[0:05]एक आपने बीच में रोजगार का जिक्र किया वह भी बहुत इंपॉर्टेंट सवाल है। पार्टीशन के बाद तकरीबन 30% 30% मुसलमान थे सरकारी या गैर सरकारी नौकरियों में। 50 साल बाद वह 2% भी नहीं है। तो अगर आप उनके रोजगार की बात करते हैं तो कल को अगर आप सत्ता में आते हैं तो क्या उनका प्राइवेट सेक्टर में और पब्लिक सेक्टर में पुलिस में, आर्मी में आप कोई कोशिश करेंगे कि उन्हें ज्यादा से ज्यादा रिप्रेजेंटेशन मिले जो 11-12% लोग हैं? मैं मानता हूं कि नौकरियों में रोजगार में मुसलमानों का
[0:48]ऐतिहासिक कारण में मैं नहीं जाना चाहता। लेकिन मुसलमान एजुकेशन की तरफ जितना ध्यान देना चाहिए उतना नहीं दे रहे हैं। और एजुकेशन से मेरा मतलब खाली मकतब की पढ़ाई से नहीं है। जनरल एजुकेशन है, साइंस की शिक्षा है, टेक्नोलॉजी की शिक्षा है। कंपटीशन के लिए दरवाजे खुले हुए हैं। थोड़ा बहुत भेदभाव है जरूर। और वह भेदभाव खाली मुसलमान के खिलाफ नहीं है। हमारे यहां जातियों के कारण भी भेदभाव होता है। एजुकेशन के बारे में आपने बहुत जरूरी बात कही। वाकई एजुकेशन तो हमारे मुल्क में सभी की होनी चाहिए जैसा कि आपने पहले कहा कि 40% लोग आज भी जो हैं अनपढ़ हैं। लेकिन दुख की बात यह है कि जो 40% के अलावा जो पढ़े लिखे हैं, इस मुल्क में ज्यादातर प्रॉब्लम उनकी वजह से होता है इसलिए कि जो एजुकेशन है वह गलत है। जैसे मकतब का ही आपने जिक्र किया। मदरसों में पता नहीं कैसी एजुकेशन होती है। अब यह बाल शिशु मंदिर हैं आरएसएस के बनाए हुए लाखों की तादाद में, उनमें जिस तरह की एजुकेशन दी जाती है उस एजुकेशन से तो शायद जाहिल ही रहे आदमी तो अच्छा है। इसलिए कि वह घुट्टी में उनके एक जहर एक कम्युनिज्म का एलिमेंट डाला जाता है वह मदरसों में हो या इनमें हो। तो आप एजुकेशन की जो पॉलिसी बनाएंगे तो इस तरह की एजुकेशन जो इस मुल्क की एकता या शांति या भाईचारे के खिलाफ हो उसे आप कर्ब करने की कोशिश करेंगे? पहले तो आपने जो शिशु मंदिरों का हवाला दिया मुझे लगता है कि शायद आपने उन्हें नजदीक से जाकर नहीं देखा है। मैं उनसे जुड़ा हुआ रहा हूं। और वहां सांप्रदायिक भेदभाव जैसी कोई चीज नहीं है। देशभक्ति का भाव जरूर है। और हर देशवासी भारत से प्यार करें। इस पर तो किसी को ऐतराज नहीं हो सकता। लेकिन किताबों में अगर कुछ ऐसी चीजें हैं और पढ़ाई में ऐसी ऐसे मुद्दे शामिल हो गए हैं कि जो भाईचारे में रुकावट डालते हैं या इतिहास को गलत ढंग से पेश करके लोगों को गुमराह करना चाहते हैं। तो पहले भी ऐसी किताबें निकालने की बात होती रही है ऐसे कोर्स को हटाने की चर्चा होती रही है और हमारी सरकार इस बात पर पूरा ध्यान देगी। पढ़ाई के द्वारा जहर नहीं फैलना चाहिए। But in there a very thin dividing line between nationalism and communalism, which has manifest itself in many parts of the world, in Pakistan even, as well as in India and many parts of the world that parties tend to confuse the two issues, nationalism and communalism. कहीं ना कहीं तो मुझे ऐसा लगता है अटल जी, यह दुनिया के सब मुल्कों में होता है कि जो मेजॉरिटी कम्युनिटी का कम्युनिज्म होता है वह नेशनलिज्म के अंदर छुप जाता है। वह कहते हैं कि यह कम्युनिज्म नहीं है यह नेशनलिज्म है। मेजॉरिटी कम्युनिटी का नेशनलिज्म जो कम्युनिज्म है। अगर मेजॉरिटी कम्युनिटी का नेशनलिज्म की क्या डेफिनेशन है आपके पास कम्युनिज्म की क्या डेफिनेशन है कि यह है मेजॉरिटी का कम्युनिज्म वह क्या होता है? अगर हिंदू हिंदुस्तान में यह मांग करें कि चूंकि वह 82% हैं इसलिए उनके कुछ विशेषाधिकार होना चाहिए और बाकी के तादाद में कम हैं और इसलिए उनके अधिकार कुछ कम होना चाहिए तो मैं कहूंगा कि वह कम्युनलिज्म है।



