Thumbnail for जब पिता ने बेटे का मांस शिव को परोसा 😨 | सिरुथोंडा की भक्ति | #Siruthonda #facts by Kaalchakra Katha

जब पिता ने बेटे का मांस शिव को परोसा 😨 | सिरुथोंडा की भक्ति | #Siruthonda #facts

Kaalchakra Katha

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[0:00]माता पार्वती के होश तब उड़ गए जब महादेव ने एक बच्चे के पके हुए मांस को देखकर अपना सिंहासन छोड़ दिया और कहा गौरी, यह कोई साधारण भोग नहीं, यह उस महान भक्त का कलेजा है जिसने मेरे एक इशारे पर अपना पूरा संसार लुटा दिया। क्या कोई पिता अपने ही इकलौते बेटे की बलि महादेव को दे सकता है? जी हां, यह कोई काल्पनिक कहानी नहीं, बल्कि तमिलनाडु के उत्तरापतेश्वर स्वामी मंदिर का वह सच है, जिसे सुनकर आज भी पत्थर दिलों की रूह कांप जाती है। इतिहास में एक महान भक्त हुए। नाम था श्रीयाला। वे महादेव के इतने बड़े भक्त थे कि बिना किसी शिव भक्त को भोजन कराए खुद पानी तक नहीं पीते थे। उनकी इसी कठोर भक्ति को परखने, एक दिन स्वयं महाकाल एक खूंखार अघोरी का रूप धरकर उनके द्वार पहुंचे। राजा श्रीयाला हाथ जोड़कर बोले, आज मेरा सौभाग्य है कि आप पधारे। आज्ञा दीजिए, आपके लिए क्या भोजन बनाऊं? तभी अघोरी हंसा और ऐसी शर्त रखी कि पूरे महल में सन्नाटा छा गया। अघोरी बोला, राजन, मेरा पेट साधारण भोजन से नहीं भरता। मुझे चाहिए नर मांस और वह भी उस बच्चे का जो अपने माता-पिता की इकलौती संतान हो। पूरी सभा कांप उठी, लेकिन रोंगटे तो तब खड़े हुए जब अघोरी ने आखिरी शर्त रखी। उस बच्चे को उसके माता-पिता खुद अपने हाथों से काटेंगे और पकाते समय उनकी आंखों में एक भी आंसू नहीं होना चाहिए। श्रीयाला और उनकी पत्नी निःशब्द थे, फिर भी उन्होंने अघोरी की इच्छा को ईश्वर की आज्ञा माना। उन्होंने अपने पांच साल के मासूम बेटे को बुलाया। मां ने उसका सिर थामा और पिता ने अपने ही हाथों से छुरी चला दी। हड्डियों के टूटने की आवाज आई। खून की धार बही, लेकिन उस मां की आंखों में एक भी आंसू नहीं था। बस होठों पर हर हर महादेव। उन्होंने अपने ही बेटे का मांस पकाया और अघोरी के सामने परोस दिया। थाली देखकर अघोरी बोला, मैं अकेला नहीं खाऊंगा। अपने बेटे को भी बुलाओ, हम साथ बैठेंगे। श्रीयाला फूट-फूट कर रो पड़े। वह तो अब इस दुनिया में नहीं रहा। अघोरी गरजा, उसे पुकारो, वह जरूर आएगा। मां ने कांपती आवाज में अपने बेटे का नाम लिया और तभी चमत्कार हो गया। महल के दरवाजे खुले और वो बच्चा दौड़ता हुआ अपनी मां की गोद में आ गिरा। तभी महादेव अपने असली रूप में प्रकट हुए। उन्होंने श्रीयाला को गले लगाया और उन्हें श्री थोंडा छोटा भक्त की उपाधि दी। आज भी तमिलनाडु के जंगा टंगुड़ी मंदिर में उस भक्त और उसके बेटे की प्रतिमा मौजूद है। यह मंदिर गवाह है कि महादेव के लिए प्रेम और त्याग से भरा कुछ भी नहीं। अगर आपकी आंखों में भी महादेव के लिए प्रेम है तो कमेंट में हर हर महादेव लिखना ना भूलें।

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