[0:00]एक संत नदी किनारे नहा रहे थे। तभी उन्होंने देखा एक बिच्छू डूब रहा है। उन्होंने बिच्छू को हथेली में उठाया। बिच्छू ने जोर से डंक मारा। हथेली हिली तो बिच्छू फिर से नदी में गिर गया।
[0:12]संत ने दोबारा उसे हथेली में उठाया और किनारे ले जाने लगे। बिच्छू ने एक और डंक मारा।
[0:17]जैसे-तैसे करके संत ने उस बिच्छू को किनारे छोड़ दिया। यह सब देखकर एक शिष्य हैरानी से बोला,
[0:23]ये क्या गुरु जी? ये बिच्छू आपको बार-बार डंक मार रहा है। फिर भी आप इसकी जान बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
[0:32]यहां संत ने एक बहुत प्यारा जवाब दिया। कि बेटा इसका स्वभाव है डंक मारना।
[0:37]मगर मेरा धर्म है इसे बचाना। अगर मैं इसके जैसा हो जाऊंगा।
[0:41]तो मेरे में और इसमें फर्क ही क्या रहेगा?
[0:44]सो कभी किसी की बुराई देखकर हमें अपना अच्छा व्यवहार नहीं खोना चाहिए।



