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नया कार्टून | Tuntuni Stories in Hindi | Hindi Kahaniya | Chidiya wala Cartoon |#tunikauwastoriestv

Tuni Kauwa Stories-Tv

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[0:12]मम्मा चिड़िया का एक अंडा था वो अपने अंडे को अपने घोंसले में छुपाकर भोजन लेने चली जाती है। मम्मा चिड़िया को भोजन लेने दूर तक जाना था। ऊंचे आसमान में उड़ती हुई एक चील खाली घोंसला देखकर वहां आ जाती है। ये घोंसला तो खाली है ना कोई छोटा बच्चा ना ही कोई अंडा आज तो भूखे ही रहना पड़ेगा। चेल जब उड़ने लगती है तो उसकी नजर पत्तों में छुपे हुए अंडे पर जाती है और वह खुश हो जाती है। वाह वाह पत्तों में छुपाया हुआ है अंडा। देख लिया मैंने अंडा देख लिया। चेल वो अंडा उठाकर जल्दी से वहां से भाग जाती है। चिड़िया चलो दूसरे जंगल में फल लेने जाते हैं। नहीं मिट्ठू मैंने दाना ले लिया है अब मुझे वापस जाना है मेरा अंडा घोंसले में अकेला है मुझे अपने अंडे की चिंता हो रही है। मम्मा चिड़िया वापस घोंसले में जाती है उसकी तो दुनिया ही उजड़ चुकी थी उसका अंडा घोंसले में नहीं था चिड़िया रोने लग जाती है। मेरा अंडा मेरा अंडा किसने चुरा लिया मेरे अंडे से तो बच्चा निकलने वाला था जालिम किसी जालिम ने मेरा अंडा चुरा लिया है। चिड़िया बैठी रोए जा रही थी। चिल भी आराम से अपने घर पहुंच जाती है। वो चिड़िया के अंडे को प्लेट में रखती है। इसकी ऑमलेट बनाऊं या फिर कच्चा ही पी लूं ऐसा करती हूं इसे कच्चा ही पी लेती हूं फिर वो चील अंडे को तोड़ती है। मगर उसमें से तो एक छोटा सा चिड़िया का बच्चा निकलता है जिसे अचानक देखकर चील ढर जाती है। डर गई डर गई मम्मा डर गई। अरे अरे कौन कौन मम्मा। मजाक ना करें जल्दी से मुझे कुछ खाने को दें मैं बहुत थकी हुई हूं मुझे बहुत भूख लगी है। हा हा मैं इसे खाने वाली हूं और यह बच्चा मुझसे ही खाना मांग रहा है। लाई थी अंडा और मिल गया मास बहुत भाग्यशाली हूं मैं। चेल अपनी तेज चोंच से उस बच्चे पर वार करती है। मगर वह बच्चा भी बहुत तेज था वह भागकर दूसरी तरफ हो जाता है। रुके रुके मम्मा आप आप क्यों मुझे खाना चाहती हो रुके मेरी बात तो सुने। कंबख्त मैं तुम्हारी मम्मा नहीं हूं मैं तुम्हारी दुश्मन हूं। यह सुनकर वह बच्चा फिर से हंसने लग जाता है। झूठ पक्का झूठ मुझे सब मालूम है मुझसे जरूर कोई गलती हुई होगी जो आप मुझे मार रही हैं अच्छा सॉरी सॉरी मम्मा मैं फिर कोई भी काम ऐसा नहीं करूंगी जिससे आपको गुस्सा आए। छोटे बच्चे की बातें सुनकर चील को उस पर दिया आ जाती है। क्या तुम जीना चाहते हो। हां मम्मा मैं बड़ी होकर आपका सहयोग बनूंगी मैं दाना लाऊंगी आपके लिए मैं दुख सुख में आपके काम करूंगी साथ रहूंगी मैं आपके। चिल की आंखों में आंसू आ जाते हैं। हां मेरी बच्ची मैं भूल गई थी अंडे से निकलते हुए तुमने शोर किया था ना तो मुझे तुम पर गुस्सा आ गया था। सॉरी मॉम चिड़िया पूरे जंगल में अपने अंडे को ढूंढ रही थी वो कौवे के पास जाती है। कौवे कौवे मेरा अंडा नहीं मिल रहा कोई मेरा अंडा चुरा कर ले गया है। आज जंगल में एक बड़ी चील फिर रही थी शायद वो चील आपका अंडा चुरा ले गई होगी। ये सुनकर चिड़िया की उम्मीद टूट जाती है। वह रोती हुई घोंसले में वापस चली जाती है। थोड़ी ही देर बाद बड़ी चील चिड़िया के पास घोंसले में आती है उसके पास चिड़िया का छोटा सा बच्चा था। मुझे माफ करना चिड़िया बहन मैं आपका अंडा ले गई थी अंडे से आपकी बेटी निकली है और बहुत प्यारी प्यारी बातें करती है इसे आप रख लें मैं इसे नहीं खा सकती। अपनी बेटी को देखकर चिड़िया बहुत खुश हो जाती है। चील दी आप बहुत अच्छी हैं मैं बदले में आपको क्या दे सकती हूं। मेरी मम्मा कौन है पहले मुझे यह तो बता दें पहले आप मेरी मम्मा थी और अब आप मेरी असल मम्मा कौन है। बेटी सच मैं सच कह रही हूं मैं तुम्हारी मम्मा नहीं हूं चिड़िया अगर बदले में तुम मुझे कुछ देना चाहती हो तो मुझे इस गुड़िया से मिल लेने दिया करना। मुझे यह बच्ची बहुत प्यारी लगी है फिर चिड़िया चील से वादा करती है और चिड़िया अपनी बेटी का नाम गुड़िया रखती है। चिड़िया और चील की दोस्ती हो जाती है। चिल वापस चली जाती है। गुड़िया बड़ी हो जाती है उसने तो उड़ना भी सीख लिया था फिर एक दिन गुड़िया उड़ती हुई जा रही थी कि डस्ट कव्वा जिसका नाम बुरा था वो गुड़िया को रोक लेता है। क्या तुम्हारा नाम गुड़िया है। हां मेरा नाम गुड़िया है तुम्हें क्या मसला है। तुम बहुत सुंदर चिड़िया हो क्या तुम मुझसे दोस्ती करोगी। चल चल भाग गंदा कौवा मैं तुम जैसे बुरे कौओं से दोस्ती नहीं करती। गुड़िया ने इतना कहा था कि वह डस्ट कव्वा गुड़िया को अपने पंजों में दबोच लेता है। तो फिर मैं तुम्हें जान से मार दूंगा जो मेरा दोस्त नहीं वह किसी का भी नहीं हो सकता। छोड़ो छोड़ो मुझे बुरे कौवे मुझे मेरे घर जाने दो। गुड़िया का शोर सुनकर थोड़ी दूर बैठी उसकी चील मम्मा वहां आ जाती है। डस्ट कौवे तुमने मेरी बेटी को मारा मैं छोडूंगी नहीं तुम्हें। ये ये तो चिड़िया की बेटी है तुम्हारी नहीं है। यह मेरी ही बेटी है फिर वो बड़ी चील बुरे कौवे को मार मार कर बंदर बना देती है और बुरा कव्वा वहां से भाग जाता है। जिसकी दोदो माए हो उसे क्या घर। मेरी बेटी चलो मैं तुम्हें तुम्हारे घर छोड़ देती हूं। फिर वह चील मम्मा गुड़िया को उसके घर छोड़कर आती है गुड़िया की मम्मा चील की दोस्ती को कभी नहीं भुला सकती थी क्योंकि चील ने उसकी बेटी की जान बचाई थी प्यारे दोस्तों इस कहानी को लाइक करना बिल्कुल मत भूलना आपका धन्यवाद। कौवे की कौवी मर जाती है कौवे का एक अंडा भी था कौवा बहुत परेशान था कि वह अपने अंडे से निकलने वाले बच्चे को कैसे संभालेगा। अब मैं दाना लेने जाऊं या अंडे की रक्षा करूं मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रही लाली तो मर गई मगर मुझे मुसीबत में डाल गई। फिर कालू कौवा दाना लेने निकल जाता है उसे मैदान से कुछ दाने मिल जाते हैं कौवा जल्दी-जल्दी वो दाने लेकर वापस घोंसले की तरफ उड़ता है। कौवे का अंडा भी टूट जाता है और उसमें से एक काला छोटा कौवा बाहर निकलता है। ना मम्मा ना पापा मेरा स्वागत करने के लिए कोई भी नहीं है सब ना जाने कहां चले गए हैं। फिर उतनी देर में कालू कव्वा भी वहां आ जाता है और आ गया मैं आ गया मेरे बच्चे डरो ना मैं आ गया हूं। आप आप कौन है। मैं आपका पापा हूं मेरे बेटे। पापा मगर मैं कैसे मालूम कि आप ही मेरे पापा हैं। अपने बेटे की यह बात सुनकर कालू कव्वा हैरान हो जाता है। जैसे तुम्हारे पंख काले वैसे मेरे पंख काले जैसी तेरी चोंच वैसी मेरी चोंच और देखो मैं तुम्हारे लिए दाना भी लाया हूं। तो फिर मैं ही तुम्हारा पापा हुआ ना। अगर आप मेरे पापा हैं तो मेरी मम्मा कहां है मुझे मम्मा चाहिए मुझे मम्मा लेनी है। कालू कव्वा रोने लग जाता है। ओ जब एक दिन तेज हवा चल रही थी तो तुम्हारी मम्मा हवा में उड़ती हुई दूर निकल गई और फिर कभी लौटकर वापस नहीं आई मेरे बच्चे। नहीं मैं नहीं मानता मुझे मम्मा लेनी है मुझे मम्मा चाहिए अगर मम्मा आएगी तो फिर ही मैं दाना खाऊंगा। कव्वा परेशान हो जाता है और अपने बेटे से कहता है। ठीक है बेटा तुम पत्तों में छुप जाओ और मैं तुम्हारी मम्मा को ढूंढ कर लाता हूं। फिर कालू कव्वा उड़ता है वो उड़ता हुआ जा रहा था कि नदी पर उसे एक कवी बैठी हुई दिखाई देती है कौवा वहां जाता है। मेरा नाम कालू है कवि जी अगर आप मेरा एक काम करो तो मैं आपको 10 दाने गेहूं के दूंगा। ये सुनकर वो कवि तो बहुत खुश हो जाती है। 10 दाने बताओ बताओ कालू कौवे जी क्या काम है। तुम्हें थोड़ी देर के लिए मेरे छोटे से बेटे की मां बनना होगा। क्या ये तुम क्या कह रहे हो कालू कौवे मेरा बेटा आज ही अंडे से निकला है उसकी मां मर गई है और वह जिद कर रहा है कि मां के पंखों से ही दाना खाएगा। कवी मान जाती है और कौवा उस कवि को किराए की मां बनाकर अपने साथ घोंसले में ले जाता है। आ गई आ गई मेरी मम्मा आ गई देखा देखा मैंने जिद की तो पापा मम्मा को ले आए ना झूठे पापा कहते थे मम्मा मर गई है अब कहां से आ गई मेरी मम्मा। बेटा मैं तो नदी पर पानी पीने गई थी मुझे बहुत प्यास लगी हुई थी ना इसलिए लो आप यह दाना खा लो। अपनी मम्मा समझकर छोटा बच्चा उस कवि के पंख से दाना लेकर खा लेता है और थोड़ी ही देर बाद सो जाता है। लो कवि जी आपके बेटे ने दाना भी खा लिया और सो भी गया अब दो मुझे मेरे 10 दाने गहियों के मेरे पास और समय नहीं है। बहुत-बहुत धन्यवाद लो कवि जी ये रहे तुम्हारे दास दाने। काम अच्छा है अगर कल मेरी जरूरत हुई तो बेरी के पेड़ पर रहती हूं मैं तुम वहां से आकर मुझे ले जाना। ऐसा कहते हुए वह कवी वहां से चली जाती है। रात गुजर जाती है सुबह हो जाती है जब कौवे का बच्चा सोकर उठता है तो वह फिर से रोने लग जाता है। कहां है कहां है मेरी मम्मा मेरी मम्मा कहां है मुझे मम्मा लाकर दें उठे उठे पापा मुझे मम्मा लाकर दें। कालू फिर से परेशान हो जाता है। चुप चुप कर जाओ बेटा तुम्हारी मम्मा नदी पर पानी पीने गई है मैं अभी उसे लेकर आता हूं। कव्वा फिर से उस कवी को लेने जाता है। मगर आज मैं 10 नहीं बल्कि 20 दाने लूंगी। यह तुम मुझे ब्लैकमेल कर रही हो ऐसे मेरी मजबूरी का फायदा ना उठाओ बहुत मुश्किल काम है किसी की मम्मा बनना। फिर कव्वा मान जाता है और 20 दानों में गोरी कवी ले जाता है। ऐसे ही दिन गुजरते गए और कव्वा हर रोज जब भी अपने बेटे को भोजन खिलाना होता तो उस कवि को ले आता। फिर एक दिन कव्वा फैसला करता है। अब मेरा बेटा रोए या हंसे मैं और दाने नहीं बांट सकता अब मैं उस कवी को नहीं लाऊंगा। कौवे का बेटा बहुत जिद करता है मगर कौवा चुपचाप बैठा रहता है। पापा पापा मम्मा आएगी तो मैं फिर ही दाना खाऊंगा। नहीं खाने तो ना खाओ आज वो नहीं आएगी एक चक्कर के 20 दाने लेती है तुम्हारी किराए की मम्मा मुझसे। अभी तक कालू कव्वा क्यों नहीं आया मेरा तो उस बच्चे से मिलने को बहुत दिल उदास है। फिर वह कवी खुद ही कालू के घोंसले की तरफ आ जाती है। कालू कालू कौवे जी आज क्या हुआ आज आप मुझे लेने ही नहीं आए। बच्चा कवी से लिपट जाता है। मैं अब तुम्हें दाना नहीं दे सकता आखिर कब तक मैं तुम्हें दाना दे देकर अपने बेटे को दाना खिलाऊंगा। कालू कौवे जी एक बात कहूं बुरा तो नहीं मनाओगे। कहो कहो क्या बात है। अब मेरा इस बच्चे के बिना दिल नहीं लगता प्लीज मुझे अपने घोंसले में रख लें मैं इसकी सज्जी की मम्मा बनकर रहना चाहती हूं। क्या हां। यह सुनकर कव्वा तो उल्टी छलांग लगाने लगता है। मिल गई मिल गई मेरे बेटे को मां मिल गई। फिर वह सब उस घोंसले में खुशी खुशी जीवन गुजारते हैं प्यारे दोस्तों इस कहानी को लाइक करना बिल्कुल मत भूलना आपका धन्यवाद।

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