से जा रहे थे जहां दोनों ही आपस में बात कर रहे थे जहां पर कि राधा मैम का मानना यह है कि अभिलाष को रैंक इंप्रूव के लिए सोचना चाहिए. क्योंकि उसके पास अभी भी लास्ट अटेम्प्ट है और वो आईएएस अभी भी बन सकता है. राधा मैम उसे एक एग्जांपल देते हुए कहती है कि जब नदियां रुक जाती है ना तो वो एक छोटे से तालाब के रूप में बदल जाती है और फिर उस तालाब का पानी भी सूख जाता है. अब आगे हम देखते हैं कि डिविजनल कमिश्नर के ऑफिस में सारे डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट आते हैं जहां सभी लोग अभिलाष की इंक्वायरी के बारे में बात कर रहे थे. थोड़ी देर के बाद ही यहां पर डिविजनल कमिश्नर नरेंद्र कुमार आ जाते हैं. नरेंद्र कुमार यहां पर एक सीरियस मुद्दे पर बात करते हैं कि बहुत समय से एजुकेशन टाउन प्रोजेक्ट जो है वो अटका हुआ है. वैसे तो एजुकेशन टाउन प्रोजेक्ट अमरोहा जिले के लिए था तो अमरोहा जिले के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट मतलब कि डीएम कहते हैं कि ये प्रोजेक्ट जो है वो इतना आसान नहीं होने वाला है. क्योंकि एजुकेशन टाउन प्रोजेक्ट के लिए 1000 एकड़ की जमीन चाहिए लेकिन अमरोहा जिले में कहीं भी एक पैच में तो इतनी सारी जमीन मिलना नामुमकिन है. लेकिन नरेंद्र सर कहते हैं कि ये हमारे लिए बहुत जरूरी है. एजुकेशन टाउन प्रोजेक्ट को लेकर गवर्नमेंट बहुत सीरियस है जिसे हमें जल्द से जल्द क्लियर करना होगा. जिसके बाद आगे हम देखते हैं कि अभिलाष और दीपा मिलते हैं जहां पर कि दीपा विलास से कहती है कि मेरे मम्मी-पापा जो है वो जल्दी ही तुमसे मिलने के लिए आएंगे या फिर तुम उनसे मिलने के लिए जाओगे. अभिलाष कहता है कि क्या हम कुछ जल्दबाजी तो नहीं कर रहे हैं ना. जिस पर दीपा कहती है कि बस हम मिल रहे हैं. यहां जब वो दोनों बातें करते हैं तो दीपा नोटिस करती है कि अभिलाष जो है वो थोड़ा टेंशन में है. अभिलाष बताता है कि वैसे ही मेरे ऊपर इंक्वायरी बैठी हुई है और कुछ ऑफिसर ने तो यह भी मान लिया है कि शायद मैं ही गलत हूं. जिस पर कि दीपा कहती है कि तुम्हारा सपना यूपीएससी क्रैक करना नहीं था बल्कि तुम्हारा सपना आईएएस बनकर चेंज लाना था. जो कि तुमने बहुत ही अच्छे से किया है. एथेनॉल प्रोडक्शन में तुमने स्टेट को देश में नंबर वन बनाया है अगर तुम बंडे वर्ल्ड कप हार गए हो तो कम से कम टी20 वर्ल्ड कप तो जीत कर दिखाना ही होगा. यहां हमें मालूम चलता है कि दोनों ही एक दूसरे से बहुत प्यार करते हैं और अब कहानी जो है वह पास्ट में जाती है जहां हम देखते हैं कि अभिलाष जो है वो आईआरएस बन चुका है लेकिन दीपा अभी भी तैयारी कर रही है और वो राजन नगर में अकेली थी. दीपा चाहती है कि अभिलाष भी अपनी रैंक इंप्रूव करे क्योंकि उसके पास अभी भी लास्ट अटेंप्ट बचा हुआ है और वो ये भी कहती है कि अभिलाष जो है वो यहीं पर रहे. तब अभिलाष उसे समझाता है कि प्यार-ब्यार के मामले में मत पड़ो और ड्रीम पर फोकस करो. हमें जब मिलना होगा तब हम मिल लेंगे. जिसके बाद वो दोनों एक दूसरे को हग करते हैं और फिर यहां से चले जाते हैं. अब अभिलाष जब चुपचाप बैठा हुआ था तब वो एक बात सोचता है कि आज जितनी भी बात हुई है वो रैंक इंप्रूव करने वाली बात हुई है. क्या वो थक गया है या फिर हार गया है या फिर वो आखिरी अटेम्प्ट देना ही नहीं चाहता है. अब आगे कहानी जो है वो प्रेजेंट में आ जाती है जहां हम देखते हैं एसके को जिसकी बुक पुनः मधुशाला जो है वो पब्लिश होने वाली थी. और यहीं पर हम देखते हैं अभिलाष और गुरु को जिन्हें सीट तो नहीं मिली थी लेकिन वो बाजू में ही खड़े हुए थे. गुरु यहां पर अभिलाष को बताता है कि मैंने एसके को कहा था कि हम लोग आ रहे हैं इसके बावजूद इसने सीट का इंतजाम तक नहीं कराया. एसके ने इन दोनों को देख लिया था कि ये दोनों आ चुके हैं. अब बुक के बारे में सारी बातें बताने के बाद अब वो ऑडियंस को बताता है कि आखिरकार इस बुक का क्रेडिट किसे जाता है. गुरु और अभिलाष को ऐसा लग रहा था कि शायद उनका नाम आ सकता है. लेकिन यहां पर एसके ने नाम जो है वो संदीप ओलान का लिया था जो कि वहीं पर बैठे हुए थे. संदीप ओलान जब स्टेज पर आए तो यहां पर अभिलाष को और गुरु को बहुत ज्यादा बुरा लगता है और वो यहां से चले जाते हैं. दूसरी तरफ हम देखते हैं एक अननोन पर्सन को जो कि एसके और संदीप भैया के पास जा रहा था. और वो उन्हें बुक को लेकर कांग्रेचुलेशन करता है. अब अगले सीन में हम देखते हैं धैर्य और अभिलाष को दोनों ही आपस में बात कर रहे थे रात काफी हो चुकी थी. यहां धैर्य अभिलाष को कुछ बताना चाहती है वो कहती है कि जो अनोनिमस लेटर था ना वो लेटर दरअसल में उसी ने लिखा था. मतलब कि जो संदीप भैया ने कहा था कि धैर्य ने ही वो लेटर लिखा है वो बात एकदम सही थी. यह सुनकर तो अभिलाष के होश उड़ जाते हैं. वो पूरी तरह से हैरान रह चुका था और वो धैर्य से पूछता है कि आखिरकार तुमने यह सब कुछ क्यों किया. तो यहां पर धैर्य बताती है कि वो टेंडर जो है वो गुरु के लिए बहुत ज्यादा जरूरी था. धैर्य कहती है कि जिस कंपनी को वो टेंडर मिला था वो टेंडर वो कंपनी डिजर्व नहीं करती थी. इसलिए उस पर इंक्वायरी बैठनी ही थी और ये सब कुछ उसने गुरु के लिए किया था. बस उसने गलती ये की कि उसने इन सब में संदीप भैया की मदद ले ली. और बात यहीं तक नहीं रुकती है बल्कि यहां पर धैर्य एक और बात बताती है कि संदीप भैया के पास उनका साइन किया हुआ लेटर भी रखा हुआ है. मतलब कि इससे इंक्वायरी में अभिलाष को प्रॉब्लम हो सकती है. तो अब इंक्वायरी में हम देखते हैं कि अभिलाष से बहुत सारे सवाल पूछे जाते हैं टेंडर को लेके कि आखिरकार तुमने अपनी पावर का गलत इस्तेमाल किया है और वो टेंडर अपने दोस्त को दिलाया है. लेकिन यहां पर अभिलाष बताता है कि दरअसल में गुरु जो है वो स्टैंडर्ड को डिजर्व करता है. फायर ब्रिगेड के सूज के लिए जिस कंपनी को पहले हायर किया गया था वो डिजर्विंग नहीं थी उसकी क्वालिटी खराब थी. इसी वजह से यह टेंडर जो है वो गुरु की कंपनी को देना पड़ा. अब कहानी फिर से फ्लैशबैक में जाती है जहां हम देखते हैं कि अभिलाष जो है वो आखिरी अटेम्प्ट के लिए मान गया है और वो आखिरी अटेंप्ट के लिए पूरी तैयारी करना चाहता है. जिसके लिए वो राधा मैम के पास जाता है जहां अब उनकी कोचिंग जो है वो मुखर्जी नगर में हो गई थी. राधा मैम कहती है कि यह तुमने बहुत ही अच्छा डिसीजन लिया है क्योंकि अगर तुम रुक जाते तो तुम्हारी कहानी यहीं पर समाप्त हो जाती. कोई तुम्हें याद नहीं रखता और तुम्हें जिंदगी भर मलाल भी रहता कि मुझे उस लास्ट अटेंप्ट को दे देना चाहिए था. और तभी यहां पर पवन कुमार नाम का एक व्यक्ति आता है जो कि राधा मैम की कोचिंग में ही कोचिंग करता है. वो थोड़ा भावुक किस्म का आदमी है और तो और वो हिंदीवादी भी है. राधा मैम यहां अभिलाष से कहती है कि तुम आरएस बन चुके हो तुमने काफी मेहनत भी की है. मैं चाहती हूं कि तुम इसी कोचिंग में एक लेक्चर भी दो. अभिलाष कहता है कि शायद वो यह नहीं कर पाएगा क्योंकि हिंदी में उसकी पकड़ जो है वो मजबूत नहीं है. और इसके लिए तो उसे हिंदी की अलग से पढ़ाई करनी पड़ेगी और हिंदी में वैसे भी सक्सेस रेट बहुत कम होते हैं. लेकिन यह सुनकर पवन कुमार को बहुत ज्यादा बुरा लग जाता है. वो कहता है कि हाल फिलहाल में जितनी भी बात हुई है वो लगभग 90 पर हिंदी में हुई है तो फिर आप हिंदी को कैसे बुरा कह सकते हैं. लेकिन अभिलाष का वो सब कहना नहीं था पर पवन कुछ और ही समझ बैठा. आगे हम देखते हैं कि डिविजनल कमिश्नर ऑफिस में एक बात बताई जाती है कि डीएम संभल का ट्रांसफर हो गया है और उनकी जगह पर नए डीएम आ रहे हैं. लेकिन अभिलाष का कहना यह है कि जब तक डीएम संभल नहीं आ जाते तब तक तो हम एजुकेशन टाउन प्रोजेक्ट के बारे में बात कर ही सकते हैं. वो बात कर ही रहे थे कि तभी यहां पर डीएम संभल आ जाते हैं जो कि कोई और नहीं बल्कि पवन कुमार था. और उसे देखकर अभिलाष जो है वो पूरी तरह से हैरान रह चुका था. पास्ट में उनके बीच में जरूर कोई लड़ाई तो हुई है जिस वजह से वो एक दूसरे से ठीक से बात नहीं कर रहे हैं. अब अभिलाष जो है वो ऑफिस में कहता है कि एजुकेशन टाउन प्रोजेक्ट जो है वो मुरादाबाद डिवीजन को अलॉट हुआ है जिसमें रामपुर भी आता है. और अगर अमरोहा जो है वो एजुकेशन प्रोजेक्ट को नहीं संभाल पा रहा है तो इसे हम संभालेंगे. तभी यहां पर पवन बोलता है और वो कहता है कि मुरादाबाद डिवीजन में तो संभल भी आता है और हम चाहते हैं कि एजुकेशन टाउन प्रोजेक्ट में हम भी थोड़ा सहयोग दें. और अगर एजुकेशन टाउन प्रोजेक्ट जो है वो संभल में खोला जाए तो बहुत अच्छा होगा. लेकिन नरेंद्र सर का मानना यह है कि पवन जो है फिलहाल नया है और अभी उसे मौका नहीं देना चाहिए. और ये एजुकेशन टाउन प्रोजेक्ट जो है वो बहुत ही ज्यादा जरूरी है. तब नरेंद्र सर कहते हैं कि मौका तो सभी को मिलना चाहिए क्योंकि विकास की जिम्मेदारी तो सबकी है. नरेंद्र सर कहते हैं कि जो भी सबसे पहले हजार करोड़ की प्रॉपर्टी लेकर आएगा हम उसे ही यह प्रोजेक्ट दे देंगे. तो अब अभिलाष और पवन के बीच में लड़ाई फिर से स्टार्ट हो चुकी थी. पवन कहता है कि अगर तेरी जगह पर कोई और होता ना तो मैं इस प्रोजेक्ट को हाथ तक नहीं लगाता. लेकिन अब तू मुझसे जीत नहीं सकता क्योंकि मैं इस महाभारत का अर्जुन हूं. यह सुनकर अभिलाष कहता है कि अगर तू अर्जुन है तो मैं इस महाभारत का भीष्म पितामह हूं. अब कहानी जो है वो पास्ट में जाती है जहां पर कि हम अभिलाष और दीपा को देखते हैं. अभिलाष जो है वो मुखर्जी नगर में राधा मैम की यहां पर कोचिंग इंस्टिट्यूट में पड़ता है. तो वहीं दीपा जो है वो राजनगर में पड़ती है. तो वहीं अभिलाष ने अपना लास्ट अटेंप्ट देने का मन बना लिया था इसलिए दीपा को बहुत अच्छा लग रहा था. और वो अभिलाष से कहती है कि वो भी सोच रही है कि वो भी मुखर्जी नगर में आ जाए और वहीं पर कहीं कोचिंग में पढ़े. लेकिन यह सुनकर यहां पर अभिलाष जो है वो उसे डांट देता है और कहता है कि इन सबके चक्कर में मत पड़ो. मुझे पता है कि तुम किसकी वजह से मुखर्जी नगर आना चाहती हो तुम मेरी वजह से आओगी और फिर दोनों की पढ़ाई खराब कर दोगी. अगर प्यार करना ही है तो अपने सपनों से करो अपने सिलेबस से करो क्योंकि यही सारी चीजें आगे चलकर काम आएगी. और मैंने तुमसे पहले भी कहा है कि अभी तो मुझे रिलेशनशिप में नहीं आना है. अब आगे हम देखते हैं कि राधा मैम की कोचिंग में राधा मैम जो है वो एक सिचुएशन क्रिएट करती है और वो कहती है कि हमारे पास जो है वो आईआरएस अभिलाष हैं और एक एस्पिरेंट्स पवन है. दोनों ही एक दूसरे के आमने-सामने हैं और हम एक सिचुएशन यहां पर रखेंगे. तो वो सिचुएशन यह है कि आज आपका इंटरव्यू है और आज जब आप घर से बाहर निकलते हैं तो आपने देखा कि ट्रैफिक जो है वो बहुत ज्यादा है. जब आप ऑटो में बैठे तभी आपको पता चलता है कि ऑटो के पीछे ही एक एक्सीडेंट हो गया है जिसमें चार लोग बुरी तरह से घायल हो चुके हैं जिनमें एक छ साल की बच्ची भी है. ऐसे में आप क्या करेंगे सबसे पहले बारी अभिलाष की थी. तब अभिलाष कहता है कि मैं ऑटो में बैठूंगा और फिर मैं रास्ते में ही एंबुलेंस को कॉल कर दूंगा. अब बारी आती है पवन कुमार की. पवन कुमार कहता है कि मैं ऐसा बिल्कुल भी नहीं करूंगा. अगर मेरे जस्ट पीछे एक्सीडेंट हुआ है तो मैं उन्हें नजरअंदाज नहीं करूंगा बल्कि मैं उन चारों को ऑटो में बिठाऊ और उन्हें हॉस्पिटल तक छोड़कर आऊंगा. जिसके बाद ही मैं इंटरव्यू देने के लिए जाऊंगा. लेकिन यहां पर अभिलाष कहता है कि यह रूल के खिलाफ होगा क्योंकि ऑटो में सिर्फ चार लोग ही अलाउड होते हैं लेकिन तुम छह लोगों को बिठाओगे. पवन कुमार कहता है कि मैं रूल्स की फिक्र नहीं करता जब किसी की जान जा रही हो. पवन कहता है कि अगर मेरा लास्ट अटेंप्ट भी हो तब भी मैं उन लोगों की जान बचाऊंगा और तभी इंटरव्यू देने के लिए जाऊंगा. मुझे इंटरव्यू की भी बिल्कुल परवाह नहीं है लेकिन मैं उन लोगों की जान जरूर बचाऊंगा. यह सुनकर राधा मैम कहती है कि दोनों का ही ईक्यू जो है वो बहुत ही ज्यादा लो है. हालांकि सिचुएशन भी यहां पर बहुत गंभीर थी लेकिन ईक्यू तो आपका लो है. यहां कौन जीता कौन हारा यह डिसाइड नहीं करना है बल्कि मैं तो तुम्हें यह बताना चाहती थी कि जब तुम सिविल सर्वेंट बन जाओगे तब इसी तरह की और इससे भी ज्यादा सिचुएशन जो है वो गंभीर हो सकती है लेकिन आपको उन सारी सिचुएशन को देखते हुए अपने फैसले लेने हैं.

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