Thumbnail for पपीता की खेती कैसे करें | Papaya farming in India | Papita ki kheti kab aur kaise karen | full video by The Advance Agriculture

पपीता की खेती कैसे करें | Papaya farming in India | Papita ki kheti kab aur kaise karen | full video

The Advance Agriculture

14m 1s2,278 words~12 min read
Auto-Generated

[0:29]हेलो दोस्तों, नमस्कार। आज की इस वीडियो के माध्यम से हम बात करेंगे पपाया फार्मिंग पपीते की उन्नत खेती। जब भी आप पपीते की खेती कर रहे हैं तो रेड लेडी 786 वैरायटी को ही लगाएं।

[0:46]इस वैरायटी की जो पैदावार है वो अन्य वैरायटी से काफी आगे है काफी बढ़िया पैदावार देखने के लिए मिलती है और यह जो किस्म है। उत्पादन बढ़िया है, चमकदार काफी आकर्षक और इसका जो फल है, मार्केटिंग करने में दिक्कत नहीं जाती है। तो आप रेड लेडी 786 वैरायटी को लगा सकते हैं, जो ताइवानी वैरायटी आती है। एक एकड़ में 30 ग्राम सीड्स की रिक्वायरमेंट आपको पड़ेगी। पपीते की जो पौधरोपण है, लाइन से लाइन की दूरी आपको 7 फीट रखनी चाहिए और पौधे से पौधे की दूरी 6 फीट रखनी चाहिए। इस डिस्टेंस से आप यदि प्लांटेशन करेंगे तो एक एकड़ में 1050 पौधे के आसपास आपको रिक्वायरमेंट पड़ने वाली है एक एकड़ पर। बाकी जो टाइमिंग है दोस्तों, बरसात पर गर्मियों पर और सर्दियों पर। तीनों सीजन पर आप प्लांटेशन कर सकते हैं। बरसात के लिए जून-जुलाई काफी बढ़िया हैं। बाकी गर्मियों के लिए आप अक्टूबर से नवंबर के मध्य आप प्लांटेशन कर सकते हैं। जब भी आप प्लांटेशन कर रहे हैं थोड़ा सा आप चाहें तो जून, मई-जून पर प्लांटेशन ना करें। यदि आप प्लांटेशन कर रहे हैं तो फरवरी पर आप प्लांटेशन कर सकते हैं या फिर अगस्त-सितंबर पर भी प्लांटेशन कर सकते हैं। लेकिन खासकर जनवरी-फरवरी महीने पर जो प्लांटेशन की जाती है उसका उत्पादन काफी बढ़िया देखने के लिए मिलता है। पपीते की खेती काली मिट्टी, काली दोमट, हल्की भूमि या फिर जो बालुई दोमट भूमि रहती है काफी अच्छा उत्पादन देखने के लिए मिलता है। तो सभी प्रकार की सोइल पर आप पपीते की खेती कर सकते हैं बस उत्तम जल निकास का प्रबंध होना चाहिए। मिर्दा की पीएच वैल्यू 5 से 7 तक चल जाती है और जो औसत टेंपरेचर है 16 डिग्री सेल्सियस से लेकर 38 डिग्री सेल्सियस तक का टेंपरेचर इस फसल पर यह फसल सरवाइव कर जाती है। बाकी खेत की तैयारी में जो पहली आप जुताई कर रहे हैं, वो गहराई में चलने वाले जैसे प्लाऊ है। तोतहल से पहली फ्लोइंग कराएं फिर उसके बाद 15 दिन से लेकर 30 दिन की तेज धूप लगाएं। फिर रोटावेटर या फिर डिस्क हेरो से आपको खेत की ठीक तरीके से मिट्टी को भुरभुरी कराना है और एकदम मिट्टी को समतल आपको जरूर कराना है। इस हिसाब से खेत की तैयारी करें फेंसिंग होना, ग्रीन नेट चारों साइड खींच लीजिए, साफ-सफाई होना और उत्तम जल निकास का प्रबंध होना पपीते की फसल पर बहुत ज्यादा जरूरी है। बेसल डोज के ऊपर दोस्तों बात करते हैं तो जब भी आप प्लांटेशन कर रहे हैं, बेड तैयार कर रहे हो तो उस समय आपको डीएपी 50 किलोग्राम लेना है। एसएसपी सिंगल सुपर फास्फेट 100 किलोग्राम एमओपी पोटाश आपको लेना है 30 किलोग्राम जिप्सम 25 किलोग्राम और चार ट्राली गोबर की खाद इन सभी को मिक्स करके बेड के ऊपर देकर के आपको बेड तैयार कराना चाहिए। बेड की आपको जो चौड़ाई रखनी है 2.5 फीट, बेड से बेड की दूरी 7 फीट और बेड की ऊंचाई 1 फीट आपको रखनी चाहिए। इस हिसाब से आप खेती करें और आपको पौध रोपण एक-एक पौधे की पौध रोपण करना है। हल्के हाथों से पहले हल्की सिंचाई कर लीजिए, हल्के हाथों से पौध रोपण करें। जो भी दोस्तों आप पौधे खरीद रहे हैं वो आप नजदीकी से जो बागबानी नर्सरी हैं वहां से पौधे खरीद सकते हैं। पौधे की जो कीमत है वो ₹40 से लेकर लगभग ₹50 प्रति पौधा की कीमत देखने के लिए मिल सकती है। तो संपर्क कर लीजिए या फिर नजदीकी कृषि विश्वविद्यालय से भी आप संपर्क करके पौधे को खरीद सकते हैं या फिर कोई ऐसा पर्सन है जो कि ट्रस्टबल पर्सन है तो वहां से भी आप उस नर्सरी से आप पौधे को बाय कर सकते हैं। तो पौधे को एकदम मजबूत पौधे होने चाहिए, तंदुरुस्त पौधे होने चाहिए, स्वस्थ पौधे होने चाहिए, रोग मुक्त पौधे होने चाहिए। एक-एक पौधे की पौधरोपण करें। उसके बाद दोस्तों जो पौधा है, वो हवा चलने पर टूटे ना, झुके ना, टूटे ना तो इसके लिए आप एक काम करें कि छोटे-छोटे बांस के टुकड़े गलाकर प्लांटेशन के बाद पौधे को बांध दीजिए। इस काम को आपको जरूर करना है। उसके बाद सिंचाई इरिगेशन तो पपीते की फसल पर मध्यम सिंचाई की आवश्यकता होती है। ड्रिप से आप खेती कर रहे हैं टपक सिंचाई से तो डेढ़-दो घंटे सिंचाई करें, दिन भर में पर्याप्त है दो-दो दिनों के अंतराल पर। बाकी फ्लड इरिगेशन से 15 से लेकर 17 दिनों की अंतर रख के आपको इरिगेशन करना चाहिए। पपीते की फसल पर एक समस्या आती है निमेटोड्स की। जड़ों में गांठें बन जाती है बीच पर। यह निमेटोड्स है, पौधा भोजन नहीं बना पाता, पैदावार कम जाती है, घट जाती है और अच्छी पैदावार के लिए निमेटोड्स को कंट्रोल करना भी बहुत ज्यादा जरूरी है। तो देखिए जो भी आप सिंचाई कर रहे हैं पहले तो वाटर मैनेजमेंट को ठीक तरीके से सुधारिए। खेत के चारों साइड गेंदे की दो-चार लाइन लगाइए और इसके लिए बेलम प्राइम 400 से 500 एमए 200 लीटर पानी में घोलकर सिंचाई के साथ प्रयोग आप कर सकते हैं।

[5:48]पपीते की फसल पर खरपतवार को कंट्रोल करने के लिए निराई-गुड़ाई बेस्ट है। बाकी आप चाहें तो फसल के बीच-बीच में आप इंटर क्रॉपिंग में अलग-अलग फसलों को उगा सकते हैं जैसे सोयाबीन की खेती कर सकते हैं। इसके अलावा बींस की खेती कर सकते हैं, मटर को लगा सकते हैं, धनिया, मेथी, पालक, लाल साग को ग्रो कर सकते हैं। इसके अलावा आप टमाटर को भी दोस्तों लगा सकते हैं, मिर्च को आप लगा सकते हैं, पत्ता गोभी, फूल गोभी को लगा सकते हैं, सूरन यानी जिमी कंद को आप लगा सकते हैं, आलू को लगा सकते हैं, प्याज-लहसुन की खेती भी आप कर सकते हैं इंटर क्रॉपिंग के रूप में। तो आप चाहें तो जैसे समय लगेगा हार्वेस्टिंग में तो इसके लिए बीच-बीच में आप सब्जियों को भी ग्रो कर सकते हैं जो हल्की फसलें होती हैं एक डेढ़ फीट वाली फसलों को ग्रो कर सकते हैं। सबसे जरूरी इंपॉर्टेंट टॉपिक के ऊपर बात करते हैं दोस्तों, स्प्रेइंग शेड्यूल। तो देखिए पपीते की फसल पर जो वायरस आता है लीफ कर्ल वायरस जो कि आप वीडियो पर देख रहे हैं कुछ पत्ते इस प्रकार हो जाते हैं। यह समस्या ना आए तो इसके लिए रेजिस्टेंस वैरायटी लगाएं और जो आप वैरायटी लगा रहे हैं उन पर कोई भी फंगस का प्रकोप ना हो। तो जो बीमारी कौन-कौन सी आ सकती है खासकर लीफ कर्ल वायरस है, येलो लीफ कर्ल वायरस है, मोजेक वायरस है, एफिट जैसड, सफेद मक्खी। यह जो कीटों के नाम बतला रहे हैं, यह काफी जिद्दी हैं और आपकी पपीते की फसल पर जरूर आते हैं। रेड माइट्स के साथ-साथ एलो माइट्स है, तंबाकू इल्ली, हरी इल्ली, सेमी लूपर्स, थ्रिप्स, वाइट ग्रेब, मिली बग, डीबीएम, सुंडी और फ्रूट बोरर की समस्या देखने के लिए मिलती है। कुछ फंगस पर पाउडरी मिल्ड्यूड, डाउनी मिल्ड्यूड, लीफ स्पॉट, ब्लाइट, स्केब और एंथ्रेक्नोज की समस्या देखने के लिए मिलती है। तो बीमारी काई है इनके लिए जो इलाज है, जो उपाय है उसका हम निराकरण तो बतलाएंगे और डिजीज में बैक्टीरिया विल्ट है, तना सड़न है। जो तना सड़न की समस्या बरसात के दिनों पर काफी देखने के लिए मिलती है और रूट रॉट है। तो समस्याएं तो कई हैं इसके लिए आपको एक काम करना है कि खेत में चारों साइड खेत के बीच-बीच में आपको गेंदे की दो-चार लाइन लगाना है। खेत के चारों साइड मक्के की एक लाइन लगाना है और ग्रीन नेट जरूर खींच लीजिए। इसके अलावा दोस्तों स्टिकिंग ट्रैप आपको लगाना है, फल मक्खी के ट्रैप लगाना है एक एक में 15 से 20 फीस। और जो स्प्रेइंग शेड्यूल है फर्स्ट स्प्रे 30 से 50 दिन के आसपास की फसल होती है। तो बायो R303 आपको 20ml लेना है। कृषि रसायन की इक्का 10 ग्राम एंडोफिल की M45 40 ग्राम 15 लीटर पानी में घोलकर स्प्रे करें सिलिकॉन चिप को मिलाकर। सेकंड जो स्प्रे है 90 दिन से लेकर 120 दिन के आसपास की फसल होती है। तो बायर कंपनी की सोलेमन इंसेक्टिसाइड 10ml एंको फंगीसाइड 40 ग्राम, सिजेंन्टा क्वान्टस 40ml 15 लीटर पानी घोल करके आपको स्प्रे करना चाहिए। थर्ड स्प्रे ट्रांसप्लांट से 150 से 160 दिन के आसपास की फसल होती है। तो धानूका की कोनिका फंगी साइड 40 ग्राम बायर कंपनी की मूवेंटो एनर्जी 25ml 15 लीटर पानी घोल करके स्प्रे करें। फोर्थ स्प्रे ट्रांसप्लांट से 180 से 200 दिन की फसल होती है तो प्रोक्लेम, फेंटाक प्लस और एंकोल इन तीनों को मिक्स करके 15 लीटर की दर से स्प्रे करना चाहिए। यदि आप साधारण तरीके से खेती कर रहे हैं तो फर्स्ट खाद 40 से 60 दिन सेकंड खाद 80 से 120 दिन की फसल होती है। थर्ड खाद 140 से 160 दिन की फसल होती है और वहीं फोर्थ खाद 180 से 200 दिन की फसल होती है। तो इन खादों को जो दिन बतलाए हैं, जो डोज बतलाया है जड़ों के पास देकर सिंचाई करें। लेकिन दोस्तों आप खेती कर रहे हैं ड्रिप से तो ड्रिप आप लगा सकते हैं 16 एमएम से लेकर 20 एमएम इनलाइन ड्रिप लगवा सकते हैं। मल्चिंग पेपर भी आप लगा सकते हैं। बाकी ड्रिप वेंचुरि से खेती कर रहे हैं तो वेंचुरि के माध्यम से इन खादों को आप चला सकते हैं। फर्स्ट जो कॉम्बिनेशन है 25 दिन से लेकर 50 दिन के आसपास की फसल होती है तो 5-5 दिनों के अंतराल पर इन खादों को चलाएं। जैसे एनपीके 19-19-19 2 किलोग्राम वाटर सेल्युबल फर्टिलाइजर्स है 12-61-00 2 किलोग्राम 17-44-00 2 किलोग्राम और साथ ही ह्यूमिक एसिड 500 ग्राम इनको एक दिन में एक खाद चलाएं फिर दोस्तों लगभग आपको 5 दिन का अंतर रखना चाहिए फिर दूसरी खाद चलाएं कब 25 दिन से लेकर 50 दिन के बीच में। सेकंड जो कॉम्बिनेशन है 60 दिन से लेकर 120 दिन के आसपास की फसल होती है तो आपको 7-7 दिनों के अंतराल पर एनपीके 05234 4 किलोग्राम, एनपीके 13-40-13 4 किलोग्राम माइक्रोन्यूट्रिएंट्स 500 ग्राम, कैल्शियम नाइट्रेट 4 किलोग्राम। इनको 6 से 7 दिनों के अंतर रख के आपको ड्रिप से इन खादों को चलाना चाहिए। एक दिन में एक खाद फिर 6 दिन का अंतर रख के दूसरी खाद चला सकते हैं। थर्ड जो कॉम्बिनेशन है 130 से 200 दिन के आसपास की फसल होती है तो एनपीके 0-0-50 है, 13-0-45 है, अमोनियम सल्फेट है, कैल्शियम नाइट्रेट है, जिंक सल्फेट है। इनकी क्वांटिटी आप देख सकते हैं 5 से 6 दिनों के अंतर रख के आपको वेंचुरि के माध्यम से इन खादों को चलाना चाहिए। जड़ों के पास आपको देना चाहिए वेंचुरि के माध्यम से। लाइफ साइकिल के ऊपर दोस्तों बात करते हैं तो 7 महीने की जब फसल होती है तो हार्वेस्टिंग के लिए तैयार हो जाती है। एक हार्वेस्टिंग जो फर्स्ट हार्वेस्टिंग है वह 6-7 महीने, 7-7 महीने में तैयार फसल हो जाती है और लगभग ढाई से 3 साल तक बड़े आराम से चल जाती है। जो उत्पादन है 30 किलोग्राम जो फल हैं रेड लेडी 786 के एक पौधे से 30 किलोग्राम से लेकर आप 70 किलोग्राम तक फल निकाल सकते हैं एक फल में। तो कम से कम 30 किलोग्राम ही हम पकड़ लें तो यह मान लीजिए लगभग 30 टन के आसपास पैदावार हुई। लेकिन दोस्तों इससे ज्यादा ही पैदावार देखने के लिए मिलती है। यदि हम लागत के ऊपर दोस्तों बात करते हैं तो ₹45000 से लेकर ₹50000 के आसपास खर्च के बाद हमारे पौधे का आ जाता है खाद, स्प्रे। तो सभी जो हमारी लागत है सभी लागत को यदि इंक्लूड करें तो ₹100000 से लेकर ₹150000 तक हमारी लागत लग जाती है पपीते की फसल पर। अब बाजार भाव के ऊपर बात करें तो औसत जो बाजार भाव हैं ₹8 से लेकर ₹15, ₹20 प्रति किलोग्राम का रेट हमारे किसान भाइयों को मिल पाता है। लेकिन वही पपीता जब मार्केट पर जाता है तो 40 से ₹60 प्रति किलोग्राम के रेट देखने के लिए मिलते हैं लेकिन थोक रेट पर किसानों से ₹15, ₹17 केजी ही खरीदा जाता है। मुनाफा के ऊपर अगर हम बात करें तो पपीते की जो फसल है सभी लागत को काटकर ₹150000 लागत काटकर आप एक एकड़ से जो कमाई कर सकते हैं वो ₹300000 से लेकर ₹400000 के आसपास एक एकड़ से कमाई कर सकते हैं। तो पपीता एक ऐसी फसल है यदि आप बहुत अच्छे तरीके से खेती करते हैं तो ₹400000-₹500000 आप एक एकड़ से कमाई कर सकते हैं। तो इस वीडियो के माध्यम से हमने संपूर्ण जानकारी साझा की लेकिन खासकर वायरस ना फैल पाए या फिर जो लीफ कर्ल वायरस है इसके लिए थ्रिप्स माइट्स वाइट फ्लाई की आपको प्रॉपर स्प्रेइंग लेनी पड़ेगी। स्टिकिंग ट्रैप लगाइए, देखभाल करिए थोड़ा सा स्प्रे पर खास तौर पर आपको ध्यान रखना चाहिए। आपके एरिया पर पपीते की फसल सूटेबल है या फिर नहीं है तो इसके लिए थोड़ी बहुत जगह पर आप केयर करें और पपीते को लगाकर देखिए आधे बीघे पर एक बीघे पर। यदि अच्छा उत्पादन, अच्छा परफॉर्मेंस अच्छे से पौधा ग्रो करता है तो फिर जो रखवा पपीता का फिर वो दो-पांच एकड़ 10 एकड़ पर 20 एकड़ पर भी पपीते की खेती करके अच्छी कमाई कर सकते हैं। तो स्टार्टिंग पर यही स्ट्रेटजी को अपनाना है कि एकदम से आप बड़े लेवल पर पपीते खेती ना करें। पहले एक-दो बीघे पर एक एकड़ पर खेती करके देखिए और फिर उस हिसाब से आप जो आने वाली स्ट्रेटजी है, आने वाली समस्याओं को देखते हुए यदि आप अपना अनुभव विवेक लगाकर प्रॉपर स्प्रेइंग खास शेड्यूल चलाएंगे तो पैदावार बहुत अच्छी होने वाली है। यदि आपको यह वीडियो पसंद आया तो वीडियो को अन्य किसान मित्रों तक वीडियो को साझा जरूर करें धन्यवाद।

Need another transcript?

Paste any YouTube URL to get a clean transcript in seconds.

Get a Transcript