[0:00]ठंडी हवा से जंगल कांप रहा था. एक छोटी सी चिड़िया खिड़की पर खड़ी घबराकर बार-बार बाहर देख रही थी. वो चिंतित होकर बोली, अभी तक क्यों नहीं आए?इतना समय हो गया. कहीं रास्ते में कुछ हो तो नहीं गया? तभी अचानक फड़फड़ाते पंखों की आवाज आई. चिड़िया ने देखा उसका पति तेजी से उड़ते हुए घर के पास आ रहा था. जैसे ही वो घर के अंदर आया, उसने ठंड से कांपते हुए कहा, उफ्फ बाहर बहुत ठंड है. आज तो जंगल की हवा ही बदल गई. चिड़िया जल्दी से उसके पास आई और बोली, आप तो अनाज लेने गए थे लेकिन ये लकड़ियां क्यों ले आए? मैंने पूरे जंगल में अनाज ढूंढा लेकिन कहीं नहीं मिला. लौटते समय रास्ते में एक सूखा पेड़ गिरा हुआ था. मैंने सोचा खाली हाथ लौटने से अच्छा है ये लकड़ियां ही ले आऊं. चिड़िया ने हैरानी से पूछा, लेकिन लकड़ियां किस काम आएंगी? बारिश का मौसम आने वाला है. जब तेज बारिश होगी और ठंडी हवा चलेगी तब यही लकड़ियां हमारे घर को मजबूत बनाने में काम आएंगी. चिड़िया को उसकी बात सही लगी. फिर उसका पति थोड़ा थका हुआ बैठ गया और बोला, आज तो अनाज नहीं मिला लेकिन कल मैं सुबह-सुबह बहुत दूर जाऊंगा. जंगल के उस पार खेतों के पास. वहां शायद हमें अच्छा अनाज मिल जाए. चिड़िया ने प्यार से कहा, ठीक है पहले आप आराम कर लीजिए आपने आज बहुत मेहनत की है. दोनों अपने छोटे से घर में बैठ गए. बाहर जंगल में ठंडी हवा और भी तेज चलने लगी थी. उसी जंगल में थोड़ा दूर उनकी मौसी का घर था. मौसी अपने घर की दीवारों पर गोबर से लीपाई कर रही थी. वे बड़े मन से घर को साफ और मजबूत बना रही थी. काम करते-करते मौसी खुद से बोली, अगर अभी से घर को अच्छी तरह लीप दूंगी तो सर्दियों में घर साफ भी रहेगा और ठंड भी कम लगेगी. उन्होंने पूरा घर ध्यान से लीप दिया. काम खत्म होने के बाद मौसी दरवाजे के पास बैठ गई और गहरी सांस लेकर बोली, अरे वाह अब तो घर बिल्कुल नया लग रहा है. फिर वे थोड़ी देर आराम करने लगी. लेकिन उन्हें क्या पता था. जंगल में मौसम बहुत जल्दी बदलने वाला था. मौसी धीरे-धीरे घर के अंदर आई. उन्होंने इधर-उधर देखा फिर अपने बिस्तर पर बैठ गई. थकी हुई आवाज में उन्होंने खुद से कहा, अरे आज तो मैं बहुत थक गई हूं अब थोड़ा आराम कर लेती हूं. इतना कहकर मौसी धीरे-धीरे बिस्तर पर लेट गई. उन्होंने चादर ओढ़ी और कुछ ही पलों में उनकी आंखें बंद हो गई. मौसी अब गहरी नींद में सो चुकी थी.
[3:08]जंगल में थोड़ा दूर एक बड़े पेड़ पर कौवा और उसकी पत्नी कौड़ी रहते थे. उस समय कौवा अपने बिस्तर पर आराम से सो रहा था. लेकिन कौड़ी रसोई के पास खड़ी सोच रही थी कि अभी खाना बनाना बाकी है. वो धीरे-धीरे कौवे के पास आई और उसे हिलाते हुए बोली, अरे उठिए उठिए अभी खाना बनाना बाकी है. कौवा आधी नींद में गुस्से से बोला, अरे मुझे सोने दो मैं तो बिस्तर पर सोया हूं. क्या मैं चूल्हे पर सोया हूं जो इतनी जल्दी उठा रही हो. कौड़ी थोड़ा नाराज होकर बोली, आपको तो बस सोना ही आता है. फिर वो घर की तरफ इशारा करते हुए बोली, देखिए हमारा घर भी अब बहुत पुराना हो गया है इसकी दीवारें भी कमजोर हो गई हैं. कौवा ने आलस से करवट बदली और बोला, तो क्या हुआ? बाद में देख लेंगे. सुनिए अगर हमने अभी घर को ठीक नहीं किया और बाद में पानी टपकने लगा तो हमें बहुत परेशानी होगी. इसलिए अभी से इसे ठीक कर लेते हैं. लेकिन कौवा अभी भी आलस में पड़ा हुआ था और उठने का नाम ही नहीं ले रहा था. एक पंछी जल्दी-जल्दी उड़ते हुए आया और ऊंची आवाज में बोला, सुनो, सुनो जंगल के सभी पंछियों सुनो. उसकी आवाज सुनकर सभी पक्षी अपने-अपने घरों से बाहर झांकने लगे. मुझे अभी खबर मिली है कि आने वाले दो दिनों में हमारे जंगल में बहुत ज्यादा बारिश होने वाली है. इसलिए सभी अपने-अपने घरों की तैयारी कर लो. यह बात सुनते ही पूरे जंगल में हलचल मच गई. हर कोई अपने घर की चिंता करने लगा. सबसे पहले यह खबर मौसी चिड़िया तक पहुंची. जैसे ही उन्होंने यह बात सुनी वे घबरा गई और बोली, अरे ये क्या हो गया. फिर उन्होंने अपने घर की दीवारों को देखा और चिंतित होकर बोली, मैंने तो अभी-अभी अपने घर पर गोबर लगाया था. गोबर को ठीक से सूखने में तो कम से कम 10-15 दिन लगते हैं. अगर अभी बारिश आ गई तो सब खराब हो जाएगा. फिर उन्होंने सोचा कि अगर अभी गोबर हटा दूं और घर को थोड़ा बदल दूं तो शायद घर बच जाए. उधर जंगल में दूसरी तरफ एक मेहनती चिड़िया और उसका पति अपने घर को ठीक करने में लगे हुए थे. उन्होंने पहले ही कुछ लकड़ियां इकट्ठी कर ली थी. अब दोनों मिलकर अपने पुराने घर की पुरानी लकड़ियां निकाल रहे थे और उनकी जगह नई मजबूत लकड़ियां लगा रहे थे. चिड़िया बोली, अच्छा हुआ हमने पहले से लकड़ियां इकट्ठी कर ली थी. हां, अगर हम अभी घर को मजबूत नहीं करेंगे तो बाद में बहुत परेशानी होगी. दोनों मिलकर तेजी से काम करने लगे.
[6:13]उधर कौवा जो अभी तक आराम से बिस्तर पर पड़ा हुआ था उसने भी ये खबर सुन ली. कौड़ी ने तुरंत कहा, देखा मैंने पहले ही कहा था कि हमें अपना घर ठीक कर लेना चाहिए. ठीक है अब समय बर्बाद नहीं करना चाहिए. मैं जंगल में जाकर कुछ सामान ढूंढकर लाता हूं. इतना कहकर कौवा उड़ गया.
[6:41]सबसे पहले कौवा मौसी चिड़िया के घर पहुंचा. कौवा बोला, मौसी क्या आपके पास थोड़ा गोबर है मुझे अपने घर को मजबूत करना है. हां बेटा ले जाओ अभी मैं भी अपने घर की चिंता कर रही हूं लेकिन जितना है तुम ले लो. कौवा थोड़ा गोबर लेकर आगे उड़ गया. फिर वो एक दूसरी चिड़िया के पास गया. कौवा बोला, बहन क्या तुम्हारे पास थोड़ी घास है मुझे अपने घर के लिए चाहिए. हां ले जाओ अभी सबको अपने घर ठीक करने हैं. कौवा वहां से घास लेकर आगे उड़ गया. फिर वो एक और पक्षी के पास गया और वहां से उसे कुछ छोटी लकड़ियां और टहनियां मिल गई. तभी कुछ देर बाद वही सूचना देने वाला पंछी फिर से जंगल में आया और जोर से बोला, सुनो, सुनो अभी खबर आई है कि बारिश हमारे जंगल में नहीं आने वाली लगता है मौसम बदल गया है. यह सुनते ही कई पक्षियों ने राहत की सांस ली. लेकिन मौसी चिड़िया थोड़ी उदास होकर बोली, अरे तो फिर मेरी इतनी मेहनत बेकार हो गई मैंने तो जल्दी-जल्दी अपना घर बदल दिया. लेकिन कौवा यह बात सुनकर खुश हो गया. कौवा मुस्कुराकर बोला, अच्छा हुआ अब तो बारिश नहीं आएगी. मैं आराम-आराम से बाद में अपना घर ठीक कर लूंगा. फिर भी हमें थोड़ा काम पूरा कर लेना चाहिए. अरे रहने दो अभी क्या जल्दी है. लेकिन कुछ ही समय बाद अचानक बहुत तेज बारिश शुरू हो गई. जंगल में हर तरफ पानी ही पानी होने लगा. कौवा और कौड़ी डर गए. वे तुरंत अपने घर से बाहर निकलकर पेड़ की एक डाल पर जाकर बैठ गए. क्योंकि उनका पुराना घर कभी भी गिर सकता था. बारिश में भीगते हुए कौवा दुखी होकर बोला, काश मैंने समय रहते अपना घर ठीक से बना लिया होता.



