[0:00]34 साल का रवि मेरे सामने बैठा था और बोला डॉक्टर साहब मैं बर्बाद हो गया। 2 साल शादी को हुए थे 2 साल से अपनी वाइफ को और खुद प्रेगनेंसी टेस्ट को हर 15 दिन में देख के दुखी होता था। और कष्ट ये था कि उसका लो स्पर्म काउंट था पूअर मोटिलिटी थी और जो बनावट होती है ना एब्नॉर्मेलिटी जिसे बोलते हैं हम मॉर्फोलॉजी वो खराब थी। हर डॉक्टर के पास मैं गया सबने कहा बस आईवीएफ कराओ और कुछ नहीं। मेरे सामने आके जब बैठा और रोने लगा तो मैंने उसे सिर्फ एक बात कही मुझको 90 दिन दे दो। देखिए ये आधा सच है जो आप सुनते हैं। किसी ने आपको नहीं बताया होता कि एक स्पर्म को बनने में 72 से 74 दिन लगते हैं। और स्क्रैच से चालू होता है जो आज आप स्पर्म बनाना शुरू करेंगे वो 90 दिन में आपके पास में मौजूद होगा तो एक फ्रेश स्टार्ट आपके स्पर्म का डीएनए स्पर्म की बनावट सबकी अच्छी दे सकता है। ऐज लॉन्ग ऐज मैन्युफैक्चरिंग यूनिट ठीक हो। तो मैंने उससे कहा मुझे 90 दिन दो और तीन स्पेसिफिक न्यूट्रिएंट दूंगा बस और कुछ नहीं जा रहा तीन स्पेसिफिक न्यूट्रिएंट। मेरे पास में तीन महीने बाद आया मैंने नई सीमन की रिपोर्ट देखी कुछ डाइट सप्लीमेंट्स के अलावा जो बताया था वह भी बताया जो आपको बताऊंगा। और उसे देखते ही मेरे चेहरे पे एक मुस्कुराहट आई जो बहुत बार आई है हजारों लोगों के साथ। तो मुझे ऐसा लगा उस मोमेंट पे यह वीडियो आज आपके लिए बताऊंगा क्योंकि मिलियंस ऑफ लोग इसके लिए इंतजार कर रहे हैं। और जब इसके लिए मैं कर सका तो आपके लिए क्यों नहीं करूंगा। मैं डॉक्टर सुनील जिंदल हूं रिप्रोडक्टिव सर्जिकल मेडिकल स्पेशलिस्ट हूं। यह काम करते हुए मुझे 30 साल हो गए हैं एक-एक चीज जो इसमें आपको दे रहा हूं पीयर रिव्यूड जर्नल से निकली हुई है। यह कोई प्रिस्क्रिप्शन नहीं है कोई गारंटी नहीं है आउटकम का कोई सब्सीट्यूट नहीं है मेडिकल कंसल्टेशन का। कोई भी चीज लेने से पहले अपने डॉक्टर से बात जरूर करें लेकिन एक चीज सुन लो मेरी बात को इतनी बढ़िया इंफॉर्मेशन दे रहा हूं जो जिंदगी में अगले 12 मिनट आपको चेंज कर देगी। मोस्ट इंपोर्टेंटली लाइक शेयर सब्सक्राइब कर दीजिए ना जाने कौन इंतजार कर रहा हो इस वीडियो का। एक क्राइसिस जिसके बारे में कोई बात नहीं कर रहा। तो देखिए आपको कुछ फैक्ट्स देता हूं पहला फैक्ट तो यह है कि बरखुरदार छह में से एक के बच्चे नहीं है आप अकेले नहीं है वर्ल्ड की स्टैटिस्टिक्स है इंडिया में इससे ज्यादा है। दूसरी चीज 50% भागीदार बच्चे ना होने का आदमी है। अब आदमी की कहानी क्या होती है रोज देखता हूं स्पर्म काउंट को लेकर उसकी मर्दानगी पर एक कहानी होती है जिसकी वजह से उसे लगता है कि किसी को मालूम ना चल जाए अशेम्ड होता है। डॉक्टर के पास नहीं जाता पर आज आपको एक गुड न्यूज़ देने वाला हूं। आपके स्पर्म को बनने में 72 से 74 दिन लगते हैं। और इस दौरान में स्क्रैच से बनते हैं तो अगर आप अभी कुछ काम कर लेते हैं तो अगले 72 से 74 घंटे से जो स्पर्म आज बनना शुरू हुआ है वह बेहतर हो सकता है। वाइ स्पर्म फेल्स द रूट कॉज असली रीजन यह बताने के पहले कि ये तीन न्यूट्रिएंट काम कैसे करते हैं मैं आपको यह बताता हूं कि स्पर्म असल में फेल क्यों करता हूं। एक कॉम्प्लेक्स चीज को बहुत सिंपली दूंगा। तो आपकी टेस्टीज में करोड़ों स्पर्म बनते हैं पर ये 24 घंटे अटैक पे रहते हैं ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से। ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कैसा होता है जैसे एक लोहे के ऊपर जंग बनना। मतलब फ्री रेडिकल्स पोल्यूशन हीट स्ट्रेस खराब डाइट टेंशन दिमाग की टेंशनें ये सब डैमेज करती है स्पर्म का डीएनए। उसकी मूवमेंट खराब करती है और नंबर को कम करती है। तो स्पर्म को दो चीजें चाहिए सरवाइव करने के लिए नंबर एक एनर्जी क्योंकि उसे तेजी से अंडे के पास जाना होता है और नंबर टू प्रोटेक्शन ऑक्सीडेटिव डैमेज से। अब जब यह दो सिस्टम फेल करते हैं तो स्पर्म फेल होता है। लो मोटिलिटी लो काउंट पुअर मॉर्फोलॉजी यह कोई रैंडम चीज नहीं है यह रिजल्ट होते हैं कि स्पर्म के अंदर एनर्जी कम आ रही है और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस उसे डिस्ट्रॉय कर रहा है। तो अगर मैं आपको बताऊं कि तीन नेचुरली अकरिंग न्यूट्रिएंट्स हैं जो आपके बॉडी में छोटी अमाउंट में प्रेजेंट होती है जो डायरेक्टली आपके स्पर्म को फ्यूल भी देती है और बचाती है डैमेज से तो आपका काम बन सकता है। तो चलते हैं मिलते हैं इनसे वन बाय वन तो सबसे पहला न्यूट्रिएंट है एल कार्निटिन द फ्यूल इंजेक्टर। देखिए स्पर्म को ये समझिए कि एक फार्मूला वन की रेस कार है। उसकी एयरोडायनेमिक है लेकिन उससे फर्क नहीं पड़ता इसके अंदर फ्यूल कैसे पहुंच रहा है वो पहुंच भी रहा है या नहीं पहुंच रहा। तो डिलीवरी सिस्टम इसका करता है एल कार्निटिन। देखिए इसका एक खास काम होता है फैटी एसिड्स चाहिए होते हैं माइटोकॉन्ड्रिया में एनर्जी के लिए। उसको पहुंचाने का काम करता है एल कार्निटिन। तो आप यह समझ लीजिए कि अगर पावर प्लांट को आप दूर कर दो स्पर्म से तो वह है बिना कार्निटिन के। एक मेजर स्टडी हुई इसके अंदर उन्होंने क्या किया 16 क्लिनिकल ट्रायल्स एक साथ लिए और कंक्लूजन आया जो स्टनिंग था। एल कार्निटिन ने यह दिखाया कि ग्रेटेस्ट इंप्रूवमेंट करती है प्रोग्रेसिव मोटिलिटी स्पर्म के जब भी सप्लीमेंट की तरह दी जाए। और यह स्टैटिस्टिकली इफेक्टिव साइज 4.19 था जो किसी भी क्लिनिकल रिसर्च में बहुत स्ट्रांग एविडेंस है। बहुत सारी स्टडीज इस पर आई है पर आपको अभी एक सीक्रेट बताऊं ये डोज कब काम करती है जब हम 1000 से 3000 मिलीग्राम पर डे देते हैं। आपको एक अजीब सी चीज बताऊं सुन के बड़ा ताज्जुब होगा आपको एल कार्निटिन सिर्फ सप्लीमेंट नहीं है यह एक न्यूट्रिएंट है जो हमेशा रहता है। आपकी टेस्टीज के पीछे एक एपिडिडिमिस होती है जिस ट्यूब में स्पर्म्स मैच्योर होते हैं। कार्नेटिन का हाईएस्ट कंसंट्रेशन होता है इस टिश्यू के अंदर तो जब नेचर ने इसे डाला है तो किसी कारण से तो डाला ही होगा। कोएंजाइम क्यू10 द पावर हाउस प्रोटेक्टर। देखिए अगर एल कार्निटिन फ्यूल डिलीवरी सिस्टम है तो कोएंजाइम क्यू10 एक्चुअली इंजन है माइटोकॉन्ड्रिया के अंदर। यह दो काम करता है एक तो आपका एनर्जी देने की चीज है दूसरा आपका बॉडीगार्ड है ऑक्सीडेटिव डैमेज से। तो कोएंजाइम क्यू10 हर इंसान के हर सेल में होता है। और माइटोकॉन्ड्रिया हर सेल में होता है इसकी एनर्जी करेंसी है पर स्पर्म के अंदर इसका रोल बहुत ज्यादा इसलिए हो जाता है कि स्पर्म के माइटोकॉन्ड्रिया को बहुत काम करना पड़ता है टेल को हिला के आगे बढ़ने के लिए। तो आपको एक छोटी सी अजीब सी चीज सुन लो। जैसे-जैसे हम एज करते हैं लाइफस्टाइल का स्ट्रेस होता है कोएंजाइम क्यू10 हमारे बॉडी में कम होने लगता है। तो 40 साल की उम्र में सिग्निफिकेंटली कम होता है 25 साल के लड़के की निस्बत। तो जैसे-जैसे लेवल फेल करता है या फॉल करता है स्पर्म की एनर्जी कोलैप्स करती है और ऑक्सीडेटिव डैमेज बढ़ता है। क्लिनिकल एविडेंस इसका बहुत रिमार्केबल है। और देखा गया है सेम मेटा एनालिसिस में कि कोएंजाइम क्यू10 हाईएस्ट इंप्रूवमेंट देता है स्पर्म कंसंट्रेशन में। इसका मीन डिफरेंस 2.98 है जो सिग्निफिकेंट है। इसकी इफेक्टिव डोज मैं आपको बताने वाला हूं 200 से 300 मिलीग्राम पर डे है पर एक क्रिटिकल फैक्ट को सुन लीजिए कोएंजाइम क्यू10 के बारे में जो आपको कोई नहीं बताएगा यह फैट सॉल्युबल है। इसका मतलब है आप इसे जब भी लेंगे किसी मील के साथ में लेंगे जिसमें फैट के कारण यह अच्छी तरह अब्जॉर्ब होगा। अगर आप खाली पेट लेते हैं तो लार्जली वेस्टेड रहेगा तो आप ब्रेकफास्ट के बाद ले या लंच के बाद ले या डिनर के बाद ले पर हमेशा खाने के साथ ले। लाइकोपिन द हिडन वॉरियर अब यह एक ऐसी चीज है जिसको लोगों ने रोज देखा है पर इसके बारे में सुना नहीं है। बड़ा इंपोर्टेंट प्रोटेक्टिव काम करता है लाइकोपिन। टमाटर देखें आपने रोज खाते हैं ये जो ब्राइट रेड पिगमेंट होता है ना टमाटर का यह मेल रिप्रोडक्टिव सिस्टम के अंदर होता है और बड़ा स्पेसिफिक और पावरफुल रोल होता है। देखिए लाइकोपिन एक बड़ा पोटेंट कैरोटीनॉयड एंटीऑक्सीडेंट है साइंस का और इसकी फैसनेटिंग बात पता है क्या है यह टेस्टीज और सीमन के अंदर हाईएस्ट कंसंट्रेशन में होता है। तो ये भगवान ने ऐसा बनाया है तो नेचर हमें कुछ बता ही रही है। इनफर्टाइल आदमियों में जब नापा गया तो देखा गया कि लाइकोपिन का लेवल सीमन में कम है और फर्टाइल आदमियों में ज्यादा है। तो जहां-जहां पुअर सीमन पैरामीटर आपको दिखेगा लाइकोपिन का लेवल कम होता है। यह कोई कोइंसिडेंस नहीं है यह एक बायोलॉजी है तो लाइकोपिन कैसे काम करता है। देखिए ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस मतलब किसी भी चीज को अगर एजिंग हो रही हो तो उसके लिए सबसे ज्यादा खराब चीज क्या होती है सिंगलेट ऑक्सीजन। सिंगलेट ऑक्सीजन सबसे ज्यादा डिस्ट्रक्शन करता है और यह लाइकोपिन सिंगलेट ऑक्सीजन को न्यूट्रलाइज करता है। तो स्पर्म डीएनए फ्रेगमेंटेशन में जब फर्टिलाइजेशन नहीं होती मिसकैरेज ज्यादा होता है तो लाइकोपिन आपके स्पर्म का बॉडीगार्ड है। रिसर्च ने एक चीज बड़ी सिंपल दिखाई है कि सप्लीमेंटेशन में जब लाइकोपिन कोएंजाइम क्यू10 और एल कार्निटिन के साथ में एक साथ दी जाती है तो यह सिग्निफिकेंट इंप्रूवमेंट स्पर्म मोटिलिटी कंसंट्रेशन एंड मॉर्फोलॉजी में देते हैं बेसलाइन के अलग मतलब बेसमेंट से ज्यादा। तो डोज इसकी क्या-क्या है इसकी डोज 4000 से 8000 माइक्रोग्राम है और यह बराबर है यह समझ लीजिए तीन बड़े टमाटर अगर आप ताजे सलाद के रूप में खाते हैं पर जो बायोअवेलेबिलिटी होती है एक सप्लीमेंट की वह कई बार बेहतर होती है मतलब जो आप गोली खाते हैं वह ज्यादा पहुंचती है लाइकोपिन के रूप में टमाटर से ज्यादा पर आप दो से तीन टमाटर खा सकते हैं। तो हाउ एंड व्हेन टू टेक देम अब यह कहते हैं कि चलिए डॉक्टर साहब अब यह बताइए मैं सुबह लूं रात को लूं दोपहर को लूं एक साथ लूं सेपरेट लूं। तो एक्चुअली एक प्रैक्टिकल प्रोटोकॉल आपको बताता हूं क्लिनिकल स्टडीज में कैसे लेते हैं। तो एल कार्निटिन 1000 मिलीग्राम ब्रेकफास्ट के बाद लीजिए। कोएंजाइम क्यू 300 मिलीग्राम लंच या डिनर या एक खाने के साथ ले लीजिए। लाइकोपिन 4000 माइक्रोग्राम किसी भी खाने के बाद आप ले सकते हैं क्योंकि यह तीनों खाने के बाद में एब्जॉर्प्शन बेटर होती है। पर एक इंपोर्टेंट चीज जो आपको बताने वाला हूं सुन लो एक 90 दिन का रूल है इनका। यह याद कर लीजिए जो मैंने आपको शुरू में बताया था आपका बॉडी 72 से 74 दिन देता है एक नए स्पर्म को बनाने में। तो अगर आप अपना सप्लीमेंट आज लेना शुरू करते हैं तो स्पर्म जो आज शुरू होगा वह रेडी होगा तीन महीने के बाद में।
[11:02]तो पेशेंस ऑप्शनल नहीं है यह एक बायोलॉजी का हिस्सा है यह पेशेंस रखनी पड़ेगी तो मिनिमम तीन महीने लेना है आइडली छह महीने लेना है कंसिस्टेंटली हर दिन लेना है यह प्रोटोकॉल है। तो वापस आता हूं रवि के पास। यह 90 दिन बाद जब मेरे पास आए इनकी मोटिलिटी बेटर थी सिग्निफिकेंटली। और प्रोग्रेसिव मोटिलिटी क्योंकि गई थी इनका काउंट भी थोड़ा बेटर था। एंड जेन्युइनली इनकी रिपोर्ट बहुत अच्छी थी मैंने इन्होंने ये समझी रवि ने कुछ खास काम नहीं किया। रवि को मैंने एक एक्सरसाइज का और लाइफस्टाइल का प्रोग्राम दिया था वह इन्होंने फॉलो किया। कोई मैंने सर्जरी नहीं की मैंने अभी तक आईवीएफ कुछ भी नहीं किया था इनको सिर्फ यह तीन न्यूट्रिएंट दिए जो मिसिंग थे एक फ्यूल मतलब पेट्रोल एक इंजन जो इंजन स्पर्म के अंदर होना और तीसरा प्रोटेक्शन ये तीनों चीजें इनको दी और बाकी पूरे बॉडी ने अपने आप किया क्योंकि अपने आप प्रिपेयर करता है। मैं रिप्रोडक्टिव मेडिसिन में 30 साल हो गए हैं हजारों लोगों को बेबी दे चुका। बहुत बार बढ़ता है अगर बढ़ सकता है क्योंकि अगर थोड़ी बहुत खराबी होगी या इडियोपैथिक स्पर्म इनफर्टिलिटी होगी मोसी जिसे बोलते हैं उसमें यह बहुत हेल्प करता है। पर एक चीज आपको बता दूं फर्टिलिटी फिक्स नहीं है परमानेंट नहीं है अनचेंजेबल नहीं है तो आपका एक चांस है तो लिटरली आप तीन महीने तक ट्राई कर सकते हैं किसी और चीज को करने से पहले। क्वेश्चन एक आता है क्या आप 90 दिन का ये ट्राई लेना चाहते हैं। तो अगर यह वीडियो ने आपको हेल्प किया और आप अंडरस्टैंड किए स्पर्म हेल्थ को थोड़ी गहराई में तो प्लीज शेयर कर दीजिए। जितने लोग मेरे को सुनते हैं उनमें सिर्फ 10% ने सब्सक्राइब किया हुआ है। अगर आप सब्सक्राइब करेंगे तो और लोगों के पास यह जाएगी और उनका भला होगा थैंक यू वेरी मच फॉर बीइंग ए पार्ट ऑफ पीपल हु वांट टू हेल्प पीपल। मिलियंस ऑफ मेन सफर कर रहे हैं साइलेंस में बाप बनने की चाह रखते हैं ये इंफॉर्मेशन किसी की जिंदगी शेयर कर सकता है। एक कमेंट डालिए और कमेंट क्या डालिए कि अगर आप सीमन एनालिसिस कराया है तो यस डालिए अगली वीडियो मैं आपके लिए सीमन एनालिसिस की बनाऊंगा। पर अगर आप चाहते हैं मैं वीडियो बनाऊ सीमन एनालिसिस पे तो आपको एक चीज मेरे लिए जरूर करनी है। कमेंट में डालना है सीमन एनालिसिस। मैं डॉक्टर सुनील जिंदल हूं रिप्रोडक्टिव सर्जिकल स्पेशलिस्ट हूं सबसे ज्यादा आनंद हमें आपको आप ही का बेबी देने में आता है और आपका स्पर्म अगर अच्छा होगा और आप खुश होंगे तो यह जिंदगी आबाद होगी। थैंक यू वेरी मच और मेरी अगली वीडियो को जरूर देख लीजिए लेकिन मोस्ट इंपोर्टेंटली मैं एक लिंक दे रहा हूं आपको इन तीनों न्यूट्रिएंट के बारे में सब कुछ पढ़ने के लिए क्योंकि आपके पढ़ने से आप इन्हें लेकर अपने स्पर्म को बेटर कर पाएंगे।



