[0:01]मुगल बादशाह फिर पागल हो गया है बोल रहा है मजदूर के लिए ऐसा खाना बनाओ जिसे खाते ही ताकत मिले वो अच्छे से काम कर सके और मजदूरों को ठंड भी ना लगे और वो ज्यादा काम करे।
[0:09]अरे सबका ठेका मैंने ले लिया है कभी कुछ बनाओ कभी कुछ बनाओ
[0:12]अभी मजदूर के लिए बनाओ मैं यहां बावरची हूं या नौकर
[0:15]आज कुछ भी हो जाए आज तो यही हड्डी बनाऊंगा और यही खिलाऊंगा सबको
[0:19]रोज नया फरमान दे देता है आज सर कमाल होगा तो होगा रोज नया फरमान देता है लेकिन आज हड्डी ही खाएंगे
[0:25]लेते में मैंने गोश्त मोटे मोटे पीस काट लिए और ये देखो नल्ली ये सब हड्डी और गोश्त को एक ही में डाल दिया मसाला डाल के ढक्कन बंद कर दिया
[0:30]मैंने सारा मसाला मिला दिया है और मैं जा रहा हूं सोने इसे रात भर छोड़ दूंगा ऐसे ही खराब बनेगा तो बनेगा मुझे कोई मतलब नहीं
[0:36]जो सुबह में आया तो देखा यह हड्डी तक पक गया है यह सुनहरा लाल और टेस्टी लग रहा है इसे मैंने सुबह के टाइम मजदूर को दिया
[0:42]रहेगा निहारी



