[0:00]शिशुओं में शारीरिक वृद्धि का आकलन इस मॉड्यूल में आपका स्वागत है। नमस्कार! मेरा नाम सुनीता है और मैं आंगनबाड़ी की पर्यवेक्षिका (सुपरवाइजर) हूं। इस मॉड्यूल में मैं आपकी मार्गदर्शिका रहूंगी। आज मुझे रामपुर आंगनबाड़ी केंद्र जाना है क्योंकि वहां से बच्चों के वजन लेने की रिपोर्ट नहीं आ रही है। रामपुर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, रमा ने दो महीने पहले ही काम करना शुरू किया है। दीदी, वजन के माध्यम से बच्चों की वृद्धि का आकलन कैसे करते हैं? बच्चों को कुपोषित और सामान्य श्रेणी में कैसे रखते हैं? यह सब मुझे ठीक से नहीं पता, क्या आप बताएंगी? बिल्कुल। हम वृद्धि चार्ट का उपयोग कर बच्चों की वृद्धि का आकलन कर सकते हैं। इस मॉड्यूल में हम यह देखेंगे कि किस तरह बच्चों की वृद्धि को नाप सकते हैं। और यदि बच्चा कमजोर हो, तो माता-पिता को किस तरह परामर्श देना चाहिए। इस मॉड्यूल के अंत तक, आप जानेंगे कि शिशु की शारीरिक वृद्धि को कैसे मापे और शारीरिक वृद्धि मापने के क्या फायदे हैं? शिशु का वजन कैसे ले और यह शिशु के शारीरिक वृद्धि के बारे में क्या दर्शाता है? शिशु की लंबाई कैसे मापे और यह शिशु के शारीरिक वृद्धि के बारे में क्या दर्शाता है? जब शिशु वृद्धि निगरानी चार्ट में लाल और पीले दायरे में आते हैं तो आंगनबाड़ी कार्यकताओं को क्या करना चाहिए? रमा, कुमुद से मिलो जो पिछले 3 वर्षों से कार्यकर्ता के रूप में काम कर रही है। कुमुद क्या तुम रमा को बता सकती हो कि बच्चे का वजन कैसे लिया जाता है और बच्चे का वजन उसके वृद्धि के बारे में क्या बताता है? जरूर।
[2:13]रमा, पहले हम बच्चों का वजन लेने की प्रक्रिया जानेंगे। शिशु की उम्र दर्ज करें। अगर शिशु खड़ा होने की उम्र से अभी छोटा है, तो उसका वजन टाइप-1 वाली मशीन पर लें। एवं माप दर्ज करें। अगर शिशु बैठ सकता है, लेकिन खड़ा नहीं हो सकता, तो उसका वजन टाइप-2 वाली मशीन पर लें। एवं माप दर्ज करें। अगर शिशु खुद से अकेला खड़ा रह सकता है, तो उसका वजन टाइप-3 वाली मशीन पर लें।
[2:54]जब तक मशीन पर दिखाई देने वाली संख्या में परिवर्तन नहीं होता या सुई स्थिर नहीं हो जाती, तब तक प्रतीक्षा करें। शिशु का वजन निकटतम 0.01 किलोग्राम (किलो) तक दर्ज करें आंकड़ा पूर्ण संख्या में दर्ज ना करें। पुष्टि के लिए पुनः वजन लें। अगर दोनों बार लिए गए वजन में अंतर है, तो वास्तविक वजन की पुष्टि करने के लिए तीसरी बार शिशु का वजन लें। वजन लेते समय शिशु की उम्र सुनिश्चित करें। एवं यह ध्यान रखें कि शिशु ने कम-से-कम कपड़े पहने हो। यदि शिशु बहुत बीमार हो तो उसका वजन ना लें। अब हम जानेंगे कि वजन से शारीरिक वृद्धि के बारे में क्या बताते हैं? इन तालिकाओं को देखो। यह वृद्धि निगरानी चार्ट पर आधारित है। जब हम शिशु का वजन लेते हैं तो उसकी तुलना हमें उसी उम्र और लिंग के सामान्य वजन श्रेणी से करनी होगी। यदि शिशु का वजन सामान्य वजन श्रेणी की निचली सीमा से कम है तो शिशु कम वजन का है। यह शिशु वृद्धि निगरानी चार्ट के पीले या लाल भाग में पाया जाएगा। इसका मतलब है कि शिशु कम वजन का है। उदाहरण के लिए यदि किसी 6 महीने की बच्ची का वजन 5.7 किलोग्राम है, तो वह कम वजन की है। सामान्य रूप से उसका वजन कम-से-कम 5.8 किलोग्राम होना चाहिए। यदि हमें दुबलेपन की पहचान करनी हो तो? लंबाई और लिंग के अनुसार वजन की तुलना करें। यदि लंबाई के अनुसार वजन निर्धारित मानक के नीचे है तो शिशु दुबला है। यह शिशु वृद्धि निगरानी चार्ट पर पीले या लाल पट्टी पर दर्शाया जाएगा। राजू की ऊंचाई 70 सेंटीमीटर और वजन 6 किलो है तो वह गंभीर रूप से दुबला है। उसका वजन कम-से-कम 7.7 किलो होना चाहिए। दीदी, एक बच्चे की लंबाई उसके स्वास्थ्य का मापदंड कैसे हो सकती है? मैं बताती हूं। यह देखो यहां कई बच्चों की लंबाई नापी जा रही है। दो साल से कम उम्र के शिशु या 85 सें.मी. से कम लंबे शिशु की ऊंचाई इस तरह मापते हैं: अपने हाथों को शिशु के दोनों कानों पर रखें एवं बाहों के साथ शिशु के सिर को हेड-बोर्ड के सहारे से सीधा रखें। माप लेने वाले व्यक्ति का सिर शिशु के सिर के सीधे ऊपर होना चाहिए।
[5:48]जब शिशु सही स्थिति में हो तो पैरों की तरफ वाले बोर्ड को खिसकाकर शिशु के पैरों के तलवे पर सीधा लगाएं। अगर शिशु पैरों की उंगलियों को मोड़ बंद कर रहा हो तो पैरों के तलवे पर हल्के से गुदगुदी करे और जब शिशु उंगलियों को सीधा करे, तो पैरों की तरफ वाले बोर्ड को तलवे पर सीधा लगाएं।
[6:17]सहयोग के लिए आप शिशु की माता या आंगनबाड़ी सहायिका की मदद ले सकते हैं। लंबाई जांच कर तुरंत दर्ज करें। दर्ज करने के बाद, पुष्टि करने के लिए पुनः लंबाई का माप लें। अगर दोनों माप में अंतर है तो वास्तविक लंबाई की पुष्टि करने के लिए तीसरी बार शिशु की लंबाई मापें। दो साल से अधिक उम्र के शिशु की ऊंचाई को इस तरह मापते हैं: शिशु पीठ के सहारे बोर्ड से सटकर खड़ा हो। उसका सिर, कंधा, कुल्हा और एड़ी खड़े बोर्ड के साथ पैनल को स्पर्श करने चाहिए।
[7:05]शरीर का वजन दोनों पैरों और कंधों पर समान रूप से बटा हो। शिशु के दोनों पैरों को एक साथ रखें। शिशु के सिर को ऊपर एवं चेहरे को आंखों की सीध में रखें।
[7:24]अपने दूसरे हाथ की मदद से हेड बोर्ड को शिशु के सिर के सबसे ऊपरी भाग पर रखें। एवं बालों को हल्का दबाते हुए आराम से स्थिर रखें। फिर माप लेकर दर्ज करें। माप को दर्ज करने के बाद, पुष्टि के लिए पुनः ऊंचाई की माप लें। अगर दोनों माप में अंतर है तो वास्तविक ऊंचाई की पुष्टि करने के लिए तीसरी बार शिशु की ऊंचाई मापें। नाटे शिशुओं की पहचान करने के लिए उम्र और लिंग के अनुसार शिशु की ऊंचाई की तुलना करें। यदि शिशु की ऊंचाई निर्धारित मानक से नीचे है तो वह शिशु नाटा है। उदाहरण के लिए, यदि किसी 6 महीने के उम्र की लड़की की लंबाई 59 सें.मी. है, तो वह नाटी है। उसकी ऊंचाई कम-से-कम 61.2 सें.मी. होनी चाहिए। तुम जानती ही हो कि स्तनपान एवं भोजन से शरीर को पोषण एवं ऊर्जा मिलती है, जिससे शारीरिक वृद्धि होती है। 6 महीने तक के शिशुओं को पोषण एवं ऊर्जा सिर्फ और सिर्फ स्तनपान से मिलता है। 6 महीने से 2 साल तक के शिशुओं के लिए पोषण एवं ऊर्जा स्तनपान और पूरक आहार से मिलता है। 2 वर्ष से अधिक उम्र के शिशुओं के लिए पोषण एवं ऊर्जा विविध और पर्याप्त भोजन खाने से मिलता है। तो हम बच्चों के शारीरिक वृद्धि का आकलन किस तरह कर सकते हैं? हम वृद्धि मापने के लिए अलग-अलग उपकरणों का प्रयोग करते हैं। जैसे कि वजन मापने की मशीन, इन्फेंटोमीटर, यानी शिशुओं की लंबाई मापने की मशीन, स्टेडिओमीटर, यानी शिशुओं की ऊंचाई मापने की मशीन। एक शिशु के वजन और ऊंचाई को मापने से पता चलता है कि शिशु कम वजन का है, नाटा है या अत्यधिक दुबला है। यदि उम्र के अनुसार वजन कम है तो वह शिशु कमजोर है। कम वजन या कमजोर होना कुपोषित होने का संकेत है। शिशु की ऊंचाई को मापकर और उम्र के साथ तुलना करके यह पता चलता है कि शिशु नाटा, यानी उम्र के अनुसार कम लंबाई है या नहीं। नाटापन लंबे समय से बीमारी एवं पोषक तत्वों की कमी को दर्शाता है। शिशु के वजन को मापने एवं उस माप को ऊंचाई के अनुसार तुलना करने से यह पता चलता है कि शिशु दुबला है या नहीं। दुबलापन हाल ही में हुई बीमारी या खाने की कमी को दर्शाता है। यदि 24 महीने से कम उम्र का शिशु नाटा या कम वजन का पाया जाता है है तो माता-पिता को इन बातों का अधिक ध्यान रखने के लिए कहें। उन्हें सूचित करें कि उनके शिशु की लंबाई या वजन उम्र के अनुसार कम है उसकी वृद्धि धीमी है। शिशु को घर में बने विभिन्न भोजन खिलाएं। और कम समय के अंतराल पर भोजन कराते रहें। शिशु को खिलाने की नियमित सूची बनायें व समय से खिलाएं। शिशु को खिलाने के लिए अलग कटोरी का प्रयोग करें ताकि मां को पता चल सके कि शिशु ने क्या और कितना खाया। भोजन को ढक कर एवं मक्खी से बचा कर रखें। खाना बनाने से पहले साबुन और पानी से हाथ धोएं। पीने के लिए साफ उबले हुए पानी का प्रयोग करें। शिशु को नियमित रूप से स्नान करायें एवं नाखून कटे रखें। शिशु के नियमित प्रगति पर नजर रखने के लिए माता-पिता से प्रत्येक माह शिशु का माप कराने के लिए कहें। यदि शिशु दुबला है और वृद्धि निगरानी चार्ट के लाल क्षेत्र में है तो उन्हें शिशु को अस्पताल ले जाने की सलाह दें। जब शिशु गंभीर रूप से कुपोषित हो अथवा बीमार हो, तो उसे निकटतम अस्पताल में जरूर ले जाने की सलाह दें। यदि शिशु को भूख लग रही हो और वह बीमार नहीं दिख रहा हो तो उसे एन.आर.सी. (पोषण पुनर्वास केंद्र) में रेफर करें। अगर परिवार शिशु को एन.आर.सी. नहीं ले जाना चाह रहा है तो 6 माह से बड़े शिशु का वजन बढ़ाने को कहें, और स्वच्छता पर ध्यान देने को कहें। उन दुबले व नाटे शिशुओं का फॉलो-अप करें जिनकी देखभाल घर में की जा रही है। आइए अब देखें कि कार्यकर्ताओं की क्या भूमिका है। अपने आंगनबाड़ी केंद्र के सभी जन्म से 3 साल तक के शिशुओं का हर माह वजन लें। 2 साल से कम उम्र के सभी शिशुओं की लंबाई हर 3 माह में मापें। 2 से 5 साल के सभी शिशु अथवा जो शिशु खड़े हो सकते हैं उनकी ऊंचाई हर 6 माह में मापें। गृह भ्रमण के दौरान माता-पिता को शारीरिक वृद्धि की निगरानी के महत्व के बारे में समझाएं। इसी के साथ हमारा यह अध्याय समाप्त होता है। एक बार फिर से देखते हैं हमने आज क्या सीखा। इस अध्याय में हमने सीखा है कि शिशु की वृद्धि को मापने के लिए वजन की मशीन, इन्फेंटोमीटर, स्टेडिओमीटर का उपयोग किया जाता है। शिशुओं का वजन और ऊंचाई कब-कब लेना चाहिए। जब शिशु वृद्धि निगरानी चार्ट में लाल और पीले दायरे में आते हैं तो आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को माता-पिता को ध्यान रखी जाने वाली बातों के बारे में सूचित करना चाहिए। धन्यवाद! आप ये मॉड्यूल सफलतापूर्वक पूर्ण कर चुके हैं। अब आप अगला अध्याय आरंभ कर सकते हैं।



