[0:07]आपकी जिंदगी में कभी कोई ऐसा दिन गया है? दिन तो मैंने शायद ज्यादा बोल दिया। कभी कोई एक ऐसा घंटा भी गया है कि जब आपने हाथ में मोबाइल ना लिया हो? किसी ना किसी तरह से डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल नहीं किया हो, नहीं ना। हर रोज करते हैं। लेकिन कभी आपने सोचा है कि आपको आसानी से यह जो डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और सारी सेवाएं मिल रही है, आपके मोबाइल फोन का आप इस्तेमाल कर रहे हैं, कॉल्स आ रहे हैं जा रहे हैं आप सारे ट्रांजैक्शंस कर रहे हैं इन सबके पीछे कौन है वो अथॉरिटी कौन है वो रेगुलेटर जो इन्हें पूरी तरह से देशभर में चलाता है? क्योंकि कई बार आपको समस्याएं भी होती हैं, स्पैम कॉल्स आते हैं, अनचाहे कॉल्स आते हैं, कनेक्टिविटी के इश्यूज होते हैं, टेलीकॉम कंपनी आपकी सुनती नहीं, तो आप ये सोचते हैं कि इसकी सुनवाई किसके पास है? कहां जाकर गुहार लगाएं? तो आज हम आपको ऐसे ही रेगुलेटर से मिलवाने जा रहे हैं जिसकी शायद जिंदगी में आपको सबसे ज्यादा जरूरत पड़ती है। टेलीकॉम अथॉरिटी रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया ट्राई जी हां इसके चेयरमैन अनिल कुमार लाहोटी साहब हमारे साथ कार्यक्रम में हो रहे हैं शामिल और मैं जरा उनका परिचय आपको दे दूं। आपने 37 साल तक इंडियन रेलवेज में अलग-अलग पदों पर अपनी सेवाएं दी है। अगस्त 2023 में आप रिटायर हुए थे रेलवे बोर्ड के सीईओ और चेयरमैन के पद से। उसके बाद तुरंत ही जनवरी 2024 से आप ट्राई के चेयरमैन बन गए। ग्वालियर से आपने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में सिविल इंजीनियरिंग में इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की है। आईआईटी रुड़की से आपने स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है यानी कि वेल क्वालिफाइड वेल एक्सपीरियंस अनिल कुमार लाहोटी साहब। सर बहुत-बहुत स्वागत है आपका ज़ी बिज़नेस पर। धन्यवाद हमें समय देने के लिए। ढेर सारे सवाल है सर मेरे पास आज आपके लिए। क्योंकि मैं सारे देश भर के कंज्यूमर्स का प्रतिनिधित्व कर रहा हूं और वो बहुत कुछ आपसे जानना समझना चाहते हैं। सबसे पहले शुरुआत इस बात से करता हूं कि आमतौर पर लोगों को जो सबसे बड़ी समस्या रहती है कि स्पैम कॉल आ रहा है। मैं तो नहीं चाहता कि फोन आए। ठीक है। कहीं कुछ डिजिटल फ्रॉड हो रहे हैं। पता चला कि अगर मुझे कुछ सर्विसेज़ बराबर नहीं मिल रही है, नेटवर्क अच्छा नहीं है। मैं कंप्लेन करता हूं तो उसकी सुनवाई नहीं होती है। ट्राई आप रेगुलेटर हैं पूरी इस स्पेस के। ट्राई का क्या कुछ काम चल रहा है इस बारे में? आप क्या कुछ नए बदलाव करने जा रहे हैं? सबसे पहले वह समझाएं। अब देखिए कंज्यूमर के इंटरेस्ट को प्रोटेक्ट करना और कंज्यूमर को सही क्वालिटी की सेवा मिले। उचित दर पर मिले, यह ट्राई की एक बहुत इंपॉर्टेंट जिम्मेदारी है और इसको हम सर्वोपरि रख के चलते हैं और इसके लिए हमने क्वालिटी ऑफ सर्विस के बारे में नियम बनाए हैं। और उनको समय-समय पर हम अपग्रेड करते हैं आवश्यकता अनुसार और हाल ही में टेलीकम्युनिकेशन सुविधाओं के लिए हमने जो क्वालिटी ऑफ सर्विस के रेगुलेशन है, उसमें पूरा बदलाव करके उनको आधुनिक बनाया है और स्ट्रिंजेंट बनाया है और उसमें बहुत क्लोज मॉनिटरिंग की व्यवस्था की है ताकि कंज्यूमर्स को प्रॉपर क्वालिटी टेलीकम्युनिकेशन सेवाओं की मिल सके। जो स्पैम के बारे में आपने चर्चा की तो उसके बारे में ट्राई ने बहुत ही सुदृढ़ एक व्यवस्था बनाई है जो कि टेक्नोलॉजी पर आधारित है। देश भर में प्रतिदिन लगभग 11000 करोड़ कॉल्स या एसएमएस का संचार होता है। और अ तो इस इस संचार में स्पैम की समस्या यदि आ रही है तो उसको कंट्रोल करने के लिए हमने टेक्नोलॉजी का उपयोग किया है। और इसमें हमने इसको दो तरीके से हैंडल करते हैं। एक तो जो टेली मार्केटर्स के जरिए मार्केटिंग कॉल होती हैं। उसमें स्पैम ना हो इसके लिए हमने ब्लॉकचेन बेस्ड डिजिटल लेजर डिस्ट्रीब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी का उपयोग किया है। जी। और जो अ तो इसके माध्यम से जो प्रत्येक टेलीमार्केटिंग कॉल या एसएमएस है, वह डेल टी प्लेटफॉर्म के माध्यम से जाता है। और जिस कंज्यूमर ने अपना जो मार्केटिंग कॉल को ब्लॉक किया हुआ है, उसकी कॉल्स वहां पर रुक जाती हैं। प्राय हमने देखा है कि बहुत से लोग जो पर्सनल नंबर हैं, व्यक्तिगत नंबर हैं, मोबाइल नंबर हो, लैंडलाइन नंबर हो, उनका उपयोग दुरुपयोग करके या मिसयूज करके व्यवसायिक कॉल करते हैं। उसको डिटेक्ट करने के लिए हमने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यूज करने का काम प्रावधान किया है और इसको हमारे सभी मेजर टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स ने पिछले लगभग एक साल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का यह तंत्र लगा दिया है। तो उसके जरिए यदि कोई भी कॉल स्पैम या मैसेज स्पैम आइडेंटिफाई होता है तो कंज्यूमर को उसकी वार्निंग मिल जाती है। तो प्रतिदिन लगभग 40 करोड़ कॉल या एसएमएस को या तो ब्लॉक कर दिया जाता है या उस पर वार्निंग जाती है कि ये स्पैम संभावित है। इसका मतलब है कि हमें प्रति एक करोड़ वॉइस और एसएमएस के संचार के बीच केवल एक शिकायत स्पैम की प्राप्त होती है। तो इस सुदृढ़ तंत्र की का यह प्रभाव है कि अल्टीमेटली हमको 11000 कॉल और एसएमएस के अगेंस्ट जो प्रतिदिन जो स्पैम की शिकायतें प्राप्त होती हैं, उनकी संख्या केवल 13000 है। लेकिन एक चीज और जो आपने अभी हाल ही में की, मैं उस पर जाना चाहता हूं। चूंकि हम कंज्यूमर के इंटरेस्ट की बात कर रहे हैं। आपने डिजिटल कंसेंट एक्विजिशन पर आपने हाल ही में एक पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च किया है। पहले तो यह समझाएं सर कि ये डिजिटल कंसेंट एक्विजिशन है क्या? कैसे काम करेगा और इसको लागू करने के पीछे ट्राई का इरादा क्या है? ये एक बहुत महत्त्वपूर्ण कदम ट्राई ने उठाया है। तो आज डू नॉट डिस्टर्ब रजिस्ट्री में जो प्रावधान है, कोई भी कंज्यूमर सेक्टर वाइज मार्केटिंग कॉल्स को रोक सकता है। जैसे उदाहरण के लिए फाइनेंशियल सेक्टर से यदि वह मार्केटिंग कॉल नहीं चाहता तो उसको ब्लॉक कर सकता है। रियल एस्टेट सेक्टर से नहीं चाहता तो उसको ब्लॉक कर सकता है इत्यादि। लेकिन उसमें यह भी प्रावधान है कि यदि वह कंज्यूमर चाहता है कि मुझे मान लीजिए सामान्यतः सारी सारी बैंक से कॉल नहीं चाहिए, बट एक पर्टिकुलर बैंक जिसका वह सब्सक्राइबर है। उससे वो चाहता है कि मुझे मार्केटिंग कॉल या ऑफर आए या उसको कोई लोन लेने में इंटरेस्ट है और वो ऑफर्स जानना चाहता है तो वो उसकी परमिशन दे सकता है। अब अ अब लेकिन इसमें एक प्रैक्टिकल प्रॉब्लम यह आ रही थी कि यह जो अ कंसेंट लोगों ने दी हुई हैं, ये अ प्रायः फॉर्म भरते समय दी हुई हैं। या उनकी विभिन्न ब्रांचेस पे अलग-अलग स्थानों पर दी हुई हैं और जब इन कंज्यूमर्स को यह मार्केटिंग कॉल आती है तो इनके खिलाफ हमें कई शिकायतें प्राप्त हुई। तो जब उन शिकायतों को इन्वेस्टिगेट किया गया तो वह कंसर्न जो भी एंटिटी थी, चाहे बैंक हो, चाहे इंश्योरेंस कंपनी हो, उन्होंने ये कहा कि हमारे पास तो कंज्यूमर का कंसेंट अवेलेबल है। अब ये कंज्यूमर को पहली चीज तो इसकी पूरी जानकारी नहीं है और वह उसको आसानी से रिवोक नहीं कर सकता। तो कंज्यूमर को एंपावर करने के लिए यानी उसको ये ट्रांसपेरेंटली विजिबल हो कि उसने कौन-कौन सी एंटरप्राइजेस को ये कंसेंट दे रखी है कि वो उसको मार्केटिंग कॉल कर सके। और वो जब चाहे उस सुविधा को रिवोक कर सके। यह एंपावर करने के लिए हम डिजिटली इसको डिजिटल कंसेंट एक्विजिशन का प्रावधान कर रहे हैं। और इसमें जो सबसे बड़ा चैलेंज था, वो यह था कि सारी जो हमारी इकोनॉमिक व्यवस्था है, उसमें सभी एंटरप्राइजेस के पास लीगसी कंसेंट्स हैं जो उन्होंने पहले से ली हुई है। तो उसको कैसे अकाउंट फॉर किया जाए। तो विस्तृत चर्चा हम लोगों ने सभी से की और उसके बाद में निर्णय लिया गया कि जो इनके पास लीगसी कंसेंट्स हैं वो इनको सेल्फ सर्टिफाई मतलब जो एंटरप्राइज है वो सर्टिफाई करके अपलोड कर सकती है। और उसके बाद में कंज्यूमर को जब वो विजिबल हो जाएगी तो वो उसको रिवोक कर सकेगा। ये डिजिटल कंसेंट एक्विजिशन की व्यवस्था है और जब ये एक बार लागू हो जाएगी उसके बाद फर्दर जो भी कंसेंट्स होंगी वो केवल डिजिटल होगी। तो कब तक लागू करने का इरादा रखते हैं? आप क्योंकि इसमें तो मेरे पास पावर आ जाएगा। जी। मैं एज अ कंज्यूमर देख रहा हूं मैंने किसको अनुमति दी है मेरी मर्जी है बंद करनी मैं तुरंत कर दूंगा और आप उसको पूरी हमारी सहायता करेंगे कि ऐसा मैं कर सकूं। ये लागू कब करने वाले हैं? पायलट प्रोजेक्ट चल रहा है। जी। तो ये इसको लागू करने के लिए इसमें चूंकि यह बहुत मैसिव स्केल पे ये काम होगा तो इसमें सबसे पहले हमने एक पायलट प्रोजेक्ट लिया। जी और चूंकि जो सबसे महत्त्वपूर्ण कम्युनिकेशन किसी भी कंज्यूमर के लिए है वह बैंक से होता है तो यह पायलट प्रोजेक्ट हमने बैंकिंग सेक्टर में लिया है और इसमें आरबीआई के सहयोग से हमने जो 11 बड़ी बैंक्स थी जिसमें कि एसबीआई, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई, इत्यादि शामिल हैं। उनको इस पायलट प्रोजेक्ट में सहयोगी बनाया और उनके साथ हमारे जो आठ टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर हैं, वो भी जुड़े। और इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत जो उसकी पूरी टेक्निकल व्यवस्था है, वह उसको बनाया गया और वह बनाने के बाद इन्होंने टेस्ट कंसेंट्स उसमें अपलोड किए जो कि यह पायलट प्रोजेक्ट हमने दिसंबर 2025 में लॉन्च किया। और यह जो पायलट प्रोजेक्ट हमने लॉन्च किया, वह लार्जली सक्सेसफुली लॉन्च हुआ यानी उसमें टेक्निकली वो व्यवस्था ठीक पाई गई। एंड टू एंड डिलीवरी संभव हो पाई। वो इंटर ऑपरेबल भी था, एक ऑपरेटर से दूसरे ऑपरेटर के बीच मैसेज जा सका। तो अभी ये पायलट प्रोजेक्ट हमारा सफल हुआ है। अब इसको हम इन बैंक्स में पूर्ण रूप में लागू करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं और उसके बाद हम पूरे बैंकिंग सेक्टर में लेके जाएंगे। और उसके बाद जो पूरा फाइनेंशियल सेक्टर है यानी इंश्योरेंस कंपनी, म्यूचुअल फंड कंपनी, म्यूचुअल फंड कंपनी, पेंशन फंड कंपनी इत्यादि सभी को कवर करते हुए पूरा फाइनेंशियल सेक्टर हम कवर करेंगे। और उसके बाद इकोनॉमी के दूसरे सेक्टर्स में इसको लेके जा। यानी कि कंज्यूमर के हाथ में एक बड़ा हथियार कि किससे उनको कॉल्स चाहिए, किन से नहीं चाहिए। किन से मार्केटिंग ऑफर्स चाहिए? स्पैम कॉल्स उनके हाथ में होगा और तुरंत वो देख सकेंगे किस-किस को अप्रूवल दी गई है और बदलना चाहें तो तुरंत बदल सकते हैं। लेकिन एक और बड़ी समस्या जो लाहोटी साहब हैं देश के कंज्यूमर्स को बड़े-बड़े महंगे-महंगे घर खरीद लेते हैं। मुंबई की बात करूं जो मैं मुंबई में लेता हूं। लेकिन कनेक्टिविटी नहीं है। पता चला कि वहां सिग्नल्स अच्छे नहीं आ रहे हैं। मैंने सुना है कि ट्राई कुछ बड़ा और बड़ा सिस्टम बनाने की कोशिश कर रही है। इंडोर सिस्टम जिसे कहते हैं इन बिल्डिंग कनेक्टिविटी। यह क्या प्रोजेक्ट है और यह कैसे आम कंज्यूमर की समस्या को दूर करेगा? यह एक बहुत महत्त्वपूर्ण इनिशिएटिव ट्राई ने लिया है। अ जैसे-जैसे हमारा डेटा कंजम्पशन बढ़ रहा है। आज की तारीख में जो हमारे 5जी यूजर्स हैं, 4जी, 5जी यूजर्स हैं। उनका प्रतिमा डाटा कंजम्पशन लगभग 28 जीबी के होता है जो कि विश्व में हाईएस्ट स्तर पर के के स्तर पर है। तो यह डेटा कंजम्पशन टेक्नोलॉजी, संचार टेक्नोलॉजी के विस्तार से संभव तो हो रहा है। लेकिन इसी के साथ में नया चैलेंज आ गया है इंडोर कनेक्टिविटी का। क्योंकि जो 5जी टेक्नोलॉजी है, इसमें हम हायर फ्रीक्वेंसी के बैंड्स यूटिलाइज करते हैं जिनमें कि ज्यादा डेटा कैरी करने की कैपेसिटी क्षमता है। लेकिन ये जो हायर फ्रीक्वेंसी की जो वेव्स हैं सिग्नल्स हैं, इनके साथ में यह टेक्निकल दिक्कत है कि जब वो दीवार को या ग्लास को या कंक्रीट या स्टील को पार करते हैं तो समय इनकी सिग्नल की जो स्ट्रेंथ है वह कम हो जाती है।
[11:55]तो इसके लिए अब आवश्यक यह है कि हम अपनी बिल्डिंग्स के अंदर भी जो डिजिटल कनेक्टिविटी का इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइड करें। अर्थात जिस तरह से हम अपने एक इलेक्ट्रिकल सप्लाई बिल्डिंग तक लाने के बाद में उसको अंदर पूरा एक नेट और अपना पूरी डिस्ट्रीब्यूशन लगाकर के और बल्ब्स या फैेंस को इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई करते हैं। उसी प्रकार से हमको नेटवर्क लगा कर के सिग्नल अपने बिल्डिंग में डिस्ट्रीब्यूट करना होगा और डिस्ट्रीब्यूटेड एंटीना सिस्टम यानी जो छोटी छोटी पावर के एंटीना होते हैं, वो बिल्डिंग्स में लगाए जाएंगे और ऐसे प्रत्येक एंटीना से सारे सर्विस प्रोवाइडर का सिग्नल आपको वहां पर उपलब्ध होगा। अच्छा सबका मिलेगा? सबका मिलेगा और पूरी बिल्डिंग में आपको बेहतर सिग्नल पूर्ण सिग्नल स्ट्रेंथ मिल सकेगी हर जगह पे। और इसी प्रकार से उसके साथ में वाईफाई एक्सेस पॉइंट का भी प्रावधान किया जा सकता है जिससे आपको ब्रॉडबैंड की भी सुविधा उपलब्ध होगी। ये आपने बड़ी इंटरेस्टिंग चीज की कि भले ही मैं किसी भी टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर का कनेक्शन लेकर बैठा हूं, लेकिन सबको समान वो कनेक्टिविटी मिलेगी। मुझे कैसे पता चलेगा कि इस बिल्डिंग में कनेक्टिविटी अच्छी है, इसमें खराब है? अब मैंने तो महंगा फ्लैट खरीद लिया। वहां गया पता चला कि 40वें फ्लोर पे पता चला कनेक्टिविटी नहीं है। इतने पैसे देने के बाद या किसी ऐसे इलाके में जहां आपको लगता है पोश इलाका है। वहां किसी पर्टिकुलर सर्विस प्रोवाइडर का बिल्कुल सिग्नल ही नहीं आ रहा है तो क्या इसमें कोई ऐसा तरीका है जिससे मुझे पहले ही पता चल जाए? ये कंज्यूमर के लिए एक आसान तरीका होना बहुत आवश्यक है। क्योंकि कंज्यूमर को ये जानकारी अदर वाइज टेक्निकली उपलब्ध नहीं हो पाएगी तो इसके लिए ट्राई ने एक रेगुलेशन बनाया है, जिसके तहत हम प्रत्येक प्रॉपर्टी का यह संभव होगा कि हम उसकी डिजिटल कनेक्टिविटी कैसी है, उसका रेटिंग कर सकते हैं। अच्छा जी और वो रेटिंग करने के बाद में उस प्रॉपर्टी का को एक स्टार रेटिंग दे दिया जाएगा। जिस प्रकार से हम एनर्जी एफिशिएंसी का रेटिंग अप्लायंसस में देते हैं तो एक से लेकर के पांच स्टार के बीच में उसका रेटिंग होगा और उससे कंज्यूमर को आसानी से पता चल जाएगा कि यदि वह एक फना प्रॉपर्टी में फ्लैट खरीद रहा है या शॉप खरीद रहा है या ऑफिस रेंट कर रहा है तो वहां उसको डिजिटल कनेक्टिविटी कैसी मिलने वाली है? तो वो स्टार रेटिंग के आसान व्यवस्था के आधार पे उसको मिल जाएगा। क्या बात है ये तो बड़ा आसान काम हो जाएगा कि जिस तरह अगर मैं फ्रीज या वाशिंग मशीन खरीदने जाता हूं या एसी खरीदता हूं, मुझे पता चलता है कि रेटिंग कितनी है? जी सिमिलरली बिल्डिंग्स की रेटिंग इसके बेसिस पे होगी। बहुत बढ़िया बात है। एक और जहां ट्राई का काम है कि कंज्यूमर्स को बेस्ट सर्विसेज़ मिले। दूसरी और टेलीकॉम कंपनियां हैं उनकी भी अपनी समस्याएं हैं। एक्सपेंशन करना है, इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना है। पैसे उन्हें भी चाहिए हैं फाइनेंशियल असिस्टेंट चाहिए और साथ ही हिंदुस्तान में जो है आप जैसे रेगुलेटर की वजह से टेलीकॉम सर्विसेज के दाम सबसे कम है पूरी दुनिया में। तो दोनों के बीच में किस तरह से आप बैलेंस बनाकर अच्छी सर्विसेज और प्रॉफिटेबिलिटी कंपनी की कैसे मैनेज करेंगे? अ देखिए अ हमारे लिए हमें दोनों चीजें देखना है कि इंडस्ट्री भी ग्रो करें तभी वह सेवाएं प्रदान कर सकेगी और कंज्यूमर का इंटरेस्ट प्रोटेक्ट हो। वो कंज्यूमर को प्रॉपर चॉइस मिले तो हम इन दोनों के बीच में बैलेंस लगाकर बना कर के हमें आगे बढ़ना होता है। इंडस्ट्री ग्रो करे इसके लिए आवश्यक है कि हम उनको इज ऑफ डूइंग बिजनेस प्रोवाइड प्रोवाइड करें और इसके साथ ही ट्राई ने पिछले कई वर्षों से लगातार इस तरह की सिफारिश की है या रेगुलेशन में प्रोविजन किए हैं। जिसके तरह से जिस की वजह से उनको जो बिजनेस करने की सुविधा है, वह बेहतर हो। ट्राई ने लगातार उनके जहां पर लाइसेंस फी अधिक थी, उसको रेशन आइज करने की सिफारिश की है। जो स्पेक्ट्रम प्राइसेस हैं जिससे जो इनका एक बड़ा खर्च स्पेक्ट्रम की प्राइस से आता है, उसको रेशन आइज करने की दिशा में ट्राई ने कार्य किया है।
[16:00]टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स की फाइनेंशियल वायबिलिटी बनी रहे। इसके लिए हमने यह भी प्रावधान किए हैं कि टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर इंफ्रास्ट्रक्चर को शेयर कर सकें ताकि उनकी लागत कम आए, स्पेक्ट्रम को शेयर कर सकें। ताकि उनकी लागत कम आए। जो भी हम प्रावधान कर रहे हैं उसमें ध्यान रखते हैं कि ये इनोवेशन फ्रेंडली हो ताकि वो इनोवेट कर सके और टेक्नोलॉजी से जो बेनिफिट्स ला सकते हैं सुविधाओं में या कॉस्ट कम करने में। वो आसानी से न्यू टेक्नोलॉजी को अडॉप्ट कर सकें। तो ये प्रिंसिपल्स के आधार पर हमने रेगुलेशंस बनाए हैं और सिफारिशें की हैं सरकार को ताकि जो टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स हैं उनकी वायबिलिटी बनी रहे। वो ग्रो करें और बेहतर सुविधाएं प्रदान करें। बिल्कुल डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर भी आप ही के अंडर में आता है। स्पेशली ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर जो थोड़ा मुश्किल भरे समय से गुजर रहा है। धीरे-धीरे टेलीविजंस का दौर कम हो रहा है। लोग अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर डेटा कंज्यूम कर रहे हैं। ऐसे में जो ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर की चुनौतियां हैं, उसको लेकर ट्राई की क्या अप्रोच है? आपकी क्या प्रायोरिटीज है वो समझाएं सर? देखिए ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर हो चाहे टेलीकॉम सेक्टर हो, जो बेसिक प्रिंसिपल्स हैं वो तो कॉमन ही है। कि हमको प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करना है। लेवल प्लेइंग फील्ड प्रोवाइड करना है। हम ऐसे रेगुलेशन या पॉलिसी बनाएं जिससे जिससे स्मॉल प्लेयर्स जो छोटे प्लेयर्स हैं उनको बिजनेस करने में दिक्कत ना आए। उनको एक लेवल प्लेइंग फील्ड मिले। कोई भी न्यू एंटरप्रेन्योर अगर बिजनेस में आना चाहता है, उसके लिए एंट्री बैरियर कम हो। वह आसानी से बिजनेस शुरू कर सके, ये तो बेसिक प्रिंसिपल्स हैं और यह सब करते हुए हम कंज्यूमर को फेयर चॉइस प्रोवाइड करें और उसके इंटरेस्ट को प्रोटेक्ट करें। तो इन्हीं प्रिंसिपल्स के आधार पर हम ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर को भी डील करते हैं। अब जो ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर है जैसा आपने कहा कि उसमें जो हमारा ट्रेडिशनल ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर है या लीनियर टेलीविजन है। वो उसके पास में आज की तारीख में चुनौतियां हैं। वो चुनौतियां है राइज ऑफ अल्टरनेटिव टेक्नोलॉजी यानी जो डिजिटल प्लेटफॉर्म का राइज हो रहा है, वो एक चुनौती है। और इसके साथ ही उनको चुनौती आती है कि जहां पर प्राइवेट सेक्टर और पब्लिक सेक्टर के बारे में जो रेगुलेटरी प्रिंसिपल्स हैं, उनमें कुछ डिफरेंस है। तो ये दो चुनौतियां ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर के सामने आती हैं। तो ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर सस्टेन करे और वो सुविधाएं प्रदान करता रहे और उसकी ये इंडस्ट्री वायबल रहे। इसके लिए हम लगातार जो ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पे कार्य कर रहे हैं, जो रेगुलेशन है उनको जहां संभव है वहां इज कर रहे हैं ताकि ये लोग अपना कंप्लायंस बर्डन इनका कम हो सके। इसका हम लोग ध्यान कर रहे हैं और यह इसके साथ में हमें ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर में विशेष ध्यान रखना है कि हम एक लेवल प्लेइंग फील्ड स्मॉल प्लेयर्स को प्रोवाइड करें ताकि स्मॉल प्लेयर्स सबसे पहले अफेक्ट होंगे तो वो सरवाइव कर सकें। इन तीन चीजों का हम विशेषकर ध्यान रखें। आपने कुछ समय पहले ये कहा भी जब स्पैम कॉल्स की बात हो रही थी आपने कहा कि हम ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तो यानी कि स्टेट ऑफ द आर्ट टेक्नोलॉजी ट्राई यूज कर रहा है। मैं ये जानना चाहता हूं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टॉक ऑफ द टाउन है और हर हर एक सेक्टर में इंप्लीमेंट किया जा रहा है। यहां पर क्या चिंताएं हैं? क्या चुनौतियां हैं? क्या मौके हैं? अगले तीन पांच साल में ट्राई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर किस तरह से इस्तेमाल करने का प्लान बना रहा है? देखिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तो हमारी पूरी इकोनॉमी और सोसाइटी में हर जगह आने वाला है और एक बहुत मतलब सशक्त टेक्नोलॉजी आई है। जिससे कि जिससे कि प्रोडक्टिविटी बहुत इंप्रूव हो सकती है, एफिशिएंसी इंप्रूव हो सकती है जो कन्वीनियंस है, सुविधा है, वह बहुत तेजी से बढ़ सकती है। इसका अगर मैं टेलीकम्युनिकेशन सेक्टर की बात करूं तो टेलीकम्युनिकेशन सेक्टर में इसका बहुत बड़ा रोल है।
[20:06]तो आज की सबसे पहली बात तो यह है कि टेलीकम्युनिकेशन का एक बहुत बड़ा नेटवर्क होता है। इस नेटवर्क को मैनेज ही करना एक बड़ी चुनौती होती है जबकि उसमें मल्टीपल टाइप ऑफ सर्विसेस प्रोवाइड की जा रही हैं। 24 घंटे डिफरेंट टाइप की ट्रैफिक डिमांड्स हैं और उसमें जो अपना हमारा पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर है उसमें जगह-जगह मेंटेनेंस की चुनौती भी है। तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक बहुत बड़ा रोल जो नेटवर्क को मैनेज करने के लिए प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस के लिए उसमें उपयोग हो सकता है और जो टेलीकम्युनिकेशन सेक्टर की बहुत सारे कॉम्प्लेक्शन मतलब जटिल वर्कफ्लोज हैं। उनको मैनेज करने के लिए उनको प्लान करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का एक बहुत बड़ा उपयोग है। कंज्यूमर से के एंगल से देखें तो कंज्यूमर के लिए बेहतर सुविधाएं प्रोवाइड करने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का रोल है। और जो जैसा मैंने आपको बताया स्पैम कॉल के डिटेक्शन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का ऑलरेडी उपयोग हमने शुरू कर दिया है। तो इस प्रकार से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का पूरे टेलीकम्युनिकेशन सेक्टर में ऑल पर्वेजिव रोल है और गोइंग फॉरवर्ड जो हमारे नेटवर्क हैं, वह एआई नेटिव नेटवर्क होने वाले हैं जिन जो जिसमें कि एआई नेटवर्क में ही रहेगी और वो सुविधाएं प्रदान करने में सहयोग करेगी। लाहौटी साहब एक आखिरी सवाल आपसे कि टेलीकॉम और ब्रॉडकास्ट इकोसिस्टम में ट्राई का क्या रेगुलेटरी विजन है? आप किस तरह से इसको रेगुलेट करना चाहते हैं आने वाले समय में और दूसरी बात है कि 6जी की बात हो रही है 5जी के बाद। हायर डिजिटल कनेक्टिविटी की भी बात हो रही है। इस पर हम कैसे आगे बढ़ेंगे? देखिए गोइंग फॉरवर्ड जैसे हम आगे भविष्य को देखते हैं तो चाहे टेलीकम्युनिकेशन हो, ब्रॉडकास्टिंग हो। जो एक बहुत महत्त्वपूर्ण चेंज जो समय के साथ आ रहा है कि अब वॉइस कम्युनिकेशन, डेटा डेटा ट्रांसमिशन और कंटेंट डिलीवरी। ये तीनों का पाइप समय के साथ एक होता जा रहा है। और ये तीनों चीजों का कन्वर्जेंस हो रहा है कम्युनिकेशन का डेटा सर्विसेस का, डिजिटल सर्विसेस का और साथ ही कंटेंट डिलीवरी का। ये कन्वर्स होते चले जा रहे हैं। तो ये सेक्टर में बहुत बड़ा चेंज आ रहा है जिसको गोइंग फॉरवर्ड हमें उसको रेगुलेशन में इसको ध्यान में रखना होगा। एक ये चीजें दूसरी चीज यह है कि जो टेलीकम्युनिकेशन नेटवर्क हैं जो हम लोग ट्रेडिशनल जिस तरह से टेलीकम्युनिकेशन नेटवर्क को देखते आए हैं। वो अब समय के साथ वह नेटवर्क इटसेल्फ डिजिटल प्लेटफॉर्म में कन्वर्ट होना शुरू हो चुके हैं और ये एक कम्युनिकेशन नेटवर्क से से हायर स्तर पर डिजिटल प्लेटफॉर्म बनेंगे। तो इसमें जैसे कि अब टेलीकम्युनिकेशन नेटवर्क हैं वो केवल आपको वॉइस कम्युनिकेशन या या डेटा कम्युनिकेशन की सुविधाएं देने के बियोंड। दे ये ये आपको इवन स्टोरेज की सुविधा कंप्यूट पावर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सर्विसेस ये भी इन्होंने प्रावधान करना ऑलरेडी शुरू कर दिया है और यह गोइंग फॉरवर्ड आगे बढ़ने वाला है। तो जो टेलीकम्युनिकेशन हमारा सिस्टम है वो डिजिटल सर्विसेस भी प्रदान प्रदान करेगा तो यह एक बहुत बड़ा परिवर्तन हमारे सामने आने वाला है और जो 6जी टेक्नोलॉजी है वो एआई नेटिव होगी। तो 6जी टेक्नोलॉजी भी पूरी तरह से जो एआई को यूज करेगी और एक यूबिकुटस कम्युनिकेशन सिस्टम हमको प्रोवाइड करेगी जो कि बहुत अल्ट्रा हाई लेटेसेंसी होगा और हाई स्पीड होगा कम्युनिकेशन। तो ट्राई इन सब चीजों को देखकर के जो पॉलिसी और रेगुलेशन निर्धारित कर रहा है वह फ्यूचर कम्युनिकेशन नीड्स को ध्यान में रख कर के कर रहा है। जी तो बिल्कुल लाहौटी साहब हम उम्मीद करते हैं कि ट्राई जिस तरह से ब्लॉकचेन एआई स्ट्रेट ऑफ द आर्ट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके 6जी को लागू करने जा रहा है। डिजिटल कंसेंट एक्विजिशन आप करने जा रहे हैं और साथ ही सबसे बड़ी बात इंडोर इनबिल्डिंग जो डिजिटल कनेक्टिविटी है उस पर ट्राई जिस तरह से बहुत तेजी से काम कर रहा है। आई एम श्योर आप और हमें कंज्यूमर के तौर पर एक नया और बेहतरीन एक्सपीरियंस बहुत जल्दी हिंदुस्तान में मिलने वाला है इन सारी टेलीकॉम सर्विसेस का। इन्हीं उम्मीदों के साथ लाहौटी साहब बहुत-बहुत धन्यवाद आपका आपने समय दिया और विस्तार से आपने इन सारे मुद्दों पर बातचीत की जो आज हिंदुस्तान के हर एक टेलीकॉम कंज्यूमर के मन में है। जिनका आपने जवाब भी दिया। थैंक यू सो मच सर बहुत-बहुत शुक्रिया। इस खास शो में आज के लिए इतना ही मुझे दीजिए इजाजत नमस्कार।



