[0:00]आकाश ये वही जगह है जहां इंसान ने अपनी सबसे बड़ी उड़ाने भरी और वहीं उसकी सबसे रहस्यमई कहानियां भी छिपी पड़ी हैं। हजारों फीट ऊपर बादलों के बीच जब सब कुछ सामान्य दिखता है तभी अचानक एक विमान बिना कोई निशान छोड़े गायब हो जाता है। कई बार रेडियो पर आखिरी शब्द रहस्य में बदल जाते हैं। और पूरे विमान का सफर मानो हवा में ही गुम हो जाता है। नमस्कार काफी रिसर्च और मेहनत के बाद आज हम इस वीडियो में दुनिया के 10 खतरनाक विमान घटनाओं के बारे में बात करने जा रहे हैं। जिनमें से कुछ के बारे में आप बहुत कम जानते होंगे या फिर बिल्कुल भी नहीं जानते होंगे। बस ध्यान रखें कि वीडियो अगर इंटरेस्टिंग और इनफॉर्मेटिव लगे तो हमारी कड़ी मेहनत के लिए अपना रिस्पांस जरूर दीजिएगा। वेलकम टू रहस्यमई सफर यूट्यूब चैनल। यहां सच्चाई कभी-कभी कल्पना से भी ज्यादा अजीब होती है। नंबर 10 16 मार्च 1962 अमेरिकी सेना के 93 सैनिक और 11 क्रू मेंबर फ्लाइंग टाइगर लाइन फ्लाइट 739 में सवार हुए। यह उड़ान गुआम से वियतनाम की ओर जा रही थी। सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन प्रशांत महासागर के बीच आसमान में पहुंचकर इस विमान ने अचानक रेडियो संपर्क तोड़ दिया। ना कोई आपात संदेश, ना कोई चेतावनी मानो पलक झपकते ही पूरा जहाज गायब हो। जैसे ही संपर्क टूटा अमेरिकी सेना हरकत में आ गई। तुरंत ही इतिहास का सबसे बड़ा हवाई और समुद्री खोज अभियान शुरू किया गया। गुआम से लेकर फिलीपींस तक का इलाका खंगाल डाला गया। नौसेना के जहाज, हवाई जहाज, हजारों लोग सभी दिन रात तलाश करते रहे, लेकिन ना तो विमान का कोई टुकड़ा मिला, ना ईंधन का कोई निशान, ना ही यात्रियों का कोई सबूत। विमान मानो पानी में नहीं, बल्कि हवा में ही समा गया। गवाहों के अनुसार कुछ जहाजों ने उस इलाके में एक तेज चमक और आग का गोला देखा था। लेकिन जांच कभी यह साबित नहीं कर पाई कि वह सच में वहीं विमान था। आधिकारिक रिपोर्ट ने इसे अज्ञात कारणों से हुई गुमशुदगी बताया। सबसे रहस्यमई बात यह थी कि इतने बड़े विमान के अचानक गायब हो जाने के पीछे कोई ठोस वजह सामने नहीं आई। आज 60 से अधिक साल गुजर चुके हैं। उस हादसे के पीड़ित सैनिकों और क्रू मेंबरों की याद में अमेरिका में एक स्मारक बनाया गया है। लेकिन विमान कहां गया, कैसे लापता हुआ और यात्रियों का क्या हुआ, इन सवालों का जवाब आज भी किसी के पास नहीं है। यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि एक ऐसा रहस्य है जिसने साबित कर दिया कि आधुनिक तकनीक और ताकतवर सेना होने के बावजूद आसमान और समंदर के बीच कुछ ऐसे राज छिपे हैं जिन तक इंसान की पहुंच अब तक नहीं हो पाई है। नंबर नौ 16 अगस्त 1942 द्वितीय विश्व युद्ध अपने चरम पर था। अमेरिकी नौसेना का एक ब्लिंप जिसे एल8 कहा जाता था, सुबह-सुबह सैन फ्रांसिस्को से उड़ान भरता है। इसका काम था समुद्र के ऊपर गश्त करना और दुश्मन पनडुब्बियों पर नजर रखना। इस ब्लिंप पर दो अनुभवी नौसैनिक अधिकारी सवार थे। उड़ान पूरी तरह सामान्य थी, लेकिन कुछ घंटों बाद जो हुआ उसने इसे इतिहास का सबसे रहस्यमय वाक्या में से एक बना दिया। दोपहर तक अचानक ब्लिंप का रेडियो संपर्क टूट गया। जमीन से लोग देखते हैं कि ब्लिंप शहर के ऊपर मंडरा रहा है। धीरे-धीरे वह बिना किसी नियंत्रण के समुद्र तट से होते हुए डेली सिटी की ओर बढ़ता है। आखिरकार यह एक घर और कार से टकराता है और जमीन पर गिर जाता है। लेकिन असली रहस्य इसके बाद सामने आता है। अंदर कोई नहीं था। दोनों नौसैनिक अधिकारी कहीं गायब हो चुके थे। जांचकर्ताओं ने ब्लिंप की तलाशी ली। हर चीज अपनी जगह पर थी। रेडियो काम कर रहा था, इंजन बिल्कुल सही था। लाइफ बोट और पैराशूट भी जस्त के तस रखे थे। किसी संघर्ष या खराबी का कोई निशान नहीं मिला। सवाल उठता है, तो फिर दोनों सैनिक कहां गए। ना तो वे समुद्र में मिले ना जमीन पर। आज तक उनका कोई सुराग नहीं मिला। यह ब्लिंप बाद में फिर से सेवा में आया और कई साल नौसेना के काम में इस्तेमाल हुआ। लेकिन इसके साथ उड़ान भरने वाले दोनों सैनिक हमेशा के लिए रहस्य बन गए। सोचिए युद्ध का समय हर तरफ चौकसी और ऐसे हालात में दो प्रशिक्षित सैनिक हवा में उड़ते ब्लिंप से गायब हो जाएं। बिना कोई निशान छोड़े। यह घटना आज भी अमेरिकी विमानन इतिहास की सबसे बड़ी पहेली बनी हुई है जो हमें याद दिलाती है कि कभी-कभी सच्चाई आसमान के सन्नाटे में खो जाती है। नंबर आठ 23 जून 1950 की रात। अमेरिका के आसमान में उड़ रहा एक यात्री विमान जिसे न्यूयॉर्क से सेटल जाना था और मिनियापोलिस में इसका एक स्टॉप था। इस विमान पर 55 यात्री और तीन क्रू मेंबर सवार थे। उड़ान बिल्कुल सामान्य थी, लेकिन जब यह मिशिगन झील के ऊपर पहुंचा तब सब कुछ अचानक बदल गया। आधी रात पायलट ने रेडियो पर मैसेज भेजा, मौसम खराब है, तूफान तेज है और ईंधन खत्म होने का खतरा है। उसने कम ऊंचाई पर उड़ने की अनुमति मांगी, लेकिन उसके कुछ ही देर बाद रेडियो खामोश हो गया। इसके बाद विमान कभी दिखाई नहीं दिया। तुरंत बड़े स्तर पर खोज अभियान शुरू हुआ। अमेरिकी कोस्ट गार्ड, नौसेना और सैकड़ों लोगों ने मिशिगन झील को छान मारा। अगले दिनों में झील की सतह पर केवल कुछ छोटे मलबे मिले। सीट कुशन, आर्म रेस्ट और इंसानी अवशेषों के टुकड़े, लेकिन विमान का मुख्य ढांचा, इंजन और ब्लैक बॉक्स सब कुछ गहराई में समा गया। झील के तल की बार-बार तलाशी ली गई, लेकिन किसी को कुछ नहीं मिला। आज 70 से ज्यादा साल गुजर चुके हैं। कई प्रयास हुए, आधुनिक तकनीक का सहारा लिया गया। सोनार और डाइविंग मिशन चलाए गए, लेकिन विमान अब तक लापता है। मिशिगन झील की गहराइयों में यह हादसा आज भी दफन है। सबसे बड़ा सवाल यही है, क्या यह सिर्फ मौसम का असर था या फिर कोई और वजह? कोई तकनीकी खराबी या ऐसा कुछ जिसे इंसान अब तक समझ नहीं पाया। नंबर सात 2 अगस्त 1947 दक्षिण अमेरिका के एंडीज पर्वतों के ऊपर आसमान में उड़ रहा था एक ब्रिटिश एयरलाइंस का विमान जिसका नाम था स्टारडस्ट। यह विमान ब्यूनस आयर्स से सैंटियागो की ओर जा रहा था। सवार थे 11 लोग, यात्री और क्रू। उड़ान बिल्कुल सामान्य थी, लेकिन जैसे-जैसे विमान पहाड़ों के करीब पहुंचा, अचानक उसकी कहानी रहस्य में बदल गई। आखिरी बार कंट्रोल टावर को जो संदेश मिला, वह था एक छोटा सा कोड। स्टैंडेक इस शब्द का मतलब आज तक कोई नहीं समझ पाया। पायलट ने यह संदेश बार-बार दोहराया और फिर रेडियो हमेशा के लिए खामोश हो गया। विमान आसमान से गायब हो गया। ना कोई धमाका सुना गया, ना कोई मलबा मिला। उस समय के खोजी दल ने एंडीज की बर्फीली चोटियों में हफ्तों तलाशी, लेकिन विमान का कोई सुराग नहीं मिला। मानो पहाड़ों ने उसे निगल लिया हो। सालों तक यह कहानी एक रहस्य बनी रही। लोगों ने अलग-अलग अनुमान लगाए। क्या यह तकनीकी खराबी थी, कोई विस्फोट या फिर कुछ और। यहां तक कि बाहरी ग्रहों के शामिल होने तक के अनुमान लगाए गए, लेकिन सच कोई नहीं जान पाया। फिर आधी सदी से भी ज्यादा समय बाद 1998 में एंडीज की बर्फ पिघलने लगी। तभी पहाड़ों ने अपने सीने में दबा हुआ राज बाहर निकाला। स्टारडस्ट का मलबा और यात्रियों के अवशेष आखिरकार मिले। जांच में पता चला कि खराब मौसम और गलत अनुमान के कारण विमान पहाड़ से टकराया था। लेकिन उस रहस्यमई शब्द एसटीईएनडीसी स्टैंडेक का राज आज भी अधूरा है। क्या यह कोई तकनीकी कोट था या पायलट की आखिरी चीख? नंबर छह 5 दिसंबर 1945 फ्लोरिडा से पांच अमेरिकी नेवी बमवर्षक विमान आसमान में उड़ान भरते हैं। यह एक साधारण ट्रेनिंग मिशन था जिसे फ्लाइट 19 कहा गया। इन विमानों पर 14 प्रशिक्षित सैनिक सवार थे। मिशन शुरू हुआ, लेकिन थोड़ी ही देर में पायलटों के रेडियो संदेश कुछ और ही कहानी बताने लगे। रेडियो पर आवाज आई हमारा कंपास काम नहीं कर रहा। हमें समझ नहीं आ रहा कि हम कहां हैं। फिर एक और संदेश समंदर अजीब लग रहा है जैसे सफेद हो गया हो। इसके बाद धीरे-धीरे रेडियो से आती आवाजें धीमी होती गई और अंत में सब कुछ खामोश हो गया। पांचों विमान और उनमें बैठे सभी सैनिक हमेशा के लिए लापता हो गए। तुरंत खोज अभियान शुरू किया गया। दर्जनों जहाज और विमान बरमूडा ट्रायंगल के उस इलाके में भेजे गए। लेकिन ना तो कोई मलबा मिला ना ईंधन का निशान ना ही किसी सैनिक का कोई सुराग। और रहस्य को और गहरा कर देने वाली बात यह थी कि खोज में गया एक बचाव विमान भी अचानक गायब हो गया। उसके 13 लोग भी लौट कर कभी नहीं आए। आधिकारिक जांच ने इसे नेविगेशन की गलती और ईंधन खत्म होने की संभावना बताया। लेकिन सवाल यह है कि अगर विमान समुद्र में गिरते तो मलबा क्यों नहीं मिला। आखिरकार इतने बड़े इलाके में एक भी ठोस सबूत क्यों सामने नहीं आया। आज 75 साल से ज्यादा वक्त गुजर चुका है। फ्लाइट 19 के सैनिकों को अमेरिकी नेवी ने समंदर में खोए हुए घोषित कर दिया, लेकिन यह घटना अब भी बरमूडा ट्रायंगल के सबसे बड़े रहस्यों में गिनी जाती है। सोचिए प्रशिक्षित सैनिक, आधुनिक विमान और दुनिया की सबसे ताकतवर नेवी, फिर भी सब कुछ गायब। यह कहानी आज भी हमें याद दिलाती है कि धरती और समंदर के कुछ हिस्सों में ऐसे रहस्य छिपे हैं जहां इंसानी समझ अब तक पहुंच ही नहीं पाई है। नंबर पांच 1937 का साल। दुनिया की सबसे मशहूर महिला पायलट अमेलिया ईयरहार्ट अपने सबसे बड़े सपने को पूरा करने निकली थी। पूरी धरती का चक्कर हवाई जहाज से लगाना। उनका साहस और जुनून उन्हें उस दौर की एक दंत कथा बना चुका था। लेकिन इस सफर का सबसे कठिन हिस्सा तब शुरू हुआ जब वे प्रशांत महासागर के बीच एक छोटे से द्वीप हाउलैंड आइलैंड की ओर बढ़ रही थी। 2 जुलाई 1937 की सुबह उनका विमान उड़ान पर था। रेडियो संपर्क लगातार कमजोर हो रहा था। आखिरी बार सुनी गई उनकी आवाज थी हम अपनी स्थिति ठीक से नहीं देख पा रहे ईंधन खत्म हो रहा है। इसके कुछ ही मिनट बाद सन्नाटा छा गया। अमेलिया और उनके नेविगेटर फ्रेड नूनन दोनों हमेशा के लिए गायब हो गए। तुरंत अमेरिकी नौसेना और तटरक्षक बल ने खोज अभियान शुरू किया। हजारों मील का समुद्र छाना गया, लेकिन विमान का एक भी टुकड़ा नहीं मिला। ना ही कोई यात्री, ना ही कोई स्पष्ट सुराग। मानो अमेलिया अपने सपनों के साथ हवा में ही खो गई हों। दशकों बाद भी यह रहस्य कायम है। कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि उनका विमान समुद्र में गिर गया और गहराइयों में दब गया। जबकि कुछ सिद्धांत कहते हैं कि वे किसी द्वीप पर उतरीं और वहीं पर जीवन का अंत हुआ। हाल के सालों में कुछ धातु के टुकड़े और संभावित सबूत मिले। लेकिन वे भी पक्के तौर पर अमेलिया के विमान से जुड़े साबित नहीं हुए। आज लगभग नौ दशक बाद भी अमेलिया ईयरहार्ट सिर्फ एक पायलट नहीं बल्कि एक रहस्य है। उनकी गुमशुदगी ने आसमान को यह राज सौंप दिया कि इंसान चाहे कितना भी बहादुर क्यों ना हो प्रकृति और समय के सामने कुछ कहानियां हमेशा अनकही रह जाती हैं। यही वजह है कि उनका नाम आज भी साहस और रहस्य का प्रतीक माना जाता है। नंबर चार जनवरी 1949। आसमान में उड़ रहा था ब्रिटिश साउथ अमेरिकन एयरवेज का बड़ा यात्री विमान स्टार एरियल। यह विमान बरमूडा से किंगस्टन जमैका की ओर जा रहा था। उड़ान पर सात क्रू और 13 यात्री सवार थे। सब कुछ सामान्य लग रहा था, मौसम साफ था और विमान बिना किसी रुकावट के उड़ रहा था। लेकिन कुछ ही देर बाद स्टार एरियल अचानक रेडियो संपर्क से कट गया और फिर वह हमेशा के लिए गायब हो गया। पायलट ने आखिरी बार मौसम की रिपोर्ट भेजी थी। उसने ना किसी खतरे का जिक्र किया ना किसी आपातकालीन संदेश की कोशिश की। इसके बाद रेडियो पूरी तरह शांत हो गया। जब विमान ने तय समय पर किंगस्टन नहीं पहुंचा तो बड़े पैमाने पर खोज शुरू हुई। अमेरिकी, ब्रिटिश और कैरेबियन क्षेत्रों की टीमें लगीं, लेकिन ना विमान का कोई मलबा मिला ना यात्रियों का कोई सुराग। यह घटना बरमूडा ट्रायंगल के रहस्य से भी जुड़ गई। कहा गया कि क्या स्टार एरियल उसी अनदेखी ताकत का शिकार हुआ जिसने कई जहाजों और विमानों को निगल लिया। लेकिन आधिकारिक रिपोर्टों में तकनीकी खराबी और पायलट की किसी अनजानी मुश्किल को संभावित कारण माना गया। बावजूद इसके खोजी अभियानों की नाकामी ने इस घटना को और भी रहस्यमय बना दिया। स्टार एरियल का गायब होना आज तक अनसुलझा है। 20 लोग एक झटके में गुम हो गए और उनका नाम सिर्फ इतिहास की एक रहस्यमय फाइल में दर्ज रह गया। आज जब हम इस घटना को याद करते हैं तो यह सवाल उठता है आखिर वह विमान कहां गया? क्या यह किसी हादसे का शिकार हुआ या वाकई किसी ऐसे रहस्य में समा गया जिसे आज तक विज्ञान भी नहीं समझ पाया? नंबर दो 8 मार्च 2014। मलेशिया की राजधानी क्वालालंपुर से एक विमान उड़ान भरता है। गंतव्य था बीजिंग। विमान में 239 लोग सवार थे। उड़ान सामान्य थी, लेकिन कुछ ही देर बाद यह कहानी रहस्य में बदल गई। रडार पर विमान आखिरी बार दिखाई दिया, फिर अचानक उसका संपर्क टूट गया। ना कोई आपात संदेश, ना चेतावनी मानो आसमान ने पूरे विमान को निगल लिया हो। सबसे अजीब बात यह थी कि जांच में पता चला विमान ने अपनी दिशा बदल ली थी और वह हजारों किलोमीटर तक ऐसे रास्ते पर उड़ता रहा जहां उसे जाना ही नहीं था। सवाल यह उठता है कि क्या यह पायलट का फैसला था या किसी और ने विमान को नियंत्रित कर लिया था। दुनिया ने इस गुमशुदगी की तलाश के लिए अब तक का सबसे बड़ा और महंगा खोज अभियान शुरू किया। समुद्र की गहराइयां खंगाली गई, रडार डेटा और सैटेलाइट सिग्नल खंगाले गए, लेकिन नतीजा लगभग शून्य। सिर्फ कुछ मलबे के टुकड़े बाद में हिंद महासागर के किनारों पर मिले जिन्हें इसी विमान का हिस्सा माना गया। आधिकारिक रिपोर्ट ने कहा कि विमान शायद समुद्र में गिर गया, लेकिन यह कैसे और क्यों हुआ इसका जवाब अब तक कोई नहीं दे पाया। कुछ विशेषज्ञ इसे तकनीकी खराबी मानते हैं, कुछ इसे इंसानी हस्तक्षेप तो कुछ इसे अब तक का सबसे बड़ा अनसुलझा रहस्य। आज एक दशक से ज्यादा समय बीत चुका है। यात्रियों के परिवार अब भी जवाब तलाश रहे हैं और यह घटना आधुनिक विमानन के इतिहास की सबसे चौंकाने वाली गुत्थी बनी हुई है। नंबर एक जनवरी 1948। ब्रिटिश साउथ अमेरिकन एयरवेज का एयरक्राफ्ट स्टार टाइगर बरमूडा की ओर उड़ान भरता है। यह एरो ट्यूडर सीरीज का चौथा वर्जन जो एक यात्री विमान था। इसमें कुल 31 लोग सवार थे और उड़ान सामान्य थी, मौसम शांत था और सब कुछ तय प्लान के अनुसार चल रहा था। लेकिन सुबह होते-होते यह विमान अचानक आसमान से गायब हो गया। पायलट ने आखिरी रेडियो संदेश में कहा था कि सब कुछ ठीक है और विमान सुरक्षित ऊंचाई पर उड़ रहा है। ना किसी खराबी का जिक्र हुआ ना किसी मदद की पुकार आई और इसके तुरंत बाद रेडियो साइलेंट हो गया। जब विमान समय पर बरमूडा नहीं पहुंचा तो ब्रिटिश और अमेरिकी नौसेना ने समुद्र और आसमान दोनों जगह बड़े पैमाने पर खोज अभियान चलाया। लेकिन ना तो कोई मलबा मिला ना ईंधन का निशान और ना ही यात्रियों का कोई सुराग। यह घटना बरमूडा ट्रायंगल के रहस्य से गहराई से जुड़ गई। कई विशेषज्ञों ने कहा कि शायद खराब मौसम या नेविगेशन की गलती इसका कारण हो सकती है। लेकिन सवाल यह है अगर वाकई ऐसा हुआ था तो विमान का एक भी टुकड़ा क्यों नहीं मिला। बरसों की खोज के बावजूद आज तक स्टार टाइगर का कोई अता पता नहीं चला। यह घटना आधिकारिक तौर पर अनसुलझी मानी जाती है। वैज्ञानिकों ने तकनीकी संभावनाओं को माना, लेकिन रहस्यमई गुमशुदगी ने इसे पूरी तरह से इतिहास का हिस्सा बना दिया।
[18:53]नमस्कार। फिलहाल अब वीडियो समाप्त होता है। फिर मिलेंगे अगले वीडियो में कुछ बेहतर और कुछ रोचक जानकारियों के साथ। थैंक्स फॉर वाचिंग



