Thumbnail for हाईवे के पास करोड़ो की संपतिया बर्बाद? सब कुछ टूटेगा! Highway 75 meter rule ? 75 meter highway news by Ramesh Ruyal(RNI)

हाईवे के पास करोड़ो की संपतिया बर्बाद? सब कुछ टूटेगा! Highway 75 meter rule ? 75 meter highway news

Ramesh Ruyal(RNI)

15m 20s2,589 words~13 min read
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[0:02]नमस्कार, 75 मीटर हाईवे रूल को लेकर के काफी घमासान मचा हुआ है। और इसको लेकर के मैंने अभी हाल ही में एक वीडियो बनाया था। लेकिन काफी डाउट रह गए, काफी लोगों के मैसेज आए। आज इस वीडियो में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा करूंगा कि क्या मुआवजा मिलेगा जो यह निर्माण हटाए जा रहे हैं, इसका? क्या 40 से 75 मीटर के बीच में कौन से निर्माण वैध हैं और कौन से अवैध हैं? इसको लेकर भी आज मैं पूरा कानूनी तरीके से बताऊंगा। क्या नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया NHAI और PWD द्वारा अनुमति ली गई है, वह भी हटाए जाएंगे या नहीं? 75 मीटर का नियम कब बना था और अन्य विभागों से पंचायत, नगरपालिका, बिजली विभाग, अलग-अलग खनन विभागों से अनुमति क्यों दी गई थी जब NHAI का रूल था? तो इसको लेकर भी जहां मास्टर प्लान लागू वहां 75 मीटर जरूरी नहीं जैसे जयपुर सिटी के अंदर से कोई हाईवे गुजर रहा है, उसको लेकर भी बताऊंगा। लाखों रुपए डूब गए, आम आदमी की क्या गलती थी? बना लिया सब कुछ अब हट रहा है करोड़ों रुपए की, लाखों रुपए की, बहुत सारों के फोन और मैसेज आ रहे हैं। क्या सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत मिल सकती है? यह भी एक मैसेज आ रहा है, काफी लोगों का कि क्या सुप्रीम कोर्ट से हमको राहत मिल सकती है? तो कानूनी प्रभाव जो यह क्या है और इसको लेकर भी किसकी परमिशन को लेकर भी चर्चा करूंगा और किस प्रकार से अवैध निर्माण सड़क के किनारे हो जाते हैं, सड़क पर हाईवे पर बना लेते हैं। और उसके यह तमाम चीजें हैं, इसको लेकर विस्तार से चर्चा करूंगा। यदि आप मेरे चैनल पर पहली बार जुड़े हैं तो चैनल को सब्सक्राइब कर लें, वीडियो को लाइक और शेयर जरूर करें। पीछे वाला वीडियो जरूर देखें और यह वीडियो जरूर देखें। सारे डाउट दूर हो जाएंगे। पीछे वाले वीडियो में मैंने लगभग बताने की कोशिश की, लेकिन काफी डाउट रह गए। 75 मीटर नियम कब बना, कब आया, अचानक से यह नियम आता है और लाखों की, करोड़ों की संपत्तियां रद्दी का कागज बनती भी जा रही है और एक डर और एक खौफ का माहौल बढ़ता हुआ जा रहा है। जिला कलेक्टर प्रशासन पत्र जारी कर रहा है, कौन सा हटेगा, कौन सा नहीं हटेगा, पता था नहीं, नियम बना लिए, काफी लोग अनुमति लेकर घूम रहे हैं कि हमारे पास एनओसी है, अनुमति है, तब भी हमारा क्यों हटा रहे हो? तो यह कई सवाल हैं। तो इन्हीं सवालों पर पूरा एक विश्लेषण करूंगा। आप पूरा वीडियो जरूर देखें। जो हाई कोर्ट ने जो पैराग्राफ नंबर जो 4.2 जो लिखा है अपने पैराग्राफ में, उसका हिंदी अनुवाद है, उसके अंदर मैं बताऊंगा कि यह तीन लाइन कौन सी हैं। लेकिन उससे पहले कई अब जैसे हाईवे है, हाईवे के अंदर इस प्रकार से इसी पर बात कर लिया, यह जो आपकी जो रोड लैंड है, इसी पर अतिक्रमण हो गए, थैले लगा है। तो यह तो पूरी तरीके से इलीगल है, यह तो हटाने ही हटाने होंगे। अब इस प्रकार से बुलडोजर चलेगा यदि नहीं कोई हटाएगा अपने आप से। इस प्रकार से घर भी टूटेंगे, हाईवे के किनारे 75 मीटर की दूरी छोड़कर के घर नहीं बनाए गए। और इनके पास गांव की जमीन आती है, उसमें ग्राम पंचायत का पट्टा होगा, वह सारे इनवैलिड कर दिए। यह 0 से 40 मीटर के अंदर तो किसी भी प्रकार का इसको बिल्डिंग लाइन बोली गई, 0 से 40 मीटर को बिल्डिंग लाइन बोली गई। निर्माण की अनुमति नहीं है। तोड़फोड़ अनिवार्य है, करना पड़ेगा। कोई भी कानून प्राधिकरण के तहत नियमित नहीं किया जा सकता और यह दूरी बीच सेंटर से 40 इधर और 40 इधर। 40 इधर और 40 इधर, टोटल 80 हो गई, 40 और 40। इस 40 के अंदर कोई भी निर्माण नहीं हो सकता और किसी भी कानून या प्राधिकरण की अनुमति के तहत उसको नियमित नहीं किया जा सकता, उसको रेगुलराइज नहीं किया जा सकता, वैलिड नहीं ठहराया जा सकता। यह बिल्डिंग लाइन के क्षेत्र में। 40 से 75 के इश्यू का काफी विवाद है, मामला है। यह कंट्रोल लाइन है। 75 मीटर से आगे तो सारे निर्माण वैध हैं। कोई किसी की परमिशन की जरूरत नहीं है, सुरक्षित है, कोई भी बना सकता है 75 मीटर से आगे। लेकिन 40 से 75 मीटर जो है, यह जो यहां पर आकर के जो 75 मीटर होता है, यह 35 मीटर दूरी। इस 35 मीटर दूरी का झगड़ा है, विवाद है। निर्माण इसके अंदर निर्माण कार्य केवल NHAI/PWD की वैधानिक अनुमति (NOC) से ही अनुमत है। इसके बिना यह अवैध है और इसे ध्वस्त किया जा सकता है। जिसने भी निर्माण कर रखा है 40 से 75 के बीच में। 40 तक तो बाउंड है। आप पाबंद कर ही नहीं सकते। 40 से 75 के बीच में जो 35 मीटर में, जिसने भी कोई निर्माण कर रखा है घर, दुकान, ढाबा, होटल, कुछ भी मंदिर, कुछ भी, तो वह यदि NHAI और PWD की अनुमति है, तो तो वह रहेगा। उसको ध्वस्त नहीं किया जाएगा। बाकी सारे ध्वस्त किए जाएंगे। मात्र दो की ही अनुमति वैलिड मानी जाएगी, वह मैं दिखाऊंगा कैसे मानी जाएगी, इसी आदेश में भी दिखाऊंगा। यह जो रोड लैंड है, रोड लैंड तो वह है जो सड़क जा रही है, उसमें तो पूरा स्ट्रक्चर पूरी तरीके से इलीगल है, अवैध है। बिल्डिंग लाइन जो 40 मीटर वाली बताई मैंने, यह 40 मीटर वाली, यह भी अवैध है, इसके अंदर भी नहीं कर सकते। जो कंट्रोल लाइन जोन है, जो 40 से 75 यह कंडीशनल है। कंडीशनल ऐसे इसमें अलाउड ओनली वैलिड NHAI/PWD परमिशन विदाउट यह इलीगल होगा और यह हटाया जाएगा। और यह 40 से 75 से आगे वालों को कोई एकदम पूरा सेफ है। यह बाद में कई प्रकार की मेरे पास मैसेज आए कि सर, हमारे पास इसकी अनुमति है, पट्टा है, यह तमाम। यदि आपके पास नगरपालिकाओं का पट्टा है, कोई नगरपालिका से पट्टा है, अनुमति है, पट्टा है, तो वह इनवैलिड है, ध्वस्त होगा। यदि बिजली का विद्युत का कनेक्शन है, तब भी वैलिड नहीं है, इनवैलिड है और यदि माइनिंग डिपार्टमेंट से है, तब भी इनवैलिड है। यदि लीगल मेट्रोलॉजी या धर्मकांटा अप्रूव किया हुआ है, वह भी वैलिड नहीं है। यह कौन सी वाली में हो रहा है? यह आपके 40 से 75 मीटर के बीच में, यह आपके 40 से 75 मीटर के बीच में इन-इनकी यदि अनुमति है, तो वह सारे अनुमति इनवैलिड हैं, वह मान्य नहीं है और ध्वस्त किया जाएगा। लोकल बॉडी ग्राम पंचायत से एनओसी है, कोई और है, पट्टा है, कोई जमीन की रिकॉर्ड है, तो यह इसमें सारों में इनवैलिड है, किसी भी परमिशन नहीं है। यह हाई कोर्ट का पैराग्राफ नंबर 10 कहता है। अब इसमें जो इसमें जो परमिशन है, वह किसकी है, वह मैं आपको दिखाता हूं। यह NHAI और PWD स्टेट्यूटरी परमिशन जरूरत है, वह ओनली परमिशन है और वह हाई कोर्ट के पैराग्राफ नंबर 4.2 और 10 के अंदर है, वह मैं आगे दिखाता हूं कैसे। हाई कोर्ट का पैराग्राफ नंबर 4.2 क्या कहता है? नो कंस्ट्रक्शन इज परमीसिबल विद इन द बिल्डिंग लाइन। बिल्डिंग लाइन कौन सी है? 40 मीटर वाली, इसके अंदर कोई भी कंस्ट्रक्शन परमीसिबल नहीं है, हाई कोर्ट साफ-साफ अपने पैराग्राफ नंबर 4.2 में कह रहा है। ओनली रेगुलेटेड कंस्ट्रक्शन विद ड्यू स्टैच्युटरी परमिशन इज परमीसिबल विद इन द कंट्रोल लाइन। ओनली रेगुलेटेड परमिशन जो कंस्ट्रक्शन है, वह ही परमीसिबल है और स्टैच्युटरी परमिशन कौन सी है? NHAI और PWD है। वह भी मैं दिखाऊंगा आगे कहां बताया है। तो यह दो से अनुमति है, तो आप कंट्रोल लाइन, कंट्रोल लाइन कौन सी है? 40 से 75 के बीच में, उसके अंदर। उन इस के अंदर इन दो की अनुमति से बनाया हुआ है, तो वैलिड है, कोई आपको हटाएगा नहीं, बाकी हटेंगे। यह पैराग्राफ नंबर 10 है, जो मैंने पीछे बताया था टेबल में, जो परमिशन दी गई माइनिंग डिपार्टमेंट से, लोकल बॉडीज, इलेक्ट्रिसिटी, वाटर अथॉरिटीज, ट्रेड लाइसेसिंग जो जल विभाग या विद्युत विभाग, लोकल बॉडी, कोई नगरपालिका यह सारे के सारे आपको नहीं बचा सकते हाईवे जोन के अंदर है, सारे आपके उनको कैन नॉट ऑपरेट एज ए डिफेंस, आपको सुरक्षा नहीं दे सकते। यह हाई कोर्ट का पैराग्राफ नंबर 10 कह रहा है। अब जो मैं कह रहा था कि यह जो पैराग्राफ जो अपना डायरेक्शन दिया था, नो डिपार्टमेंट और अथॉरिटी लोकल बॉडी शैल ग्रांट और रिन्यू एनी लाइसेंस, NOC परमिशन, यूटिलिटी कनेक्शन और ट्रेड अप्रूवल फॉर एनी साइट फॉलिंग विद इन हाईवे सेफ्टी जोन विद आउट प्रायर क्लियरेंस फ्रॉम NHAI/PWD एज द केस मे बी।

[8:26]जब तक विद इन द हाईवे सेफ्टी जोन में जो आता है, विदाउट प्रायर क्लियरेंस फ्रॉम NHAI/PWD। जब तक NHAI और PWD से क्लियरेंस नहीं मिल जाती, उनसे अनुमति नहीं मिल जाती, तब तक कोई भी अन्य विभाग अब आगे से ना तो कोई परमिशन दे सकता, ना लाइसेंस को रिन्यू कर सकता। किसी भी डिपार्टमेंट ग्राम पंचायत, नगरपालिका, विद्युत, जल किसी भी विभाग में जाओगे, पहले वह अब मांगेंगे NHAI और PWD परमिशन ला दो, उसके बाद वह परमिशन देंगे अदरवाइज वह परमिशन नहीं दे सकते। जो पहले से जो लाइसेंस है, वह 15 दिन के अंदर रिव्यू करके करने को कहा था और जो नियमों ने में नहीं है, उनको हटा दो।

[9:09]तो यह बात है हाई कोर्ट ने अपने पैराग्राफ में कही। अब जो जिला कलेक्टर ने जो आदेश जारी किया। जिला कलेक्टर ने भी यही कहा कि 75 मीटर के दायरे में जो भी व्यवसायिक निर्माण कानूनी रूप से अमान्य हो, उनको हटाओ और हाई कोर्ट के आदेश की बात कही। हालांकि इसमें यह कहना चाहिए था कि 40 से 75 के बीच में यदि NHAI, लेकिन उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार जो हाई कोर्ट जो भी अधिकारी हाई कोर्ट का आदेश पढ़ेगा। तो इन दो की, यह नियम कोई पहले नहीं बना है 75 मीटर वाला। यह 2003 का लेटर है और इस 2003 के लेटर के अंदर और 150 मीटर और 75 मीटर दूरी के अंदर भूमि निर्माण को लेकर के बात कही गई, यह राजस्व विभाग राजस्थान सरकार का यह परिपत्र है। उस समय भी यह कई बार अवगत करवाया गया है और सभी जिला कलेक्टर को यह लिखा गया था, समस्त जिला कलेक्टर को 2003 के अंदर। अब जो यह मैं बात बता रहा था यहां से 40, कोई झगड़ा नहीं है, कोई बना नहीं सकता। यहां से 75, यह 35 मीटर है। इस 35 मीटर के अंदर NHAI और PWD की परमिशन है, वह वैलिड रहेगा, बाकी किसी की परमिशन है, वह मान्य नहीं रहेगी, हटाया जाएगा। NHAI और PWD परमिशन रहेगी, तो वह नहीं हटेंगे। अब जो आता है यह IRC, इंडियन जो रोड कांग्रेस है, यह 1980 की बनी हुई है, उसके फाउंडेशन से कंट्रोल लाइन को डिफाइन किया हुआ है। नियंत्रण रेखा को एक ऐसी रेखा के रूप में परिभाषित किया जाता है जो सड़क के संबंध में भविष्य में होने वाली अनियंत्रित निर्माण गतिविधियों को निकटतम सीमाओं को दर्शाती है। और इस IRC के अंदर 1980 में बनाया है, इसमें 75 मीटर और 40 मीटर का डिफाइन किया हुआ है। बहुत पहले से और अनकंट्रोल्ड कौन से होंगे, यह सारी चीजें बताई हुई हैं। अब यह राजस्थान सरकार का 18 नवंबर 2021 का परिपत्र है। इस परिपत्र में बाकायदा NHAI और राज्य और राष्ट्रीय 40 मीटर के अंदर तो कोई भूमि का परिवर्तन नहीं कर सकता ना निर्माण हो सकता है, जो कमर्शियल में कन्वर्जन वगैरह कुछ नहीं कर सकते। 75 मीटर वाली में कहा कि इन निर्माण सक्रिय को नियंत्रित किया जाना है और इसमें नीचे लिखा गया है कि सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के बिना कोई भी उसमें वह नहीं करेगा। अब सक्षम प्राधिकारी इसको देखने के लिए रूल में जाओ, रूल में जाओगे, वहां पर NHAI और PWD मिलेगा, उनके अनुमति के बगैर आप नहीं बना सकते।

[11:42]यह बहुत बार यह काफी बार सरकार लिख चुकी, लेकिन होता क्या था कि निर्माण का जो काम होता था, यही केंद्र बिंदु से कंट्रोल लाइन की दूरी भवन निर्माण क्रियाओं को कंट्रोल करना था। यह आपका जो 5 फरवरी हाई कोर्ट का जो ऑर्डर है, उसमें यही कहा गया है, पैराग्राफ नंबर, ओनली रेगुलेटेड कंस्ट्रक्शन जो स्टैच्युटरी परमिशन है, वह ही कंट्रोल लाइन में वह रेगुलेटेड किए जाएंगे और पैराग्राफ नंबर 10 का वह मैंने पीछे बताया वही चीजें हैं।

[12:11]यह 75 मीटर का है जो 40 है आपका, इसके अंदर तो हटेगा ही हटेगा। इसमें इनकी परमिशन वाले वैलिड रहेंगे बाकी नहीं और यह वाले सेफ हैं। और यह अब जो काफी जो शुरुआत में जो सवाल थे, उन सवालों का मैं जवाब दे देता हूं। जो मुख्य जो सवाल थे, यह आपकी टेबल है। रोड लैंड और बाउंड्री ले। यह जो इसके अंदर तो पूरा अवैध है, बाउंड्री लाइन के अंदर भी कोई निर्माण नहीं कर सकते। इसमें वैधानिक अनुमति, इसमें NHAI और PWD अनुमति है, तो निर्माण कर पाओगे, भविष्य में भी और अभी भी वही बचे हैं। बाकी किसी की अनुमति कुछ भी नहीं चलेगा। अब जो मुआवजा मिलेगा, कोई मुआवजा नहीं मिलेगा। क्योंकि जमीन आपकी है, कृषि विभाग है, तो आपकी कृषि की जमीन है, आप खेती कर सकते हो, कोई निर्माण नहीं कर सकते, कोई मुआवजा नहीं मिलेगा, जमीन आपके पास है। कौन से वैध हैं, मैंने यह बता दिया। और कौन से, यह इनकी अनुमति है तो हटाए नहीं जाएंगे, जो पहले से अनुमति ली हुई है, वह एक बार रिव्यू जरूर होगी और यह बहुत पहले से बना हुआ है। अन्य विभागों को लेकर बता दिया मैंने और सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिलेगी। क्योंकि यह नियम बने हुए हैं। हाई कोर्ट ने मात्र बनाए हुए नियम को लागू करवाया, हाई कोर्ट ने कुछ नहीं किया। सख्त से लागू करवाया है। हाई कोर्ट ने कोई डिस्टेंस कोई दूरी तय नहीं करी 40-75। जो NHAI और जो नियम बने हुए थे, उनको सख्ती से लागू करवाया। अन्यथा सरकार के पास शिकायतें पहुंचती थी, सरकार लेटर लिख देती थी, परिपत्र लिख देती थी और एक कानूनी कार्यवाही और वह हो जा एक फॉर्मेलिटी हो जाती थी कागजी कार्यवाही और निर्माण बनते रहते थे और NHAI कभी उसका इतना सीरियस लेते नहीं थे। लेकिन जब यह जोधपुर वाली घटना घटित हुई और उसके बाद यह सीरियस लेकर के हाई कोर्ट ने सख्ती से आदेश पालन करवाया। अब जो यह पूरे नेशनल हाईवे और राज्य हाईवे सबके लिए है। शहर के अंदर आएंगे जयपुर सिटी और वहां पर 75 मीटर की जरूरत नहीं है, पीछे वाले वीडियो में मैंने वह टेबल दिखाई है, उसमें 3 से 6 मीटर का ही लिखा हुआ है नेशनल हाईवे और जो शहरी क्षेत्र है। अब वहां पर मास्टर प्लान लागू होता है तो वहां 40 वहां यह 75 मीटर वाला नियम इतनी दूरी की जरूरत नहीं है, कम दूरी की जरूरत है। और मैंने बता दिया कि परमिशन मात्र दो की वैलिड है, बाकी किसी की भी परमिशन हो, आगे भविष्य में भी और पहले भी जिनकी ली हुई है उनके नहीं हटेंगे, बाकी सारे हटेंगे। और यह कोई अतिक्रमण नहीं था, निर्माण वैध और अवैध थे। जो नियमों की अब सरकार अब काफी लोगों के मैसेज आते हैं कि सर हमारी क्या गलती है, हमने पंचायत से पट्टा लिया, हमने भूमि कन्वर्जन करवा लिया, विद्युत विभाग से कनेक्शन, नगरपालिका से तमाम अलग-अलग विभागों का। हाई कोर्ट ने यह कहा कि विभागों में आपस में कम्युनिकेशन का अभाव था और सब अपनी-अपनी मनमर्जी एडमिनिस्ट्रेशन फेलियर बताया गया उस चीज को, उसकी वजह से सब परमिशन दे देते थे और उसकी वजह से ही हुआ, लेकिन कानून और नियम के तहत उसको फॉलो करवाया और आगे के लिए सभी यह परमिशन भी नहीं देंगे, सबको बाउंड कर दिया। धन्यवाद जुड़े रहें, चैनल को सब्सक्राइब करें।

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