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पवित्र आत्मा इंसान को कब छोड़ देता है? | वो 1 गलती जो उसे खामोश कर देती है 😱

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[0:13]बाइबल आग, बाढ़ और विनाश की कहानियां सुनाती है, लेकिन उनसे भी ज्यादा डरावना वह पल है जब एक इंसान रोता है, पुकारता है, प्रार्थना करता है और ऊपर से कोई जवाब नहीं आता.
[0:32]और क्या यह सिर्फ दुष्टों के साथ होता है या फिर एक ऐसा विश्वासी भी जो चर्च जाता है, भजन गाता है, प्रार्थना करता है?
[1:14]हम अक्सर सोचते हैं कि अगर पवित्र आत्मा किसी को छोड़कर जाएगा तो आसमान में बिजली कड़केगी, जमीन हिल जाएगी या उस इंसान के माथे पर कोई निशान आ जाएगा.
[1:34]हकीकत यह है कि जब परमेश्वर का आत्मा किसी इंसान को छोड़ता है तो अक्सर उस इंसान को पता भी नहीं चलता.
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[0:00]पवित्र आत्मा इंसान को कब छोड़ देता है? ज़रा रुकिए, यह सवाल डरावना इसलिए नहीं है कि इसमें सजा की बात है.

[0:07]बल्कि इसलिए कि बाइबल में सबसे खौफनाक पल सजा नहीं खामोशी होती है.

[0:13]बाइबल आग, बाढ़ और विनाश की कहानियां सुनाती है, लेकिन उनसे भी ज्यादा डरावना वह पल है जब एक इंसान रोता है, पुकारता है, प्रार्थना करता है और ऊपर से कोई जवाब नहीं आता.

[0:25]वो दिन जब परमेश्वर कहता है मेरा आत्मा सदा मनुष्य से विवाद नहीं करेगा.

[0:32]यहीं से असली सवाल जन्म लेता है. पवित्र आत्मा इंसान को छोड़ता कब है? और क्या यह सिर्फ दुष्टों के साथ होता है या फिर एक ऐसा विश्वासी भी जो चर्च जाता है, भजन गाता है, प्रार्थना करता है?

[0:46]क्या वह भी इस खतरे में हो सकता है? आज का यह वीडियो कोई साधारण बाइबल स्टडी नहीं है. अगले कुछ मिनटों में हम उन आयतों को खोलेंगे जिन पर अक्सर चुप्पी साध ली जाती है.

[0:55]अगर आप अपनी आत्मा को लेकर गंभीर हैं तो इस वीडियो को बीच में मत छोड़िए. क्योंकि आज सवाल यह नहीं है कि परमेश्वर बोल सकता है या नहीं.

[1:04]सवाल यह है क्या पवित्र आत्मा अब भी हमसे बोल रहा है या वो खामोश हो चुका है?

[1:10]सबसे पहले हमें एक बहुत बड़ी गलतफहमी को दूर करना होगा.

[1:14]हम अक्सर सोचते हैं कि अगर पवित्र आत्मा किसी को छोड़कर जाएगा तो आसमान में बिजली कड़केगी, जमीन हिल जाएगी या उस इंसान के माथे पर कोई निशान आ जाएगा.

[1:25]हमें लगता है कि यह एक बहुत ही नाटकीय या ड्रामेटिक घटना होगी.

[1:29]लेकिन बाइबल हमें एक बहुत ही अलग और बहुत ही डरावनी तस्वीर दिखाती है.

[1:34]हकीकत यह है कि जब परमेश्वर का आत्मा किसी इंसान को छोड़ता है तो अक्सर उस इंसान को पता भी नहीं चलता.

[1:40]यही इस घटना का सबसे खतरनाक पहलू है अज्ञानता.

[1:45]इसे समझने के लिए मैं आपको पुराने नियम के एक ऐसे पहलवान के कमरे में ले चलना चाहता हूं जिसे हम सब जानते हैं शमशून.

[1:53]न्यायों के अध्याय 16 आयत 20 को जरा ध्यान से पढ़िए.

[1:56]वहां एक बहुत ही अजीब बात लिखी है. जब दलीला ने उसके बाल काट दिए, जब उसका अभिषेक, उसकी ताकत का वो चिन्ह उसे छीन लिया गया तो शमशून नींद से जागा.

[2:08]अब जरा उस पल की कल्पना कीजिए. उसकी आंखें खुलीं, उसने अपने शरीर को देखा.

[2:12]सब कुछ वैसा ही लग रहा था.

[2:15]उसके हाथ-पैर वैसे ही थे, उसकी मांसपेशियां वैसी ही थीं.

[2:21]उसे लगा कि कल रात जैसा ही सब कुछ सामान्य है. उसने अपने मन में कहा मैं पहले की तरह बाहर जाकर अपने आप को झटकूंगा और आजाद हो जाऊंगा.

[2:30]मैं पहले की तरह ये शब्द आज भी मेरे रोंगटे खड़े कर देते हैं.

[2:34]उसे लगा कि परमेश्वर की ताकत उसकी जागीर है.

[2:38]उसे लगा कि वो जब चाहेगा परमेश्वर की शक्ति को एक बटन की तरह ऑन कर लेगा.

[2:44]वो अपने अनुभव, अपनी पुरानी जीतों और अपनी पिछली प्रार्थनाओं के भरोसे था.

[2:48]लेकिन फिर बाइबल एक ऐसा वाक्य लिखती है जो किसी भी मसीही इंसान का दिल दहला सकता है.

[2:54]वहां लिखा है परंतु वो न जानता था कि यहोवा उसके पास से चला गया है.

[2:59]वो न जानता था. जरा ठहरिए और इस सन्नाटे को महसूस कीजिए.

[3:04]यहोवा चला गया और उसे खबर तक नहीं.

[3:07]कैसे? यह कैसे संभव है कि जिस परमेश्वर की आत्मा ने उसे शेर को फाड़ने की ताकत दी, जिस आत्मा ने उसे हजारों फिलिस्तीनियों को मारने का बल दिया.

[3:17]वह आत्मा उसे छोड़कर चली गई और उसे महसूस भी नहीं हुआ.

[3:21]यही वह रहस्य है जो हमें समझना होगा.

[3:24]पवित्र आत्मा का जाना अक्सर शोर के साथ नहीं होता.

[3:27]यह एक धीरे-धीरे होने वाली प्रक्रिया का अंतिम परिणाम होता है.

[3:31]शमशून अभी भी वही भाषा बोल रहा था. उसका शरीर अभी भी वहीं था. शायद उसमें अभी भी थोड़ा आत्मविश्वास बाकी था.

[3:39]लेकिन सोर्स यानी स्रोत कट चुका था. आज कलीसियाओं में यह दृश्य कितना आम हो गया है.

[3:44]हम पहले की तरह गिटार बजाते हैं. हम पहले की तरह प्रचार करते हैं.

[3:49]हम पहले की तरह हाथ उठाकर हालेलुयाह बोलते हैं.

[3:54]सब कुछ बाहर से वैसा ही दिखता है. लेकिन अंदर, अंदर वह मीठी आवाज खामोश हो चुकी है.

[4:00]और सबसे बड़ा धोखा यह है कि हम शमशून की तरह सोचते हैं. सब ठीक है.

[4:05]मैं तो अब भी सेवा कर रहा हूं. लेकिन याद रखिए, आदतों के बल पर चलना और अभिषेक अनॉइंटिंग में चलने में जमीन आसमान का फर्क है.

[4:14]शमशून आदतों में जी रहा था. अभिषेक जा चुका था. अब, अगर शमशून का उदाहरण हमें अंजान रहने का डर दिखाता है तो इजराइल के पहले राजा शाऊल का जीवन हमें इससे भी भयानक परिणाम दिखाता है.

[4:27]शमशून को तो पता नहीं चला लेकिन शाऊल, शाऊल के साथ जो हुआ वो एक अलग ही स्तर की त्रासदी थी.

[4:35]पहला शमूएल अध्याय 16 आयत 14.

[4:38]यहां एक आत्मिक सिद्धांत स्पिरिचुअल प्रिंसिपल छिपा है जिसे आज की दुनिया भूल चुकी है.

[4:44]वचन कहता है यहोवा का आत्मा शाऊल पर से उठ गया.

[4:48]बात यहीं खत्म नहीं हुई. अगर बात सिर्फ पवित्र आत्मा के जाने की होती तो शायद शाऊल एक साधारण इंसान बनकर जी लेता.

[4:56]लेकिन आयत आगे कहती है. और यहोवा की ओर से एक दुष्टात्मा उसे घबराने लगी.

[5:02]यहां एक बहुत गहरा नियम है. आत्मिक दुनिया में कोई वैक्यूम वैक्यूम या खाली जगह नहीं होती.

[5:10]आप और मैं एक ऐसे बर्तन की तरह हैं जो कभी खाली नहीं रह सकता.

[5:14]या तो उसमें परमेश्वर का पवित्र आत्मा रहेगा या फिर अंधकार की शक्तियां उसे भरने के लिए तैयार बैठी हैं.

[5:19]कोई न्यूट्रल जोन नहीं है. हम यह नहीं कह सकते कि मैं परमेश्वर के साथ नहीं चलूंगा लेकिन मैं शैतान के साथ भी नहीं रहूंगा.

[5:26]मैं बस अपनी जिंदगी जीऊंगा. यह असंभव है. जैसे ही रोशनी जाती है, अंधेरा पूछकर नहीं आता.

[5:33]वह बस आ जाता है. यह ऑटोमेटिक है. शाऊल राजा था. उसके पास मुकुट था, महल था, सेना थी.

[5:40]बाहर से देखने वाले को लग रहा होगा कि वाह क्या सफल इंसान है.

[5:44]लेकिन महल के अंदर रातों के सन्नाटे में वो तड़प रहा था.

[5:49]एक मानसिक और आत्मिक बेचैनी उसे खाए जा रही थी.

[5:52]क्यों? क्योंकि सुरक्षा कवच हट चुका था. जब पवित्र आत्मा इंसान को छोड़ता है तो सबसे पहले जो चीज जाती है वह है शांति.

[6:03]वह शांति जो समझ से परे है वह गायब हो जाती है.

[6:06]इंसान चिड़चिड़ा हो जाता है. उसके अंदर एक डर बैठ जाता है. उसे हर किसी पर शक होने लगता है. बिल्कुल शाऊल की तरह. वह दाऊद से जलने लगा. वह अपने ही बेटे पर हमला करने लगा. यह पागलपन कहां से आया? यह उस खालीपन का नतीजा था जहां अब परमेश्वर नहीं था.

[6:23]यह हमें यह सोचने पर मजबूर करता है.

[6:26]क्या आज हमारी बेचैनी, हमारा डिप्रेशन, हमारा रिश्तों में बार-बार झगड़ना.

[6:33]कहीं यह सिर्फ तनाव नहीं बल्कि एक आत्मिक संकेत तो नहीं है?

[6:36]क्या हमने पवित्र आत्मा को इतना दुखी कर दिया है कि उसकी सुरक्षा हमारे ऊपर से हट रही है?

[6:42]लेकिन यहां एक सवाल आपके मन में जरूर आ रहा होगा.

[6:45]और यह सवाल बहुत जायज है. आप कहेंगे लेकिन भाई, मैंने तो ऐसे कई लोगों को देखा है जो पाप में जी रहे हैं.

[6:52]फिर भी उनकी सेवकाई चल रही है. उनके प्रचार में लोग रो रहे हैं, चंगाई हो रही है.

[6:58]अगर पवित्र आत्मा उन्हें छोड़ देता तो यह सब कैसे होता?

[7:01]यह बहुत बड़ा जाल है और बहुत से विश्वासी इसमें फंसकर अपनी अनंत काल की जिंदगी दांव पर लगा देते हैं.

[7:07]हमें उपस्थिति प्रेजेंस और वरदान गिफ्ट्स के बीच का अंतर समझना होगा.

[7:14]बाइबल में एक बहुत अजीब चरित्र है, बिलाम.

[7:17]एक ऐसा नबी जिसका दिल पैसों के लिए बिका हुआ था.

[7:20]लेकिन फिर भी जब उसने मुंह खोला तो परमेश्वर का वचन निकला.

[7:25]यहां तक कि उसकी गद्दी ने भी बात की. क्या गद्दी पवित्र थी? नहीं. क्या बिलाम पवित्र था? नहीं.

[7:32]रोमियो 11:22 में पौलुस एक रहस्य खोलता है.

[7:35]परमेश्वर के वरदान और बुलाहट अटल हैं.

[7:38]इसका मतलब है कि अगर परमेश्वर ने आपको प्रचार करने का या गाने का या चंगाई का वरदान दिया है.

[7:45]और आप पाप में गिर जाते हैं तो जरूरी नहीं कि वह वरदान तुरंत वापस ले लिया जाए.

[7:50]इसे ऐसे समझिए जब आप अपने घर में बिजली के पंखे का स्विच बंद कर देते हैं तो क्या पंखा तुरंत रुक जाता है? नहीं.

[7:58]स्विच ऑफ होने के बाद भी पंखा कुछ देर तक घूमता रहता है.

[8:02]क्यों? बिजली के कारण नहीं बल्कि मोमेंटम मोमेंटम या पुरानी गति के कारण.

[8:07]आज कलीसिया में कई ऐसे पंखे घूम रहे हैं जिनका स्विच स्वर्ग से ऑफ हो चुका है.

[8:14]वह अपनी पुरानी गति, अपनी पुरानी रटी-रटाई बातों और अपनी पुरानी शोहरत के बल पर घूम रहे हैं.

[8:20]लोग उनकी हवा खा रहे हैं और सोच रहे हैं कि पावर अभी भी है.

[8:25]लेकिन परमेश्वर जानता है कि कनेक्शन कट चुका है.

[8:29]यह शमशून का सिंड्रोम है. काम हो रहा है, भीड़ आ रही है, तालियां बज रही हैं.

[8:35]लेकिन परमेश्वर वहां नहीं है. सोचिए क्या इससे ज्यादा डरावनी स्थिति कोई हो सकती है?

[8:41]कि आप स्टेज पर हों या आप अपने परिवार में आत्मिक अगुआ हों.

[8:46]लोग आपकी तरफ देख रहे हो और परमेश्वर आपको देखकर कहे मैं इसे नहीं जानता.

[8:50]यीशु ने खुद मत्ती सात में कहा था उस दिन बहुत से लोग मुझसे कहेंगे हे प्रभु, हे प्रभु क्या हमने तेरे नाम से नबूवत नहीं की?

[8:58]क्या तेरे नाम से दुष्टात्माओं को नहीं निकाला? और यीशु का जवाब क्या होगा? मैं तुम्हें कभी नहीं जानता था.

[9:06]उन्होंने काम किया. उन्होंने चमत्कार किया. लेकिन उनके पास रिश्ता नहीं था. पवित्र आत्मा एक शक्ति नहीं है जिसे हम इस्तेमाल करें.

[9:15]वो एक व्यक्ति है जिसके साथ हम जीते हैं.

[9:18]तो अब सवाल यह उठता है कि अगर यह खतरा इतना बड़ा है और अगर यह इतने चुपके से होता है तो हमें कैसे पता चलेगा?

[9:26]वह कौन सी लकीर है जिसे पार करने के बाद इंसान की वापसी मुश्किल हो जाती है?

[9:31]क्या यह खतरा सिर्फ पुराने नियम के शाऊल और शमशून के लिए था?

[9:36]या फिर आज अनुग्रह के युग में भी हम पवित्र आत्मा को खो सकते हैं?

[9:41]क्या एक बार बचाए गए, हमेशा के लिए बचाए गए का नारा हमें धोखा दे रहा है?

[9:46]अगले हिस्से में हम सीधे आपके और मेरे जीवन के अंदर झांकेंगे.

[9:50]हम उन संकेतों की बात करेंगे जो बताते हैं कि पवित्र आत्मा अब बुझने की कगार पर है.

[9:57]और विश्वास मानिए, अगला हिस्सा आपको हिलाकर रख देगा क्योंकि हम उस लक्ष्मण रेखा की बात करेंगे जिसके आगे जाने का मतलब है तबाही.

[10:06]जुड़े रहिएगा क्योंकि असली राज तो अभी खुलना बाकी है.

[10:10]यह सवाल अक्सर हमारे मसीही समाज में एक ढाल की तरह इस्तेमाल किया जाता है.

[10:14]हम तो अनुग्रह के युग में हैं.

[10:17]परमेश्वर अब पुराने नियम की तरह व्यवहार नहीं करता.

[10:20]यह बात सच है कि परमेश्वर का अनुग्रह अपार है लेकिन गलतफहमी यह है कि हम सोचते हैं कि अनुग्रह का मतलब है छूट.

[10:27]हमें लगता है कि अनुग्रह एक ऐसा लाइसेंस है जो हमें मनमानी करने की आजादी देता है और पवित्र आत्मा चुपचाप कोने में बैठकर सब देखता रहेगा.

[10:35]लेकिन यहीं हम सबसे बड़ी गलती कर बैठते हैं.

[10:39]अगर पुराने नियम में परमेश्वर की उपस्थिति का जाना डरावना था तो नए नियम में यह और भी ज्यादा संवेदनशील और गहरा है.

[10:47]क्यों? क्योंकि पुराने नियम में परमेश्वर का आत्मा लोगों के ऊपर आता था.

[10:53]लेकिन आज, आज वह हमारे अंदर रहता है.

[10:56]और जब कोई आपके घर के अंदर रहता है तो उसे चोट पहुंचाना और भी आसान हो जाता है.

[11:00]बाइबल हमें दो बहुत ही विशिष्ट शब्दों के जरिए चेतावनी देती है.

[11:04]और अगर आप इन दो शब्दों का फर्क समझ गए तो शायद आज आपकी आत्मिक आंखें खुल जाएंगी.

[11:10]पहला शब्द है शोकित करना, ग्रीविंग और दूसरा शब्द है बुझाना, क्वेंचिंग.

[11:17]पौलुस इफिसियों चार 30 में लिखता है परमेश्वर के पवित्र आत्मा को शोकित मत करो.

[11:23]जरा रुकिए और सोचिए आप शोकित या दुखी किसे कर सकते हैं?

[11:27]क्या आप अपने दुश्मन को दुखी कर सकते हैं? नहीं.

[11:31]आप दुश्मन को गुस्सा दिला सकते हैं. क्या आप सड़क पर चलते किसी अनजान व्यक्ति को दुखी कर सकते हैं? नहीं.

[11:37]आप केवल उसी को दुखी कर सकते हैं जो आपसे बेइंतहा प्यार करता है.

[11:41]शोकित करना एक रिश्ते का शब्द है.

[11:44]यह एक प्रेमी की भाषा है. जब पवित्र आत्मा आपको किसी गलत काम से रोकता है मान लीजिए आप कोई गलत वीडियो देखने जा रहे हैं या झूठ बोलने जा रहे हैं और आपके अंदर एक हल्की सी बेचैनी होती है, एक आवाज आती है मत कर.

[11:58]वह पवित्र आत्मा का प्रेम है.

[12:01]लेकिन जब आप उस आवाज को अनसुना करके वह पाप कर देते हैं तो पवित्र आत्मा वहां से भाग नहीं जाता.

[12:05]वह कोने में बैठकर रोता है.

[12:08]उसे दर्द होता है. जैसे एक मां को दर्द होता है जब उसका बेटा गलत रास्ते पर जाता है.

[12:14]यह पहली स्टेज है. हम पवित्र आत्मा को शोकित करते हैं. हम उससे कहते हैं चुप रहो मुझे तुम्हारी राय नहीं चाहिए.

[12:21]लेकिन खतरा तब बढ़ता है जब यह आदत बन जाए और यहीं पर दूसरा शब्द आता है आत्मा को मत बुझाओ.

[12:27]एक थिस्सलुनीकियों पांच 19.

[12:31]यहां पौलुस पवित्र आत्मा की तुलना आग से कर रहा है.

[12:35]कल्पना कीजिए एक अंगीठी में आग जल रही है.

[12:39]अगर आप उस पर एक कप पानी डालेंगे तो क्या होगा?

[12:42]थोड़ी सी छन-छन की आवाज आएगी, थोड़ा धुआं उठेगा, आग थोड़ी कम होगी लेकिन बुझेगी नहीं.

[12:49]यह है शोकित करना. लेकिन अगर आप हर रोज उस आग पर पानी डालते रहें.

[12:54]बार-बार, जान-बूझकर, बिना किसी पछतावे के उस पर पानी डालते रहें तो एक दिन क्या होगा?

[12:59]एक दिन वह आग पूरी तरह बुझ जाएगी. वहां सिर्फ राख बचेगी.

[13:04]और राख में न तो गर्मी होती है, न रोशनी.

[13:07]यही वह खतरे की घंटी है जिसे हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं.

[13:10]पवित्र आत्मा का जाना एक झटके में नहीं होता.

[13:13]यह धीरे-धीरे होने वाली आत्मिक मौत है.

[13:19]और जब यह आग बुझने लगती है तो इंसान के अंदर एक बहुत ही भयानक बदलाव आता है.

[13:22]बाइबल इसे कहती है विवेक का जल जाना सियर्ड कॉन्शियस.

[13:26]एक तिमुथियुस चार दो में एक बहुत ही डरावना शब्द इस्तेमाल हुआ है.

[13:30]पुराने जमाने में जब किसी जानवर पर अपनी छाप छोड़नी होती थी तो लोहे को लाल गर्म करके उसकी खाल पर दाग दिया जाता था.

[13:40]उस जगह की खाल जल जाती थी और वहां के नर्व एंडिंग्स नर्व एंडिंग्स मर जाते थे.

[13:46]उसके बाद आप उस जगह पर सुई चुभाएं या उसे काटें, जानवर को दर्द नहीं होता था.

[13:52]वह जगह शून्य हो जाती थी. क्या आज आपकी आत्मिक दशा ऐसी ही हो गई है?

[13:57]याद कीजिए वह दिन जब आपने मसीह को नया-नया ग्रहण किया था.

[14:00]तब एक छोटा सा झूठ बोलने पर भी पूरी रात नींद नहीं आती थी.

[14:04]किसी से ऊंची आवाज में बात कर लेने पर भी हम रोते थे और माफी मांगते थे.

[14:09]वो जिंदा विवेक की निशानी थी. लेकिन आज, आज हम बड़ी-बड़ी गलतियां कर जाते हैं, गंदी बातें कर लेते हैं, दूसरों का हक मार लेते हैं और हमें कुछ महसूस नहीं होता.

[14:20]हम चर्च जाते हैं, हाथ उठाते हैं और हमारे दिल की धड़कन भी नहीं बढ़ती.

[14:25]मेरे दोस्तों, यह शांति नहीं है.

[14:28]यह आत्मिक कोढ़ अलेपरसी है.

[14:31]कोढ़ में इंसान को दर्द महसूस होना बंद हो जाता है और यही उसकी मौत का कारण बनता है.

[14:35]अगर आपको पाप करने के बाद अब बुरा लगना बंद हो गया है तो समझ लीजिए कि आप उस लकीर के बिल्कुल ऊपर खड़े हैं जिसके बाद वापसी का रास्ता धुंधला हो जाता है.

[14:47]लेकिन असली सच तो इससे भी ज्यादा चौंकाने वाला है.

[14:50]और यह सच आपकी रूह को झकझोर देगा. क्या ऐसा भी हो सकता है कि कोई इंसान रोए, गिड़गिड़ाए, माफी मांगे लेकिन उसे माफी ना मिले?

[15:00]क्या परमेश्वर का दिल इतना सख्त हो सकता है? हम अक्सर कहते हैं कि परमेश्वर हर टूटे हुए दिल की सुनता है.

[15:06]लेकिन इब्रानियों 12:17 हमें एक ऐसे इंसान की कहानी बताता है जिसकी चीखें आसमान से टकराकर वापस आ गईं.

[15:15]उसका नाम था ऐसौ. वचन कहता है उसने आंसू बहा-बहाकर उसे आशीष को खोजने का यत्न किया तो भी मन फिराव का अवसर उसे न मिला.

[15:24]जरा सोचिए एक इंसान रो रहा है. वह आशीष मांग रहा है लेकिन परमेश्वर खामोश है.

[15:30]क्यों? क्या परमेश्वर के पास दया खत्म हो गई थी? नहीं.

[15:34]समस्या परमेश्वर की दया में नहीं ऐसौ के आंसुओं में थी.

[15:38]हमें यह समझना होगा कि हर तरह का रोना तौबा रिपेंटेंस नहीं होता.

[15:44]ऐसौ अपने पाप पर नहीं रो रहा था. वह अपने नुकसान पर रो रहा था. उसे इस बात का दुख नहीं था कि उसने परमेश्वर की पवित्रता को तुच्छ जाना.

[15:54]उसे दुख इस बात का था कि उसका बर्थ राइट पहलोठे का हक चला गया.

[16:00]यही ऐसौ सिंड्रोम है जो आज बहुत से मसीही लोगों को अपनी चपेट में ले चुका है.

[16:05]जब हम किसी मुसीबत में फंसते हैं, कोई बीमारी आती है या कोई राज खुलने वाला होता है तो हम परमेश्वर के सामने रोते हैं.

[16:13]प्रभु मुझे बचा ले, प्रभु मैं फिर ऐसा नहीं करूंगा.

[16:16]लेकिन गौर कीजिए हम पाप से नफरत नहीं कर रहे.

[16:19]हम पाप के परिणाम कॉन्सीक्वेंसेस से डर रहे हैं.

[16:23]पवित्र आत्मा सच्चाई का आत्मा है. वह हमारे आंसुओं के पीछे की सच्चाई जानता है.

[16:28]वह जानता है कि अगर आज उसने हमें इस मुसीबत से निकाल लिया तो कल हम फिर वही पाप करेंगे.

[16:33]क्यों? क्योंकि हमारा स्वभाव नेचर नहीं बदला है.

[16:38]सिर्फ हमारे हालात बिगड़े हैं. ऐसौ एक ऐसी अवस्था में पहुंच गया था जहां उसका दिल इतना सख्त हो गया था कि वह चाहकर भी सच्चा मन फिराव नहीं कर सकता था.

[16:48]वह पॉइंट ऑफ नो रिटर्न था. उसने पवित्र आत्मा को इतनी बार ठुकराया था कि अब उसकी रिसीवर रिसीवर खराब हो चुकी थी.

[16:56]परमेश्वर अभी भी सिग्नल भेज रहा था लेकिन ऐसौ के पास उसे पकड़ने का कोई साधन नहीं बचा था.

[17:02]यह हमें कांपने पर मजबूर कर देता है. क्या मैं भी अपनी जिद, अपनी वासना या अपने घमंड के कारण अपने दिल को इतना पत्थर बना रहा हूं कि एक दिन मैं रोना चाहूं तो भी मेरे अंदर से सच्ची तौबा ना निकल पाए?

[17:15]पवित्र आत्मा का छोड़ना कोई एक दिन की घटना नहीं है. यह एक लंबा सफर है जो लापरवाही से शुरू होता है और कठोरता पर खत्म होता है.

[17:22]अभी आपके मन में हजारों सवाल उठ रहे होंगे.

[17:26]आप सोच रहे होंगे अगर मैंने कोई बहुत बड़ा पाप किया है तो क्या मैं उस अक्षम्य पाप अनपार्डनेबल सिन का दोषी हूं?

[17:34]क्या मेरे लिए अब कोई उम्मीद नहीं बची? बाइबल में यीशु मसीह ने एक ऐसे पाप का जिक्र किया है जिसकी माफी ना इस लोक में है ना परलोक में.

[17:42]यह सुनकर अच्छे-अच्छे ज्ञानियों के पसीने छूट जाते हैं.

[17:45]आखिर वह कौन सा पाप है? क्या वह हत्या है, व्यभिचार है या पवित्र आत्मा की निंदा? और सबसे बड़ा सवाल.

[17:52]क्या जाने-अनजाने आपने वह पाप कर दिया है?

[17:56]अगले भाग में हम बाइबल के सबसे गहरे और विवादस्पद रहस्य को खोलने जा रहे हैं.

[18:01]हम बात करेंगे अक्षम्य पाप की और मैं आपको विश्वास दिलाता हूं जो जवाब आपको मिलेगा वो वैसा बिल्कुल नहीं होगा जैसा आपने आज तक सोचा है.

[18:11]तैयार हो जाइए क्योंकि अब हम उस जगह चलने वाले हैं जहां बहुत कम प्रचारक जाने की हिम्मत करते हैं.

[18:18]वह पाप क्षमा नहीं किया जाएगा. यह शब्द किसी इंसान के नहीं बल्कि खुद दया के सागर प्रभु यीशु मसीह के हैं.

[18:26]मत्ती 12:31 से 32.

[18:29]बाइबल की पूरी 66 किताबों में शायद ही कोई और आयत होगी जिसने मसीही लोगों की रातों की नींद इस कदर हराम की हो.

[18:38]हमारे पास लोग आते हैं आंखों में आंसू और चेहरे पर खौफ लिए हुए और पूछते हैं.

[18:43]पास्टर मुझसे एक बार गुस्से में पवित्र आत्मा के खिलाफ कुछ निकल गया था.

[18:49]क्या अब मैं नरक जाऊंगा? क्या मेरे लिए माफी के दरवाजे हमेशा के लिए बंद हो चुके हैं?

[18:53]अगर आज आपके मन में भी यह डर है तो जरा गहरी सांस लीजिए और मेरे शब्दों को बहुत ध्यान से सुनिए.

[19:00]क्योंकि आज हम शैतान के उस सबसे बड़े झूठ का पर्दाफाश करने जा रहे हैं जिसके जरिए वह लाखों विश्वासियों को डिप्रेशन में धकेल देता है.

[19:07]पवित्र आत्मा की निंदा ब्लैस्फमी अगेंस्ट द होली स्पिरिट.

[19:12]आखिर है क्या? क्या यह मुंह से निकला कोई गाली-गलौज है? क्या यह गुस्से में बोला गया कोई शब्द है? नहीं.

[19:20]परमेश्वर इतना छोटा नहीं है कि वह आपके शब्दों के उच्चारण प्रोनंसिएशन या गुस्से में फिसली जुबान पर अपनी अनंत दया को रोक दे.

[19:29]इस पाप को समझने के लिए हमें उस घटना को देखना होगा जहां यीशु ने यह बात कही थी.

[19:34]वहां फरीसी खड़े थे. उन्होंने अपनी आंखों से देखा कि यीशु ने एक ऐसे व्यक्ति को चंगा किया जो ना देख सकता था, ना बोल सकता था.

[19:43]यह एक स्पष्ट चमत्कार था. उनकी बुद्धि जानती थी कि यह काम परमेश्वर के अलावा कोई नहीं कर सकता.

[19:50]लेकिन उनके दिल में यीशु के लिए इतनी नफरत थी, इतना जलन था कि उन्होंने जानते-बूझते हुए उस पवित्र काम को शैतान का काम कह दिया.

[20:00]उन्होंने कहा, यह तो दुष्टात्माओं के सरदार बालजबूल की सहायता से निकालता है.

[20:05]यहां गहराई को पकड़िए. यह अज्ञानता का पाप नहीं था. यह विद्रोह का पाप था. पवित्र आत्मा का काम है सच्चाई को प्रकट करना.

[20:14]वह हमारे दिल की आंखों को रोशनी देता है ताकि हम यीशु को पहचान सकें.

[20:18]अब सोचिए, अगर कोई इंसान सूरज की रोशनी को देखे और जानबूझकर अपनी आंखें फोड़ ले और कहे कि यह अंधेरा है तो उसे रोशनी कौन दिखा सकता है?

[20:28]कोई नहीं. अक्षम्य पाप कोई एक घटना इवेंट नहीं है.

[20:33]यह दिल की एक अवस्था, स्टेट है.

[20:36]यह एक ऐसा मुकाम है जहां इंसान सच्चाई को इतनी बार ठुकरा चुका होता है कि अब उसकी नैतिक दिशा मोरल कंपास पूरी तरह उल्टी हो चुकी है.

[20:46]वह भलाई को बुराई कहता है और बुराई को भलाई.

[20:49]वह रोशनी को अंधेरा कहता है और अंधेरे को रोशनी.

[20:53]जब इंसान इस हालत में पहुंच जाता है तो उसे क्षमा इसलिए नहीं मिलती क्योंकि वह क्षमा मांगना ही नहीं चाहता.

[20:59]उसे लगता ही नहीं कि उसने कुछ गलत किया है.

[21:02]तो मेरे दोस्त, अगर आप आज इस वीडियो को देखते हुए डर रहे हैं, अगर आपका दिल कांप रहा है कि कहीं मैंने यह पाप तो नहीं कर दिया?

[21:10]तो मुबारक हो आप सुरक्षित हैं.

[21:13]क्योंकि जिसने यह पाप कर दिया है उसे डर नहीं लगता.

[21:17]उसका जमीर मर चुका होता है. आपकी यह घबराहट ही इस बात का सबूत है कि पवित्र आत्मा अभी भी आपके अंदर काम कर रहा है और आपको चेतावनी दे रहा है.

[21:26]एक लाश को डर नहीं लगता सिर्फ जिंदा इंसान को डर लगता है.

[21:31]लेकिन रुकिए, कहानी यहीं खत्म नहीं होती.

[21:34]असली खतरा वो एक शब्द नहीं है जो आपने बोला बल्कि असली खतरा वो रास्ता है जिस पर कुछ लोग चल पड़ते हैं.

[21:40]और बाइबल इसके बारे में एक ऐसी चेतावनी देती है जो किसी भी गंभीर विश्वासी को घुटनों पर ला सकती है.

[21:48]मैं बात कर रहा हूं इब्रानियों की किताब अध्याय छह आयत चार से छह की.

[21:54]यह बाइबल का वह चक्रव्यूह है जिसमें बहुत से लोग फंस जाते हैं.

[21:58]वचन कहता है क्योंकि जिन्होंने एक बार ज्योति पाई है और जो स्वर्गीय वरदान का स्वाद छक चुके हैं.

[22:04]यदि वे गिर जाएं तो उन्हें मन फिराव के लिए नया बनाना अनहोना इंपॉसिबल है.

[22:10]अनहोना.

[22:13]यह शब्द पत्थर की लकीर जैसा लगता है. लेकिन यहां गिरने का मतलब क्या है? क्या इसका मतलब यह है कि अगर आज मैंने झूठ बोला या गुस्सा किया तो मैं उस अनहोना वाली लिस्ट में आ गया? नहीं बिल्कुल नहीं.

[22:29]क्योंकि अगर पवित्र आत्मा आपको सच में छोड़ चुका होता तो आप यह वीडियो यहां तक नहीं देख रहे होते.

[22:36]आप अब तक इसे बंद करके किसी गंदे मनोरंजन में डूब चुके होते.

[22:42]आपके अंदर की यह बेचैनी, यह प्यास, यह डर इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि परमेश्वर ने अभी तक आपका हाथ नहीं छोड़ा है.

[22:49]वह माली अभी भी आपके पास कैंची लेकर नहीं बल्कि खाद और पानी लेकर खड़ा है.

[22:54]तो फिर हम वापस कैसे आएं? उस टूटे हुए रिश्ते को दोबारा कैसे जोड़ें? उस बुझती हुई आग को फिर से कैसे भड़काएं?

[23:07]चौथा और आखिरी हिस्सा आपके जीवन को बदल सकता है.

[23:10]क्योंकि वहां हम बात करेंगे उस वापसी के रास्ते की जो परमेश्वर ने खुद अपने लहू से बनाया है.

[23:15]तैयार हो जाइए क्योंकि अब हम भय से निकलकर अनुग्रह के समुद्र में गोता लगाने वाले हैं.

[23:22]अब, एक गहरी सांस लीजिए.

[23:25]अगर पिछले तीन भागों को सुनकर आपके दिल की धड़कन बढ़ गई है, अगर आपको अपनी पिछली गलतियां याद आ रही हैं और अगर एक अनजाना डर आपको सता रहा है कि कहीं बहुत देर तो नहीं हो गई?

[23:37]तो मैं आपसे एक बात कहना चाहता हूं.

[23:40]डरिए मत क्योंकि यह डर ही आपका सबसे बड़ा दोस्त है.

[23:44]जी हां आपने सही सुना. यह घबराहट, यह बेचैनी, यह तड़प यही वह सबूत है जिसकी आपको तलाश थी.

[23:51]यह इस बात का सबूत है कि आपकी आत्मिक नब्स स्पिरिचुअल पल्स अभी भी चल रही है.

[23:55]एक मरे हुए इंसान को यह चिंता नहीं होती कि वह मर गया है.

[23:58]यह चिंता सिर्फ उसे होती है जिसमें जान बाकी है. इस बात को साबित करने के लिए मैं आपके सामने बाइबल के दो सबसे बड़े राजाओं को खड़ा करना चाहता हूं.

[24:05]एक तरफ शाऊल और दूसरी तरफ दाऊद. दोनों राजा थे, दोनों का अभिषेक हुआ था.

[24:10]और मजे की बात यह है कि दोनों ने भयानक पाप किए. शाऊल ने आज्ञा नहीं मानी और दाऊद, दाऊद ने तो व्यभिचार किया और हत्या भी करवाई.

[24:20]पाप की गंभीरता देखें तो दाऊद का पाप शायद ज्यादा बड़ा और घिनौना था.

[24:24]लेकिन अंत क्या हुआ? पवित्र आत्मा शाऊल को छोड़कर चला गया लेकिन दाऊद को छोड़कर नहीं गया.

[24:31]क्यों? आखिर फर्क क्या था?

[24:35]फर्क पाप में नहीं, फर्क प्रतिक्रिया में था. जब नबी ने शाऊल को उसका पाप याद दिलाया तो शाऊल ने क्या कहा?

[24:41]उसने बहाने बनाए. उसने कहा मैंने तो जनता के दबाव में यह किया.

[24:48]और फिर उसने एक बहुत ही घटिया बात कही. उसने शमूएल से कहा मेरा आदर कर ताकि लोग मुझे देखें.

[24:57]उसे पवित्र आत्मा की चिंता नहीं थी. उसे अपनी इमेज की चिंता थी. उसे अपनी गद्दी प्यारी थी परमेश्वर नहीं.

[25:04]लेकिन जब नातान नबी ने दाऊद पर उंगली उठाई.

[25:07]दाऊद ने कोई बहाना नहीं बनाया. वह अपनी गद्दी से नीचे उतर गया.

[25:12]उसने अपना मुकुट उतार फेंका और उसने इतिहास की सबसे दर्दनाक और खूबसूरत प्रार्थना की.

[25:18]भजन संहिता 51. उसने यह नहीं मांगा कि प्रभु मेरी गद्दी बचा ले या मेरी इज्जत बचा ले.

[25:25]उसने रोते हुए सिर्फ एक बात मांगी. मुझको अपने सामने से ना निकाल और अपना पवित्र आत्मा मुझसे अलग ना कर.

[25:31]भजन संहिता 51 11.

[25:36]यह है वह लिटमस टेस्ट.

[25:39]दाऊद जानता था कि राज-पाठ के बिना जिया जा सकता है.

[25:42]महलों के बिना जिया जा सकता है लेकिन परमेश्वर की उपस्थिति के बिना एक पल भी जीना मौत के बराबर है.

[25:47]मेरे दोस्त, अगर आज रात आप अपने बिस्तर पर लेटकर यह महसूस करते हैं कि प्रभु चाहे सब कुछ ले ले.

[25:54]बस तू मुझसे दूर मत जाना.

[25:57]तो मैं आपको स्टैंप पेपर पर लिखकर दे सकता हूं कि पवित्र आत्मा आपको कभी छोड़कर नहीं जाएगा.

[26:06]क्योंकि टूटा हुआ और पिसा हुआ मन परमेश्वर को एक चुंबक की तरह अपनी ओर खींचता है.

[26:09]लेकिन हमारी सुरक्षा सिर्फ हमारी प्रार्थना पर नहीं टिकी है.

[26:12]हमारी सुरक्षा की नींव इससे भी कहीं ज्यादा गहरी है.

[26:15]क्या आपने कभी सोचा है कि नए नियम न्यू टेस्टामेंट में विश्वासी होने का सबसे बड़ा विशेषाधिकार प्रिविलेज क्या है?

[26:22]पौलुस इफिसियों एक 13 में एक शब्द इस्तेमाल करता है.

[26:26]मुहर, सील. तुम उस पर विश्वास करके प्रतिज्ञा किए हुए पवित्र आत्मा की मुहर छाप से अंकित किए गए हो.

[26:35]पुराने जमाने में जब एक राजा किसी चिट्ठी पर अपनी अंगूठी से मोहर लगा देता था तो दुनिया की कोई ताकत उसे तोड़ नहीं सकती थी.

[26:40]उस मुहर का मतलब था यह राजा की संपत्ति है.

[26:45]इस पर राजा का अधिकार है. जिस दिन आपने यीशु को अपना जीवन दिया, जिस दिन आपने सच्चे मन से तौबा की.

[26:52]उसी पल आत्मिक दुनिया में परमेश्वर ने आप पर अपनी पवित्र आत्मा की मुहर लगा दी.

[26:59]शैतान उस मुहर को देख सकता है और वह कांपता है.

[27:03]क्योंकि वह जानता है कि यह बिका हुआ माल है, इस पर मालिक का नाम लिखा है.

[27:08]हम इंसान हैं, हम गिरते हैं, हम गलती करते हैं.

[27:11]कई बार हम बेवफा हो जाते हैं.

[27:15]लेकिन दो तिमुथियुस दो 13 की वह आयत याद रखिएगा जो अंधेरी रातों में सहारा देती है.

[27:21]यदि हम अविश्वासी भी हों तो भी वह विश्वास योग्य बना रहता है क्योंकि वह आपसे मुकर नहीं सकता.

[27:29]आपका उद्धार साल्वेशन आपकी मजबूती पर नहीं उसकी पकड़ पर निर्भर है.

[27:35]सोचिए एक पिता अपने छोटे बच्चे का हाथ पकड़कर भीड़ में चल रहा है.

[27:40]बच्चा बार-बार हाथ छुड़ाने की कोशिश करता है इधर-उधर भागता है.

[27:43]लेकिन क्या पिता उसका हाथ छोड़ देता है? नहीं.

[27:46]बच्चे की पकड़ कमजोर हो सकती है लेकिन पिता की पकड़ मजबूत होती है.

[27:51]पवित्र आत्मा वह पिता है जिसने आपका हाथ तब थामा था जब आप उसे जानते भी नहीं थे.

[27:57]वह आपको इतनी आसानी से जाने नहीं देगा.

[28:00]तो अब हमें क्या करना चाहिए? अगर आप इस वीडियो को देख रहे हैं और आपको लग रहा है कि आप परमेश्वर से बहुत दूर आ चुके हैं.

[28:06]उड़ाऊ पुत्र की तरह आप सूअरों के बाड़े में बैठे हैं.

[28:09]गंदगी और बदबू से भरे हुए और आपको लग रहा है कि अब मैं वापस कैसे जाऊं?

[28:15]पिता क्या कहेंगे? तो सुनिए पिता ने दरवाजा बंद नहीं किया है.

[28:19]वह आज भी चौखट पर खड़ा आपकी राह देख रहा है. पवित्र आत्मा कोई शक्ति या एनर्जी नहीं है जिसे आपने खो दिया और अब दोबारा रिचार्ज करना पड़ेगा.

[28:26]वह एक व्यक्ति पर्सन है.

[28:29]और एक रूठे हुए व्यक्ति को कैसे मनाया जाता है? जादू-टोना करके नहीं, मंत्र पढ़कर नहीं बल्कि उसके पास जाकर अपनी गलती मानकर.

[28:38]आज ही अभी जहां आप हैं वहीं घुटने टेक दीजिए.

[28:43]किसी बड़े पास्टर की जरूरत नहीं है.

[28:46]किसी खास दिन की जरूरत नहीं है.

[28:50]बस अपनी कोठरी बंद कीजिए और कहिए पवित्र आत्मा मैंने तुझे बहुत दुख दिया है.

[28:56]मैंने तेरी आवाज को अनसुना किया.

[29:00]मैंने तुझे इग्नोर किया.

[29:05]मैं गलत था.

[29:09]मैं कोई बहाना नहीं बनाऊंगा.

[29:13]बस मुझे तेरी जरूरत है. प्लीज वापस आ जा. बाइबल कहती है मेरे पास जो कोई आएगा मैं उसे कभी नहीं निकालूंगा.

[29:26]यह यीशु का वादा है. और अंत में मैं आपको सुसमाचार गॉस्पेल के सबसे गहरे रहस्य के साथ छोड़ना चाहता हूं.

[29:34]यह वह बात है जो इस पूरी कहानी का निचोड़ क्लाइमेक्स है.

[29:39]हम इस बात पर इतना भरोसा क्यों कर सकते हैं कि परमेश्वर हमें कभी नहीं छोड़ेगा? हमें यह गारंटी कहां से मिलती है?

[29:45]हमें यह गारंटी मिलती है उस क्रूस से.

[29:48]याद कीजिए दोपहर का समय था लेकिन अंधेरा छा गया था.

[29:52]यीशु मसीह क्रूस पर लटके हुए थे.

[29:56]उनके शरीर पर बेइंतहा दर्द था.

[30:00]लेकिन उस दर्द के बीच उन्होंने एक ऐसी चीख मारी जिसने ब्रह्मांड को हिला दिया.

[30:06]उन्होंने यह नहीं कहा कि मेरे हाथ दुख रहे हैं या मुझे प्यास लगी है.

[30:11]उन्होंने चिल्लाकर कहा ऐली ऐली लमा सबकतनी अर्थात् हे मेरे परमेश्वर, हे मेरे परमेश्वर तूने मुझे क्यों छोड़ दिया?

[30:20]इतिहास में पहली बार और आखिरी बार पिता और पुत्र अलग हुए थे.

[30:24]परमेश्वर ने अपना मुंह फेर लिया था.

[30:29]उस पवित्र त्रिएक ट्रिनिटी में विच्छेद सेपरेशन हुआ था.

[30:33]क्यों? यीशु को अकेलापन क्यों सहना पड़ा?

[30:37]जवाब सुनिए और अपनी रूह में इसे बसा लीजिए.

[30:40]यीशु मसीह को इसलिए छोड़ा गया ताकि आपको और मुझे कभी छोड़ा ना जाए.

[30:46]उसने वह सन्नाटा सहा ताकि हमें हमेशा आवाज मिल सके.

[30:52]उसने वह अंधेरा सहा ताकि हमारे पास हमेशा पवित्र आत्मा की रोशनी रहे.

[30:58]उसने त्याग रिजेक्शन सहा ताकि हमें स्वीकृति एक्सेप्टेंस मिले.

[31:05]क्रूस पर उसने वह कीमत चुका दी है.

[31:08]इसलिए शैतान चाहे आपके कान में कितना भी झूठ बोले कि तुझे छोड़ दिया गया है तू अकेला है.

[31:16]क्रूस की तरफ देखिए और कहिए नहीं.

[31:19]मेरे हिस्से का अकेलापन मेरे प्रभु ने सह लिया.

[31:24]अब वादा है मैं तुझे कभी ना छोडूंगा और ना कभी त्यागूंगा.

[31:30]तो मेरे भाई मेरी बहन अपने आंसुओं को पोंछ लीजिए.

[31:34]उठिए, धूल झाड़िए.

[31:37]पवित्र आत्मा आपके पास है.

[31:40]वह आपके अंदर है.

[31:43]और वह आज अभी इसी वक्त आपको एक नई शुरुआत देने के लिए तैयार है.

[31:49]क्या आप उस हाथ को थामेंगे? प्रार्थना कीजिए मेरे साथ. हे पिता, धन्यवाद उस कीमत के लिए जो तूने चुकाई.

[31:57]मुझे माफ कर कि मैंने तेरे आत्मा को शोकित किया.

[32:00]आज मैं वापस आता हूं. मुझे फिर से भर दे.

[32:05]यीशु के नाम में. आमीन.

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