Thumbnail for हिंदी कार्टून | Chidiya Wala Cartoon | Tuni Chidiya Kahani | Ghosla kahani | Chidiya ka Ghosla by Tuni Kauwa Stories-Tv

हिंदी कार्टून | Chidiya Wala Cartoon | Tuni Chidiya Kahani | Ghosla kahani | Chidiya ka Ghosla

Tuni Kauwa Stories-Tv

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[0:10]लक्मी चिड़िया उस जंगल में नई आई थी वह अंडे देने वाली थी और उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो कोई सुरक्षित जगह कैसे ढूंढे। वह बहुत चिंतित थी ऐसे ही उसे कालू कौवा दिखाई देता है वह उसके पास जाती है कौवे भैया क्या आप मुझे बता सकते हैं कि इस जंगल में सबसे सुरक्षित जगह कौन सी है वह मेरे अंडे होने वाले हैं। चिड़िया बहन इस जंगल में एक जालिम चील रहती है वह तो पक्षियों के अंडों की तलाश में रहती है तुम ऐसा करो कि इस जंगल के बाहर एक मकई का खेत है वह है भी बिल्कुल तैयार तुम उसके अंदर अपना घोंसला बना लो। वहां पर चील की नजर नहीं पड़ेगी आपका बहुत-बहुत धन्यवाद जो आपने मुझे बता दिया उस चील के बारे में मेरे तो पहले अंडे हैं और मैं तो अपने अंडों के लिए बहुत चिंतित हूं। धन्यवाद कहने की कोई जरूरत नहीं है तुम्हें यह तो मेरा करते व्यथा और फिर लक्ष्मी चिड़िया उस मकई के खेत की तरफ चली जाती है। वह मकई का खेत बहुत घना था लक्ष्मी चिड़िया सारा दिन काम करती है और अपना घोंसला बना लेती है। शुक्र है मेरा घोंसला बन गया है अब मेरे अंडे यहां पर सुरक्षित रहेंगे और फिर अगले दिन लक्ष्मी चिड़िया अंडे दे देती है वह बहुत खुश थी। उस मकई के खेत में घोंसला बनाने का एक फायदा उसे यह भी था कि उसे दाने की तलाश में दूर नहीं जाना पड़ता था वह वहीं खेत से दाना खा लेती और अपने घोंसले में अपने अंडों के ऊपर बैठ जाती। लक्ष्मी चिड़िया हर दिन गिन कर गुजार रही थी कि अंडों से बच्चे कब बाहर आएंगे और फिर आखिर वो दिन आ ही गया जब एक अंडा हिलना शुरू कर देता है। और फिर उसमें से एक बच्चा बाहर आ जाता है और फिर दूसरा अंडा भी हिलता है उसमें से भी एक बच्चा बाहर आता है लक्ष्मी चिड़िया अपने बच्चों को देखकर बहुत खुश होती है। वह अपने बच्चों को दाना खिलाती है और उनका बहुत प्यार करती है ऐसे ही रात हो जाती है और वह सब सो जाते हैं और फिर ऐसे ही कुछ दिन गुजर जाते हैं। और फिर एक दिन लक्ष्मी चिड़िया को पास ही में से इंसानों की बातें करने की आवाजें आती हैं। कल हम फसल काटना शुरू कर देंगे दरती लोहार को तेज करने के लिए दी हुई है उसके पास से दरती लेकर आना। और फिर वह इंसान ऐसे बातें करके वहां से चले जाते हैं लक्ष्मी चिड़िया यह सब सुनकर बहुत परेशान हो जाती है क्योंकि अभी उसके बच्चों ने उड़ना शुरू नहीं किया था। अब मैं क्या करूं मेरे बच्चे अभी बहुत छोटे हैं मैं इन्हें लेकर कहां जाऊंगी अगर उन इंसानों ने फसल काट ली तो उस चील की नजर मेरे बच्चों पर पड़ सकती है। कहीं वो मेरे बच्चों को खा ना जाए लक्ष्मी चिड़िया बहुत परेशान थी वो इसी परेशानी में कालू कौवा की तरफ जाती है। आओ आओ चिड़िया कैसी हो और तुम्हारे बच्चे कैसे हैं हां कौवे भैया मैं ठीक हूं और मेरे बच्चे भी बिल्कुल ठीक हैं। लेकिन अब एक मुश्किल आ गई है वो क्या और फिर लक्ष्मी चिड़िया कौवे को सारी बात बताती है चिड़िया ये तो परेशानी वाली बात है तुम्हारे बच्चे वहां सुरक्षित हैं। अगर तुम उन्हें कहीं और लेकर गई तो वो चील तो उन्हें खा जाएगी वैसे मेरे जहन में एक बात आ रही है हम क्यों ना उन इंसानों के पास जाए जिनकी यह फसल है और उनकी मिन्नती करते हैं कि वह कुछ रोज अपनी फसल ना काटे। कौवे भैया क्या वो हमारी बात मान जाएंगे चिड़िया कुछ इंसान तो बड़े स्वार्थी होते हैं और कुछ इंसान अच्छे भी होते हैं हम जाकर बात करके देखते हैं शायद वो इंसान अच्छे ही हो और वो मान जाए। और फिर चिड़िया और कौवा उन इंसानों से बात करने चले जाते हैं कौवे भैया यही है वह इंसान जो फसल काटने की बातें कर रहे थे। अच्छा तुम इधर ही बैठो मैं जरा सावधानी से बात करता हूं इनसे ए इंसान मुझे तुम बहुत अच्छे इंसान लग रहे हो क्या तुम मेरी एक बात मान सकते हो कहो क्या बात है तुम कुछ रोज अपनी मकई की फसल ना काटो। वो असल में मेरी दोस्त चिड़िया के छोटे-छोटे बच्चे हैं जो आपके खेत में ही हैं वो अभी बहुत छोटे हैं वो ठीक से उड़ भी नहीं सकते उन्हें ठीक से उड़ने में दो-तीन दिन लग जाएंगे। जब तक वह उड़ नहीं पाते आप तब तक फसल ना काटे काले कौवे तू कहीं पागल तो नहीं हो गया एक आम सी चिड़िया के बच्चों के लिए हम अपनी कीमती फसल बर्बाद कर ले बारिशों का क्या पता शुरू हो जाए। अगर बारिशें शुरू हो गई तो हमारी तो तैयार फसल बर्बाद हो जाएगी चलो भाग जाओ यहां से वरना एक लगाऊंगा और कौवा वहां से आ जाता है क्या हुआ कौवे भैया क्या वो इंसान मान गया। नहीं चिड़िया वो इंसान नहीं माना वो बहुत लालची था उसे कोई परवाह नहीं है हम पक्षियों की अब हम क्या करेंगे कौवे भैया वो इंसान बातें कर रहे थे कि दरती लोहार को तेज करने के लिए दी हुई है। हम क्यों ना लोहार के पास जाएं और उसकी मिन्नत करके आए कि वह कुछ दिन किसान को उसकी दरती तेज करके ना दे और अगर उस किसान को उसकी दरती ना मिली तो वह अपनी फसल भी नहीं काट पाएगा।

[6:22]चिड़िया अपने बच्चों की तो तुम्हें फिक्र है अगर मैंने किसान को दरती ना तेज करके दी तो किसान मुझे पैसे नहीं देगा और मैं अपने बच्चों को भोजन कैसे खिलाऊंगा और लोहार भी उनकी बात मानने से इनकार कर देता है। और वो वहां से भी नाराज होकर आ जाते हैं और वो दोनों एक पेड़ पर बैठ जाते हैं कौवे भैया उस लोहार पर तो हमारी आखिरी उम्मीद थी अब हम क्या करेंगे। कौवे भैया चिड़िया मेरे जहन में एक बात आ रही है वो क्या कौवे भैया बस हम यहीं बैठे रहते हैं और आगे तुम देखना मैं क्या करता हूं। और फिर लक्ष्मी चिड़िया और कालू कौवा वहां ही बैठे रहते हैं फिर कुछ देर बाद वो किसान भी अपनी दरती लेने आ जाता है। वो जैसे ही अपनी दरती लेकर वहां से गुजरने लगता है कालू कौवा जल्दी से जाकर किसान से दरती छीन कर उड़ जाता है फिर क्या था कौवा आगे-आगे और किसान उसके पीछे-पीछे। कालू कौवा वो दरती लेकर सीधा सागर की तरफ ले जाता है और जाकर उस दरती को सागर के पानी में गिरा देता है मतलबी इंसान अब काटो जाकर फसल। और किसान कौवे की चालाकी पर हैरान रह जाता है अब तो नई तरती बनने में दो चार रोज लग ही जाने थे। कालू कौवा वापस आ जाता है और वापस आकर लक्ष्मी चिड़िया से ऐसे कहता है चिड़िया अगर घी सीधी उंगलियों से ना निकले तो उंगलियां टेढ़ी करना पड़ती हैं। और वो दोनों हंसने लगते हैं और फिर ऐसे ही तीन दिन गुजर जाते हैं और अब लक्ष्मी चिड़िया के बच्चों ने उड़ना शुरू कर दिया था। और लक्ष्मी चिड़िया अपने बच्चों को लेकर वो खेत छोड़कर चली जाती है।

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