[0:00]पहलगाम हमले में जिन हाथों ने उस दिन बंदूकें चलाई थी वह आज की डेट तक जिंदा घूम रहे हैं
[0:10]पहलगाम हमला करने जो आया था वह पाकिस्तानी आर्मी का एसएसजी पैरा कमांडो निकला और यह चीज ऐसे पता चली
[0:19]हमले के लास्ट में इन्होंने डेड बॉडीज के साथ सेल्फी ले ले के रखी और जो वीडियो रिकॉर्ड करी थी उसने उसके पास जाकर उसको पैलेस्टीन के बारे में बोलने को कहा और जैसे ही उसने बोला
[0:32]यह चीज सामने आई इन्होंने होटल पर हमला करने का जो प्लान था इनका उसकी लोकेशन चेंज करके पहलगाम कर दी वरना पहले जो टारगेट था तीसरा आतंकवादी लीगल स्टूडेंट वीजा लेकर अटारी बॉर्डर से पाकिस्तान में तो घुसा हमला होने से पहले पहलगाम एरिया की जो सैटेलाइट इमेजेस थी उनको खरीदने की जो डिमांड थी वह अचानक से डबल क्यों हो गई यह नॉर्मल नहीं है यह जो ओजीडब्ल्यू थे इनको जब पकड़ के पुलिसिया अंदाज में पूछा गया तो इन्होंने लाइन बाय लाइन जैसे ही हमला हुआ यूएस की मैक्स टेक्नोलॉजी ने पाकिस्तान की कंपनी बीएसआई से पार्टनरशिप तुरंत तोड़ दी यह कोई ऐसे ही रैंडम फायरिंग नहीं थी तीन तरफ से ग्राउंड को चौक करके भीड़ को मैगी स्टॉल की तरफ इकट्ठा किया गया तुम्हारी इतनी हिम्मत कि तुम कश्मीर में डोमिसाइल इशू करोगे देखिए आगे बढ़ने से पहले बात करते हैं बढ़ती गर्मी के साथ इंडिया की बढ़ती प्रॉब्लम टेंपरेचर और पोलूशन भारत की ज्योग्राफिकल लोकेशन ऐसी है जहां वेदर हॉट और ह्यूमिड रहता है और ग्लोबल वार्मिंग से लास्ट 30 इयर्स में एवरेज 1 डिग्री टेंपरेचर बढ़ गया है धूल मिट्टी गर्मी यह सब 12 में से 10 महीने रहने लगा है इंडिया में 40% प्लस लोगों की स्किन ऑयली है और इसलिए डर्ट पोलूशन और एक्सेस सीबम प्रोडक्शन की वजह से ऑयली स्किन में एक्ने यानी कि मुहांसे की प्रॉब्लम बढ़ती जा रही है देखिए ऑयली स्किन में जो सेबेसियस ग्लैंड्स होते हैं वह ज्यादा सीबम बनाते हैं और जब यह सीबम गंदगी और डेड स्किन के साथ मिलता है तो पोर्स ब्लॉक हो जाते हैं और वही बनाता है पिंपल्स तो इसके लिए आज मैं आपको बताना चाहूंगा डर्मा टच के सेलिसिलिक 2% फेस वॉश के बारे में इसमें है बीएए जो ऑयल कंट्रोल करके एक्ने को ठीक करता है और जिंक पीसीए जो स्किन को हाइड्रेटेड रखता है छह से आठ वीक्स में आपको रिजल्ट्स दिखने शुरू हो जाते हैं पावरफुल एक्टिव्स से बना यह फेस वॉश फ्रेगरेंस फ्री है और सभी स्किन टाइप्स के लिए सूटेबल है तो यह सेंसिटिव स्किन को भी वेल सूटेड है डॉक्टर रिकमेंडिड इंडियन फार्मेसी ब्रांड डर्मा टच बनाता है सॉलिड प्रोडक्ट्स फोर प्लस रेटेड इस फेस वॉश का स्टार्टिंग प्राइस है सिर्फ ₹149 यह अवेलेबल है इनकी वेबसाइट dermato.com और amazon flipkart ब्लिंकट जैसे सभी प्लेटफार्म पे और आपके नियरेस्ट फार्मेसी स्टोर पर भी तो टॉपिक पर वापस आते हैं देखिए यह है जम्मू एंड कश्मीर और जम्मू एंड कश्मीर के अंदर जो अनंतनाग डिस्ट्रिक्ट है इसके अंदर पड़ता है पहलगाम और पहलगाम से जब आप 5 किलोमीटर ऊपर चढ़ाई करते हो तो यह यहां पे 800 मीटर लंबा एक मैदान है बसरन जिसको इंडिया का मिनी स्विट्जरलैंड भी कहते हैं और यही वह जगह है जहां 22 अप्रैल को आतंकवादियों ने एक प्लांड तरीके से हमला किया और यह जो इंसिडेंट हुआ है यह ऐसा ही नहीं है कि एक आतंकवादी आया और ऐसे ही बस बंदूक उठाई और गोली चला दी इसमें बहुत बड़ी प्लानिंग की गई है जिसमें मल्टीपल ग्रुप्स ने वेल कोऑर्डिनेटेड स्ट्रेटजीज और अल्ट्रा सेट्स जैसी टेक्नोलॉजीज का यूज करके हमला किया है अभी यह हमला कैसे किया गया प्लानिंग कैसे हुई कहां पे हुई पाकिस्तान में हुई तो उसके मल्टीपल प्रूफ्स क्या निकल के आए एक-एक चीज मैं इस वीडियो में आपको बताऊंगा और यह सारी चीजें समझने के लिए हमें थोड़ा सा पीछे जाना पड़ेगा तो देखिए यह जो अभी मैंने आपको बसरन एरिया दिखाया था इसके इस तरफ एक गांव है जिसका नाम है गुर यह गांव ऑफिशियली अनंतनाग डिस्ट्रिक्ट के बिजबेहारा ब्लॉक में पड़ता है और इसी गांव के एक घर में पैदा होता है आदिल हुसैन ठोकर जो कि पहलगाम अटैक का पहला आतंकवादी है अभी थोड़े दिन पहले ही इसके घर को तोप से उड़ा दिया है लेकिन ईयर 1992 में जब यह पैदा हुआ था तो किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि यह आगे चलके पहलगाम जैसा हमला करेगा जिसकी वजह से दो देशों के बीच में वॉर जैसी सिचुएशन आ जाएगी
[4:03]अब आदिल जब यहां पर बड़ा हो रहा था तो इसने पहले शाह हमदान पब्लिक स्कूल में एडमिशन लिया फिर गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल बिजबेहारा से 12th क्लास की और ईयर 2018 आते-आते अनंतनाग में जो रहमत आलम कॉलेज है वहां से अपना एमए कंप्लीट करके टीचिंग करने लगा तो ईयर 2018 तक जब तक यह कॉलेज में था तब तक किसी भी एंटी इंडिया एक्टिविटी में इसका नाम नहीं आया था लेकिन बस एक चीज थी उस टाइम पे जो सबने नोटिस की थी कि उस एरिया में जब भी कोई आतंकवादी मारा जाता था तो उसके जनाजे में जरूर जाता था ये बाकी किसी और एक्टिविटी में इसका नाम उससे पहले सुनाई में नहीं आया था लेकिन अप्रैल 2018 में इसने अपना असली गेम स्टार्ट किया 29th ऑफ अप्रैल 2018 को यह आदिल ठोकर जो था यह क्या करता है अपने घर वालों से बोलता है कि उसका एक एग्जाम है तो उसके लिए इसको कश्मीर के बटगाम जाना पड़ेगा और वहां एग्जाम देकर वापस घर आ जाएगा और घर वाले भी इसकी बात मान के इसको भेज देते हैं लेकिन दो से तीन दिन निकल जाते हैं लेकिन आदिल अपने घर वापस नहीं आता है बल्कि गायब हो जाता है और घर वाले बैक टू बैक फोन भी मिलाते हैं इसको लेकिन इससे बात नहीं होती है और फिर थक हार के सेकंड ऑफ में 2018 को आदिल ठोकर की जो मदर थी शहजादा बानो वह पुलिस स्टेशन में जाकर मिसिंग कंप्लेंट रजिस्टर करा देती हैं अब इधर मिसिंग रिपोर्ट तो रजिस्टर हुई लेकिन एक्चुअल में आदिल ने पहले से ही पूरी प्लानिंग कर रखी थी इसने बिना किसी को बताए सेम मंथ यानी कि अप्रैल 2018 को पाकिस्तान में एक एप्लीकेशन लगाकर स्टूडेंट वीजा के लिए अप्लाई कर दिया था हायर स्टडीज के लिए और बहुत ही कम टाइम में यानी कि सेम मंथ में पाकिस्तान अथॉरिटी जो है वह आदिल ठोकर को स्टूडेंट वीजा ग्रांट भी कर देती है और इसी वीजा के बेसिस पे आदिल घर में एग्जाम का बहाना बनाकर अटारी वाघा बॉर्डर के रास्ते वैलिड पासपोर्ट और वैलिड स्टूडेंट वीजा के थ्रू मे 2018 में पाकिस्तान पहुंच जाता है यह उसकी पिक है उस टाइम की अभी यह पाकिस्तान पहुंच तो गया था लेकिन इसको पाकिस्तान जाकर पढ़ाई नहीं करनी थी पाकिस्तान पहुंचने के बाद सबसे पहले यह अपना फोन बंद करता है अपनी फैमिली और अपनी कश्मीर के आसपास के जो लोग थे उनसे पूरी तरीके से कांटेक्ट खत्म कर देता है और सेम डे लश्कर तैयबा की लीडरशिप से मिलता है लश्कर-ए-तैयबा यह वही मिलिटेंट ऑर्गेनाइजेशन है जिसने मुंबई आए पार्लियामेंट अटैक यह सब करवाए हैं अब पाकिस्तान पहुंचने के बाद मुजफ्फराबाद के सवाई नाला में एलईडी का कैंप है जो कि एलओसी से 30 किलोमीटर अंदर पड़ता है पीओके में यहां पे इसकी ट्रेनिंग स्टार्ट होती है दौरा-ए-सूफा दौरा-ए-आम दौरा-ए-खास यह सारी इसकी ट्रेनिंग स्टार्ट होती है अभी जो ऑपरेशन सिंदूर में नौ स्ट्राइक्स की गई थी उसमें से सबसे पहली स्ट्राइक यहीं की गई थी अब इधर आदिल की ट्रेनिंग अपनी चलती रहती है इसको रेडी किया जाता है आगे चलकर हमले करने के लिए दूसरी तरफ जब यह आया था उसके नेक्स्ट मंथ यानी कि 28 ऑफ जून 2018 को पाकिस्तान के लिए एक दिक्कत खड़ी हो जाती है एफएटीएफ फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स यह एक इंटरनेशनल बॉडी है जो दुनिया के अंदर टेरर फंडिंग की मॉनिटरिंग वगैरह करती है तो एफएटीएफ ने पाकिस्तान की एक्टिविटीज को देखते हुए उसे अपनी ग्रे लिस्ट में डाल दिया ब्लैकलिस्ट करने से पहले ग्रे लिस्ट में डाला जाता है एक मौका दिया जाता है सुधरने का अब यह बहुत बड़ी दिक्कत थी पाकिस्तान के लिए क्योंकि इसकी वजह से आईएमएफ वर्ल्ड बैंक से जो लोन वगैरह मिलते हैं पाकिस्तान को वह सब रुक जाते हैं इससे पाकिस्तान के लिए एक सर्वाइवल का भी इशू खड़ा हो जाता है तो ग्रे लिस्ट में डालने के बाद एफएटीएफ ने पाकिस्तान को गाइडलाइंस दी कि यह जो आपकी कंट्री में लश्कर-ए-तैयबा जैसी ऑर्गेनाइजेशन चल रही हैं इनकी फंडिंग आप रोको इन पे एक्शन लो तो एफएटीएफ की गाइडलाइंस और दुनिया को दिखाने के लिए पाकिस्तान ने छोटे-मोटे एक्शन लिए इन्होंने रिपोर्ट सबमिट करना स्टार्ट करी कि इन्होंने फंडिंग रोक दी है और इनके लीडर्स जो हैं एलटी वगैरह के इनको भी जेल में डाल के दिखाया अब इसके कुछ महीने बाद 14th ऑफ फरवरी 2019 को इंडिया के अंदर पुलवामा अटैक किया जाता है इंडिया के अंदर हर कोई बहुत गुस्से में था और इस हमले के तुरंत बाद इंडिया ने जितने भी प्रूफ थे जैसे उमर जिसने हमला किया था उसके अकाउंट में कैसे ₹10.43 लाख पाकिस्तान से डाले गए यह सारे प्रूफ इकट्ठा करके एक डोजियर बनाया गया और एफएटीएफ मेंबर कंट्रीज जो थी जैसे यूएस फ्रांस यूके इनको भेजा 17 से 22 फरवरी तक एफएटीएफ की पेरिस के अंदर मीटिंग होती है और पाकिस्तान को फाइनल वार्निंग दी जाती है कि अब अगर ऐसा कुछ हुआ तो ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा तो अब इस चीज के बाद पाकिस्तान के अंदर लश्कर-ए-तैयबा जैश-ए-मोहम्मद इनकी जो एक्टिविटी थी वह स्लो हो गई और पाकिस्तान में भी शांति हुई और फिर इसके पांच महीने बाद फिफ्थ ऑफ अगस्त 2019 को इंडिया ने कश्मीर से आर्टिकल 370 हटा दिया
[8:03]अब यह चीज होने के बाद पाकिस्तान जो था वह चारों तरफ से फंस गया था इधर आर्टिकल 370 हट चुका था मिलिट्री एक्शन पाकिस्तान ले नहीं सकता था लश्कर-ए-तैयबा जैश-ए-मोहम्मद यह जितनी भी प्रॉक्सी थी इनकी एफएटीएफ की नजर पड़ी थी उन पे तो इस चीज से निपटने के लिए पाकिस्तान के मुरिदके में जहां एलटी का हेड क्वार्टर है वहां पे मल्टीपल मीटिंग्स होती हैं इसका सलूशन निकाला जाता है और फिर इसके कुछ टाइम बाद एक नया प्लान बनाया जाता है ताकि कश्मीर के अंदर जो लड़ाई है उसको कंटिन्यू किया जा सके पाकिस्तान एक नए नाम से आतंकवादी आउटफिट बनाता है द रेजिस्टेंस फ्रंट टीआरएफ प्लान इसमें यह था कि अपना नाम बदलो चेहरा बदलो और काम सारा का सारा वही पुराना रखो जैसे नॉर्मली आपने देखा होगा कि कोई कंपनी जिसका किसी फ्रॉड के चक्कर में बहुत ज्यादा नाम खराब हो जाता है तो वह नए नाम से कंपनी खोल के सेम काम करने लगती है तो ठीक वैसा ही यहां पे भी किया गया तो अगस्त 2019 में आर्टिकल 370 हटता है और दो महीने बाद यानी कि अक्टूबर 2019 में द रेजिस्टेंस फ्रंट टीआरएफ को सेट अप कर दिया जाता है और यही टीआरएफ आगे चलकर पहलगाम के हमले को अंजाम देती है यह जो टीआरएफ थी इसको ऐसे बनाया गया था कि एक क्लीन लोकल कश्मीरी ग्रुप का इल्यूजन दे दुनिया भर से ये लोग बचे रहे जिसमें पाकिस्तान का नाम दूर-दूर तक ना आए और इस टीआरएफ के अंदर जो पूरा सिस्टम था जो ऑपरेशन था उसको चलाने की जिम्मेदारी वही पुराने आतंकवादी जो लश्कर-ए-तैयबा जैश-ए-मोहम्मद वाले थे उन्हीं के हाथ में थी बस नाम बदला गया था टीआरएफ बनने के बाद हायरिंग एक बहुत बड़ा इशू था तो इसके लिए इन्होंने इनिशियल फेज में तहरीक-ए-मिलत इस्लामिया गजनवी हिंद हिज्बुल मुजाहिदीन और लश्कर-ए-तैयबा के कुछ लोगों को मिलाकर इन्होंने हायरिंग स्टार्ट करी और यह जितनी भी हायरिंग की गई इन सारी हायरिंग में से एक हायरिंग बहुत ही इंपॉर्टेंट है उसका नाम आप याद रखिएगा क्योंकि पहलगाम हमले का एक्चुअल मास्टर माइंड यही है इसका नाम है हाशिम मूसा यह हाशिम मूसा जो है यह पाकिस्तान आर्मी का एक एसएसजी पैरा कमांडो है तो पाकिस्तान आर्मी जो थी वह इसकी सर्विस जो थी वह टर्मिनेट करके इसको लोन पे लश्कर-ए-तैयबा को दिया था लोन पे एलटी को दे दिया इसका मतलब यह है कि अब यह एलटी के जितने ऑपरेशंस होंगे उनको एग्जीक्यूट करेगा और देखिए यह कोई भी कंस्पिरेसी थ्योरी नहीं है एनआईए की जो इनिशियल इन्वेस्टिगेशन हुई है उसमें साफ यह चीज सामने आई है जितने ओजीडब्ल्यू के बयान आए हैं इंडिया टुडे टाइम्स ऑफ इंडिया द न्यू इंडियन एक्सप्रेस डे वन से इस चीज को कवर कर रही हैं और इसमें जो कह रहा है कि एनआईए तो इंडिया की है यह न्यूज एजेंसीज भी इंडिया की हैं तो देखिए क्राइम इंडिया के अंदर हुआ है इन्वेस्टिगेशन इंडिया के अंदर चल रही है तो टोक्यो से रिपोर्ट नहीं आएगी और यह जो सारी चीजें बता रहे हैं छुपती नहीं है पुराने भी जितने हमले हुए हैं चाहे पुलवामा हो 26/11 हो कसाब जो पकड़ा गया जो भी प्रूफ आए एनआईए ने इनिशियल स्टेज में जो भी बोला गया आगे चलके वो सारी चीजें प्रूव हुई और इंटरनेशनल कम्युनिटी ने भी उन प्रूफ्स को माना है और देखिए इससे पहले मैं आगे पहलगाम का जो हमला हुआ उसकी प्लानिंग कैसे हुई यह लोग घुसे कैसे कोऑर्डिनेशन कैसे किया उसके बारे में बताऊं उससे पहले यह चीज समझनी बहुत जरूरी है कि सिर्फ इंडिया इकलौता देश ऐसा नहीं है कि जो पाकिस्तान के बारे में यह सब चीजें बोलता है इंडिया के बाहर की ऐसी ऑर्गेनाइजेशन जिनकी रिपोर्ट्स को पूरी दुनिया के लोग मानते हैं यूनाइटेड नेशन इंटरनेशनल वॉच डॉग्स इंडिपेंडेंट इंटेलिजेंस फर्म सब यह चीज कह चुके हैं अपनी रिपोर्ट में कि पाकिस्तान ने टेरर आउटफिट का यूज करके कश्मीर जैसे एरिया में एक प्रॉक्सी बैटलफील्ड बनाया है और सबसे डेंजरस पार्ट इस चीज में यह रहता है कि पाकिस्तान आर्मी और आईएसआई जो है इसे आतंकवादी नहीं समझती है बल्कि एक कैलकुलेटेड मिलिट्री डॉक्ट्रिन मानती है जैसे अफगानिस्तान में यूएस की सीआईए ने लोकल मुजाहिदीन के थ्रू प्रॉक्सी वॉर लड़ के सोवियत यूनियन को बाहर कर दिया था तो यह मानते हैं कि सेम ऐसे ही बिना वॉर लड़े इंडिया से कश्मीर ले लेंगे यूरोपियन फाउंडेशन फॉर साउथ एशिया स्टडीज की रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान आर्मी और इनकी इंटेलिजेंस एजेंसी आईएसआई इनका एक अन होली अलायंस है टेरर ग्रुप्स के साथ इन्होंने 125 से 250 मिलियन डॉलर्स आतंकवादी ग्रुप्स को दिए हैं कुछ उनकी सैलरी की फॉर्म में ट्रेनिंग ऑपरेशनल कॉस्ट जितनी भी लगती है उसके लिए दिए हैं इस पूरी रिपोर्ट का लिंक मैंने डिस्क्रिप्शन में लगा रखा है पेज नंबर 23 से 24 के आगे आप पढ़ोगे जब तो आपको पता चलेगा कैसे कसीदे पढ़े गए हैं पाकिस्तान के लिए
[12:26]अमेरिका की पार्लियामेंट यूएस कांग्रेस में जो सीआरएस रिपोर्ट पब्लिश हुई थी उसमें भी कहा गया कि पाकिस्तान के अंदर 15 आतंकवादी ग्रुप हैं जिनको पांच कैटेगरीज में डिवाइड किया गया है जिसमें से एक ग्रुप का डेडिकेटेड टास्क है कश्मीर के अंदर आतंकवाद फैलाना यह सारे उनके नाम हैं और इसका भी लिंक आपको डिस्क्रिप्शन में मिल जाएगा यह सारी रिपोर्ट्स इंडिया के बाहर की हैं और अगर इनको भी आप नहीं मानो तो पाकिस्तान के फॉर्मर प्रेसिडेंट मुशर्रफ ने सीएन के इंटरव्यू में एक्सेप्ट किया कि हम ट्रेनिंग देते हैं मुस्लिम्स को कश्मीर में लड़ने के लिए यह हमारे हीरो हैं पाकिस्तान के फॉर्मर पीएम नवाज शरीफ ने डॉन को इंटरव्यू देते हुए एक्सेप्ट किया कि नॉन स्टेट एक्टर्स जैसे लश्कर-ए-तैयबा ने पाकिस्तान की जमीन का यूज करके मुंबई पे अटैक किया बाकी ये फेमस फोटोग्राफ आपने हाल फिलहाल में जरूर देखी होगी यूएन के डेजिग्नेटिड आतंकवादी हाफिज अब्दुल रऊफ के साथ ये सारी पाकिस्तान की लीडरशिप खड़ी है
[13:17]और यह मैं शॉर्ट में बता रहा हूं यूएस डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस पेंटागन एफएटीएफ की कितनी सारी रिपोर्ट है पूरी रात निकल जाएगी और सिर्फ और सिर्फ उन रिपोर्ट्स में पाकिस्तान और उनके आतंकवादियों से क्या कनेक्शन रहे हैं सिर्फ उसके बारे में पता गया है और यह सब इंडिया के बाहर की रिपोर्ट है तो आगे मैं जो भी स्टोरी बता रहा हूं आपको उसको सिर्फ आप यह कह के नहीं रिजेक्ट कर सकते कि अरे यह तो इंडिया का यूट्यूबर है इंडिया की रिपोर्ट्स हैं इंडिया की एनआईए है यह सारी चीजें कह के आप पाकिस्तान का जो लिंक है आतंकवाद से वह हटा नहीं सकते चलिए वापस अपनी स्टोरी पर आते हैं तो देखिए अभी तक पाकिस्तान आर्मी का जो पैरा कमांडो था हाशिम मूसा वह आर्मी छोड़ के एलटी के जो ऑपरेटिव्स थे उनके साथ काम करने लगा था आदिल ठोकर जो कश्मीर से पाकिस्तान पहुंच गया था वह वहां पे उसकी ट्रेनिंग चल रही थी यानी कि पहलगाम हमले वाले दिन जो दो आतंकवादी थे वह पाकिस्तान के अंदर अपना काम कर रहे थे और तीसरी चीज टीआरएफ इसका फॉर्मेशन हो चुका था और टीआरएफ के फॉर्मेशन के बाद दूसरी चीज जो इनको करनी थी इनको टीआरएफ के हेड बनाने थे और हेड ऐसे बनाने थे जिनके ऊपर इनको लंबे टाइम से ट्रस्ट हो स्किलफुल हो और कश्मीर के लोकल हो ताकि इनका जो नैरेटिव है वॉर का वह उसी तरीके से एग्जीक्यूट हो और लोकल हेड होने से लोकल हायरिंग और उस एरिया की नॉलेज उसको अच्छी होती है तो उसका बहुत बड़ा एडवांटेज होता है तो इसके लिए ये लोग सेलेक्ट करते हैं कश्मीर के कुलगाम जिले के रामपुरा के कमा गांव का रहने वाला मोहम्मद अब्बास शेख यह बहुत ही पुराना और ट्रस्टी आतंकवादी था एलटी का यह 1996 से ही एलटी के साथ आतंकवाद फैलाने में जुड़ा हुआ था तो इसी वजह से मोहम्मद अब्बास शेख जो था उसको हेड बनाया गया टीआरएफ का इसको टीआरएफ का फाउंडर भी कहते हैं लेकिन एक्चुअल में जो टीआरएफ के फाउंडर थे वह पाकिस्तान में बैठे हुए थे टीआरएफ के हेड मोहम्मद अब्बास शेख के साथ एक और एलटी का ट्रस्टी आदमी रहता था जिसका नाम था शेख सज्जाद गुल पहलगाम हमले की जो प्लानिंग हुई थी जो लोकेशन सेट की गई थी जो होटल से पहलगाम शिफ्ट की गई थी सारी प्लानिंग इसी ने की थी अभी आएगा आगे यह कश्मीर में श्रीनगर के नवा बाजार में रहता था इसने एमबीए कर रखा था और पहले भी दिल्ली में एक बार अटैक के साथ पकड़ा गया था कई हमले में इंवॉल्व था इसका भाई भी महाराजा हरि सिंह हॉस्पिटल में पहले डॉक्टर था अभी आजकल गल्फ कंट्रीज में टेरर फंडिंग संभालता है तो यह सारी चीजें करने के बाद अब यहां से मोहम्मद अब्बास शेख और शेख सज्जाद गुल कश्मीर में टीआरएफ का पूरा नेटवर्क संभालते हैं और फिर इसके बाद कश्मीर के अंदर जो टीआरएफ के ओजीडब्ल्यू नेटवर्क की जो जिम्मेदारी थी वह फारूक अहमद को दी गई फारूक अहमद जो था यह बहुत ही इंपॉर्टेंट आदमी था यह 2016 तक तो कश्मीर के नारकोट गांव कालरू ब्लॉक कुपवाड़ा डिस्ट्रिक्ट में था लेकिन 2016 के बाद से यह पीओके के मुजफ्फराबाद में रह के कश्मीर का जो ओजीडब्ल्यू नेटवर्क था उसको संभालता था और एलओसी पार कराके कश्मीर के अंदर जो आतंकवादी पहुंचाए जाते थे वह भी यही फारूक ही करवाता था इनफैक्ट पहलगाम हमला जो था उस टाइम पे भी जितने आतंकवादी आए थे पाकिस्तान से सारे के सारे एलओसी इसी ने क्रॉस करवाए थे और जितने ओजीडब्ल्यू इंवॉल्व थे पहलगाम हमले में जो प्लानिंग से पहले जा जा के रैकी कर रहे थे सब के सब इसके साथ कांटेक्ट में थे देखिए ओजीडब्ल्यू मैंने पुरानी वीडियो में बता रखा है एक बार फिर से बता देता हूं ओजीडब्ल्यू ओवर ग्राउंड वर्कर
[16:05]कश्मीर में जो लोग इंडिया से नफरत करते हैं लेकिन हथियार उठा के अपनी जान दाव पे नहीं लगाना चाहते हैं वह ओजीडब्ल्यू बन जाते हैं यह आराम से आम जनता की तरह अपना घर चलाते हैं कोई ऑटो चलाता है कोई दुकान संभालता है लेकिन जो आतंकवादी होते हैं उनको यह हेल्प करते हैं उनको खाना शेल्टर आर्मी की इंफॉर्मेशन देना एरिया की डिटेल्स शेयर करना यह सारे काम करते हैं ओजीडब्ल्यू कश्मीर में बहुत ही इंपॉर्टेंट रोल प्ले करते हैं ओजीडब्ल्यू के बिना यह जितनी आतंकवादी ऑर्गेनाइजेशन है एलटी हो गई जैश-ए-मोहम्मद हो गई इनका पूरा काम करना बहुत मुश्किल हो जाता है कश्मीर के अंदर अब इसके बाद जब यह सारी चीजें सेट अप हो जाती हैं तो कश्मीर के अंदर फारूक अहमद पाकिस्तान से आतंकवादियों को एलओसी क्रॉस करा के घुसाना चालू करता है कश्मीर के अंदर ताकि हमला किया जा सके एलओसी से जितने भी आतंकवादी घुस रहे थे वह सांभा कठुआ रजौरी और पुंज वाला जो एरिया था वहां से घुस रहे थे और इनका एक सेट पैटर्न रहता था कश्मीर के बॉर्डर पर घुसने के बाद ओजीडब्ल्यू इनको रिसीव करते थे इनकी हेल्प करते थे और फिर यह बॉर्डर पर आने के बाद डायरेक्ट जम्मू वाला रूट पकड़ के अनंतनाग पहुंचने की बजाय यह जो यहां से आप किश्तवार वाला एरिया जो देख रहे हो यहां वाले रूट से पहुंचते थे क्योंकि यहां पे बहुत ज्यादा घने जंगल हैं नेचुरल केव्स हैं एवरेज एलिवेशन जो है सी लेवल से 2000 मीटर से भी ऊपर है तो भागने में बहुत आसानी होती है यहां पे पकड़ना इनको बहुत मुश्किल होता है 22 अप्रैल 2025 जिस दिन यह अटैक हुआ था आज की डेट तक किश्तवार वाला जो इलाका है हमारी फोर्सेस इनको ढूंढ ढूंढ के मार रही हैं अभी भी लड़ाई चल रही है इस एरिया में तो देखिए ईयर 2022 आते-आते इन्होंने अपना पूरा नेटवर्क एस्टेब्लिश कर लिया था कश्मीर के अंदर टीआरएफ ने अपने आतंकवाद के मॉडल की रीब्रांडिंग करी ऑनलाइन पोर्टल्स बनाए टेलीग्राम सोशल मीडिया का बहुत ज्यादा यूज किया इन्होंने एक टीजेआरएफ नाम से टेलीग्राम चैनल भी बनाया जिसमें प्रोपेगेंडा वाली वीडियोस वगैरह शेयर करके कश्मीरियों को जॉइन कराते थे और फिर इसी बीच इन्होंने कश्मीर के अंदर हमले करना स्टार्ट किया नॉन लोकल जो थे उनको टारगेट करना स्टार्ट किया लाल चौक से 100 मीटर पर हरि सिंह हाई स्ट्रीट मार्केट एरिया में बम मारा इन्होंने टीआरएफ का यह पहला अटैक था कश्मीर के अंदर इसके बाद इन्होंने अजय पंडिता जी इनको मारा आकाश मेहरा को मारा इंडिया के कोने-कोने से जो लेबर्स आए थे उन पे हमले किए बेसिकली इनका मॉडल कुछ इस तरीके से आप समझ लीजिए कि एक कॉन्ट्रैक्ट किलर की तरह यह काम कर रहे थे जितने भी नॉन लोकल थे उनको यह जा जा के मार रहे थे लेकिन असली झटका जो इनको लगा था वह 23 अगस्त को लगा था क्योंकि इस दिन श्रीनगर के अलूची बाग में टीआरएफ का हेड मोहम्मद अब्बास शेख जिसको फाउंडर भी कहा जाता है टीआरएफ का यह लोकल लोगों के साथ क्रिकेट मैच खेल रहा था वहीं पे जम्मू एंड कश्मीर की पुलिस को पता चल जाता है और इन्होंने वहीं पर पहुंच के इसको मार दिया जिस दिन यह मरा सेम वीक में जो टीआरएफ का सेकंड हैंड कमांड था जो मैंने बताया भी था आपको शेख सज्जाद गुल इसको हेड बना दिया जाता है इधर टीआरएफ का हेड मारा जाता है दूसरी तरफ कश्मीर की सिचुएशन भी बहुत तेजी से बदल रही थी जैसे 2018 में जो स्टोन पेल्टिंग होती थी वह 1458 केसेस आए थे वहीं 2020 में यह 255 रह गए थे और फिर आगे चल के और कम हुए आगे 2023 और 2024 में तो ऑफिशियल डाटा जीरो हो गया था स्टोन पेल्टिंग का 2018 में जहां 228 आतंकवादियों के केस रजिस्टर्ड हुए थे वहीं 2023 की बात करें तो टीआरएफ 44 हमले ही कर पाया था 2018 में जहां 8.5 लाख टूरिस्ट आए थे यह नंबर बढ़कर 2023 में 31 लाख हो गया था और उसके नेक्स्ट ईयर तो 43 लाख टूरिस्ट आए थे 2019 में जहां 296.64 करोड़ की इन्वेस्टमेंट हुई थी वहीं 2022 में 2153 करोड़ की इन्वेस्टमेंट हुई कश्मीर के अंदर बहुत पैसा इंजेक्ट किया जा रहा था डोमिसाइल लॉ जो थे वह भी आ चुके थे जिसकी वजह से कश्मीर के बाहर के लोग भी डोमिसाइल सर्टिफिकेट बनवा सकते थे और मेन जो टारगेट था टीआरएफ का वह यही था कि ये जो ट्रेड बढ़ रहा है टूरिस्ट बढ़ने से जो कश्मीरियों के हाथ में पैसे आ रहे हैं इसको रोका जाए अटैक करके इसको लेकर इन्होंने कुछ नॉन लोकल्स और जिन लोगों को डोमिसाइल इशू किए गए थे उन पे हमले किए लेकिन टूरिस्ट का नंबर कम नहीं हो रहा था होटल्स फुल थे पोनी राइडर्स जो थे ऑटो वाले हर कोई बिजी था youtube पे भी एक बार आप लोकल कश्मीरी जो थे उनके इंटरव्यू वगैरह जरूर सुनिए जिसमें वह खुलेआम बता रहे हैं कि इतना काम था कि एक दिन का भी आराम नहीं था बहुत पैसा आ रहा था और बहुत टूरिस्ट भी आ रहे थे तो जो कश्मीर में इतनी तेजी से चीजें चेंज हो रही थी तो इससे निपटने के लिए अब यहां से असली गेम शुरू होता है सितंबर 2023 को हाशिम मूसा इसके बारे में मैंने आपको बताया था कि इनिशियल इन्वेस्टिगेशन में ही आ गया था कि यह पाकिस्तान आर्मी का एसएसजी पैरा कमांडो था तो मूसा और मूसा के साथ अली भाई अली भाई के बारे में ज्यादा डिटेल्स आई नहीं है यह इसके बारे में नहीं पता है कि यह पैरा कमांडो में था या नहीं था लेकिन यह अली भाई और मूसा जो थे यह दोनों पाकिस्तानी सिटीजन थे तो सितंबर 2023 को दोनों कठुआ और सांभा सेक्टर के रूट से कश्मीर में इनको घुसाया जाता है कश्मीर में पहुंचने के बाद ओजीडब्ल्यू की हेल्प से यह खारी माहौर बसंतगढ़ यहां पे सेफ हाउस में रहते हैं यह मूसा जो था इसकी कॉम्बैट ट्रेनिंग बहुत ही अच्छी कराई गई थी यह कई-कई दिनों तक बर्फ में जंगल में रह के निकाल सकता था तो प्लान यह था कि अब जो भी आगे कश्मीर में हमले होंगे उसको मूसा ही लीड करेगा अली भाई के साथ मिलके और फारूक के जो 15 से 20 ओजीडब्ल्यू थे यह उसकी मदद करेंगे तो कहने का मतलब यह है कि आगे चलके जो पहलगाम हमला होने वाला था उसके मेन दो आतंकवादी कश्मीर में सितंबर 2023 में पहुंच चुके थे कश्मीर में पहुंचने के बाद यह अपने छोटे-मोटे ऑपरेशन एग्जीक्यूट करते हैं और फिर अक्टूबर 2024 को पहलगाम हमले में जो तीसरा आतंकवादी था जिसने बंदूकें चलाई थी आदिल ठोकर जो शुरू में मैंने बताया था कि स्टूडेंट वीजा लेके पाकिस्तान गया था यह भी अपनी ट्रेनिंग पूरी करके कश्मीर के अंदर जो पुंज रजौरी वाला एरिया था इस सेक्टर से घुस जाता है एक एहसान करके और आतंकवादी था जो सेम टाइम में कश्मीर में आया था लेकिन उसके भी कोई कंफर्म रिपोर्ट नहीं आई है कि यह वही एहसान है जो पहलगाम के हमले वाले दिन था अब कश्मीर में पहुंचने के बाद यह लोग कुछ टाइम तक नॉन लोकल्स पर हमले करते हैं स्पेशली जो लेबर्स जो थे जो इंफ्रा और डेवलपमेंट के प्रोजेक्ट में इवॉल्व थे जैसे गगनगीर में जमोर टनल प्रोजेक्ट पे छह लेबर और एक डॉक्टर को मारा इन्होंने फिर डेरा की गली डीकेजी में हमले किए तो इस तरीके से हर थोड़े टाइम पे ये लोग वहीं से बैठ के अटैक कर रहे थे कश्मीर के अंदर अब इसके दो महीने बाद यानी कि दिसंबर 2024 में यानी कि पहलगाम हमला होने से तीन चार महीने पहले की बात है इस टाइम पे श्रीनगर के दचीगाम में इनके साथ एक आतंकवादी था जुनैद अहमद भट्ट इसको फोर्सेस घेर के एक ऑपरेशन में मार देती हैं और मरने के बाद इसकी बॉडी वगैरह चेक होती है तो इसके पास से एक मोबाइल मिलता है जिसमें से इसके पाकिस्तान के कनेक्शन जो इंस्ट्रक्शंस वगैरह आ रहे थे एनक्रिप्टेड मैसेज वगैरह आ रहे थे वह सब पकड़े जाते हैं और इसके मोबाइल से एक इमेज मिलती है अभी रिसेंटली भी आपने ये इमेज देखी होगी पहलगाम हमले के बाद यह इमेज बहुत ज्यादा वायरल हुई थी यह इमेज दिसंबर 2024 में जुनैद के मोबाइल से मिली थी लेकिन उस टाइम पे फोर्सेस पहचान नहीं पाई थी कि इसमें मूसा भी है लेकिन जब पहलगाम हमला हुआ और बाद में जब टूरिस्ट ने डिस्क्रिप्शन वगैरह दिए हमले के बाद और स्केच बने तब यह फोटो निकल के आई और ओजीडब्ल्यू जो थे जो पकड़े गए तो उनकी इंफॉर्मेशन के थ्रू तब उसमें पता चला कि यह जो फोटो है इसके राइट में जो है यह मूसा है और इसके बगल में जो आप देख रहे हो यह जुनैद है जिसको मारा गया अब देखिए इसके बाद जब यह सारे लोग कश्मीर में पहुंच गए थे तो हथियारों का जो अरेंजमेंट हुआ उसके बारे में भी रिपोर्ट्स आई है पहलगाम हमले में अमेरिकन एम4 राइफल्स यूज हुई हैं और यह एम4 राइफल्स एके 47 से एडवांस थी इनमें नाइट विजन डिवाइसेज और कैमरे वगैरह लग जाते हैं जब पहलगाम हमले के बाद क्राइम सीन से कारट्रेज बरामद हुई थी तो उन कारट्रेज का बैलिस्टिक एनालिसिस किया गया था उसमें यह चीज निकल के सामने आई थी कि एम4 कारबाइंस और एके 47 जैसी बंदूकें यूज की गई हैं और यह जो अमेरिकन एम4 राइफल्स हैं इनके बारे में भी चीजें बाहर आई हैं कि जब यूएस अफगानिस्तान से निकला था तो करीब 7 बिलियन डॉलर के हथियार छोड़ के गया था अफगानिस्तान में और यह जो हथियार थे इंक्लूडिंग अमेरिकन एफ4 राइफल्स वहां से ब्लैक मार्केट में यह सारे हथियार पहुंचे थे और इंटेलिजेंस रिपोर्ट के हिसाब से जैश-ए-मोहम्मद का जो चीफ था मुफ्ती अब्दुल रऊफ अजगर जिसको आर्म्स प्रोक्योरमेंट और लॉजिस्टिक का टास्क दिया गया था वह इन एम4 राइफल्स को स्मगल करवा के खैबर पखत खवा रीजन के थ्रू जैश-ए-मोहम्मद के हेड क्वार्टर मरकज कैंप में लेकर आया और फिर वहां से ड्रोन का यूज करके यह जो हथियार थे कश्मीर के अंदर डंप किए गए और यह जो प्रोसेस था कश्मीर में हथियारों को लाने का यह कई सालों से चल रहा था अब देखिए इसके बाद एक बहुत ही अनयूजुअल एक्टिविटी हुई और जिस स्टाइल से पहलगाम अटैक किया गया उसकी वजह से इस इंसिडेंट की इंपॉर्टेंस और बढ़ गई एक्चुअली हुआ क्या कि थोड़े टाइम पहले अगस्त 2024 में कतर के दोहा में यूएन का डेजिग्नेटिड आतंकवादी और लश्कर-ए-तैयबा का हेड सैफुल्ला कसूरी हमास के लीडर खालिद मशाल से मिला था और उस टाइम पे पाकिस्तान की जो पाकिस्तान मरकज मुस्लिम लीग पीएमएमएल थी इसने भी इस मीटिंग की वीडियोस वगैरह डाली थी उस टाइम पे तो इस चीज पे किसी ने ज्यादा ध्यान नहीं दिया था लेकिन असली खतरे की घंटी बजती है फिफ्थ ऑफ फरवरी 2025 को इस दिन क्या होता है कि पाकिस्तान के रावलकोट शहीद सबीर स्टेडियम में हमास के लीडर आते हैं यह इतिहास में पहली बार हुआ था जब हमास की लीडरशिप ने पीओके के अंदर कदम रखा था और यहां पहुंचने के बाद इन्होंने कॉन्फ्रेंस रखी इस कॉन्फ्रेंस का ऑफिशियल नाम रखा कश्मीर सॉलिडेरिटी एंड हमास ऑपरेशन अल अक्सा फ्लड कॉन्फ्रेंस और यहां पे इन्होंने काफी रैली की इंडिया के खिलाफ बहुत सारा जहर उगला और यहां से यह चीज लगने लगी थी कि अब कश्मीर में यह लोग कुछ करने वाले हैं और पहलगाम हमला भी जो हुआ वह भी हमास स्टाइल में ही हुआ और यह मीटिंग होने के बाद यह रिपोर्ट्स आने लगी कि हमास ने यहां पे आने के बाद कश्मीर के अंदर जो हमले करने की टैक्टिक्स हैं इनक्रिप्टेड कम्युनिकेशन के जो तरीके हैं और सिविलियन टारगेटिंग वगैरह पे डिस्कशन किया अब देखिए इधर फिफ्थ ऑफ फरवरी को हमास की लीडरशिप पीओके पहुंची वहीं इसके एक वीक बाद एक और अनयूजुअल चीज होती है यूएस के अंदर एक फेमस सैटेलाइट कंपनी है मैक्स टेक्नोलॉजी तो क्या होता है कि अचानक से इस कंपनी के पास कश्मीर के पहलगाम का जो एरिया है वहां की हाई रेजोल्यूशन इमेजेस की डिमांड जो थी वह डबल हो गई पहलगाम एक टूरिस्ट एरिया है कोई बैटलफील्ड नहीं है कि इस तरीके से डिमांड बढ़ना यह नॉर्मल नहीं था यह इमेज आप पॉज करके एक बार देख लेना 12 15 18 21 और 22 फरवरी इसी साल 2025 में सबसे ज्यादा हाई रेजोल्यूशन इमेजेस के ऑर्डर आए यह वह इमेजेस हैं देखिए ये जो यूएस की सैटेलाइट कंपनी है मैक्स टेक्नोलॉजीज यह हाई रेजोल्यूशन सैटेलाइट इमेजेस जिनका साइज 30 सेंटीमीटर से लेकर 15 सेंटीमीटर तक होता है उनको दुनिया भर की अप्रूव्ड गवर्नमेंट और डिफेंस एजेंसीज को सेल करती है जैसे इंडिया के अंदर इसरो और मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस इसके कस्टमर हैं यह हाई रेजोल्यूशन सैटेलाइट इमेजेस जो होती है नॉर्मल नहीं होती इससे ग्राउंड पे छोटी से छोटी चीज देखी जा सकती है इन हाई रेजोल्यूशन इमेजेस के थ्रू अटैक की प्लानिंग टारगेट वेरिफिकेशन वगैरह ये सारी चीजें होती है यह इमेज एक टैक्टिकल वेपन की तरह एक्ट करती है बैटलफील्ड के अंदर इस वजह से ही अपनी इमेजेस सिर्फ अप्रूव्ड गवर्नमेंट एजेंसीज के साथ ही शेयर करते हैं प्राइवेट या रैंडम एंटिटी कोई आती है तो उसको हाई रेजोल्यूशन इमेजेस नहीं देते हैं लो ग्रेड इमेजेस दे देते हैं वह काम की नहीं होती अब यहां से क्वेश्चन ये उठता है कि पहलगाम जैसे एरिया की इमेजेस की डिमांड ऐसी बढ़ी क्यों और इन इमेजेस का जो एक्सेस है वह इतना आसान नहीं है तो जब इसके बारे में भी पता लगाया गया तो एक नया खेल निकल के आया सामने हुआ क्या कि जून 2024 में एक पाकिस्तानी कंपनी बिजनेस सिस्टम इंटेलिजेंस प्राइवेट लिमिटेड बीएसआई इसने यूएस की जो यह सैटेलाइट कंपनी है मैक्स टेक्नोलॉजीज इसकी सारी की सारी शर्तें मान के इससे पार्टनरशिप कर ली अब पार्टनरशिप होने से इस पाकिस्तानी कंपनी बीएसआई को यह एडवांटेज हुआ कि यह उन हाई रेजोल्यूशन इमेजेस जिनको आसानी से एक्सेस नहीं किया जा सकता उनके राइट्स भी आ गए सेल करने के कहने का मतलब है कि इस कंपनी के पास भी एक्सेस आ गया जो अभी तक अप्रूव्ड गवर्नमेंट एजेंसीज के लिए एक्सक्लूसिव थी यह पाकिस्तानी कंपनी बीएसआई चाहे तो अपने पाकिस्तानी क्लाइंट उनको भी दे सकती है और कुछ पता नहीं कि वह पाकिस्तानी क्लाइंट क्या पता आतंकी ऑर्गेनाइजेशन ही हो और ऐसा होने के चांसेस बहुत ज्यादा हैं ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूं क्योंकि इस कंपनी का जो फाउंडर था ओबैदुल्लाह सैयद यह भी फ्रॉडिया निकला यह क्या कर रहा था कि जो न्यूक्लियर रिसर्च और मिसाइल डेवलपमेंट जैसे सेंसिटिव कामों के लिए जो हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग इक्विपमेंट और एडवांस सॉफ्टवेयर यूज होते हैं उनको यह यूएस से छुप के पाकिस्तान की जो पाकिस्तान एटॉमिक एनर्जी कमीशन पीएईसी है उसको इल्लीगली एक्सपोर्ट कर रहा था यूएस ने इसको रंगे हाथों पकड़ लिया और फिर यूएस डिस्ट्रिक्ट कोर्ट फॉर द नॉर्दर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ इलिनोए ने 18 यूएसई 371 के तहत इसको सजा दी अब देखिए फरवरी 2025 के फर्स्ट वीक में हमास मीटिंग करती है पीओके में सेम मंथ में पहलगाम जो एरिया है उसकी इमेज की जो डिमांड है वह डबल हो जाती हैं और फिर इसके 10 से 15 दिन बाद मार्च 2025 में एक अनाउंसमेंट होती है अनाउंसमेंट यह थी कि पीएम नरेंद्र मोदी नेक्स्ट मंथ यानी कि 19th ऑफ अप्रैल 2025 को कश्मीर आएंगे वंदे भारत की इनॉगरेशन करने अब जब यह अनाउंसमेंट हुई थी तो इस टाइम पे पाकिस्तान से आए मूसा अली भाई आदिल ठोकर और बाकी जो इनके साथ ग्रुप में थे ये कश्मीर के अंदर ही थे जिस मंथ यह अनाउंसमेंट हुई यानी कि मार्च 2025 इस पूरे मंथ ना तो कोई सैटेलाइट की इमेजेस के ऑर्डर आए और यह जो मूसा अली भाई ये जो थे इन्होंने भी कोई एक्टिविटी नहीं की कश्मीर में ऐसा माना जा रहा है कि इसी मंथ में यह प्लानिंग हुई होगी किश्तवार के जंगलों में टीआरएफ के हेड शेख सज्जाद गुल जो था वो मूसा अली भाई और आदिल ठोकर जो थे इन्होंने शायद इसी मार्च के महीने में प्लानिंग करी होगी लेकिन इसमें सबसे जो सरप्राइजिंग चीज थी यह जितने भी लोग कम्युनिकेशन कर रहे थे आपस में चाहे एक आपस में कर रहे हो चाहे पाकिस्तान के अंदर कर रहे हो इस कम्युनिकेशन के बारे में किसी को पता ही नहीं चल पाया और क्यों नहीं पता चल पाया वह भी डिस्कस करते हैं देखिए पहले यह जो जैश-ए-मोहम्मद लश्कर-ए-तैयबा और यह जितने आतंकवादी रहते थे 26/11 का जो मुंबई हमला हुआ था उस समय भी आपने कन्वर्सेशन सुनी होगी अभी भी youtube पर पड़ी है थुराया सैटेलाइट फोन के थ्रू ये लोग आपस में कम्युनिकेशन कर रहे थे वह सब पकड़ी गई थी लेकिन इस बार इनको पाकिस्तान मिलिट्री के अंदर जो अल्ट्रा सेट्स यूज होते हैं वह दे के भेजा गया था कश्मीर में हुवाई जो है वह एक चाइनीस कंपनी है जो इंडिया के अंदर बैंड है इसने कुछ स्पेशल स्मार्टफोंस लॉन्च किए थे मेड 60 प्रो प60 सीरीज और नोवा 11 अल्ट्रा इसमें क्या किया था इसने इंटरनल सैटेलाइट अंटीना और स्पेशलाइज्ड चिप डाल दी थी इन फोंस में पर्पस इसका यह था कि अगर यूजर को कोई इमरजेंसी हो और इंटरनेट ना हो तो वह इन फोन को चाइनीस के टियांटोंग वन सैटेलाइट नेटवर्क जिसको चाइना टेलीकॉम मैनेज करता है उससे कनेक्ट करके वॉइस टेक्स्ट हो गए और वीडियो चैट हो गए यह कर सके बिना इंटरनेट के बेसिकली एक नॉर्मल फोन सैटेलाइट फोन में कन्वर्ट हो जाता है और इन्हीं अल्ट्रा सेट्स को यूज में लाया गया अपग्रेड करके पहलगाम की पूरी प्लानिंग में यहां तक कि हमले वाले दिन यह अल्ट्रा सेट्स यूज हो रहे थे
[30:00]यह पकड़े इसलिए नहीं जा रहे थे क्योंकि जब मूसा और अली भाई जैसे आतंकवादी कश्मीर में बैठ के आपस में कम्युनिकेशन कर रहे थे तो एक्चुअल में हो ये रहा था कि मिलिट्री ग्रेड एनक्रिप्टेड रेडियो सिग्नल इंडियन सेलुलर और सैटेलाइट सर्विलेंस सिस्टम को बाईपास करके चाइना की सैटेलाइट का यूज करते थे और फिर उसके थ्रू पाकिस्तान में जो सर्वर है वहां पे सिग्नल जाते थे जिससे इनका कम्युनिकेशन ट्रेस ही नहीं हो पा रहा था और इसलिए यह माना जा रहा है ये जो पूरा मार्च का मंथ था और यह पूरी प्लानिंग हुई यह पकड़ में ही नहीं आ पाई इनके कम्युनिकेशन जो थे वही नहीं पकड़ में आए थे पाकिस्तान के कराची और पीओके के मुजफ्फराबाद में बैठ के कोऑर्डिनेट किया गया इन अल्ट्रा सेट्स का यूज करके जहां एक-एक स्टेप समझाया गया कब कहां और किस तरीके से टास्क को पूरा करना है यह जो अल्ट्रा सेट्स हैं यह सिर्फ एक बार 2023 में सुरन कोटे के एक एनकाउंटर में एक बार हाथ लगे थे एक आतंकवादी के पास से इसको क्रैक करने की कोशिश की गई इनफैक्ट इस अल्ट्रा सेट को वेस्टर्न कंट्रीज को भी भेजा गया था लेकिन यह क्रैक नहीं हो पाया था यह बहुत बड़ा रीजन था कि इनकी जो कम्युनिकेशन थी वह ट्रेस नहीं हो पा रही थी तो कम्युनिकेशन के लिए अल्ट्रा सेट्स तो यूज हुए और कश्मीर के जंगलों में जो रास्ते ढूंढे जाते थे पहले जो ओजीडब्ल्यू होते थे उनकी बहुत ज्यादा हेल्प ली जाती थी लेकिन इस बार ओजीडब्ल्यू की कम हेल्प ली गई वह इसलिए किया गया क्योंकि इन्होंने नेविगेशन के लिए भी नए मेथड यूज किए इन्होंने एक ऐप का यूज किया जिसका नाम है अल्पाइन क्वेस्ट जिसको ट्रैकर्स जो है वो ऑफलाइन नेविगेशन के लिए यूज करते हैं जब इंटरनेट नहीं होता है तो google मैप की तरह पहाड़ों पे नेविगेट करते हैं इसका यूज करके तो इस अल्पाइन क्वेस्ट के ऑफलाइन वर्जन में इन्होंने हाई रेजोल्यूशन सैटेलाइट इमेजेस का यूज किया जिसकी वजह से यह मूसा अली भाई बिना इंटरनेट सर्विसेस के बिना ओजीडब्ल्यू की हेल्प के जैसे google मैप चलता है उस तरीके से इस अल्पाइन क्वेस्ट ऐप का यूज करके किश्तवार के जंगलों में घूम रहे थे अब इसके बाद अप्रैल फर्स्ट वीक में प्लानिंग स्टार्ट होती है कि किस तरीके से कश्मीर के अंदर जो टूरिस्ट आ रहे हैं कैसे ट्रेड को इंपैक्ट किया जाए कश्मीर के अंदर ताकि यह जो पूरा सिस्टम चेंज हो रहा है बहुत तेजी से कश्मीर के अंदर वह डिसरप्ट हो सके तो अप्रैल फर्स्ट वीक में इन्होंने डिसाइड किया कि कश्मीर के जबरन वैली के पास जो लग्जरी होटल्स होंगे स्पेशली जिनमें फॉरेन टूरिस्ट होंगे उनके ऊपर हमला करा जाएगा बेसिकली यह कश्मीर के ट्रेड को इंपैक्ट करना चाह रहे थे एक तरह से कश्मीरियों के खिलाफ यह ट्रेड वॉर थी इसमें एक चीज और कही गई है कि शायद यह भी रीजन हो सकता है क्योंकि पीएम नरेंद्र मोदी को भी कश्मीर में आना था उस टाइम पे इनॉगरेशन करने के लिए तो सेम टाइम पे जो लग्जरी होटल होंगे उनमें हाई वैल्यू टारगेट जो होंगे पीएम के डेलीगेट वगैरह जो आते हैं साथ में उनके होने के भी चांसेस बढ़ जाएंगे तो उसकी वजह से हमले की जो कवरेज होगी वह और ज्यादा फैले गी इस वजह से ये लोग इस टाइम पे होटल के अंदर जो टूरिस्ट होंगे उनके ऊपर अटैक करने का प्लान जो था इन्होंने फिक्स कर दिया था अब टारगेट फिक्स होने के बाद फोर्थ ऑफ अप्रैल 2025 को यह रैकी स्टार्ट करते हैं रैकी करने आदिल ठोकर के साथ ओजीडब्ल्यू जाते हैं पाकिस्तानी जो मूसा और अली भाई थे ये रैकी करने नहीं जाते थे रैकी जब हो जाती थी तो ओजीडब्ल्यू इनको फुटेज वगैरह जा के शेयर करते थे और फिर प्लान बनाया जाता था और डेली बेसिस पर ये रैकी होती थी अब जब यह रैकी हो रही थी इसी बीच में 9th ऑफ अप्रैल को एक लोकल रेजिडेंट था रश्पाल उसके घर में दो से तीन आतंकवादी एम4 राइफल लेके घुसते हैं अब यह आतंकवादी थे कौन यह कंफर्म नहीं हो पाया लेकिन एक चीज कंफर्म हुई कि यह मूसा अली भाई इनमें से कोई नहीं था अब रश्पाल के घर में घुसने के बाद यह फूड ट्रैवल बैग और अंब्रेला मांगते हैं फिर रश्पाल जो था उससे फोन मांगते हैं उसके फोन से whatsapp कॉल करते हैं उर्दू में कहीं पे जा के बात करते हैं और फिर सिम तोड़ के रश्पाल का जो फोन था उसको वापस कर देते हैं और उसके बाद जब जा रहे थे ये लोग तो इन्होंने इलाके के आसपास जितने भी एरिया हैं उनकी जो डायरेक्शन थी वह रश्पाल से पूछी और सारा कुछ पूछने के बाद यह निकल जाते हैं और नेक्स्ट मॉर्निंग यानी कि 10th ऑफ अप्रैल को रश्पाल जो था वह पुलिस को जाकर सारी चीजें बता देता है और इसके साथ-साथ इस टाइम पे और भी छोटी-छोटी इंटेलिजेंस एजेंसीज के पास आ रही थी कि होटल के ऊपर आतंकवादी हमला करने वाले हैं तो इन सारी चीजों की वजह से जम्मू एंड कश्मीर की पुलिस और पैरा मिलिट्री जो थी यह दोनों मिलके दचीगाम निशांत और आसपास के जो लग्जरी होटल थे वहां जॉइंट ऑपरेशन शुरू करके सिक्योरिटी बढ़ा देते हैं फोर्सेस ने सारे जो होटल के जो एग्जिट और एंट्री पॉइंट थे उन पर सर्विलेंस शुरू कर दिया था गेस्ट वेरिफिकेशन होने लगे थे क्विक रिएक्शन टीम जो थी वह स्टैंड बाय पे रख दी गई थी अब इसी टाइम पे एक चीज और निकल के आती है कि प्राइम मिनिस्टर नरेंद्र मोदी जो हैं उनकी जो विजिट होनी थी कश्मीर के अंदर इनॉगरेशन के लिए वह वह कैंसिल कर देते हैं और रीजन बताया जाता है कि कश्मीर का वेदर खराब है इस वजह से यह विजिट जो है वह कैंसिल की जाएगी और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के थ्रू कर ली जाएगी अब इसके कुछ टाइम बाद यह जो होटल था जहां पे मूसा अली भाई इन सब ने टारगेट फिक्स कर दिया था कि होटल के टूरिस्ट पे अटैक करेंगे यह लोग यह प्लान कैंसिल कर देते हैं अब यह प्लान सिक्योरिटी की वजह से कैंसिल हुआ या जो प्राइम मिनिस्टर नरेंद्र मोदी का आना कैंसिल हुआ उसकी वजह से हुआ इसके बारे में कोई क्लेरिटी नहीं है लेकिन होटल का जो टारगेट था जो सबसे पहले फिक्स हुआ था इसको कैंसिल कर दिया जाता है अब इसके लिए यह लोग फिर से रैकी स्टार्ट करते हैं और रैकी करने के बाद चार लोकेशन फाइनल की जाती है जिसमें पहली थी अरु वैली दूसरी थी बेताब वैली तीसरा इन्होंने लोकल अ म्यूज मेंट पार्क जो होते हैं उनको सेलेक्ट किया था और चौथी थी बसरन वैली सारी लोकेशन ऐसी थी जिनमें टूरिस्ट को अटैक किया जाए ताकि यह जो टूरिस्ट आ रहे हैं यह जो इकॉनमी बढ़ रही है इसको इंपैक्ट किया जा सके अब इसके नेक्स्ट डे ये जो चार लोकेशन सिलेक्ट की गई थी इसमें से अ म्यूजमेंट पार्क की जो लोकेशन थी उसको ये लोग हटा देते हैं कैंसिल कर देते हैं और रीजन इसके पीछे यह था क्योंकि इसकी लोकेशन से पहलगाम पुलिस स्टेशन सिर्फ 500 मीटर की दूरी पे था यानी एक-दो मिनट के अंदर ही पुलिस पहुंच सकती थी और जो अरु वैली वाली जो लोकेशन थी उसको भी ये लोग अपने प्लान से ड्रॉप कर देते हैं रीजन यह था कि एक तो यहां पे नेटवर्क की दिक्कत थी दूसरा रोड का कनेक्शन बहुत स्ट्रांग था तो फोर्सेस का आना और लोगों का भाग जाना बहुत आसान था और बेताब वैली में भी सेम इशू था सिक्योरिटी फोर्सेस पास में थी और हमला करने के बाद जो आतंकवादी थे उनका बचके भागने के जो ऑप्शंस थे वह बहुत लिमिटेड थे और फिर ये सारी चीजें कैलकुलेट करने के बाद फाइनली इन्होंने सेलेक्ट किया पहलगाम की बसरन वैली रीजन यह था कि एक तो यहां पे कोई सिक्योरिटी की प्रेजेंस नहीं थी दूसरा टूरिस्ट का जो फुटफॉल था वह बाकियों कंपेरटिवली ज्यादा था यहां पे गाड़ी नहीं पहुंच सकती थी सिर्फ ट्रैकिंग करके या घोड़े से जाया जा सकता था सिक्योरिटी फोर्सेस को आने में भी 30 से 40 मिनट लगते ही लगते हैं सीआरपीएफ की डेल्टा कंपनी 116 बटालियन का जो सबसे करीब बेस था वह 4 से 5 किलोमीटर पे था यह मैप है उसका चारों तरफ से घने जंगल तो हमला करके जंगलों में भागना बहुत आसान था और कोई भी सीसीटीवी कैमरा नहीं था तो फिर यहां से इन्होंने यह जो लोकेशन थी पहलगाम की बायस रन वैली इस लोकेशन को फिक्स कर दिया और इसके लिए प्रिपरेशन स्टार्ट कर दी और जब यह चीज होती है तो इसके नेक्स्ट डे न्यूज आती है कि यूएस के वाइस प्रेसिडेंट इंडिया आ रहे हैं और इस न्यूज के आने की वजह से यह फैसला हुआ कि जब यूएस का वाइस प्रेसिडेंट इंडिया के अंदर होगा उसी बीच में हमला किया जाएगा ताकि पूरे वर्ल्ड में न्यूज बने
[36:36]इसलिए 22 अप्रैल की डेट फिक्स कर दी गई अब जैसे ही डेट फिक्स की जाती है तो बाकी आतंकवादी तो पहले से ही बसरन के एरिया के आसपास थे लेकिन 21 अप्रैल को मूसा और अली भाई जो इतने दिनों से जंगल में छुपे थे उनको ग्रीन सिग्नल मिलता है और दोनों सेम डेट यानी कि 21 ऑफ अप्रैल की रात में कोकर नाग के फॉरेस्ट से निकलते हैं बायसन वैली की तरफ जो रूट यह पकड़ते हैं वह किश्तवार दक्षम लनू चटपाल ऐश मुक्कम यह वाला रूट पकड़ते हैं बायसन की तरफ निकलने के लिए कुछ रिपोर्ट में आपको अवंतीपुरा त्राल सिरी गुवार पहलगाम वाला रूट भी मेंशन मिलेगा लेकिन ज्यादातर रिपोर्ट में किश्तवार वाला ही रूट मेंशन है तो मैंने वही वाला लिया अब यहां से यह लोग चलते हैं और 21 से 22 घंटे लगातार चलने के बाद इस तरीके से इन्होंने ट्रेनिंग की थी कि लगातार चलते हैं और 21 से 22 घंटे लगातार चलने के बाद बायस रन के जो आसपास के जंगल हैं वहां आ के बैठ जाते हैं और वेट करते हैं हमला करने का आदिल ठोकर वहीं सिरी गुवार के पास के एरिया में था तो वह पहले से ही वहां पे था कहने का मतलब है कि अब सारे आतंकवादी बसरन वैली के आसपास के जो जंगल थे वहां आ के बैठ गए थे और घात लगा के इंतजार कर रहे थे अब देखिए पहलगाम जो है वह यह यहां पे है और यहां से 5 से 6 किलोमीटर उबड़ खाबड़ कच्चे रास्ते से आप ऊपर ट्रैक करके जाते हो तो करीब 1 घंटा लगता है और ट्रैक करने के बाद आप यह इस गेट पर पहुंचते हो और जैसे ही इस गेट से आप एंट्री करते हो तो एंट्री करते ही 800 मीटर लंबा और 600 मीटर चौड़ा ग्रीन मैदान दिखता है यही मैदान है बायसन वैली और इसी के आसपास के जंगलों में आतंकवादी छुप के वेट कर रहे हैं तो एक यहां से एंट्री एग्जिट गेट है और एक यहां से एंट्री एग्जिट गेट है इस मैदान का यह जो पूरा एरिया है इसको पहलगाम डेवलपमेंट अथॉरिटी ने ब्रिज बेहेरा के एक आदमी को ₹3 करोड़ में 3 साल के लिए टेंडर में दे दिया था तो उसी ने इस एरिया के अंदर टिकटिंग का सिस्टम किया जिपलाइनिंग स्टार्ट करवाई और इस एरिया के चारों तरफ फेंसिंग लगा के भी सिक्योर किया तो कहने का मतलब है कि इस पूरे एरिया में दो एंट्री एग्जिट गेट है बाकी चारों तरफ फेंसिंग हो रखी है और सिक्योरिटी जो है वह अमरनाथ यात्रा के टाइम यहां प्रोवाइड होती है बाकी के टाइम सिक्योरिटी तभी आती है जब टूर ऑपरेटर या होटल वाले इनफॉर्म करते हैं अथॉरिटीज को कि टूरिस्ट ज्यादा हो गए हैं तब वो सिक्योरिटी आती है अब इसके बाद 22 सेकंड ऑफ अप्रैल 2025 का दिन स्टार्ट होता है 9:00 बजे बायसन वैली की एंट्री खुलती है और पहलगाम से टूरिस्ट अलग-अलग होटलों से अपनी-अपनी लोकेशन से बायसन वैली की तरफ पहुंचना शुरू करते हैं और धीरे-धीरे करके 1000 टिकट बिक चुके थे
[38:55]मतलब कि 1000 लोगों का फुटफॉल इस एरिया में हो चुका था और अब इसके बाद दोपहर के 1:30 बज चुके थे और तब तक करीब 400 टूरिस्ट बचे थे इस लोकेशन के अंदर बाकी सारे जितने थे वह वापस जा चुके थे किसी को भी बिल्कुल आईडिया नहीं था कि आगे क्या होने वाला है अब इसके 15 मिनट बाद यानी कि 1:45 पे पहला आतंकवादी मोस्ट प्रोबेबली आदिल ठोकर जो था वही घुसता है देखिए यहां पे जो मैं आपको जितनी भी चीजें बताऊंगा इस पूरे सीन में ये कहना मुश्किल होगा कि इधर से मूसा गया या इधर से आदिल गया क्योंकि इस चीज का कंफर्मेशन नहीं हो पाया कि आदिल किधर से घुसा मूसा किधर से घुसा सिर्फ इतना कंफर्म हुआ है कि मूसा अली भाई और आदिल वहां पे थे जिन्होंने बंदूकें चलाई थी और कुछ आतंकवादी जो थे वह जंगल में एज अ बैकअप थे कुछ ऐसे थे जिनके हाथ में बंदूक नहीं थी लेकिन वह भीड़ में मिले हुए थे इसलिए एक्चुअल में उस समय वहां पे कितने आतंकवादी थे यह कहना मुश्किल था लेकिन अली भाई मूसा और आदिल ठोकर यह कंफर्म थे वहां पे जिन्होंने बंदूक उठा के लोगों को मारा तो इस तरीके से एक आतंकवादी कश्मीरी फेरन पहन के यह इस तरफ से ग्राउंड में एंट्री करता है इसकी वगैरह जो कश्मीरी फेरन इसने पहन रखी थी उसके अंदर छुपा रखी थी तो आराम से पब्लिक के बीच में घुस के इधर यह जो एंट्री एग्जिट गेट है इसकी तरफ जाने लगता है जैसे ही यह एंट्री एग्जिट गेट पे पहुंचता है यह बंदूक निकाल के हवा में फायरिंग करना स्टार्ट कर देता है किसी आदमी पे नहीं चलाता है हवा में कंटीन्यूअसली फायरिंग करता है और भीड़ को जो मेन एंट्री एग्जिट गेट है उसकी तरफ ले जाने की कोशिश करता है अब जैसे ही भीड़ मेन एंट्री एग्जिट गेट की तरफ इकट्ठा होने लगती है तो वहीं साइड से जंगलों की तरफ से फेंस जो लगी हुई थी वहां से कूद के दो आतंकवादी मिलिट्री ट्रैक सूट पहन के गन वगैरह लेके खड़े हो जाते हैं पब्लिक सोच रही थी कि सिक्योरिटी वाले हैं तो देखिए ऐसे ही कुछ आतंकवादी आए रैंडम उन्होंने फायर करके लोगों को मार दिया ऐसा नहीं था यह एक वेल प्लान ट्रैप था जिसमें जो दोनों एंट्री एग्जिट पॉइंट थे उनको प्रॉपर ब्लॉक किया गया और यह जितने टूरिस्ट थे इनको चारों तरफ से घेरा गया और एरिया बहुत बड़ा था तो जब यह सारी चीजें हो रही थी तो कुछ लोग जो दूसरी तरफ थे उनको पता ही नहीं चल पाए कि दूसरी तरफ क्या चल रहा है वह आराम से अपना जिपलाइनिंग वगैरह कर रहे थे अब भीड़ जब मेन एंट्री एग्जिट पॉइंट पे पहुंचती है तो वह जो दोनों आतंकवादी है जो सिक्योरिटी वाले जिनको लोग समझ रहे थे वह भी गोली चलाना स्टार्ट कर देते हैं फिर यह सारी भीड़ को इधर यह जो भेलपुरी और चाय और फूड की जो स्टॉल थी इस पॉइंट पे भीड़ को इकट्ठा करते हैं औरतों और आदमियों को अलग करते हैं यह सारी चीजें जो करी इन्होंने यह मेन एंट्री एग्जिट जो गेट था उससे 50 मीटर के अंदर ही करी अब आदमी और औरतों को अलग करने के बाद ये आदमियों से पूछते हैं कि हिंदू है कि नहीं और फिर जो नहीं बताते हैं उनसे कलमा पढ़वाते हैं देबाशीष भट्टाचार्य के पास जैसे ही आतंकवादी आए उन्होंने कलमा पढ़ दिया तो उनको छोड़ के आतंकवादी दूसरी तरफ चला जाता है एक क्रिश्चियन वहीं बगल में खड़ा था उससे पैलेस्टीन का जो इशू था उस पे बोलने को कहा गया कुछ की पेंट उतरवाई गई और फिर जो हिंदू टूरिस्ट थे उनको क्लोज रेंज से गोली मार दी गई अब इसी टाइम पे आदिल हुसैन जो पोनी राइडर था यह टूरिस्ट जो थे उनको घुमाने लेकर आया था आदिल के एक टूरिस्ट को आतंकवादी गोली मारता है तो आदिल उससे बहस करने लगता है उसकी गन छीनने लगता है तो आतंकवादी आदिल हुसैन को भी तीन गोली चला के उसकी भी जान ले लेते हैं इनके पास एम4 राइफल थी एके 47 थी इनकी बॉडी और कैप पे गोप्रो कैमरा लगे हुए थे तो यह सारी चीजें रिकॉर्ड कर रहे थे और जिन लोगों की जान चली गई थी उनके साथ सेल्फी ले ले के अपने फोन में रख रहे थे और भी बहुत सारी चीजें हैं जो मैं बता नहीं पाऊंगा और आप सुन भी नहीं पाओगे तो यह सारी चीजें यह लोग 20 से 25 मिनट तक इन्होंने की इन सारी चीजों में 26 लोगों की जान गई उनके नाम ये है और फिर जब यह सारी चीजें हो गई तो इसके बाद इन्होंने भीड़ में से ही दो फोन लिए जबरदस्ती छीने उनसे और उन फोन को लेकर लेफ्ट साइड वाली जो वॉल की फेंस थी उसके ऊपर से कूद के जंगलों में भाग गए अब यह तो भाग गए लेकिन वहां साइड पे चारों तरफ लोग चिल्ला रहे थे अपनी फैमिली के लिए हेल्प मांग रहे थे लेकिन दूर-दूर तक हेल्प ही नहीं थी कोई फिर जैसे-तैसे करके 2:30 बजे पुलिस के पास पहली बार इंफॉर्मेशन पहुंचती है कि बायस रन वैली में आतंकवादियों ने यह सब कर दिया है पहलगाम पुलिस स्टेशन के एसएचओ शॉक हो जाते हैं और इनको बायस रन वैली पहुंचने में टाइम लगता है तो इन्होंने जल्दी मदद भिजवाने के लिए कश्मीर की सारी यूनियन के जो जनरल प्रेसिडेंट अब्दुल वाहिद थे इनको इनफॉर्म करते हैं कि यह सारी चीजें हो गई हैं और जल्दी से जल्दी हेल्प भेजो और अब्दुल वाहिद को जैसे ही पता चलता है वह पोनी ओनर एसोसिएशन के प्रेसिडेंट रईस अहमद भट्ट को बता देते हैं इनके भी फोन के नेटवर्क नहीं आ रहे थे तो ये अकेले ही बायस रन वैली की तरफ भागने लगते हैं और जो रास्ते में जो इनको एक-दो लोग मिलते हैं उनको अपने साथ ले लेते हैं और जंगल से शॉर्टकट लेक के फोर्सेस से पहले पहुंच जाते हैं कहने का मतलब है कि इतनी भीड़ में सिर्फ पांच से छह लोग ही पहुंच पाए थे मदद के लिए यह प्रोफेशनल भी नहीं थे तो यह लोग पीठ वगैरह पे बैठा के जिस तरीके से रेस्क्यू किया जा सकता था वह कर रहे थे फिर जैसे-तैसे करके एसएचओ रियाज जो है वह पहुंचते हैं और फिर सीआरपीएफ की 116 बटालियन के कमांडेंट राजेश कुमार जो थे वह अपनी 25 लोगों की टीम के साथ पैदल भागते-भागते अटैक साइट पे पहुंच जाते हैं और फिर रेस्क्यू ऑपरेशन स्टार्ट होता है हेलीकॉप्टर वगैरह आते हैं अब जैसे ही हमला होता है इसके थोड़ी देर बाद टीआरएफ जो थी वह हमले की जिम्मेदारी लेती है और रीजन बताती है कि जो डोमिसाइल इशू करे जा रहे हैं इसलिए अटैक किया अब इसके बाद यह जो पूरा एरिया था उसको सैनिटाइज किया जाता है टूरिस्ट जो थे जिनके साथ यह सारी चीजें हुई थी उनके स्टेटमेंट लिए जाते हैं स्केच बनवाए जाते हैं क्रैकडाउन स्टार्ट होते हैं ओजीडब्ल्यू जो थे उनको पकड़ा जाता है उनके स्टेटमेंट लिए जाते हैं और लोग जो इवॉल्व थे उनको पकड़ के कैसे प्लानिंग हुई उसको जोड़ा गया और जो-जो ओजीडब्ल्यू और आतंकवादी पकड़े जा रहे थे उनके जो घर थे उनको आग लगा के डिस्ट्रॉय किया जा रहा था अब इसमें सबसे इंपॉर्टेंट चीज यह है कि टीआरएफ ने तो ऑलरेडी जिम्मेदारी ले ली थी इस पूरे हमले की लेकिन 25th ऑफ अप्रैल 2025 को यूनाइटेड नेशन सिक्योरिटी काउंसिल ने प्रेस स्टेटमेंट इशू किया जिसमें इस पहलगाम हमले को क्रिटिसाइज करना था तो इस प्रेस स्टेटमेंट का जो फर्स्ट ड्राफ्ट था उसमें डायरेक्ट द रेजिस्टेंस फ्रंट टीआरएफ का नाम लिखा हुआ था लेकिन जैसे ही टीआरएफ का नाम इसमें लिखा हुआ देखा पाकिस्तान ने पाकिस्तान ने इसका अपोज किया पाकिस्तान ने कहा कि यूएन की इस ऑफिशियल प्रेस स्टेटमेंट से टीआरएफ का नाम हटना चाहिए यह उस स्टेटमेंट की ओरिजिनल कॉपी है आप पॉज करके देख लेना कहीं भी टीआरएफ का नाम मेंशन नहीं है चाइना ने भी यूएन की 1267 सैंक्शन कमेटी में टीआरएफ को ब्लैकलिस्ट करने वाला जो इंडिया का प्रपोजल था उसको रोक दिया चाइना के डिप्लोमेट चवांग ली ने पाकिस्तान के कहने पे टीआरएफ का नाम लिस्ट से हटा दिया और बहुत ही फक्र से पाकिस्तान ने नाम हटाने के बाद अपने पार्लियामेंट में बताया कि हमने टीआरएफ का नाम नहीं आने दिया अब देखिए सर्च ऑपरेशन अभी भी चल रहा है ओजीडब्ल्यू पकड़े जा रहे हैं लेकिन मेन जो उस दिन बंदूकों पे जिनके हाथ थे जिन्होंने मारा था मूसा अली भाई आदिल ठोकर यह सब बचे हुए हैं इनको अभी भी इंडियन फोर्सेस किश्तवार के जंगलों में ढूंढ रही है ऑपरेशन चल रहा है जैसे-जैसे और डिटेल्स आएंगी मैं आपको बता दूंगा लास्ट में एक बार फिर से आपको बता दूं डर्मा टच के सेलिसिलिक 2% फेस वॉश को जरूर ट्राई करिएगा थैंक यू



