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Who Was Samson And Delilah | Strongest Man In History | History Of Samson | Almufeed Islamic

Al Mufeed Islamic

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[0:00]बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम अस्सलाम वालेकुम। नाजरीन तारीख के औरक और इसराइली रिवायत में सैमसन एक ऐसा नाम है जिसकी ताकत महज एक दास्तान नहीं बल्कि एक मौजजा समझी जाती थी। यह दास्तान है बनी इसराइल के उस गैर मामूली इंसान की जिसे खुदा ने एक अजीम मकसद के तहत मुंतखब किया था। वह आम इंसानों जैसा नहीं था बल्कि कुदरत ने उसे ऐसी हैरानकुन ताकत से नवाजा था कि वो तनहा हजारों दुश्मनों का मुकाबला करने की सलाहियत रखता था। मैदान-ए-जंग में उसकी मौजूदगी ही दुश्मनों के हौसले पस्त करने के लिए काफी होती थी। उसकी कुवत महज जिस्मानी ताकत नहीं थी बल्कि उसके पीछे एक इलाही राज पोशीदा था। जो उसे दूसरों से मुनफरिद बनाता था। सैमसन की जिंदगी ताकत, बहादुरी और फतुहात से भरपूर थी। लेकिन उसी जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आया जहां मोहब्बत ने खामोशी से कदम रखा। बज़ाहिर नरम और पुरकशिश महसूस होने वाला यह जज्बा रफता-रफता उसकी सबसे बड़ी कमजोरी में बदलने लगा। वह इंसान जो दुश्मनों के निरखे में भी नाकाबिल-ए-शिकस्त रहता था दिल के हाथों कमजोर पड़ने लगा। यही वह लम्हा था जहां उसकी बेमिसाल कुवत के पीछे छुपा राज खतरे में पड़ गया और उसकी जिंदगी एक ऐसे अंजाम की तरफ बढ़ने लगी जिसका तसवुर भी कभी मुमकिन ना था। आज की इस वीडियो में हम सैमसन की हैरान कुन, सनसनीखेज और सबक आमोज दास्तान बयान करने जा रहे हैं। नाजरीन तारीखी रिवायत बताती हैं कि हजरत मूसा अलैहिस सलाम के इस दुनिया से पर्दा फरमाने के बाद वक्त के साथ-साथ कौम-ए-बनी इसराइल के हालात में एक वाजह तब्दीली आने लगी। इब्तदा में वह अपने नबी की तालीमात पर कायम रहे मगर आहिस्ता-आहिस्ता उनके दिलों में सरकशी ने जन्म लेना शुरू कर दिया। नाफरमानी, बदमाली और बदपरस्ती जैसे आमाल दोबारा उनके मुआशरे में सर उठाने लगे। वह अहकामात जो कभी उनके लिए मशाल-ए-राह थे अब पसे पुश्त डाले जाने लगे। रूहानी कमजोरी और इखलाकी जवाल ने उन्हें इस मकाम पर ला खड़ा किया था। जहां वह एक मर्तबा फिर अपने रास्ते से भटकने लगे। लिहाजा अल्लाह ताला ने बतौर सजा एक ताकतवर और जालिम कौम कौम-ए-अमालका को बनी इसराइल पर मुसल्लत कर दिया। इस कौम ने बनी इसराइल के इलाकों पर यलघार कर दी। उनके शहरों को तबाह किया, उनकी बस्तियां छीन ली और बेशुमार लोगों को कैदी बना लिया। जुल्मो सितम की नई दास्तान रकम होने लगी। बनी इसराइल के मर्द, औरतें और बच्चे खौफ और बेबसी की कैफियत में जिंदगी गुजारने पर मजबूर हो गए। इनकी जमीने, इनकी आजादी और इनकी इज्जत सब कुछ इनसे छीन लिया गया था। कहते हैं इन्हीं कठिन हालात के दौरान बनी इसराइल के एक घराने में एक बच्चे की पैदाइश हुई। इस बच्चे का नाम सैमसन रखा गया। यह बच्चा कबीला दानयाल की नस्ल से ताल्लुक रखता था जो बनी इसराइल के 12 मशहूर कबाल में से एक था। बजाहिर ये एक आम पैदाइश थी मगर इस बच्चे की आमद के पीछे एक खास दुआ और अहद पोशीदा था। सैमसन की पैदाइश से कब इसकी वालिदा ने खुदा के हुजूर निहायत आजिजी से दुआ मांगी थी। उन्होंने इल्तजा की थी अगर उन्हें बेटे की नेमत से नवाजा गया तो वह इसे हर तरह की बुराई से महफूज रखेंगी। वह इसे शराबनोशी और दीगर इखलाकी बुराइयों से दूर रखेंगी। और सबसे बढ़कर यह कि वो इसके बालों को कभी भी नहीं कटवाएंगी। यह एक अहद था, एक वादा जो खुदा से किया गया था। जब सैमसन पैदा हुआ तो इसकी मां ने अपने वादे को पूरी जिंदगी निभाया। इसके बाल कभी नहीं कटवाए गए। वक्त गुजरता गया और सैमसन बचपन से लड़कपन और फिर जवानी की तरफ बढ़ने लगा। मगर जूं-जूं वो बड़ा होता गया उसमें गैर मामूली फर्क नुमाया होने लगा। वो दूसरे लड़कों की निस्बत जिस्मानी तौर पर कहीं ज्यादा मजबूत और ताकतवर था। उसकी कुवत आम इंसानी हुदूद से कहीं आगे दिखाई देती थी। कहते हैं एक दिन जब सैमसन जंगल के रास्ते से गुजर रहा था। उसका सामना अचानक एक शेर से हो गया। आम इंसान के लिए यह लम्हा जिंदगी और मौत के दरमियान हद-ए-फासल होता है। मगर सैमसन के लिए यह एक आजमाइश साबित हुआ। बगैर किसी हथियार के उसने उस खूंखार दरिंदे का मुकाबला किया और उसे बकरी के बच्चे की तरह चीर डाला। नाजरीन यह वाकया ना सिर्फ हैरान कुन था बल्कि एक इशारा भी था। एक ऐसा इशारा जिसके जरिए खुदा सैमसन को यह यकीन दिलाना चाहता था कि वो किसी बड़े मकसद के तहत मुंतखब किया गया है। इस वाकए के बाद सैमसन को इस बात का शिद्दत से एहसास होने लगा कि उसकी गैर मामूली ताकत महज इत्तेफाक नहीं बल्कि खुदा की तरफ से अता करदा एक खास नेमत है। वह जान चुका था कि उसकी जिंदगी आम लोगों की तरह नहीं होगी और उसकी कुवत के पीछे कोई ना कोई इलाही हिकमत जरूर कार फरमा है। कहते हैं जब सैमसन जवानी की दहलीज पर कदम रख चुका तो उसके दिल में एक ख्वाहिश ने जन्म लिया। वह कौम-ए-अमालका के शहर को अपनी आंखों से देखना चाहता था। वही कौम जो उसके लोगों पर जुल्म ढा रही थी। यही सोच उसे अपनी बस्ती से बाहर निकलने पर आमादा करने लगी। चुनांचे एक दिन उसने अपने इलाके को छोड़ा और कौम-ए-अमालका के शहर की जानिब रवाना हो गया। इसराइली रिवायत बताती हैं कि अमालका के शहर में कयाम के दौरान सैमसन की मुलाकात तिमीना नामी एक लड़की से हुई। यह मुलाकात बजाहिर आम सी मुलाकात थी मगर वक्त गुजरने के साथ-साथ यह ताल्लुक गहरा होता चला गया। दोनों मु्तलिफ कौमों से ताल्लुक रखते थे। इनके दरमियान खानदानी और नस्ली इख्तिलाफात मौजूद थे मगर इन सब रुकावटों के बावजूद वो एक दूसरे के करीब आने लगे। दुश्मन कौमों से ताल्लुक रखने के बावजूद इनके दिलों में पैदा होने वाली कुर्बत ने तमाम फासले मिटा दिए। हालात के बरखिलाफ, माहौल के दबाव के बावजूद दोनों ने एक होने का फैसला कर लिया। बिलाखिर शादी की तैयारियां शुरू हुई। यह शादी ना सिर्फ दो अफराद का मिलाप थी बल्कि दो मुखालिफ कौमों के दरमियान एक गैर मामूली ताल्लुक की इलामत भी थी। शादी की तकरीब में अमालका के कई अफराद शरीक हुए। बजाहिर सब कुछ मामूल के मुताबिक था मगर इसी तकरीब के दौरान एक ऐसा वाकया पेश आया जिसने आने वाले वक्त की बुनियाद रख दी। शादी की महफिल में मौजूद अमालका के चंद अफराद के साथ सैमसन की एक शर्त लगी। इब्तदा में यह शर्त महज एक तफरीही मुकाबला मालूम होती थी। मगर अंजाम के ऐतबार से यह एक फैसला कुन मोड़ साबित होने वाली थी। बदकिस्मती से सैमसन इस शर्त में हार गया। शर्त के मुताबिक अब इस पर लाजिम था कि वह 30 कपड़े के थान बतौर मुआवजा अदा करें। यह तय पाया कि जब तक यह रकम अदा नहीं करेगा इसकी बीवी तिमीना अमालका के पास रहेगी। यह सूरतेहाल सैमसन के लिए निहायत तकलीफदेह थी। शादी के फौरन बाद ही अपनी बीवी से जुदाई का तसवुर उसके लिए नाकाबिले बर्दाश्त था। मायूसी और गुस्से के मिले-जुले जज्बात के साथ वह इस शहर से निकल गया ताकि शर्त में हारी गई रकम का इंतजाम कर सके। रिवायत के मुताबिक कुछ दिनों का फासला तय करने पर सैमसन को एक इसराइली काफिला दिखाई दिया। इस लम्हे उसके जहन में एक सख्त फैसला उभरा। उसने काफिले में मौजूद 30 आदमियों के मालो असबाब को छीन लिया। यह कदम इसने महज अपनी शर्त पूरी करने और अपनी बीवी को वापस हासिल करने के लिए उठाया था। मतलूबा सामान हासिल करने के बाद वो फौरन वापस अमालका के शहर की तरफ रवाना हुआ ताकि अपनी जिम्मेदारी पूरी करके तबमीना को अपने साथ ले जा सके। लेकिन जब वह वापस पहुंचा तो मंजर बदल चुका था। तिमीना के वालिद ने उसकी गैर मौजूदगी को दायमी जुदाई समझते हुए अपनी बेटी की शादी किसी और शख्स से कर दी थी। यह खबर सुनकर सैमसन के लिए अपने जज्बात पर काबू रखना मुमकिन ना रहा। उसके अंदर गुस्से की आग भड़क उठी। जिस मकसद के लिए वह शहर से निकला था वही मकसद अब उसके हाथों से फिसल चुका था। गुस्से में आकर उसने अमालका के खेतों को आग लगा दी। खड़ी फसलें जो उनके लिए मुआश जिंदगी का सहारा थी शोलों की नजर हो गई। यह इकदाम महज जाती इंतकाम ना था। बल्कि एक ऐसे गुस्से का इजहार था जो उसके दिल में नाइंसाफी के एहसास से जन्म ले चुका था। इस वाकए ने अमालका को शदीद मुश्तइल कर दिया। बदले के तौर पर अमालका के लोगों ने तिमीना और उसके वालिद को कत्ल कर दिया। इस इकदाम ने मामले को मजीद संगीन बना दिया। अब यह सिर्फ जाती तनाजा ना रहा बल्कि दो कौमों के दरमियान खुली दुश्मनी में तब्दील हो चुका था। लिहाजा अमालका ने बनी इसराइल पर दबाव डालना शुरू कर दिया कि वो सैमसन को इनके हवाले कर दें वरना इन्हें मजीद सख्त नताज का सामना करना पड़ेगा। कहते हैं बनी इसराइल जो पहले ही अमालका के जुल्मो सितम का शिकार थे। मजीद मुसीबत मोल लेने की हिम्मत ना कर सके। अपनी जान बचाने के लिए उन्होंने सैमसन को अमालका के हवाले करने का फैसला किया। यह फैसला बजाहिर उनकी बका के लिए जरूरी था मगर इसके नताज कुछ और ही निकलने वाले थे। जब अमालका ने सैमसन को गिरफ्तार किया तो उन्हें यकीन था कि अब वो उनके काबू में है। मगर हकीकत इसके बरखिलाफ थी। गिरफ्तारी के बावजूद सैमसन ने खुद को बेबस ना होने दिया। मौका मिलते ही उसने महज एक गधे की हड्डी को हथियार बनाया और अमालका के सिपाहियों पर टूट पड़ा। वह सिपाही जो इसे एक कैदी समझ रहे थे लम्हों में उसकी ताकत के सामने बेबस हो गए। उसने तने तनहा 1000 सिपाहियों को मौत के घाट उतार दिया। यह कारनामा देखकर बनी इसराइल में उसकी शोहरत फैल गई क्योंकि सैमसन अब महज एक ताकतवर शख्स नहीं रहा था। बल्कि उम्मीद की इलामत बन चुका था। लोगों ने उसे अपना सरदार तस्लीम कर लिया। दूसरी तरफ अमालका के दिलों में इसका खौफ इस कदर बैठ गया। कि इसके मुकाबले में आने से घबराने लगे। जो कौम कभी बनी इसराइल को गुलामी में रखती थी। अब इसी गुलाम कौम के अंदर बेदार होने वाली ताकत से खौफजदा हो चुकी थी। दूसरी जानिब बनी इसराइल जो कल तक महकूमी की जिंदगी गुजार रहे थे। सैमसन के बल बोते पर आजादी और जंग के ख्वाब देखने लगे। जबकि दूसरी तरफ अमालका की नींदें हराम हो चुकी थी। वो दिन-रात इसी फिक्र में मुब्तिला रहने लगे कि किस तरह इस एक शख्स का मुकाबला किया जाए। और इसी सोच के साथ वह सैमसन के खिलाफ साजिश तैयार करने लगे। जब कौम-ए-अमालका की कोई भी चाल कामयाब ना हो सकी और ना ही वह मैदान-ए-जंग में इसका मुकाबला कर सके तो उन्होंने ताकत के मुकाबले में चालाकी का रास्ता इख्तियार करने का फैसला किया। उन्हें अंदाजा हो चुका था कि यह शख्स महज जिस्मानी कुवत के बल पर नहीं बल्कि किसी पोशीदा राज के सहारे नाकाबिले शिकस्त बना हुआ है। जब तलवार और नेजा बेअसर साबित हुए तो उन्होंने एक ऐसी चाल चलने का मंसूबा बनाया जो बजाहिर नरम मगर अंदर से निहायत खतरनाक थी। अमालका के सरदारों ने अपनी कौम में से दलायला नामी एक औरत का इंतखाब किया। वह निहायत हसीन, दिलकश और पुरकशिश शख्सियत की मालिक थी। उसकी खूबसूरती और अंदाज में एक ऐसी कशिश थी जो देखने वाले को अपनी तरफ माइल कर लेती थी। अमालका के सरदारों ने उसे एक खुफिया जिम्मेदारी सौंपी कि वह किसी भी तरह सैमसन की ताकत का राज मालूम करे। इस काम के बदले में उसे भारी इनाम देने का वादा किया गया। तमाम सरदारों ने मिलकर उसे 1100 चांदी के सिक्के देने की पेशकश की जो उस दौर में बेपनाह दौलत समझी जाती थी। कहते हैं दलायला ने इस जिम्मेदारी को कबूल कर लिया। कुछ ही अरसे बाद वो सैमसन से मिलने में कामयाब हो गई। जब सैमसन की नजर उस पर पड़ी तो वो उसके हुस्न और नाजो-अंदाज से मुतासिर हुए बगैर ना रह सका। रफता-रफता वह उसके करीब आने लगी। और उसका रवैया इतना नरम और दिलनशीन था कि सैमसन उसकी मोहब्बत में खींचा चला गया। वो जो दुश्मनों के मुकाबले में मजबूत और बेखौफ था। एक औरत की मोहब्बत के सामने बेबस हो गया। वक्त गुजरता गया और दोनों एक साथ ज्यादातर वक्त गुजारने लगे। उनकी कुर्बत बढ़ती चली गई और दलायला ने सैमसन के ऐतमाद को हासिल कर लिया। बजाहिर यह एक सादा सा ताल्लुक था मगर इसके पीछे एक खतरनाक मकसद छुपा हुआ था। एक दिन मुनासिब मौका देखकर दलायला ने निहायत नरमी से सैमसन से उसकी ताकत के राज के बारे में पूछा। उसने जानना चाहा आखिर वह कौन सी चीज है जो इसे दूसरों से मु्तलिफ और ताकतवर बनाती है। सैमसन ने इस सवाल को टालने की कोशिश की। वह इस राज को अफशा करने के लिए तैयार ना था। मगर दलायला ने हिम्मत ना हारी। वो बार-बार मु्तलिफ अंदाज में इससे यही सवाल दोहराती रही। कभी मोहब्बत से, कभी नाराजगी से और कभी जज्बाती अंदाज में। उसकी बातों में ऐसी तासीर थी कि सैमसन के लिए इसे नजरअंदाज करना मुश्किल होता जा रहा था। रफता-रफता उसका इसरार बढ़ने लगा यहां तक कि एक दिन उसने सैमसन को धमकी दी कि अगर वो इसे अपना राज ना बताएगा तो वो इससे जुदा हो जाएगी। यह अल्फाज सैमसन के लिए किसी वार से कम ना थे। वह पहले ही उसकी मोहब्बत में गिरफ्तार हो चुका था और उसकी जुदाई का तसवुर उसके लिए नाकाबिले बर्दाश्त था। इश्क के हाथों मजबूर होकर बिलाखिर उसने अपना राज बयान कर दिया। उसने बताया कि जब से वो पैदा हुआ है उसके बाल कभी नहीं काटे गए। यही उसकी ताकत का असल जरिया है। उसकी गैर मामूली कुवत इन्हीं बालों से वाबस्ता है। यह राज वो था जो इसे दुनिया के सामने नाकाबिले शिकस्त बनाता था। और अब यही राज उसकी कमजोरी में तब्दील होने वाला था। एक रात जब सैमसन दलायला की गोद में सर रखे गहरी नींद में सो रहा था। दलायला ने मौका-ए-गनीमत जाना। उसने खामोशी से उसके बाल काट दिए। वो बाल जो उसकी ताकत की इलामत थे। अब जमीन पर बिखर चुके थे। कहते हैं उसी रात अमालका के सिपाहियों ने सैमसन पर हमला कर दिया। मगर इस मर्तबा सूरतेहाल मु्तलिफ थी। वो अपनी साबका ताकत के साथ उनका मुकाबला ना कर सका। उसकी कुवत जैसे उसका साथ छोड़ चुकी थी। अमालका ने उसे गिरफ्तार कर लिया और उसके साथ निहायत जिल्लत-आमेज सुलूक किया। उसे जंजीरों में जकड़ दिया गया और उसकी आंखें निकाल दी गई। बाद अजा उसे एक अंधेरी कोठड़ी में कैद कर दिया गया। जहां वह बेबसी की तस्वीर बनकर रह गया। तारीखी रिवायत के मुताबिक दलायला को इसके किए का भरपूर सिला मिला। अमालका के सरदारों ने अपने वादे के मुताबिक उसे मालो दौलत से नवाजा। 1100 चांदी के सिक्के उसके कदमों में रख दिए गए। वह औरत जिसने मोहब्बत का लिबादा ओढ़कर एक ताकतवर शख्स को बेबस कर दिया था। अब अपनी कौम के नजदीक कामयाब तरीन महरा बन चुकी थी। अमालका के लिए यह सिर्फ एक शख्स की शिकस्त ना थी बल्कि अपनी बतरी का ऐलान था। कहते हैं सैमसन की गिरफ्तारी के बाद अमालका के दिलों में जो खौफ बरसों से बैठा हुआ था। वह यकदाम खत्म हो गया। वह जो कभी उसके नाम से लरजते थे अब खुद को फातेह समझने लगे। इस अजीम फतह की खुशी में उन्होंने एक बड़े जश्न का ऐलान किया। उनका अकीदा था कि उनके देवता ने इन्हें सैमसन पर गलबा अता किया। लिहाजा तय पाया कि इस कामयाबी का जश्न देवता के मंदिर में मनाया जाएगा ताकि उसका शुक्र अदा किया जा सके। अगले दिन मंदिर और इसके अतराफ में गैर मामूली हुजूम था। आम लोग, सरदार, सिपाही और उमरा सब जमा थे। हर चेहरे पर गुरूर और खुशी नुमाया थी। मौसिकी, शोर-ओ-गुगा और कहकहू की आवाजें फिजा में गूंज रही थी। जश्न अपने उरूज पर था। इसी दौरान बादशाह के हुक्म पर उनके सबसे बड़े दुश्मन सैमसन को जंजीरों में जकड़कर मजमा के सामने पेश किया गया। वह शख्स जो कभी मैदान-ए-जंग में शेर की तरह धाड़ता था आज अंधा और बेबस खड़ा था। उसकी आंखें निकाली जा चुकी थी। हाथ-पांव जंजीरों में जकड़े हुए थे और वह दूसरों के सहारे चलने पर मजबूर था। मजमा ने उसे देखते ही शोर मचाना शुरू कर दिया। कुछ लोग उसका मजाक उड़ा रहे थे। कुछ उस पर कूड़ा करकट फेंक रहे थे और कुछ उसकी बेबसी पर कहकहे लगा रहे थे। कहते हैं अमालका फतह के नशे में चूर थे और उनकी अय्याशिया अपने उरूज पर थी। लेकिन इसी शोर और तमसखर के दरमियान एक और मंजर खामोशी से जन्म ले रहा था। जंजीरों में जकड़ा हुआ वह शख्स जिसे सब कमजोर समझ रहे थे अपने दिल में एक और जंग लड़ रहा था। वह अपनी जिंदगी के गुनाहों और अपनी गलतियों को याद कर रहा था। उसे एहसास हो चुका था कि उसकी तबाही का सबब दुश्मन नहीं बल्कि उसकी अपनी कमजोरी थी। इसी एहसास के साथ उसने रब के हुजूर सच्ची तौबा की। उसने दुआ की अगर उसे एक बार फिर ताकत हासिल हो जाए।

[18:46]तो वह उसे उसी मकसद के लिए इस्तेमाल करेगा जिसके लिए उसे चुना गया था। कहा जाता है कि उसकी दुआ में इखलास था। उसकी तौबा सच्ची थी और फिर अचानक वो लम्हा आया। जिस जिस्म को सब कमजोर समझ रहे थे उसमें दोबारा जान दौड़ने लगी। मंदिर के सुतनों के करीब खड़े होकर उसने इन्हें मजबूती से थाम लिया। मजमा अभी तक जश्न में मसरूफ था किसी को अंदाजा ना था कि चंद लम्हों में क्या होने वाला है। अचानक एक जोरदार धचका लगा फिर दूसरा। लोग घबरा कर इधर-उधर देखने लगे। शोर-ओ-गुगा चीखो पुकार में बदल गया। कुछ ही लम्हों में वह अजीमुश्शान इमारत लरजने लगी। सुतून हिलने लगे और छत में दरारें पड़ने लगी। लोग भागने की कोशिश करने लगे मगर बहुत देर हो चुकी थी। थोड़ी ही देर में पूरा महल जमीन बोझ हो गया। गर्दो गुबार का बादल फिजा में फैल गया और खुशी का जश्न मातम में तब्दील हो गया। तारीखी रिवायत के मुताबिक इस वाकए में अमालका के तकरीबन 3000 लोग मारे गए। वो जो फतह का जश्न मना रहे थे। खुद उसी जश्न के मलबे तले दब गए। यूं सैमसन ने अपनी जिंदगी के आखिरी लम्हों में वह काम अंजाम दिया जिसने तारीख का रुख बदल दिया। नाजरीन आपको बताते चले द सैमसन और दलायला का यह तारीखी वाकया अहदनामा-ए-कदीम की किताब बुक ऑफ जजेस में तफसील के साथ बयान हुआ है। इसी तरह इस्लामी मुअर्रिखन में कमालुद्दीन ने अपनी किताब हयातुल हैवान में इसका जिक्र किया है। जबकि अहमद इब्ने याकूब ने अपनी तस्नीफ तारीख-उल-याकूबी में इस वाकए को नकल किया है। याद रखें यह दास्तान महज ताकत और शिकस्त की कहानी नहीं बल्कि इंसान की कमजोरी, तौबा और अंजाम का ऐसा सबक है जो सदियों बाद भी जिंदा है। इनके नजदीक वो एक ऐसा शख्स था जिसे इब्तदा ही से एक खास मकसद के लिए मुंतखब किया गया और फिर पाक ठहरा दिया गया।

[21:03]खुदा ने उसे गैर मामूली ताकत से नवाजा था ताकि वह अपनी कौम की खिदमत कर सके और जुल्म के खिलाफ खड़ा हो सके। मगर इस बेहिसाब ताकत के साथ-साथ इस पर एक जिम्मेदारी भी आयद की गई थी। खुदा की अतात और इसके अहकामात की पाबंदी। यह ताकत दर हकीकत एक अमानत थी एक ऐसी अमानत जो इसे अपनी हुदूद में रहकर इस्तेमाल करनी थी। मगर इंसानी फितरत कमजोर है। सैमसन भी अपनी जिंदगी के एक मरहले पर ख्वाहिशात और फितनों की तरफ माइल हो गया। वह इन चीजों में उलझ गया जो इसके लिए आजमाइश का बायस बन सकती थी। नतीजतन वह रास्ता जिस पर उसे कायम रहना था उससे हटने लगा। याद रखें जब इंसान अपनी जिम्मेदारियों से गाफिल हो जाता है। और अपनी कमजोरियों के आगे हथियार डाल देता है तो उस पर से बरकते उठने लगती हैं। यही कुछ सैमसन के साथ भी हुआ। नाजरीन यह वाकया हमें एक गहरा सबक देता है कि शैतान इंसान की कमजोरी से बखूबी वाकिफ होता है। वह यह जानता है कि किस दरवाजे से इंसान के दिल तक रसाई हासिल की जा सकती है। इसलिए वह बराह-ए-रास्त हमला नहीं करता। बल्कि इन्हीं पहलुओं को निशाना बनाता है जहां इंसान पहले से कमजोर होता है। वह हमें आहिस्ता-आहिस्ता उन चीजों में उलझाता है। जो बजाहिर मामूली महसूस होती हैं मगर वक्त के साथ-साथ वही चीजें इंसान को अपने रब से दूर करने का सबब बन जाती हैं। नाजरीन अगर हमारी जिंदगी में भी कोई ऐसी कमजोरी मौजूद है जो हमें खुदा से दूर कर रही है तो हमें संजीदगी से उसका जायजा लेना चाहिए। यह कमजोरी किसी भी शक्ल में हो सकती है। बाज औकात यह मालो दौलत की मोहब्बत की सूरत में जाहिर होती है। कभी नाजायज ताल्लुकात की सूरत में तो कभी जदीद दौर की सहूलत जैसे मोबाइल फोन, टेलीविजन या सोशल मीडिया के बेजा इस्तेमाल की सूरत में। इसी तरह नशा, गुरूर, लालच, यह दुनियावी ख्वाहिशात की ज्यादती भी इंसान को आहिस्ता-आहिस्ता रूहानी जवाल की तरफ ले जाती है। हमें चाहिए कि हम वक्तन-फवक्तन अपना मुहसबा करते रहें। नाजरीन सैमसन की जिंदगी हमें यह याद दिलाती है कि असल ताकत सिर्फ जिस्मानी कुवत में नहीं बल्कि अपने नफ्स पर काबू पाने में है। एक इंसान जो अपनी कमजोरियों का गुलाम बन जाए वह चाहे कितना ही ताकतवर क्यों ना हो बिलाखिर शिकस्त का सामना करता है। जबकि वह शख्स जो अपनी ख्वाहिशात पर काबू पा ले वो अपने रब के साथ अपना ताल्लुक मजबूत वो अपने रब के साथ अपना ताल्लुक मजबूत रखे। वो हकीकी मानों में कामयाब होता है। लिहाजा जरूरी है कि हम अपनी जिंदगियों का जायजा लें और अपनी कमजोरियों को पहचाने और इनसे बचने की कोशिश करें। तौबा का दरवाजा हमेशा खुला है। अगर हम सच्चे दिल से अपने रब की तरफ रुजू करें और अपनी गलतियों को सुधारने का अजम करें तो वो यकीनन हमारी मदद फरमाता है। सैमसन की दास्तान हमें यही सिखाती है कि हमें अपनी कमजोरियों के गुलाम नहीं बनना चाहिए। बल्कि इन्हें पहचान कर इन पर बल्कि इन्हें पहचान कर इन पर काबू पाना चाहिए। ताकि शैतान को हमारी जिंदगी में दाखिल होने का कोई मौका ना मिल सके। नाजरीन आप सैमसन की इस कहानी से क्या सबक अखज करते हैं कमेंट्स में लाजमी बताइएगा। दोस्तों यह थी हमारी आज की वीडियो हम उम्मीद करते हैं कि आपको हमारी यह वीडियो पसंद आई होगी। अगर आपको यह वीडियो पसंद आई है तो इसको लाइक करें और आखिर में उन लोगों के साथ दरख्वास्त और आखिर में आप लोगों से दरख्वास्त है कि हमारे चैनल को जरूर सब्सक्राइब कर लें। अगली वीडियो तक के लिए इजाजत दीजिए अल्लाह हाफिज।

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