[0:00]उत्तर प्रदेश की तीन तस्वीरें आज सोशल मीडिया पर वायरल है। पहली तस्वीर हमीरपुर की है। यहां एक निर्माणाधीन पुल भरभरा कर गिर गया। छह मजदूरों की मौत हो गई। दूसरी तस्वीर लखनऊ के चार बाग रेलवे स्टेशन की है। यहां प्लेटफार्म पर बना शेड गिरने से तीन यात्री घायल हैं। तीसरी तस्वीर के बारे में सोशल मीडिया पर दावा है कि ये हाल ही में बने गंगा एक्सप्रेसवे की है। सड़क से उखड़ रहा। डामर कंस्ट्रक्शन क्वालिटी पर सवाल खड़े कर रहा है। इनमें से दो में तो आंधी को जिम्मेदार ठहरा दिया गया है। पर कोई यह नहीं बता रहा कि आंधी आएगी ये तो सबको पता था। कोई पहली बार तो भारत में आंधी आई नहीं है। तो इसके लिए क्या तैयारी थी? पुल गिरे, लोग मरे, टीन शेड गिरे, लोग घायल हों। और हजारों करोड़ से बने नए नवेले एक्सप्रेसवे में भी चलकर अगर आदमी अपनी कमर तुड़वाए तो क्या ही मतलब हुआ। लेगा कोई जिम्मेदारी इसकी। खैर, कहानी और भी है इन तीनों तस्वीरों के पीछे वाली। चलिए आपको विस्तार से समझाते हैं। नमस्ते मेरा नाम सौरभ त्रिपाठी है आप न्यूज़ पिंच देख रहे हैं। सबसे पहले बात हमीरपुर हादसे की हमीरपुर जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूर कुरा कंडोर और परसनी गांव के बीच में बेतवा नदी पर एक पुल बन रहा था। 700 मीटर लंबे इस पुल की कुल लागत ₹90 करोड़ है। यूपी ब्रिज कॉरपोरेशन को इस पुल के निर्माण की जिम्मेदारी दी गई थी। मार्च 2024 में इसका निर्माण शुरू हुआ था और इस साल के दिसंबर में इसे बनकर तैयार होना था। 29 मई की अलसुबह 3:00 बजे के करीब इस निर्माणाधीन पुल का टनों वजनी स्लैब नीचे गिर गया। पुल के नीचे सो रहे नौ मजदूर इसके नीचे दब गए। इसमें से छह की मौत हो गई, जबकि एसडीआरएफ की टीम ने 7 घंटे ऑपरेशन चलाकर तीन मजदूरों को जिंदा बचा लिया। मारे गए मजदूरों में 22 साल के लोकेंद्र निषाद, 19 साल के कुलदीप निषाद, 28 साल के सावंत यादव, 30 साल के सभाजीत यादव बांदा के रहने वाले हैं। 34 साल के पुष्पेंद्र चौहान और 42 साल के राजेश पालो की हमीरपुर के रहने वाले हैं। मारे गए। चश्मदीदों के मुताबिक तेज गर्मी की वजह से इस पुल का निर्माण कार्य रात की पाली में चलता था। जिस समय यह हादसा हुआ उस समय एक दर्जन के करीब मजदूर पुल के ऊपर काम कर रहे थे। बाकी मजदूर पुल के नीचे आराम कर रहे थे। रात को मौसम खराब हुआ और आंधी के साथ बरसात हो रही थी। प्रशासन के मुताबिक 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवा चल रही थी। पुल पर काम कर रहे मजदूर पुल पर जहां थे वहां लेट गए। पुल के नीचे कुछ मजदूरों ने तेज बारिश और आंधी से बचने के लिए शरण ले रखी थी। इसी बीच तेज हवा और आंधी के चलते पुल पर अस्थाई तौर पर रखा गया एक भारी भरकम स्लैब नीचे बैठे मजदूरों पर गिर गया। जिले के डीएम अभिषेक गोयल का कहना है कि मौसम विभाग ने जिले में पहले से आंधी और तेज बारिश की चेतावनी दे रखी थी। प्रशासन की तरफ से गांव-गांव में मुनादी भी पिटवाई गई थी। पुल का निर्माण शेल्टर नाम की एक निजी कंपनी कर रही थी। मजदूरों की सुरक्षा के सभी इंतजाम दे लेकिन खराब मौसम के चलते यह हादसा हो गया तो यहां सवाल यह है कि जब मौसम विभाग ने पहले से खराब मौसम की चेतावनी जारी रखी थी। जब प्रशासन ने गांव-गांव मुनादी पिटवा दी थी तब इस पुल पर निर्माण कार्य कैसे चल रहा था? क्या इस कंपनी के पास खराब मौसम की भविष्यवाणी नहीं पहुंची थी? दूसरी बात आंधी के चलते इतने भारी स्लैब का गिर जाने का दावा अपने आप में सवाल खड़े करता है। पुल निर्माण के लिए इस्तेमाल होने वाले स्लैब टनों वजनी होते हैं। इन्हें पुल पर चढ़ाना और फिक्स करना बहुत जोखिम भरा काम है। इंडियन रोड्स कांग्रेस और परिवहन और हाईवे मंत्रालय की तरफ से स्पष्ट सेफ्टी गाइडलाइंस मौजूद है। क्या इन गाइडलाइंस का पालन हुआ था? डीएम साहब किस आधार पर कह रहे हैं कि पुल निर्माण के लिए सभी सेफ्टी मेजर्स और एसओपी का पालन हो रहा था? पुल निर्माण में एसओपी का पालन हो या ना हो, हर हादसे के बाद एक राजनीतिक एसओपी है, जिसका पालन बड़ी मुस्तैदी के साथ होता है। इस मामले में भी हो रहा है। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने घटना पर दुख जाहिर कर दिया है। यूपी ब्रिज कॉरपोरेशन के एमडी धर्मवीर सिंह ने मीडिया को जानकारी दी है कि मामले में लापरवाही बरतने के लिए सहायक अभियंता गजेंद्र चौधरी को निलंबित कर दिया गया है। और डीपीएम दिलीप कुमार के खिलाफ विभागीय जांच शुरू हो चुकी है। उत्तर प्रदेश सरकार ने मृतकों के लिए 5 लाख और घायलों के लिए 50000 के मुआवजे की घोषणा कर दी है। मतलब एसओपी पूरी कर ली गई है। राजनीतिक नेतृत्व का शोक प्रकट करना, जूनियर अधिकारियों का निलंबन, विभागीय जांच और मुआवजा। लेकिन जिन परिवारों ने अपने घर का सदस्य खोया है, उसकी भरपाई ₹5 लाख में हो जाएगी। इस हादसे में मारे गए लोकेंद्र निषाद की उम्र महज 22 साल थी। कुलदीप महज 19 साल के, सावंत यादव 28 और सभाजीत 30 साल के। भरी जवानी में खाक हो चुकी इन जिंदगियों का हिसाब महज ₹5 लाख। सरकारों को ऐसा क्यों लगता है कि तुरंत मुआवजा घोषित करने से डैमेज कंट्रोल हो जाएगा? जिन अधिकारियों ने लापरवाही बरती जिस ठेकेदार ने सेट नॉर्म्स का पालन नहीं किया। उनके खिलाफ हत्या का मुकदमा क्यों नहीं चलाया जाना चाहिए? क्या यूपी ब्रिज कॉरपोरेशन के एमडी धर्मेंद्र सिंह इस बात की गारंटी दे पाएंगे कि ऐसा हादसा फिर नहीं होगा पूरे प्रदेश में कहीं भी? क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पीड़ित परिवारों को यह आश्वासन दे पाएंगे कि दोषी अधिकारी और ठेकेदार जेल की सलाखों के पीछे होंगे? सबसे आखिरी बात मुआवजे के लिए 5 लाख की राशि की गणना किस गणितीय सूत्र के हिसाब से हुई ये सवाल उठता है। अगर एक मजदूर ₹20000 भी कमा रहा था तो यह राशि महज 2 साल की कमाई होती है। पीड़ित परिवार का जीवन इस 5 लाख के मुआवजे से चल जाएगा? अगर इसी जगह पर किसी अधिकारी या सरकारी कर्मचारी की मौत हो गई होती तो क्या सरकार 5 लाख का मुआवजा देती? जवाब है नहीं। सरकारी कर्मचारी की हादसे में मौत होती तो उसके परिवार को इंश्योरेंस के पैसे दिए जाते। आश्रित परिवार को पेंशन दी जाती और परिवार के एक सदस्य को अनुकंपा नियति। तो फिर मजदूरों के मामले में ऐसा भेदभाव क्यों? क्या सरकार के नजर में एक मजदूर की जान की कीमत महज ₹5 लाख है? ये वो जरूरी सवाल है जो हर जिम्मेदार से पूछा जाना चाहिए। अब चलते हैं दूसरे हादसे की तरफ। प्रदेश की राजधानी लखनऊ का चारबाग स्टेशन। यहां पर रेलवे स्टेशन का रिनोवेशन का काम चल रहा है। सुबह 8:00 बजे के करीब प्लेटफार्म नंबर पांच पर 60 से 70 फीट लंबा टीन शेड भरभरा कर गिर गया। इस हादसे में एक टीटी और दो मुसाफिर गंभीर घायल हुए हैं। उन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। यह तो सहयोग था कि इस प्लेटफार्म पर लगने वाली इंटरसिटी एक्सप्रेस 8:00 बजे रवाना हो चुकी थी और प्लेटफार्म लगभग खाली था। अगर यह हादसा कुछ मिनट पहले हुआ होता तो जान माल का बड़ा नुकसान हो सकता था। यहां भी वही एसओपी अपना ली गई है। डीआरएम साहब सुनील कुमार ने जांच के आदेश दिए हैं। जिम्मेदारी तो वैसे भी अपने देश में कोई लेता नहीं है। तीसरी तस्वीर गंगा एक्सप्रेसवे की है। सोशल मीडिया पर इस एक्सप्रेसवे के तमाम वीडियो शेयर हो रहे हैं। इन वीडियोस में सड़क की खराब गुणवत्ता दिखाई जा रही है। इंडियन नेशनल कांग्रेस ने भी ऐसे एक सोशल मीडिया वीडियो को अपने facebook अकाउंट से पोस्ट करते हुए क्या लिखा देखिए। राजनीति से इतर इतने खर्चीले प्रोजेक्ट की अगर कंस्ट्रक्शन क्वालिटी इतनी घटिया है तो उसका जिम्मेदार कौन है? क्या सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी यह बता पाएंगे कि इस सड़क के निर्माण की क्वालिटी चेक की जिम्मेदारी किस अधिकारी के पास थी? दिल्ली मुंबई एक्सप्रेसवे के निर्माण के दौरान माननीय मंत्री जी खुद क्वालिटी चेक करते हुए दिखाई दिए थे। इस बार उन्होंने ऐसी तत्परता क्यों नहीं दिखाई? अगर ₹36000 करोड़ की लागत से बने देश के सबसे महंगे एक्सप्रेसवे से एक और उसकी सड़कें हवा में धूल की तरह उड़ जा रही हैं। तो किसी ना किसी को तो जिम्मेदारी लेनी पड़ेगी ना। या फिर एक आखिरी रास्ता है। इन तमाम खामियों के लिए आंधी को दोषी ठहरा दिया जाए। हमीरपुर का पुल आंधी ने गिरा दिया। चारबाग रेलवे स्टेशन का टीन शेड आंधी ने जमीन पर पटक दिया। गंगा एक्सप्रेसवे के बारे में भी कह दीजिए साहब की डामर थी जो डामर था उसको आंधी ने उखाड़ कर धर दिया। एक तरफ देश में बात हो रही कि नीट की परीक्षा कौन करवाएगा तो एयरफोर्स की मदद ली जाएगी। हम तो कह रहे हैं भाई यह जो पुल बन रहा है इनके लिए भी सेना आर्मी की मदद ले लीजिए। शायद उससे कुछ रास्ता निकल आए। बाकी आपको क्या लगता है? कमेंट बॉक्स में लिखकर जरूर बताइएगा मैं सौरभ त्रिपाठी हूं आप न्यूज़ पिंच देख रहे थे हमारा आपको काम कैसा लगता है उसका फीडबैक भी देते चलिए बाकी हम दोस्तों को बताइए न्यूज़ पिंच के बारे में सब्सक्राइब करवाते चलिए शुक्रिया आपको।

UP: आंधी से पुल गिरा? 6 मौतों पर 5-5 लाख मुआवजे से इंसाफ होगा? Yogi सरकार जिम्मेदारी तय करेगी?
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[0:00]डीएम साहब किस आधार पर कह रहे हैं कि पुल निर्माण के लिए सभी सेफ्टी मेजर्स और एसओपी का पालन हो रहा था?
[0:00]जिन अधिकारियों ने लापरवाही बरती जिस ठेकेदार ने सेट नॉर्म्स का पालन नहीं किया। उनके खिलाफ हत्या का मुकदमा क्यों नहीं चलाया जाना चाहिए?
[0:00]क्या यूपी ब्रिज कॉरपोरेशन के एमडी धर्मेंद्र सिंह इस बात की गारंटी दे पाएंगे कि ऐसा हादसा फिर नहीं होगा पूरे प्रदेश में कहीं भी?
[0:00]क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पीड़ित परिवारों को यह आश्वासन दे पाएंगे कि दोषी अधिकारी और ठेकेदार जेल की सलाखों के पीछे होंगे?
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