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OSHO#

Ashutoshk30

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[0:00]सबसे डेंजरस इंसान वो होता है जिसे खोने का डर नहीं होता क्योंकि जिसे खोने का डर नहीं होता उसे रोकने के लिए दुनिया के पास कुछ भी नहीं होता।

[0:10]ना रिश्ते, ना इमोशंस, ना एक्सपेक्टेशंस वो फैसले डर से नहीं अपने हिसाब से लेता है।

[0:17]और जब इंसान डर से आजाद हो जाता है तब वह अनप्रिडिक्टेबल बन जाता है और दुनिया प्रिडिक्टेबल लोगों से ही कंफर्टेबल रहती है।

[0:25]इसलिए डेंजरस बनने के लिए सबसे पहले खोने का डर छोड़ना पड़ता है।

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