[0:03]आज जो Gen Z है, जो वो दौर miss कर गया, उनको कैसे समझाऊं मैं, कि TV का Golden Period क्या हुआ करता था?
[0:12]जब अंतराक्षरी की जब मैंने बात की, तो काफी लोग थे कि किसी को समझ में नहीं आया। शूटिंग के 3 दिन पहले मुझे कहा जाता है कि गजेंद्र अन्नू कपूर नहीं चलेगा। उनकी उतनी पहुंच नहीं थी, उनकी पहचान नहीं थी, लोग उनको जूनियर आर्टिस्ट की तरह कनेक्ट करते थे। वो pure talent कहां जाए जिसके पास back story नहीं है देने के लिए जिसके घर पे कोई ऐसी दुखद कहानी नहीं है? अंतराक्षरी hit हुई, फिर निकाला एक बरगद का पेड़, जिसका नाम है सारेगामापा। जिसने मंच दिया talent को और उस शो ने हमें दिए बड़े-बड़े stars, सुनिधि चौहान, श्रेया घोषाल की आपने बात की, अरिजीत सिंह। श्रेया द श्रेया घोषाल हैं उनका ऑडियो कैसेट आया था। तब ऑडिशनस के लिए मतलब 1-1 दिन में कम से कम 500 ऑडियो कैसेट्स आते थे। देखा तो एक कैसेट पड़ा हुआ था मेरे डस्टबिन के नीचे। मैं उसको निकाल करके टेप रिकॉर्डर रखा हुआ था सुन रहा था। तो मैंने कहा फेंका क्यों हुआ है कैसेट? तो नहीं अच्छा लगा, मैं बोला मुझे अच्छी लग रही है आवाज बुलाओ इनको। श्रेया की journey वहां से शुरू होती है। अगर आपकी उस दिन नजर ना पड़ी होती, वो डस्टबिन के बगल में पड़े कैसेट पे तो आज। एक टाइम था मतलब आज से कुछ ही साल पहले जब हिंदुस्तान के घरों में रात के 8-9 बजते से ही पूरा परिवार इकट्ठा हो जाया करता था। The golden years of Indian television, जब TV का काम सिर्फ entertain करना नहीं होता था बल्कि देश को एकजुट करना होता था। फिर आए reality और game shows जिसने हिंदुस्तान के आम नागरिक को star बनने का मौका दिया। अपने सपने पूरे करने का मौका दिया, देश के कोने-कोने में जाकर talent को खोजकर उनको अपना हुनर दिखाने के लिए एक मंच दिया। अंतराक्षरी, सारेगामापा जैसे shows आज भी हमारी जिंदगी का हिस्सा हैं। और इन shows के रचयिता, इन shows के जादूगर जिन्होंने मुझे भी अपने साथ काम करने का मौका दिया। मेरा सौभाग्य रहा है कि मैं भी उनके एक show का हिस्सा रहा हूं, आज वो मेरे साथ बैठे हैं गजेंद्र सिंह उर्फ गज्जू भाई। गजेंद्र सिंह जी, गज्जू भाई स्वागत है आपका, चरण स्पर्श कहां? अरे वहीं से दूर से ही चरण स्पर्श। गज्जू भाई वरिष्ठ है हमारे I respect you a lot गजेंद्र सर आपने मेरे, मुझे तो काम दिया ही दिया मेरे जैसे कितने ही कलाकारों को मौका मिला। मैं आपके साथ फैमिली अंतराक्षरी में जुड़ा था। मुझे याद है, मुझे याद है, कितना टाइम हो गया फैमिली अंतराक्षरी को? I think 10, 10 साल से ऊपर हुए होंगे शायद। 7-8 साल हो गए। 7-8 हुए। मैं और सुगंधा साथ में थे अन्नू सर ऑफ कोर्स उसका हिस्सा थे बट the original अंतराक्षरी। गजेंद्र सर 90s का वो दौर, reality shows का दौर, you also completed around 35 years in the industry। I think it was 92 या 93 में अंतराक्षरी शुरू हुआ। 93, 3rd September 1993. तारीख आप आज भी नहीं भूलते। नहीं बोलूंगा। एंड सारेगामापा happened only 2 years later। 1st May 1995. Wow, wow this is like 35 golden years of yours। कुछ ऐसी यादें हैं जो शायद मतलब इतिहास, television इतिहास जब कुछ रचनाओं की बात होगी, जब कुछ कृतियों की बात होगी तो इन दोनों show का नाम अमर है। Absolutely गज्जू भाई एंड audience भले ही कभी की भी रही हो, millennials रहे हो जो 90 के दशक में पल बढ़ रहे थे या उनके भी जो बड़े seniors रहे हो। या even the youngsters खासतौर पर आज जो Gen Z है जो वो दौर miss कर गया उनको कैसे समझाऊं मैं कि TV का golden period क्या हुआ करता था एंड what were the values जो Indian television के हुआ करते थे because it was not only about entertainment? अगर हम बात करते हैं अंतराक्षरी की ना? कि अंतराक्षरी की शुरुआत कैसे हुई थी? मैं year 1992 में G में मुझे बुलाया गया था काम करने के लिए। वहां पे मेरा रोल खत्म हो गया, मैंने काम किया। और तब तक मेरी पहुंच respected सुभाष चंद्र गोयल तक हो गई थी। तब तक वो मुझे जानने लग गए थे, तब तक मैं अपने काम से अपने presentation से अपने जो भी मैंने उस वक्त काम किया था connect किया था लोगों को। तो सब ने कहा कि तुम जा क्यों रहे हो मेरा कॉन्ट्रैक्ट 6 महीने का था खत्म हो गया तुम कुछ करते क्यों नहीं हो? और कुछ, मैंने कहा कि मैं एक बहुत अजीबोगरीब सा मतलब show मेरे दिमाग में है मैं उसको produce direct करना चाह रहा हूं। एंड अंतराक्षरी की जब मैंने बात की तो काफी लोग थे किसी का नाम नहीं लेना चाहता हूं लेकिन किसी को समझ में नहीं आया। अंतराक्षरी सबको समझ में आता था क्योंकि घर-घर का खेल था। घर-घर का खेल था लेकिन किसी को यह समझ में नहीं आया कि यह show इतना बड़ा बन सकता है, क्या बनेगा television सबको लगा था अंतराक्षरी, ठीक है मतलब, लेकिन television show क्या बनेगा। यह तो वो बात हो गई कि किसी ने बोल दिया कि घर पे चौसर खेल रहे हैं तो लूडो बना दो। तो बातें करते-करते-करते मेरी सौभाग्य मिला मुझे discuss करने का respected सुभाष चंद्र गोयल जी के पास। उन्होंने कहा अच्छा कॉन्सेप्ट है गजेंद्र बनाओ इसको। तो पूरा एक मैंडेट मिल गया क्वेश्चन चेयरमैन का मैंडेट था चेयरमैन का ऑर्डर था तो वहां से पूरा एक मैंडेट मिल जाता है और हम उसको बनाते हैं। और बनाने के process में 3 दिन शूटिंग के पहले हमको कहा जाता है कि गजेंद्र अन्नू कपूर नहीं चलेगा। शायद उनकी उतनी पहुंच नहीं थी, उनकी पहचान नहीं थी, लोग उनको जूनियर आर्टिस्ट की तरह कनेक्ट करते थे। मुझे बहुत शौक लगा क्योंकि मैंने जो show edit किया था उनका कबीर। कबीर ने मुझे मतलब इतना बड़ा एक्टर मैं कहता हूं उस व्यक्ति को ऑस्कर अवार्ड मिलना चाहिए था। I totally agree. मतलब उस व्यक्ति ने जो काम किया है जो जिया है वो मतलब आज कोई कर सकता है क्या? उस एज में उतना ऐसा काम किया है। और उनके पीछे उनका musicality उनके गाने उनकी चीजों को तो मैं जब उनको डब करता था जब उनसे मिलता था और ये सारों सारी बातें का श्रेय जाता है respected अनिल चौधरी साहब को। उन्होंने मुझे मिलाया था, बात किया था, इन fact जब बात आई थी तो उन्होंने कहा था कि गजेंद्र आंख बंद करके अनिल को ले लो। अनिल मतलब अन्नू। उनको ले लो मैं तुम्हारे साथ में हूं। और गज्जू भाई somebody with not a musical background अन्नू सर ऑफ कोर्स बहुत सुंदर गाते हैं और भारतीय संगीत का और खासतौर पे फिल्मी गीतों का उनका उनके पास जो information है वो एक भानुमति का पिटारा है। लेकिन for a producer. लेकिन किसी को पता नहीं था। तब तो अन्नू कपूर का नाम लेना भी मतलब किसी को पता नहीं था कि अन्नू कपूर का कही धरती में नाम कोई होगा या मतलब एक कबीर एक show था या 1-2 मतलब plays उनके थे लेकिन कोई ऐसा mass level पे घर-घर का नाम अन्नू कपूर नहीं था। तो मेरी बात हो गई, सबको मतलब मेरा conviction पसंद आया, मैंने promo shoot किया अन्नू कपूर साहब के साथ में और दुर्गा जसराज जी के साथ में। और लोगों ने मतलब थाड़े रहियो और वो गाने मतलब 2-3 गानों के मतलब हमने medley create किए थे, record किए थे, गाए थे। बहुत मतलब एक ऐसा भव्य response मिला था कि लोगों मुझे लग गया था कि कुछ show अच्छा बनने वाला है। शूटिंग के 3 दिन पहले मुझे कहा जाता है कि गजेंद्र अन्नू कपूर नहीं चलेगा। आपको कुछ नया anchor या modern anchor या मतलब modern मुझे समझ में नहीं आया बात लेकिन उन्होंने कहा कि मुझे कोई मतलब आज का नाम चाहिए या उस वक्त का नाम चाहिए या जो मतलब बहुत पॉपुलर है। तो एक नाम आया साजिद खान साहब का।
[7:29]साजिद खान साहब studio में आए बुलाया गया, discuss किया, उनको कॉन्सेप्ट बहुत अच्छा लगा, उनको thought बहुत अच्छा लगा और हमने 2-3 दिन hustle किया। शूटिंग नायब studio वर्ली पता होगा आपको। बिल्कुल-बिल्कुल सर। सुबह 9:00 बजे का shift था हम लोग पहुंचे वहां पर बात करके सब कुछ करके और इस पूरे process को तैयार करने के लिए मैंने सोचा कि पहली बार India में reality TV shoot कर रहे हैं हम लोग। एक प्रोफेशनल चैनल पे लेकर के आ रहे हैं, multi-cam कभी India में था नहीं तो मैंने मतलब एक महीने का course किया Hong Kong में, एक महीने का course किया UK में, BBC studio में। And then came back तब तक मतलब दिमाग में आ गया था कि क्या होता है multi-cam। आज तो multi-cam घर-घर में है, multi-cam हर जगह पे लेकिन तब multi-cam का नामोनिशान नहीं था। मैंने एक टीम बनाई। हमारे मित्र थे अश्विनी बलसावर साहब sound engineer थे ज्ञान सहाय साहब DOP मतलब उस वक्त के सबसे बहुत चर्चित नाम थे। बिल्कुल-बिल्कुल। एंड couple of मेरे मतलब अगेन दोस्त आनंद शर्मा साहब जो आज के दिन में काफी मतलब प्रचलित नाम है, काफी कुछ करते हैं। तो उस अनुज कपूर साहब तो इस तरह से मिलकर के हमने एक टीम बनाई, एक thought create किया कि हम चलो ऐसे जा रहे हैं। शूटिंग के दिन मैं साजिद और सब सेट पे थे मैं कुछ साजिद को समझा रहा हूं साजिद मुझे समझा रहा है मैं चाहता था कि अंतराक्षरी जब बने तो उसकी एक ritual है। उसकी एक inherent story है, एक background है कि अंतराक्षरी कहां से आया, कहां पे गया जो भी हम मस्ती करेंगे मतलब फिल्मी अंतराक्षरी होगी, फिल्मी गाने होंगे। Obviously मस्ती होगी, obviously आप बोलोगे सब कुछ बातें होंगी लेकिन साजिद और मुझे सब साजिद का ये था कि मैं सोया हूं मुझे जगाओ, ये करो वो करो मतलब दुर्गा आके जगाती है ये करती है वो करती है मुझे artificially मतलब जम नहीं रहा था इतनी बड़े show की शुरुआत हम एक synthetic के साथ करें? वो gag और sketch करना चाहते थे? हां gag और sketch मतलब कहीं बीच में हो सकता है कहीं पे आगे चल के हो सकता है। Show के launch में। Soul के launch में beginning में तो नहीं हो सकता है। तो हमने 1 घंटे तक बातें की। एक आधे घंटे तक बात हुई और तब साजिद decision लेते हैं कि या तो गजेंद्र director होंगे या तो मैं anchor होऊंगा। ये जब फैसला हो जाएगा तब मुझे बुला लेना, मैं यहीं वर्ली में किसी घर पे रुका होऊंगा। और सारी टीम G TV की मुझ पे आकर के बरस पड़ी कि गजेंद्र आप resign कर दो आपके बस की बात नहीं है बनाना। लेकिन मेरी आंखें आज भी नम हो गई। बात करते-करते। मैं सोचा कि इनके सामने क्या रोऊं। इनके सामने अगर रोऊंगा तो ये समझ नहीं पाएंगे इस दर्द को क्योंकि दर्द साल भर का था 3 साल पहले सोचा था इस show को। लिखा था, बनाया था, research किया था, काम कर रहे थे। तो इनके सामने रोना नहीं चाह रहा था मैं सामने वर्ली सी फेस गया वहां पे 1 घंटा बैठ के रोया मैंने।
[10:22]और मतलब सोचा कि चलो जिंदगी की यही त्रासदी है, यही हार है कि मतलब इतने काम करने के बाद में, इतनी तकलीफ के बाद में, इतनी मेहनत के बाद में अगर मुझे यहां छोड़ना पड़ रहा है तो ठीक है क्या कर सकता हूं? और सारी टीम G TV की मुझ पे आकर के बरस पड़ी कि गजेंद्र आप resign कर दो, आपके बस की बात नहीं है बनाना। और मतलब सोचा कि चलो जिंदगी की यही त्रासदी है, यही हार है कि मतलब इतने काम करने के बाद में, इतनी तकलीफ के बाद में, इतनी मेहनत के बाद में अगर मुझे यहां छोड़ना पड़ रहा है तो ठीक है क्या कर सकता हूं? गजेंद्र आप resign कर दो, आपके बस की बात नहीं है बनाना। मेरा मानना है मंत्रा कि हर चीज evolve होती है, हर चीज का समय होता है।
[11:54]फिर मैंने कहा कि ऐसा नहीं हो सकता कि मैं आप लोगों को पैसा दे दूं और जितना खर्चा हुआ है सब मैं भर दूं और यह show मैं बनाऊं? जब मेरी मर्जी होगी जब जब मुझे जिंदगी में मौका मिलेगा तो। और ये मेरा फाइनल decision है। मैं 1 घंटा बाहर गया था ना मैं यही सोचने के लिए गया था। मेरे पास बैंक में उतना पैसा तो नहीं है लेकिन मैं पोस्ट डेटेड चेक देता हूं आप सबको एक 3 महीने के अंदर सब क्लियर कर दूंगा। उनके होश उड़ गए थे। उनके होश मतलब जमीन पर आ गए थे कि ये आदमी जिसके पास चप्पल नहीं है पहनने को, ये क्या बात कर रहा है?
[12:29]सब लोग show छोड़ के चले गए। अब कोई बचा नहीं वहां पे। कुछ लोग जो थे वो मेरे pure मित्र थे, मेरे जानने वाले थे ज्ञान सहाय साहब थे। यहां तक कि मेरा बेस्ट दोस्त आज के दिन का जो म्यूजिक director आनंद शर्मा वो भी मेरा साथ छोड़ के चला गया था। मुझे उस बात का मतलब आज भी लगता है लेकिन मैं openly आज इतने सालों के बाद बात कह रहा हूं लेकिन मुझे मतलब मौका मिला मैं कहना चाहता हूं। और कोई नहीं था। Contestants को मैंने कहा कि आप लोग रुको, देखता हूं मैं क्या होता हूं। फिर मेरा मन पता नहीं क्यों मंत्रा, अन्नू पे टिका हुआ था।
[13:08]मैंने अन्नू जी के घर पे फोन किया। अन्नू जी घर पे नहीं थे।
[13:14]मन नंबर दे के गए थे जहां पे गए थे। एक मीटिंग में। और उन दिनों तो mobile का दौर भी नहीं था। Mobile था नहीं। उस नंबर पे फोन किया तो luckily फोन उन्होंने ही उठाया। मैं कहा मैं गजेंद्र बोल रहा हूं। तो अन्नू जी ने उस दिन कभी reality नहीं कहा जब उनको मैंने मना किया कि अन्नू जी आप नहीं कर रहे हैं मतलब साजिद का रहा show। तो फिर बट उस दिन अन्नू जी भड़के मेरे ऊपर बहुत। कहा गजेंद्र इतनी बदतमीजी अब मत करो।
[13:47]मैंने उस दिन कुछ नहीं बोला लेकिन अब बदतमीजी तो मत करो क्यों मतलब हमने promo shoot किया लोगों को पसंद आया तुम मना कर दिया तुमने और मुझे फिर भी वहां पे भी रोना आ गया। उस आदमी के लिए लड़े आप गज्जू भाई। सचमुच मुझे वहां पे भी रोना आ गया मैं कहा अन्नू जी इतना जो लड़ा हूं ना वो आपके लिए लड़ा हूं। मेरा conviction आप थे अंतराक्षरी से ज्यादा।
[14:13]तो उन्होंने कहा कि are you sure तुम मुझे मेरे साथ shoot करना चाहते हो? मैं बोला अन्नू जी मैं यहां पे हूं नायब में हूं इस जगह पे हूं और मैं आपका वेट कर रहा हूं मैं shoot करना चाहता हूं। आप आ जाइए।
[14:26]Luckily उस दिन घर पे थे वो। बोले कि 2:00 बज रहा है और मैं 4:00 बजे पहुंचूंगा। हां आप बात कर रहे हो गज्जू भाई।
[14:36]और हमने shoot किया। मंत्रा। पहला ही episode में मतलब ऐसा लगा कि ये गूंज बिना telecast हुए पूरी दुनिया तक पहुंच गई। वाह वाह वाह। जी तक आवाज पहुंच गई। हम लोग नायब पे shoot कर रहे थे और वर्ली मतलब पे ही उनका ऑफिस था उनको पता coordinate कर रहे थे, बात कर रहे थे किससे क्या। सब लोग देखने के लिए आ गए कि क्या हो रहा है। क्या बात। क्या बात है क्या बात है। सब की आंखें, सब के आंखों में मतलब आंसू थे। कि तुमने क्या सोचा क्या हो गया क्या क्या क्या तुम्हारी सोच है, क्या तुम्हारी conviction है। और हमने उस रात को 2 episode shoot किया। अन्नू जी उस वक्त का shoot कर रहे थे। Next day उनका date नहीं था। Third day हमने 5 episode shoot किए। Next day 4 episode shoot किए, फिर हमने 4 episode shoot किए इस तरह से हमने 13 episode complete किए और वो हमारी पहली अंतराक्षरी की शुरुआत ऐसे होती है। Life की बाकी तो rest इतिहास है मैं क्या बताऊं।



