[0:00]बाप और बेटा को एकदम दोस्त की तरह रहना चाहिए। दोस्त? अरे नहीं-नहीं पापा। उसी में तो मजा है। नहीं-नहीं पापा। और हम चार पेटी लाए थे सोचे तो नहीं पार्टी-सार्टी करेंगे। छोड़ो। और भाई विनोद क्या हाल-चाल है? अरे विनोदवा रे। अरे पेटीया खोल। तरा बेटी के तुम लोग पीते भी हो? अरे ना-ना पापा कैसा बात। अरे विनोदवा ब्रो है अपना। अरे हां हां भाई। अरे बढ़िया पीता है। ए गर्लफ्रेंड भी है। अरे तोता तोता सृष्टि है। किसी दिन मिले हो उससे? किसी दिन नहीं बस रात। टाइम हो गया चला है। आधा घंटा बाद झांकिएगा। तनी बेल्टवा दो तो भाई। बेल्टवा। पैंट ढीला हो रहा है का? लेकिन तुम तो लुंगी पहने हो।
[0:51]ठीक है भाई। अंकल जी प्रणाम। माइए साले को हां तोरी मैया के



