[0:00]अभी रिसेंटली मोटा भाई ने इस वीडियो में गाड़ी के फ्यूल गेज इंडिकेशन के पीछे का साइंस बताया। और यह वीडियो देख के मेरे मन में भी एक सवाल आया, कि ये लो फ्यूल का इंडिकेशन अलग-अलग गाड़ियों में अलग-अलग लेवल पर क्यों आता है? कुछ गाड़ियों का 30 से 40 किलोमीटर की रेंज पे आता है और कुछ गाड़ियों का 80 से 100 किलोमीटर की रेंज पे ही आ जाता है। ऐसा क्यों? अब सबसे पहला रीज़न है फ्यूल टैंक की कैपेसिटी। कुछ गाड़ियों का 40 लीटर का होता है, कुछ का 45 और बड़ी गाड़ियों का तो 60 से 80 लीटर तक का होता है। मोस्टली गाड़ियों में लो फ्यूल इंडिकेशन तब आता है जब टैंक का ओवरऑल कैपेसिटी का 10 से 15% बचा हो। और अब ऑब्वियसली जितना बड़ा टैंक होगा, उसका 10 से 15% भी उतना ही बड़ा होगा। और इसीलिए बड़ी गाड़ियों में लो फ्यूल इंडिकेशन 80 से 100 किलोमीटर की रेंज पर ही आ जाता है, ऐज़ कंपेयर्ड टू रेगुलर हैचबैक से सेडान्स जिसमें ये इंडिकेशन 30 से 40 किलोमीटर की रेंज पर ही आता है। डिफरेंट लो फ्यूल इंडिकेशन का दूसरा कारण है फ्यूल टैंक का शेप जो हर गाड़ी में अलग होता है। और इसके बारे में मोटा भाई ने उसी वीडियो में काफी डिटेल में बताया है। उसी वीडियो में मोटा भाई ने इस फ्लोट बेस्ड फ्यूल लेवल सेंसर की भी बात की थी। और इस सेंसर का कैलिब्रेशन भी लो फ्यूल इंडिकेशन को अफेक्ट करता है। और कुछ मैन्युफैक्चरर्स इस सेंसर को जानबूझकर इस तरीके से कैलिब्रेट करते हैं कि लो फ्यूल इंडिकेशन गाड़ी में जल्दी आ जाए। और इसके पीछे का रीजन यही है कि कार ओनर्स गाड़ी को लो फ्यूल पर ज्यादा देर तक अननेसेसरीली स्ट्रेस ना करें। और जहां गाड़ी को रीफ्यूल कराने की बात हो, तो चाहे गाड़ी के लो फ्यूल इंडिकेशन आने के बाद भी गाड़ी काफी चल सकती हो। आईडियली आपको इंडिकेशन आने के 20 से 30 किलोमीटर के बाद गाड़ी को रीफ्यूल करा लेना चाहिए। तो कमेंट्स में बताओ कि आपकी गाड़ी का लो फ्यूल इंडिकेशन कितने किलोमीटर पर आता है? बाकी ऐसे और इंफॉर्मेटिव कंटेंट के लिए सब्सक्राइब टू Cars24
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