Thumbnail for Naam-e-Hussain A.S leta hun!! Marsiya recited by Syed Ajaz Shameem Hamid(Kunwar Sonvi) #azadar by GULSHAN E ABU TALIB A.S.

Naam-e-Hussain A.S leta hun!! Marsiya recited by Syed Ajaz Shameem Hamid(Kunwar Sonvi) #azadar

GULSHAN E ABU TALIB A.S.

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[0:03]मिले क्या सर बुलंदी अस्तर ए तकबीर के आगे. रवा है हुक्म खालिक कौस ए तकबीर के आगे. बताया हक ने लेकिन सात बेटे देकर साहिल को. मुकद्दर कुछ नहीं है मर्जी ए तकबीर के आगे.

[0:55]नाम ए हुसैन लेता हूं जाए दरूद है.

[1:05]नाम वो है नूर का जिस पे वरूद है और मैं उसका मदाखवा हूं शुकूर ए वजूद है. और मैं एक सिंक खिल के बिस्तर ए सुजूद है और खालिक तो क्या फजाइल ए सिते नबी पढ़ूं. और तुम सब पढ़ो दरूद में नादे. सुभान अल्लाह सुभान अल्लाह सुभान अल्लाह मौलाना. सुभान अल्लाह सुभान अल्लाह सुभान अल्लाह जो मर्जी ए हुसैन है वो मर्जी ए खुदा. अहकाम ए कदम ए तो ताबे में है कजा. ला तैत जिसकी तेज है और खुद है ला फता. और एक जुंबिश ए तलवार में जो चाहे करे अदा. बाद अस फना भी खल्क के मुश्किल कुशा हुए. और मर कर हुए जो ताब तो खाके शेफा हुए. तकलीफ में दान ए मोजज़ा ए नज में मुस्तजा. रमबाल शकल जाए है ताले रजा.

[2:11]तो खुदा नबी लफ्ज़ ए हल्ला ता, और लिखते है अब आता है शहे दीन का माजरा. वल्लाह नाउम्मीद के दिल को उम्मीद है. और इजा ए इबने फातिमा की वो नवी है. इब्न ए राजा में था किशवर ए ऐरा में मरती ए जफा. जाहिर में था यहूद मद्देनजर ए खुदा. था जो कुतुब में रुतबा ए आले अबा पढ़ा और रहता था नाम ए पंचतन ए पाके पा. सरसब्ज हर तरह से तो इसरत का बाग़ था. पर एक पिंसर न था तो कलेजे में दाग था. दिल में हुआ ख़याल मोहम्मद के पास चल. हल्लाल ए मुश्किलात है वो साहिब ए अजल. मुश्किल मेरी बगैर मोहम्मद न होगी हल. हादी के पास चल के नहीं मुझको खलल. कर्ज ए नवाजिश उनकी अलग है जमाने से. जिसको जो कुछ मिला है उसी आस्ताने से. आया गरज मदीने में पेश ए नबी ए पाक. डर से आलम से जेब ओ सफा था ब सीना चाक. की अर्ज यूँ नबी से कि तुम नूर हो मैं ख़ाक. जाहिर में मैं तो था दो पर ज़हन में परदे में नाक़. इस्लाम दे के दिल को मेरे शाद कीजिए. बाद इसके फिर अता मुझे औलाद की मांग. ये सुन के शादमा हुए पैगंबर ए खुदा. मुख्तार ए हर लता ने शह की की अता. औलाद के लिए जूंही करने लगे दुआ. नागा आया निज़्द ए नबी पैक ए किब्रिया में से बनाया कि अर्ज़ या रसूल. ये जाए दुआ नहीं और ये साहिब ए पिस्सर हो न जाए खुदा. थहरा ए निज़्र ए महल ए के पैगंबर ए जिमा. और ज़र द रू ए पाक हुआ मिसाल ए जाफ़रा. शब्बीर आ गए दड़ मस्जिद ए नागां. और आदाब अर्ज़ कर के करने लगे बयां. कुछ बात कीजिए मेरा दिल शाद कीजिए. रंज़िदा क्यों है आप है ना कीजिए. बोले नबी कि कुछ नहीं है मेरे महलक़ा. पर जब वज़ूद हुआ वो शहंशाह ए कर्बला. राहब के संग तो देख कर बोले शाह ए हुदा. और इसके लिए मैं करता था औलाद की दुआ. तासीर इसके नाले शबगीर में नहीं. साबित हुआ कि अम्र ए ये तकदीर में नहीं. बोले हुसैन बस ये तरद्दुद काहे को लाऊं. लो हमने एक पिस्सर दिया है सर्वे अरब. बोले नबी खामोश नहीं है रजा ए रब. और शह ने कहा दो लाल दिए मैंने इसको अब. बोले रसूल करते हो क्या बेदुआ किए. और बोले शह पिस्सर इसे मैंने अता किए. गज़ब के गज़ब के गज़ब के

[5:32]बोले ए रसूल ए खुदा फिर कोई एक बार. और बोले हुसैन खामिस ए आले अबा की चां.

[5:42]उस पर हुआ नबी को तो शोब ए बे शुमार. और शह ने कहा कि पांच दिए इसको गुलज़ार. बक्शिश छठे पिस्सर की हुई जबकि शह की. एक शख्स ने हाथ पे धूम हुई वाह वाह की. मन्ना ने हुई नबी खुदा फिर उठा के हाथ. मुख्तार ए हक़ ए खुद ने हंस कर कहा कि स्वार्थ.

[6:10]नागा आए हज़रत ए जिब्रील ए नेक जात. की अर्ज़ ये रसूल से ए फखर ए कायनात. बस अपने फज़ल का इससे मुख्तार कीजिए. इस जम न कुछ हुसैन से तकरार कीजिए. खालिक कसम ज़लाल की कहता है जुल्जुलाल. प्यारा है इस कदर मुझे खैरुलनिसा का लाल. शब्बीर बक्शें जाए यूंही कर हजार को आम. इस नये दुआ का न होगा कभी ज़वाल. राहब को जो हुसैन दिलाएं वो बख्श दे. बख्शे अगर हुसैन खुदा की तो बख्श दे.

[7:01]पूछो मोहिब को अपनी है पूछ ले के जात. ये खाते हुसैन कुछ पेशे किब्रिया. मोताज एक पिस्सर के दिए सात महलका. पर कर्बला में रहे सितम हुआ. मक़तूल ए ज़ुल्म शाह कुछ एकबाल हो गए. बेटे भतीजे घोड़ों से पामाल हो गए.

[7:30]अल किस्सा अपना हुसैन को सा सुना. आगोश में नबी ने नवासे को ले लिया.

[7:41]चूमा गुरू ए शाह को मुकर्रर ब सद दुआ. और असहाब की तरफ निगरा हो के ये कहा. उलफत कमाल है मुझे इस नूर ए ऐन से. यारों हुसैन मुझसे है और मैं हुसैन से.

[8:02]गौहर मेरी सदफ का है ये फातिमा का लाल. नये मेरे पलक का है ये साहिबे कमाल. सर्वेरियाज़े मुस्तफी है ये नौ नेहाल. ये शम ओ सुबह पैगंबर का है लाल. यारों ये बात बां है मेरे सीने का. वल्लाह पासबां यही है मदीने का. नागा उठा राहब उस संत को शादमा. रुखसत हुआ रसूल ए खुदा से वो जां. कि अर्ज़ ये हुसैन से रहता हूं मैं जहां. ये अच्छा भी पूरे उलके ता खू है वहां. मरबूब ए तवज्जो हुई शाद कीजिए. उम्मीदी है कि दिल को मेरे शाद कीजिए बनाया हूं. रोने लगे ये सुन के शहंशाह ए ज़ीशान. राहब के सिंह को देख के बोले शह जमां. तू साथ ही है लाख है उसने कहा कि हां.

[9:05]शह बोले जिन तेरे हम होंगे मेहमान. उस दिन दुआ ए आले पैगंबर की लीजिए ओ. ये हदिया अहले बैत ए रिसालत को दीजियो. राहब हुआ ये सुन के वो राहब ए अराक. बाद चंद साल हुआ यो इत्तेफाक. मैदान ए कर्बला का हुआ शहर ए इश्क़ ए आब. जाहिर किया एक ही पिस्सर इबने शाह ने राख. गर्मी में निकले सिस्ते पैगंबर मदीने से. वो रास्ते की धूप को मासूम को तो शाल. हर कूचे में ये था पिस्सर ए फातिमा का हाल. गद्दो की सिंक को देख के करने लगे मुकाल. ग़लत अगर लव वर्क्सरे मन वर्क्सरे मन है. और जैनब अगर नहीं तो वह दूजा है. जैनब पुकारती थी कि ए शाहे खुफ़्तू. भैया ये बात बार-बार ज़बा से तुम न कहो. बहना निषार नाद ए अली एक जरा पढ़ो और अकबर कदम करो अली अकबर कदम करो. उम्मीदी है सदा मुझे खालिक की जात से. जैनब सिक्क उलज़ाल को भाई के हाथ से. रोकर हुसैन कहते थे ए इब्न ए मुर्तजा. रहते हैं ख़ासदान ए खुदा मोजे ब बला. जैनब बहन ये है क़त्ल ए तकदीर का लिखा. हम बेकफन और खाक पे तुम हो बे रज़ा. सुन रखियो जैनब इस सुखन ए सीना सोज को. कुर्बान ये हुसैन मेरे दे के मुंह को.

[11:00]बहना मुहर्रम अब करना तुझे इस नाम पे आ. फिर कश्ती ए यूसुफ खुदा होएगी तबाह. देखा गरज मुहर्रम का शहदी पनाह. ग़ुरला को ऐ मारियम ए साहिब ए पनाह. हरदम ये गुफ्तगू थी शहदी घुल्लम की. दौलत यही नहीं टूटेगी जनाब ए बतूल की. अब तुमको खेमा रेत पे शह का हुआ तबाह. बोला फरियाद फातिमा के महल में न था. पानी का कुल्ब को तीन शबों रोज़ तक रहा. आती थी रु ए फातिमा ज़हरा की है सदा ओ कोहे आलम. गिला है हमारे हुसैन पर. पर ये जफा ये है मेरे प्यारे हुसैन.

[12:00]दशमी को सुबह को हुवा अमरो है फौज ए शाम. वो खासगान ए रब हुआ हुस्न ए आब. ताज़ौर सब शहीद हुए रण में तश्ना काम. या पे बेहतर ए शह आता है शह इमाम. रू ए अली लहत में कफन फार लेने की. बालों से खुद ब खुद भूतों ने देख ना.

[12:33]वो नौजवानी ए अकबर को नेजा. वो तीर और वो गर्द ने बाजुओं ने देखा ना. यहां नौ इब्ने फातिमा का नौ इब्ने फातिमा का लाख रुसिया. पूरी नमाज अस्र भी पढ़ने न पाए शाख. मगरीब का हमला रहा दिल ए शह ए इब्न ए. रूख ए शह कफन कफन से बद गए बोले या अली.

[13:41]अल किस्सा लुट चुके जो असीरान ए कर्बला. सज्जाद के गर्दन में पड़ा हल्का ताऊ का. कूफे को अहले बैत चले अब बे रज़ा. जैनब ने रोके लाश ए शब्बीर से कहा मैं फिर भी बुला दूं.

[14:07]लो भाई सोचैन से अब कतरे काम में. शह मात ने बनाए रिसालत पना में.

[14:21]बानो ने मुड़ के लाश ए अकबर को दी सदा. लो बारी आ फिज़ा आपका जंजल में किब्रिया. रो कर तसव्वुर ए अदी फुकानी ये कहा. प्यारे मुबारक आपको पल हो बाक का.

[14:49]आदा को ले चले हमें पढ़ने दे घेर के.

[15:00]ए बेटा दज्जाल ए ने दरीदा चायो कर दे होश में.

[15:58]लाश ए चाचा का पास है खतरा नहीं.

[16:06]ये बैंक पे की आगे बढ़ी फौज ए अशिया. दरिया किनारे पहुंचे असीरान ए कर्बला.

[16:17]बानो ने सर बानो से कर सकी नज़र क्योंकि ये कहा.

[16:25]क्यों मैं शिबन तो नहीं जाकर खड़ा रहा. ज़हरों की लाश ए मु ए ग़म खा देख लो.

[16:42]और सख्त ए काम ने आखिरी विदा.

[16:50]आंखों में आंसू भर के पुकारी वो कतरा जां. सूझे है गा कान भी जख्मी है मेरी मां. हर्बल से निकलने की अब तुम में है कहां. कहते हैं मुझको या असद ए मौला मां. आरे इस्सेवारी नील अब तक पड़ा हुआ. अरे चुपकी रहो कि शिमर है सर पे खा.

[17:23]कासिम की मां पुकारती थी हसन के लाल. मैं बेरदा हुई इसका नहीं बदलाए मलाल. और एक जन की दुल्हन के है बाल. और कैद की जाती है सख फातिमा की लाल.

[17:59]और पहले तुम्हारे लाल का.

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