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जब ट्रैन के लोको पायलट को सिग्नल ना मिलने के कारण ट्रैन को रोकना पड़ा।

Network 33

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[0:00]यह है नेटवर्क 33 दोस्तों आज की कहानी हमें भेजी है हमारे एक सब्सक्राइबर आरती जी ने.
[0:00]तो सबसे पहले आरती जी आपका बहुत-बहुत धन्यवाद आपने इस सच्ची घटना को हमारे साथ शेयर करने के लिए.
[0:00]दोस्तों आपको बता दें वैसे तो आरती जी ने यह कहानी हमारे ही दूसरे यूट्यूब चैनल इन डार्क पर पोस्ट की थी.
[0:00]मगर हमें यह कहानी इतनी पसंद आई कि हम इस कहानी को आज नेटवर्क 33 पर पब्लिश कर रहे हैं.
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[0:00]यह है नेटवर्क 33 दोस्तों आज की कहानी हमें भेजी है हमारे एक सब्सक्राइबर आरती जी ने. तो सबसे पहले आरती जी आपका बहुत-बहुत धन्यवाद आपने इस सच्ची घटना को हमारे साथ शेयर करने के लिए. दोस्तों आपको बता दें वैसे तो आरती जी ने यह कहानी हमारे ही दूसरे यूट्यूब चैनल इन डार्क पर पोस्ट की थी. मगर हमें यह कहानी इतनी पसंद आई कि हम इस कहानी को आज नेटवर्क 33 पर पब्लिश कर रहे हैं. तो चलिए बढ़ते हैं आरती जी की कहानी की ओर एक ट्रेन अपनी निर्धारित समय से काफी देरी से चल रही थी. कारण था सर्दियों के मौसम में धुंध का अधिक होना ऊपर से रात का वक्त ट्रेन में मौजूद आरती के नाना जी जो कि उस ट्रेन के लोको पायलट थे. कि उन्हें एक बार फिर ट्रेन को रोकने का सिग्नल मिला दरअसल आने वाले स्टेशन पर एक ट्रेन सिग्नल ना मिलने के कारण पहले से ही खड़ी थी. कुछ देर बाद आरती के नाना जी को वहां से चलने का सिग्नल मिला तभी उन्होंने ट्रेन का इंजन स्टार्ट किया और चलने से पहले चेतावनी के तौर पर ट्रेन का हॉर्न बजाया. ताकि अगर कोई भी ट्रेन की पटरी के आसपास हो या पटरी पर हो तो वह वहां से हट जाए तीन बार हॉर्न देने के बाद वो आगे बस चलने ही वाले थे कि उनकी नजर सामने पटरियों पर गई. जहां उन्होंने देखा कि पटरियों पर कोई लेटा हुआ है यूं तो धुंध की वजह से कुछ साफ-साफ नहीं दिख रहा था. मगर ट्रेन की लाइट से पता चल रहा था कि कोई तो है जो सफेद कपड़े पहने पटरियों पर लेटा है. आरती के नाना जी उसे वहां देखकर हैरान थे कायदे से तो उसे अब तक हॉर्न की आवाज सुनने के बाद पटरियों से हट जाना चाहिए था. मगर वो तो अपनी जगह से टस से मस ही नहीं हो रहा था आरती के नाना जी ने ट्रेन के विंडो से उसे आवाज देते हुए कहा. अरे भाई हॉर्न की आवाज सुनाई नहीं दे रही क्या चलो अब हट भी जाओ पटरियों से मगर उनके कई बार कहने के बावजूद भी वह वहीं ज्यों का त्यों ही पड़ा रहा. अब आरती के नाना जी को गुस्सा आने लगा था वह मन ही मन सोच रहे थे कि कैसा आदमी है यह. इतनी तेज हॉर्न की आवाज से भी इसे कुछ फर्क नहीं पड़ा वो यह सोचते हुए ट्रेन से नीचे उतरे और वह उसकी ओर बढ़े. जब आरती के नाना जी उसके करीब पहुंचे तो उन्हें पता चला कि वो एक 15 से 16 साल तक का लड़का है. आरती के नाना जी ने फिर से उस लड़के से कहा तुम्हें मेरी ही ट्रेन मिली है मरने के लिए. यह बोलते हुए आरती के नाना जी आगे बढ़ ही रहे थे कि वो लड़का एकदम से खड़ा हो गया उस लड़के को खड़ा होता देख आरती के नाना जी भी एकदम से रुक गए. आरती के नाना जी अभी उस पर चिल्ला ही रहे थे कि वो लड़का अजीब सी चाल में उनकी ओर बढ़ने लगा. पहले तो वह लड़का अपनी मुंडी झुकाए हुए आरती के नाना जी की ओर बढ़ रहा था जब वह आरती के नाना जी के करीब पहुंचा तो उसने अपनी मुंडी ऊपर की तो उसकी नजर सबसे पहले आरती के नाना जी के गर्दन पर गई. वह लड़का आरती के नाना जी की गर्दन की ओर घूर ही रहा था कि तभी ट्रेन में मौजूद आरती के नाना जी के सहकर्मियों की चिल्लाने की आवाज उन्हें सुनाई दी. जब उन्होंने पीछे मुड़कर देखा तो पाया कि उनके साथी उन्हें ट्रेन में तुरंत ही वापस आने के लिए कह रहे हैं. साथ ही वो सारे काफी डरे हुए भी लग रहे थे आरती के नाना जी समझ नहीं पा रहे थे कि अचानक ही उनके साथियों को क्या हो गया. उन्होंने अपने साथियों को जवाब देते हुए कहा, हां हां आता हूं पहले इस लड़के से तो निपट लूं. यह कहकर वो वापस सामने की ओर मुड़े तो वो लड़का उनसे काफी दूर खड़ा था और उन्हें घूर रहा था. आरती के नाना जी का गुस्सा अभी शांत नहीं हुआ था मगर पहले ही उन्हें काफी देर हो चुकी थी. और वह अब और देर नहीं कर सकते थे लिहाजा वो वापस ट्रेन के इंजन में पहुंचे जहां उनके साथियों ने उनसे कहा कि तुम अभी-अभी मरने से बचे हो. वह कोई लड़का नहीं था तुमने शायद उसके पैरों को ध्यान से नहीं देखा उस लड़के के पैर उल्टे थे. अपने साथियों की बात सुनने के बाद वह एकदम से सदमे में आ गए तभी उन्होंने मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत ही ट्रेन स्टार्ट की और वो वहां से निकल गए. मगर रास्ते भर उनके मन में एक ही ख्याल आ रहा था कि वो तो मुझे कुछ भी कर सकता था तभी उन्हें ध्यान आया कि वो लड़का उनकी गर्दन की तरफ देख रहा था. फिर जब उन्होंने अपनी गर्दन पर हाथ फेरा तो उन्होंने पाया कि उन्होंने अपने गले में बजरंगबली का एक लॉकेट पहना हुआ है. तभी उन्हें एहसास हुआ कि शायद उनकी जान बजरंगबली की वजह से बच गई तो दोस्तों इस कहानी में बस इतना ही. अगर आपके पास भी आरती जी की तरह ऐसी कहानियां है तो हमारे साथ शेयर करना ना भूले. तो मैं आपका दोस्त राजकुमार जल्दी ही मिलूंगा शायद आप ही की भेजी हुई एक नई कहानी के साथ तो तब तक के लिए बाय एंड टेक केयर.

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