[0:00]क्या हम मर्दों की बराबरी करने के चक्कर में हमने डबल लोड नहीं ले लिया? मर्द घर आकर तो काम नहीं करते हैं। हम जबरदस्ती बाहर जाके उनको कमाई में हेल्प कर रहे हैं। और उसके बाद हम डबल लोड ले लिया। हमारे जो मां, हमारी दादी जो थी, वो ज्यादा सुखी थी। देखिए अगर आपको यह गलतफहमी है कि जेंडर जस्टिस आपकी जिंदगी को सुविधाजनक बनाएगा, तो आप भ्रम में है। जेंडर जस्टिस आपकी जिंदगी को और कष्टकारी बनाएगा, वे मैं पहले से बता रहा हूं। लेकिन न्याय सुविधा के आधार पर नहीं होता। न्याय का औचित्य स्वयं न्याय होता है। मात्र इसलिए कि हमारी दादी की जिंदगी हमसे ज्यादा सुविधाजनक थी। हम नहीं चाहेंगे कि हमारी बेटी की जिंदगी उतनी ही गुलाम हो जितनी मेरी या मेरी दादी की थी। हम ये मेहनत इसलिए नहीं कर रहे कि हमारी जिंदगी सुविधाजनक हो। थोड़ा बहुत अंतर सिर्फ इतना होगा कि कभी साइमन ने यह बात कही, तो आज नीतू सिंह इस बात को बात कर पा रही है। आज नीतू इस बात को कहेगी तो उनकी बेटियां या अगली पीढ़ियां इससे एक कदम और आगे जा पाएंगी।

बराबरी के चक्कर में महिलाओं पर डबल बोझ?🤔@neetumaamtalks#neetumam #vijendrasir #podcast
Neetu Mam Talks
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