Thumbnail for ये भ्रष्टाचार नहीं तो क्या है by Shivangi Sharma | Poetry on Corruption by bop

ये भ्रष्टाचार नहीं तो क्या है by Shivangi Sharma | Poetry on Corruption

bop

4m 32s640 words~4 min read
YouTube auto captions
Transcript source

YouTube auto captions

This transcript was extracted from YouTube's auto-generated caption track. The transcript below is server-rendered so it can be read, searched, cited, and shared without opening the original YouTube player.

Pull quotes
[0:01]मैं शिवांगी शर्मा आप सबके समक्ष भ्रष्टाचार यानी कि करप्शन के ऊपर अपनी कविता प्रस्तुत करने जा रही हूं जिसका शीर्षक है मेरे मुल्क के मालिक हो। मेरे मुल्क के मालिक को, आपने यह देश की क्या हालत बना दी?
[0:01]हम आजादी का जश्न उसी दिन मनाएंगे। हम आजादी का जश्न उसी दिन मनाएंगे जिस दिन आप लाल किले पर नहीं हमारे दिलों में झंडा फहराएंगे। जिस दिन आप लाल किले पर नहीं हमारे दिलों में झंडा फहराएंगे थैंक्यू।
Use this transcript
Related transcript hubs

[0:01]मैं शिवांगी शर्मा आप सबके समक्ष भ्रष्टाचार यानी कि करप्शन के ऊपर अपनी कविता प्रस्तुत करने जा रही हूं जिसका शीर्षक है मेरे मुल्क के मालिक हो। मेरे मुल्क के मालिक को, आपने यह देश की क्या हालत बना दी? गुलामी ने तो लुटिया डुबोई थी, भ्रष्टाचार के सारे तार आपस में जुड़ गए। ट्यूबलाइट आपका जलाना और फ्यूज हमारे उड़ गए। ऐसी देशभक्ति सबको फले ऐसी देशभक्ति सबको फले, कटोरा लेकर आए थे और सूटकेस भरकर चले। अब देश पर आया अब देश पर आया और आप कुर्सी के सगे हो गए, हरियाली दिखी तो आदमी से गधे हो गए। भूख ने यहां तक तुमको नहीं तोड़ा, भूख ने यहां तक तुमको नहीं तोड़ा पशुओं का चारा तक नहीं छोड़ा। आप ही ने तो कहा था हुजूर हम जब सत्ता में आएंगे, एक-एक भ्रष्टाचारी को बिजली के खंभे से लटकाएंगे आप तो खंबा ही उखाड़ कर ले गए। मेरे मुल्क के मालिको जवाब दो, जवाब दो पिछले 50 सालों का हिसाब दो। आपको क्या मालूम धरती पर कहां गरीबी की रेखा है, आपने हमेशा आसमान से भारत को देखा है। एक वो एक वो जिसने वंदे मातरम गाकर प्राण दिए और एक आप जिसने जन गण मन गाकर प्राण लिए। सत्ता सुंदरी इस कदर भाई कि मां की वंदना तुम्हें रास नहीं आई। जिसे गा गाकर हमारा कंठ थका जिसे गा गाकर हमारा कंठ थका, वो वंदे मातरम हमारा राष्ट्र गायन ना बन सका। आप क्यों अपने को देशभक्तों से तोलते हैं? आप क्यों अपने को देशभक्तों से तोलते हैं, गुलाम हमेशा दूसरे की भाषा बोलते हैं। जो अपनी चमक जो अपनी चमक पराई रोशनी से खोती है जो अपनी चमक पराई रोशनी से खोती है जुगनू की औलाद ऐसी ही होती है। धन्य हो बाबा अंबेडकर आप। धन्य हो बाबा अंबेडकर आप, अच्छा संविधान बनाया गरीबों के बाप चपरासी के लिए एमए और मंत्री के लिए अंगूठा छाप। प्रतिभावान दर दर की ठोकरें खाएं। प्रतिभावान दर दर की ठोकरें खाएं और संविधान के कातिल देश चलाएं। कोना-कोना देश के अपराधियों से भर गया है, कोना-कोना देश के अपराधियों से भर गया है। शास्त्री जी क्या मरे पूरे देश का सपना मर गया है। मगर आप वक्त की आवाज कब सुनते हैं? मगर आप वक्त की आवाज कब सुनते हैं, वो तो हम ही नालायक हैं जो आपको चुनते हैं। हमारा जीना भी देश के लिए भार है। हमारा जीना भी देश के लिए भार है और आपका मरना भी जैसे त्योहार है। वो मातम क्या जिसमें विस्की या रम नहीं होती। वो मातम क्या जिसमें विस्की या रम नहीं होती, आपकी अर्थी भी किसी की शादी से कम नहीं होती। आप तो मरकर भी स्टैचू बनकर जिए जाते हैं। आप तो मरकर भी स्टैचू बनकर जिए जाते हैं, हमें तो कंधे भी किराए पर दिए जाते हैं। राम राज्य के धोबियों सत्ता के लोभियों सीमा पर सर हम कटवाए तोप और बंदूक को तो फेंको, मुंह की मक्खी ही उड़ा कर देखो। कायरता जिस चेहरे का श्रृंगार करती है उस पर मक्खी तक बैठने से इंकार करती है। यह देश की सरहद है। यह देश की सरहद है जहां रोज नई-नई बुलबुले चहकती हैं, सरहदें खुशबू से नहीं खून से महकती हैं। देश आपके अब्बा की जागीर है खाओ। देश आपके अब्बा की जागीर है खाओ, मगर एक बात तो बताओ उस दिन दुनिया का कौन सा वकील लाओगे जिस दिन अपराधियों के कठगरे में हम नहीं तुम नजर आओगे। तब याद आएंगे गुलजारीलाल नंदा। तब याद आएंगे गुलजारी लाल नंदा जब पड़ेगा गले में फांसी का फंदा, तब समझोगे देशद्रोहियों देश भक्त मरकर भी क्यों अमर होता है, भगत सिंह और तुम्हारे फंदे में क्या अंतर होता है? हम आजादी का जश्न उसी दिन मनाएंगे। हम आजादी का जश्न उसी दिन मनाएंगे जिस दिन आप लाल किले पर नहीं हमारे दिलों में झंडा फहराएंगे। जिस दिन आप लाल किले पर नहीं हमारे दिलों में झंडा फहराएंगे थैंक्यू।

Need another transcript?

Paste any YouTube URL to get a clean transcript in seconds.

Get a Transcript