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मोबाइल फोन पर जो कविता सुनाई, ऐसी कविता आपने कभी ना सुनी होगी !

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[0:00]Section 1

बहुत-बहुत धन्यवाद। आपके ऊपर जैसा कि डॉक्टर कुमार विश्वास जी ने बताया कि छत भी है ठंड से बचा। हमें तो हीटर भी नहीं दिया गया है। शॉल भी नही...

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गया नहीं मैं ले लूंगा मैं नहीं नहीं। इसे कहते हैं बामन होने का फायदा। मैंने मांग के ले ही लिया।

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क्रेडिट मेरी है ये मैंने ही दिलवाया है। हरियाणा में ऐसे नहीं चलता क्रेडिट खट्टर जी की है सैनी जी बन गए ऐसे नहीं चलता। चल चल बहुत-बहुत धन्...

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आप हाथ उठा के ताली बजाओ भाई साहब। ये वही हाथ है जब दबा के आए हैं। मतलब महाराष्ट्र में हैरान है कि जितनी जनसंख्या नहीं है उससे ज्यादा वोट...

[10:27]Section 5

इनोवा की लाइन लगाता था। मर्सिडीज की लाइन लगाता था। महाराज जी ने ऐसा काम किया कि आजकल व्हीलचेयर की लाइन लगवा रहे हैं सारे। सारे माफिया व्ह...

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[1:04]गया नहीं मैं ले लूंगा मैं नहीं नहीं। इसे कहते हैं बामन होने का फायदा। मैंने मांग के ले ही लिया।
[1:16]आवाज आवाज आवाज बढ़ाओ आवाज मेरी सेहत देख ले राजा। इस वाले नहीं नहीं अच्छा एक बात एक बात बताओ आवाज कहां-कहां नहीं आ रही हाथ उठा के बताओ। और इतना आवाज नहीं आ रही तो हाथ कैसे उठा रहा है भाई?
[5:31]कमाल कर रहे हैं यार मजाक नहीं कर रहा हूं आप सब भाई साहब। कमाल कर रहे हो आप लोग यार भाई साहब कमाल हो रहा है इलेक्शन क्या हो रहा है देश में?
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[0:00]बहुत-बहुत धन्यवाद। आपके ऊपर जैसा कि डॉक्टर कुमार विश्वास जी ने बताया कि छत भी है ठंड से बचा। हमें तो हीटर भी नहीं दिया गया है। शॉल भी नहीं दी गई है। तो आज हमारे साथ क्या मतलब गीता सुनने के बाद हमें सुनने के लिए बुलाया है यही सम्मान सबसे ज्यादा। नहीं मैं ये कह रहा हूं उनसे पर्यटन वालों से कि शॉल देनी है तो अभी दे दो वरना बाद में चढ़ानी पड़ सकती है। नहीं नहीं हम भी पर्यटन डीसी मैडम बस निवेदन इतना सा है कि अगला कवि सम्मेलन जो करें पेमेंट कम कर दें शॉल ज्यादा कर दें। बहुत-बहुत धन्यवाद महिम सारे लोग बैठे हैं पूज्य संत जी के चरणों में प्रणाम।

[1:04]गया नहीं मैं ले लूंगा मैं नहीं नहीं। इसे कहते हैं बामन होने का फायदा। मैंने मांग के ले ही लिया।

[1:16]क्रेडिट मेरी है ये मैंने ही दिलवाया है। हरियाणा में ऐसे नहीं चलता क्रेडिट खट्टर जी की है सैनी जी बन गए ऐसे नहीं चलता। चल चल बहुत-बहुत धन्यवाद मैं दो-तीन बातें कहने के लिए उपस्थित हुआ हूं। शास्त्री जी मैं श्रोता रहा बस हंसिएगा देखिए कोई यहां साधु संत बैठे हैं हम क्या सुनाएंगे। क्या हुआ? आवाज आवाज आवाज बढ़ाओ आवाज मेरी सेहत देख ले राजा। इस वाले नहीं नहीं अच्छा एक बात एक बात बताओ आवाज कहां-कहां नहीं आ रही हाथ उठा के बताओ। और इतना आवाज नहीं आ रही तो हाथ कैसे उठा रहा है भाई? कतई हरियाणा का है। हां भाई थारे घर आके सुना जाऊंगा तुम मेरी मैं जानता हूं कि मुझे क्यों रखते हैं वो। बस आप आनंद लीजिएगा देखिए महात्मा जी शास्त्री जी हम भारतीय लोग इधर आओ हम भारतीय लोग हैं और भारतीय आदमी की आदत होती है कि वो सत्यनारायण भगवान की कथा अगर दसवीं बार भी सुन रहा हूं तब भी भी जब तक पंडित ना कह के अध्याय समाप्त हुआ। तब तक हम अक्षत फूल नहीं छोड़ते क्योंकि हम ठीक से सुन ही नहीं रहे होते। तो मुझे आप पर पूरा भरोसा है कि आप ठीक से नहीं सुनोगे। हम आपको बता दिया करेंगे कि अध्याय कहां समाप्त हुआ। वहीं ताली ठोक देना हमारी भी इज्जत रह जाएगी थारी भी इज्जत रह जाएगी। बहुत अच्छे। कोई तनाव लेना ही नहीं आप लोग बहुत मन से सुना मैडम मैं आपको बार-बार संबोधित इसलिए कर रहा हूं क्योंकि मेरे पिताजी एक आईएएस ऑफिसर के कार्यालय में क्लर्क होते थे। अच्छा जब भी कोई आईएएस अधिकारी डीसी या डीएम बन कर के आता हमें घर आकर के दो लात मारते और बोलते ऐसी पढ़ाई करो। ऐसे अधिकारी बनो। 20 साल तक मैं डीसी नाम से इतना कूटा गया। कि जब भी कोई दिखता है अगली बात पर देखता हूं यह गर्मी दूर होती है या ठंडी बढ़ती है। मैंने उस दिन मैडम कसम खाई थी कि मैं जरूर ऐसा कोई काम करूंगा कि डीसी मैडम नीचे बैठी होंगी और ऊपर से मैं उनको सुना रहा होगा। सही पीटा पिताजी ने तो आज पता चला कि भगवान के घर देर है। अध्याय समाप्त हुआ। हां बस यह वाला पकड़ लेना आप काम हो जाएगा। हमारे कुनबे ने शास्त्री जी सुनाया हमारे कुनबे ने सुनाया कि जब कोई जनक धरती का सीना चीरता है तब जाकर के किसी सीता का जन्म होता है। जब कोई अर्जुन रणभूमि में लड़ने से इनकार कर देता है तब जाकर के किसी गीता का जन्म होता है। इंकार में ये सस्ती है। और एक बात बताऊं देखिए अभी पुष्पा फिल्म चल रही है पुष्पा और हमारी योगी आदित्यनाथ का एक ही डायलॉग है। झुकेगा नहीं साला अध्याय समाप्त हुआ हमें पता है ना कहां-कहां समाप्त करना है आप लोगों को। अब मैं मूलतः गोरखपुर का रहने वाला हूं। मैं गोरखपुर का रहने वाला हूं। अभी अयोध्या में सपा जीत गई। दिल्ली में अवध ओझा ने आप को हाई ज्वाइन कर ली। उधर अयोध्या जीत गई वो। अयोध्या अवध जी ने आप ज्वाइन कर ली। अब सिर्फ राम बचे हैं। हां अपने-अपने क्या सुनाते हैं कुमार विश्वास जी कभी सुन कर के देखिए मजा आ जाएगा आप लोगों को। देखिए मैं जानता हूं ठंड ज्यादा है। ठंड में जो अकड़ के चलता है वो भी सुकड़ के बैठता है। हां मैं जानता हूं आप लोगों का ठंड में कोई बड़ी बात नहीं तो मैं तो छोटा कवि हूं महाराज जी मुंबई से आया हूं। मैं हर बार कहता हूं जहां बीजेपी के लोग बैठे हैं मेरी बात सुने दुनिया की पार्टियां कांग्रेस कहती है पंजे का बटन दबाओ हमें जिताओ। समाजवादी कहती है साइकिल का बटन दबाओ हमें जिताओ। झाड़ू कहती है मतलब आम आदमी पार्टी कहती है झाड़ू का बटन दबाओ हमें जिताओ। बीजेपी ऐसा कहती ही नहीं है। वो कहती है तुम कोई भी बटन दबाओ।

[5:31]आप हाथ उठा के ताली बजाओ भाई साहब। ये वही हाथ है जब दबा के आए हैं। मतलब महाराष्ट्र में हैरान है कि जितनी जनसंख्या नहीं है उससे ज्यादा वोट मिल गए भाई साहब आपको। हमें गलत बोल रहा हूं क्या भाई साहब वो टेंशन में है वो लोग कि यार इतने वोट आए कहां से? कमाल कर रहे हैं यार मजाक नहीं कर रहा हूं आप सब भाई साहब। कमाल कर रहे हो आप लोग यार भाई साहब कमाल हो रहा है इलेक्शन क्या हो रहा है देश में? लेकिन कोई बड़ी बात नहीं आप लोग कोई टेंशन नहीं देखिए मेरी तकलीफ अलग-अलग है महाराज जी। मेरी तकलीफ यह है कि मेरा चेहरा अरविंद केजरीवाल जी से मिलता-जुलता है। और मेरी बीवी नरेंद्र मोदी की समर्थक है। तो मैं घर में दिल्ली होकर रह गया हूं। मैं गलत नहीं बोल रहा हूं गलत भाई साहब ईमानदारी की बात बता रहा हूं आप लोग आनंद लीजिए भाई साहब देखिए मैं गोरखपुर का मूलतः रहने वाला हूं। हमारे उत्तर प्रदेश में आज के 10 साल पहले जो माफिया होता था वो फॉर्च्यूनर की लाइन लगाता था।

[10:27]इनोवा की लाइन लगाता था। मर्सिडीज की लाइन लगाता था। महाराज जी ने ऐसा काम किया कि आजकल व्हीलचेयर की लाइन लगवा रहे हैं सारे। सारे माफिया व्हीलचेयर खरीद रहे हैं भाई साहब। हमारे समझ में नहीं आता है। अच्छा महाराज जी कुछ करते नहीं फिर भी गाड़ी पलट जाती है। मतलब पहला मैंने पहला साधु ऐसा देखा जो आशीर्वाद में सीधा मुक्ति देता है। मैं गलत गलत कह रहा हूं सीधा मुक्ति भाई साहब बीच का रास्ता ही नहीं है उनके पास यार मैं गलत नहीं कह रहा हूं बिल्कुल भाई साहब सीधा मुक्ति देता है भाई साहब आदमी पहले साधु देखे आपने सीधा मुक्ति। लेकिन कवि हूं कवि धर्म भी निभाना चाहिए। मैं चाहता हूं प्रशासन शासन ऐसा चले कि लोकतंत्र भी जिंदा रहे संविधान भी जिंदा रहे जनता भी जिंदा रहे प्रजा भी जिंदा रहे। सब जिंदा रहना चाहिए चाहे कोई बड़ी बात नहीं है। महाराज जी बहुत अच्छे हैं इसमें कोई डाउट नहीं एक कविता सुनाने का मानस है महाराज जी क्षमा के साथ। सुनाओ भाई। क्षमा के साथ सुना रहा हूं माफी कर देना मुझे क्षमा के साथ सुना रहा हूं। पहले हमारे दरवाजों पर लिखा होता था शुभ लाभ। हम शुभता के साथ जाते थे। और लाभ लेकर के आते थे। बहुत अच्छे। आइए सर। लाभ लेने आए। नहीं नहीं पुराने जमाने में बिल्ली रास्ता काटती थी। इनमें एक शुभ है एक लाभ है। मुझे शुभ से मतलब नहीं जो लाभ वाला है वह मंच पर आ जाए। बहुत अच्छा मैं शुभ और लाभ के साथ पहुंचते थे इसलिए शायद हमारे दरवाजों पर लिखा होता था शुभ लाभ। फिर उसके बाद हमारे दरवाजों पर लिखा जाने लगा सुस्वागतम क्योंकि अतिथि देवो भव कहा जाता था। हमें देवताओं जैसा स्वागत और सम्मान मिलता था इसलिए दरवाजों पर लिखा जाने लगा सुस्वागतम। फिर लिखा जाने लगा वेलकम। आइए खाइए और जाइए कोई स्वागत से लेना-देना नहीं। यहां तक तो ठीक था। अब दरवाजों पर लिखा जाने लगा कुत्ते से सावधान। अतिथि जब कुत्ता चाहेगा तब घर में आ सकता है भाई साहब। कुत्ता के चाहने पर अतिथि घर आ सकता है। आए और जा भी नहीं सकता भाई साहब जब कुत्ता मतलब हम लेकिन मेरी अगली टिप्पणी मेरी कविता की भूमिका आपकी तालियां उठेंगी। दरवाजे पर यह सब कुछ लिखवाइये यहां मत लिखवाइये। इन दो वाक्य अवश्य लिखवाइये। अतिथियों के लिए कृपया मोबाइल बंद कर करके घर में आइए और अतिथि का सम्मान पाइए। बहुत-बहुत अच्छे सही बता रहा हूं। चाय आ गई राम राज में चाय मिला था कृष्ण राज में घी। मोदी राज में चाय मिली है फूंक-फूंक के पी। तो कुछ भी बोल बस चाय वाले को मत बोल क्योंकि जो-जो चाय वाले पर बोला उसकी दुकान ही बंद हुई। इसलिए नहीं बोल रहा हूं गाय वाले पर बोल रहा हूं। और ध्यान रखिए यह भी दो ही आए हैं। एक तो मास्क लगा कर रखा है पता नहीं चल रहा कि देवेंद्र फंडवीस है या अमित शाह। तुझे क्या पता चलेगा ये तो एकनाथ को भी ना पता चल पाया। आहा क्या बात है। दुनिया में ऐसा कोई मेकअप नहीं बना कि आप उदास और अपने चेहरे पर लगा लें तो आप खूबसूरत लगने लगे। ईश्वर ने एक मुस्कुराहट बनाई है चेहरा कैसा भी हो सिर्फ मुस्कुराते रहिए दुनिया के सबसे खूबसूरत आदमी आप होंगे मैं कविता शुरू करता हूं। कवि धर्म निभा रहा हूं क्षमा के साथ इस दुनिया को खतरा हरियाणा कुरुक्षेत्र इस दुनिया को खतरा ना चीन ना पाकिस्तान ना अमेरिका ना इजराइल से है इस दुनिया को आज के तारीख में सबसे ज्यादा खतरा आपकी जेब में रखे हुए 6 इंच की मोबाइल से है। बहुत अच्छे बहुत अच्छे। धन्यवाद। तालियां कम थी इन्हों ने कविता सुनाना शुरू किया है। अगर आपको लगे कि हिंदुस्तान क्योंकि अब कई देशों ने बच्चों के स्कूलों में मोबाइल बंद कर दिया है उसके खतरे को देखते हुए तब मेरी कविता सार्थक साबित होगी इस दावे के साथ इस दुनिया को खतरा ना चीन ना पाकिस्तान ना अमेरिका ना इजराइल से इस दुनिया को सबसे ज्यादा खतरा आज की तारीख में 6 इंच की मोबाइल से है। सूरज तेजी से ढल रहा है हरियाणा सूरज तेजी से ढल रहा है जमाना रोज बदल रहा है संतगण माफ करें मैं जो कहने जा रहा हूं सूरज तेजी से ढल रहा है जमाना रोज बदल रहा है। एक एक एक संत ने टीवी पर प्रवचन देते हुए कहा कि अगर आप मोहमाया से दूर रहना चाहते हैं तो मुझे लाइक करें। साथ में मेरा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब करें। अध्याय समाप्त हुआ। बहुत अच्छे। साथ में मेरा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब करें। आज नहीं तो कल होना चाहता है साधु हो संत हो महात्मा हो हर कोई वायरल होना चाहता है इस मोबाइल की दुनिया ने कमाल कर दिया है। हमारा बुरा हाल कर दिया है। पहले मेरा बच्चा घर से बाहर जाता था तो मेरा जी घबराता था घड़ी पर नजर रहती थी समय पर नहीं आता था तो मैं पड़ोस में पूछने चला जाता था लेकिन अब मैं लाचार हूं बेकार हूं क्योंकि खुद के ऊपर खुद का बस नहीं चल रहा है। मेरी आंखों के सामने मोबाइल मेरे बच्चे को निगल रहा है। ना मैं चिल्ला रहा हूं ना किसी को बुला रहा हूं इस घटना ने मुझे परेशान कर दिया है। अगली दो पंक्ति किसी तीर की तरह चुभे तो आशीर्वाद मिले। घटना ने मुझे परेशान कर दिया है। अभी मैंने अपने बच्चे का बचपन देखा भी नहीं कि इस मोबाइल की दुनिया ने उसे जवान कर दिया है। आय हाय वाह वाह वाह वाह क्या बात है क्या बात है वाह यह मोबाइल जिसका भी आविष्कार है उसका सम्मान है क्योंकि इसका हमारे जीवन में बड़ा योगदान है। लेकिन इसके भीतर के कुछ अविष्कारों ने हमें भोगी बना दिया है। शरीर तो शरीर मनोरोगी बना दिया है। इसने हमारा सुकून छीना है। इसने हमारा संस्कार छीना है। अरे इसने घर में एक साथ बैठ के बतियाने वाला परिवार छीना है। क्या बात है दिनेश धन्यवाद सर क्या जरूरी कविता है क्या जरूरी परिवार छीना है इसने छीना है नई किताब की सुगंध को इसने छीना है बेटी के शादी के निमंत्रण पत्र पर हल्दी की गंध को इसने घूंघट छीना है हर रात छीना है चैट की आड़ में संवाद छीना है आप कहेंगे कि यह सब नुक्ता चीनी है। कलेजे पर हाथ रख कर के सोचेंगे हरियाणा तो कलेजा फट जाएगा इसने आपके जीवन जीने का आधार अर्थात उत्सुकता छीनी है। दो पंक्तियां गुरुजन के चरणों में जिनकी आस्था दुनिया में छाई हुई है आप लीजिए और यह मंच ताली बजाएगा दुनिया तूने कुछ अजीब सा परोसा है। आज अगर आप अपने आप को चाहते हैं बचाना तो इस 6 इंच की चीज से पूरी तरह नहीं भाई जरूरत है। पूरी तरह नहीं मगर थोड़ा दूर होगा जाना वरना जिंदगी के हरे-भरे जज्बात खो देंगे यह कुरुक्षेत्र में कुमार विश्वास जी को हमने सामने बैठने का एहसास खो देंगे। अब यह निर्णय आपका है कि आपको कैसे रहना है कैसे जीना है। एक दिन घर में बैठ कर के गुरुजनों श्रोताओं जरूर सोचना कि 6 इंच की चीज ने आपके संसार का क्या-क्या छीना है। अंतिम में दो पंक्ति का निवेदन मेरी कविता अच्छी लगी हो तो एक एक शख्स की ताली चाहिए। निवेदन इतना सा है इस कृष्ण की धरती पर जहां सबसे बड़ी कविता हुई निवेदन इतना सा है कि अपने हौसले को बुलंद करना सीखिए। मोबाइल चलाना सीखिए

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