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Important Straits and Waterways in the World | World Geography Explained in Hindi | Drishti IAS

Drishti IAS

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[0:00]आज की वीडियो शुरू करने से पहले आप जरा दुनिया का नक्शा अपनी आंखों के सामने इमेजिंग कीजिए.
[0:00]शायद आप अलग-अलग देशों, बड़े-बड़े महाद्वीपों और महासागरों के विषय में सोच रहे होंगे.
[0:00]ये ऐसे रास्ते हैं जो दुनिया में अदृश्य बने हुए हैं और जिन पर हर रोज हजारों जहाज चलते हैं जिसमें तेल, गैस, कंटेनर, मशीनें, इलेक्ट्रॉनिक्स, अनाज इत्यादि एक देश से दूसरे देश जाता है.
[0:00]आज की इस वीडियो में हम जानने वाले हैं दुनिया के उन 10 समुद्री मार्गों के बारे में जो ग्लोबल इकोनॉमी की बैकबोन माने जाते हैं.
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[0:00]आज की वीडियो शुरू करने से पहले आप जरा दुनिया का नक्शा अपनी आंखों के सामने इमेजिंग कीजिए. शायद आप अलग-अलग देशों, बड़े-बड़े महाद्वीपों और महासागरों के विषय में सोच रहे होंगे. पर जरा सोचिए क्या इन महाद्वीपों को आपस में जोड़ने का कोई रास्ता है? अलग-अलग देशों के बीच सड़कें तो है नहीं तो फिर इनके बीच व्यापार कैसे होता है? जी हां, जवाब है समुद्री मार्ग या सी रूट. ये ऐसे रास्ते हैं जो दुनिया में अदृश्य बने हुए हैं और जिन पर हर रोज हजारों जहाज चलते हैं जिसमें तेल, गैस, कंटेनर, मशीनें, इलेक्ट्रॉनिक्स, अनाज इत्यादि एक देश से दूसरे देश जाता है. आज की इस वीडियो में हम जानने वाले हैं दुनिया के उन 10 समुद्री मार्गों के बारे में जो ग्लोबल इकोनॉमी की बैकबोन माने जाते हैं. तो चलिए अपनी समुद्री यात्रा की करते हैं शुरुआत और हमारा सबसे पहला स्टॉप है पनामा कैनाल. 82 किलोमीटर लंबी ये मानक निर्मित नहर अटलांटिक महासागर और प्रशांत महासागर को आपस में जोड़ती है. अगर यह नहर नहीं होती तो जहाजों को केप हॉर्न यानी कि दक्षिण अमेरिका के साउथ टिप के चारों तरफ घूम कर जाना पड़ता. जिससे 2000 से 8000 नॉटिकल माइल की दूरी बढ़ जाती. इस नहर के जरिए एशिया और अमेरिका के बीच व्यापार काफी तेज हो गया है. हर साल यहां से करीब 12000 से 15000 जहाज गुजरते हैं. इस नहर से कोयला, मिनरल्स, क्रूड ऑयल, केमिकल्स जैसी चीजें एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाती हैं. 1904 में अमेरिका ने इसका निर्माण शुरू किया था और 1914 में इसका निर्माण पूरा कर लिया गया. और 1914 से लेकर के 1999 तक अमेरिका ही कभी पूरी तरीके से तो कभी आंशिक तौर पर इसका संचालन करता रहा. हालांकि 1999 में इसे पनामा की सरकार को सौंप दिया गया. इस रूट से जहाजों के आवागमन के लिए लॉक सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है. ऐसा इसीलिए क्योंकि अटलांटिक महासागर और प्रशांत महासागर दोनों की ऊंचाई में थोड़ा सा अंतर है. और इसीलिए इस सिस्टम का इस्तेमाल ऊंचाई प्राप्त करने के लिए किया जाता है. इसके अलावा जलवायु परिवर्तन कैनाल के लिए एक बड़ा खतरा पैदा कर रहा है. क्योंकि पनामा कैनाल का संचालन गैटुन झील पर निर्भर करता है और जलवायु परिवर्तन के कारण इस झील के पानी में काफी कमी आ रही है. हमारा दूसरा पड़ाव है स्वेज नहर. यह नहर भूमध्य सागर और रेड सी को आपस में जोड़ती है और यूरोप तथा एशिया के बीच व्यापार का सबसे शॉर्टकट रास्ता है. इसके साथ-साथ यह नहर अफ्रीकी महाद्वीप को एशिया महाद्वीप से भी अलग करती है. इसकी लंबाई करीबन 193.3 किलोमीटर के आसपास है. यहां से हर साल करीब 19000 जहाज गुजरते हैं यानी पूरी दुनिया के व्यापार का 12% और कंटेनर ट्रैफिक का लगभग 30% हिस्सा. और इसीलिए इस मार्ग को दुनिया के सबसे बिजी मार्गों में से एक माना जाता है. यहीं से एशिया और मिडिल ईस्ट का तेल यूरोप पहुंचता है. दुनिया के लगभग 7 से 8% तेल और 8% एलएनजी यानी के लिक्विफाइड नेचुरल गैस इसी रूट से ट्रांसपोर्ट होता है. 150 वर्ष पुरानी इस नहर पर प्रारंभिक वर्षों में ब्रिटिश और फ्रांसीसी हितों का नियंत्रण था. लेकिन 1956 में मिस्र ने इसका राष्ट्रीयकरण यानी नेशनलाइजेशन कर दिया. हाल ही में रूस यूक्रेन युद्ध की वजह से यहां से गुजरने वाले कई जहाजों ने लंबे रास्ते अपनाए हैं जिसकी वजह से दुनिया भर में जहाजों के बीच ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट और ट्रांसपोर्टेशन टाइम काफी ज्यादा बढ़ गया है. अब चलते हैं यूरोप की ओर डोवर स्ट्रेट की तरफ. ये इंग्लिश चैनल का सबसे पतला रास्ता है और इंग्लैंड को यूरोप से अलग करता है. यहां से हर दिन करीबन 400 से 500 जहाज गुजरते हैं. इंग्लैंड और यूरोप के बीच आने-जाने वाले माल का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आता जाता है. यहां का सबसे फेमस नजारा है व्हाइट क्लिफ्स ऑफ डोवर जो कि कुछ इस तरीके से दिखाई देता है. अब चलते हैं नॉर्थ अमेरिका में सेंट लॉरेंस सीवे की तरफ. करीब 600 किलोमीटर लंबा ये सीवे अटलांटिक महासागर को ग्रेट लेक्स से कनेक्ट करता है. यहां से हर साल 40 से 50 मिलियन टन कार्गो गुजरता है जिसमें आयरन ओर, ग्रेन माइनिंग प्रोडक्ट्स इत्यादि शामिल होते हैं. इस सीवे की वजह से अमेरिका और कनाडा के छोटे बड़े बंदरगाहों में सीधा व्यापार संभव हो पाया है. अब हम आते हैं एशिया के सबसे महत्वपूर्ण रास्ते पर यानी कि मलक्का स्ट्रेट पर. ये जलडमरूमध्य करीब 800 किलोमीटर लंबा है और सुमात्रा तथा मलेशिया के बीच स्थित है. यहीं से इंडियन ओशन और पैसिफिक ओशन कनेक्ट होते हैं. यह रूट भारत, चीन, जापान जैसे बड़े देशों को भी आपस में कनेक्ट करता है. यहां से हर साल लगभग 50,000 जहाज गुजरते हैं जिसके जरिए इंडोनेशिया की कॉफी, कोयला, पाम ऑयल, मशीनरी और फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट होते हैं. इसी के नाम पर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण कॉन्सेप्ट भी है जिसका नाम है मलक्का डिलेमा. जिसे 2003 में तत्कालीन चीनी राष्ट्रपति हू जिंताओं द्वारा गढ़ा गया था. जिसके मुताबिक यदि मलक्का स्ट्रेट को ब्लॉक कर दिया जाता है तो ये चीन की इकॉनमी को नुकसान पहुंचा सकता है. क्योंकि चीन का लगभग 80% निर्यात इसी क्षेत्र से होकर के गुजरता है. इसीलिए चीन लगातार कोशिश करता है कि वो अपने व्यापार के लिए नए मार्ग तलाश सके. यहां भारत के पास भी एक स्ट्रैटेजिक बढ़त मौजूद है. क्योंकि भारत का अंडमान निकोबार द्वीप समूह इस स्ट्रेट के काफी पास पड़ता है. और इसीलिए चीन को यह भी डर रहता है कि भारत किसी एक्सट्रीम सिचुएशन में मलक्का स्ट्रेट को ब्लॉक करने जैसा बड़ा कदम उठा सकता है. अब हम बात करते हैं एक और स्ट्रैटेजिक लोकेशन की जिसका नाम है हरमूज स्ट्रेट. यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और फिर अरब सागर से जोड़ता है. यह करीब 167 किलोमीटर लंबा है और यहां से दुनिया के लगभग 25% तेल और एक तिहाई एलएनजी गुजरता है. इसीलिए यह रास्ता एशियाई देशों जैसे भारत, चीन, जापान, कोरिया के लिए बेहद जरूरी है. अब इस मार्ग की लंबाई तो ज्यादा है लेकिन इसकी चौड़ाई काफी कम है लगभग 33 किलोमीटर के आसपास जिसमें से केवल 3 किलोमीटर का रास्ता ही नेविगेबल है. इसीलिए यहां नेविगेशन थोड़ी मुश्किल होती है. यहीं से गुजरने वाले जहाज एक ट्रैफिक सिस्टम को फॉलो करते हैं ताकि आपस में टकराव से बचा जा सके. अब हम बढ़ते हैं यूरोप और अफ्रीका के बीच मौजूद जिब्राल्टर स्ट्रेट पर. यह अटलांटिक महासागर को भूमध्य सागर से जोड़ता है. इसकी चौड़ाई सबसे सक्रिय जगह पर मात्र 13 किलोमीटर है. यहां से जहाज यूरोप, अफ्रीका और अमेरिका के बीच सफर करते हैं. यह इलाका बर्ड वाचिंग के लिए भी फेमस है क्योंकि कई प्रवासी पक्षी इसी मार्ग का इस्तेमाल करके एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते हैं. अब हम चलते हैं स्कैंडिनेवियन रीजन में डेनिश स्ट्रेट की तरफ. यह स्ट्रेट बाल्टिक सी को नॉर्थ सी से कनेक्ट करता है. यहां से हर दिन करीबन 3.2 मिलियन बैरल तेल गुजरता है खासतौर पर रूस के एक्सपोर्ट के लिए. पहले यह डेनमार्क का आंतरिक जलमार्ग हुआ करता था और 1857 में कोपेनहेगन कन्वेंशन ने डेनिश स्ट्रेट को एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग बना दिया था. अब चलते हैं तुर्की में यानी कि बॉस्फोरस स्ट्रेट की ओर. ये ब्लैक सी यानी काला सागर को सी ऑफ मरमरा से जोड़ता है. इसकी लंबाई सिर्फ 31 किलोमीटर है और कुछ हिस्सों में इसकी चौड़ाई केवल 730 मीटर ही है. इसीलिए यहां नेविगेशन थोड़ी मुश्किल होती है. यही रूट रूस यूक्रेन जैसे देशों के लिए दुनिया के बाकी हिस्सों तक पहुंचने का रास्ता है और फरवरी 2022 में जब से रूस यूक्रेन युद्ध की शुरुआत हुई है तब से यहां से गुजरने वाला व्यापार काफी ज्यादा प्रभावित हुआ है. आखिर में बात करते हैं ट्रांस पैसिफिक रूट की. यह रूट एशिया को अमेरिका और साउथ अमेरिका से जोड़ता है. यहां से इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल, मशीनरी जैसी चीजें एक्सपोर्ट की जाती हैं या ट्रांसपोर्ट की जाती हैं. इसमें दो हिस्से हैं पहला है नॉर्थ पैसिफिक रूट जो कि चीन, जापान, कोरिया को अमेरिका और कनाडा से कनेक्ट करता है. दूसरा है साउथ पैसिफिक रूट जो कि साउथ ईस्ट एशिया और ओशिनिया को साउथ अमेरिका से जोड़ता है. तो दोस्तों यह थे दुनिया के 10 सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग जिनके बिना ग्लोबल ट्रेड की कल्पना नहीं की जा सकती. अब आप हमें कमेंट करके बताइए कि इनमें से कौन सा समुद्री मार्ग आपको सबसे ज्यादा इंटरेस्टिंग लगा. और हां आपको अगर 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