[0:12]उस जंगल में आजकल सूखा चल रहा था जिस कारण जंगल में दाने और पानी की भी बहुत कमी हो चुकी थी। सब पक्षियों को दाने की तलाश में बहुत दूर जाना पड़ता था। मीनू चिड़िया और चमकीलो कवे का घोसला भी पास पास ही था। उन दोनों का एक एक बच्चा था जो अभी बहुत छोटे थे। इसलिए मीनू चिड़िया और चमकीलो कवि दोनों ही बहुत परेशान थीं कि बच्चों को अकेला छोड़ कैसे दूर दाना ढूंढने जाया करें। ऐसे ही वह एक दिन बैठे होती हैं। चमकीलो, अब तो हमारे जंगल से दाना बिल्कुल खत्म हो चुका है। अब हम कहीं दूर कैसे जा सकती हैं दाने की तलाश में। मेरा जुजू और तुम्हारा जुगनू अभी बहुत छोटे हैं। हम इन्हें अकेला भी नहीं छोड़ सकते। हां मीनू मैं भी बहुत परेशान हूं और मेरे पास तो आज खाने को भी कुछ नहीं है। भूख भी बहुत लगी हुई है। तुम्हारे पास अगर कुछ है तो दे दो। चमकीलो, मेरे पास भी कुछ भी नहीं है। वैसे मेरे दिमाग में एक बात आ रही है। अगर तुम मान लो। हां हां मीनू बताओ अगर दाने के बारे में है तो जल्दी से बताओ। मेरा तो बुरा हाल है। हम दोनों के बच्चे ही छोटे हैं। हम इन्हें अकेला नहीं छोड़ सकते। हम ऐसा करते हैं कि एक दिन मैं जाया करूंगी दाने की तलाश में और तुम बच्चों का ख्याल रखा करना। और मैं तुम्हारे लिए भी दाना ले आया करूंगी और एक दिन तुम चली जाया करना और तुम मेरे लिए भी दाना ले आया करना और मैं बच्चों का ध्यान रखा करूंगी। ऐसे हमें भोजन भी मिल जाया करेगा और हमें बच्चों की चिंता भी नहीं होगी। वैसे बात तो तुमने ठीक ही है तो फिर आज ऐसा करो तुम ही चली जाओ। मैं बच्चों का ख्याल रख लेती हूं। और फिर मीनू चिड़िया दाना ढूंढने चली जाती है। मीनू चिड़िया दाना ढूंढते ढूंढते जंगल के बाहरी हिस्से में चली जाती है। वहां से उसे कुछ चने के दाने मिलते हैं। और वह उन्हें लेकर आ जाती है। शाम हो चुकी थी। मीनू चिड़िया आधे दाने खुद रख लेती है और आधे चमकीलो कवी को दे देती है। और फिर रात हो जाती है। मीनू चिड़िया और चमकीलो कवी दोनों ही अपने-अपने घोसले में सो जाती हैं। और फिर सुबह हो जाती है। चमकीलो आज तुम्हारी बारी है दाना ढूंढने जाने की। तुम चली जाओ और मैं बच्चों का ख्याल रखती हूं। और फिर चमकीलो कवि दाना ढूंढने चली जाती है। आप दोनों आराम से बैठो मैं बस अभी थोड़ा सा सूखा घास लेकर आती हूं। मैंने थोड़ी सी मरम्मत करनी है घोसले की मैं अभी आ जाऊंगी। आप दोनों ने कोई शरारत नहीं करनी है। और फिर मीनू चिड़िया भी चली जाती है। यार जुजू चलो हम थोड़ा सा खेल कर आते हैं। नहीं जुगनू मेरी मम्मा मुझे डांटेगी। मैं नहीं जाऊंगा। एक तो तुम डरपोक बहुत हो। हम कौन सा ज्यादा देर लगाएंगे। हम जल्द ही लौट आएंगे। बल्के हम ऐसा करते हैं कि झरने की तरफ चलते हैं। तुम्हें पता है झरने पर तितलियां भी आई होती हैं। मेरा तो उन्हें देखने का बहुत मन करता है। क्या तुम्हारा नहीं करता? मन तो मेरा भी बहुत करता है। तो फिर चलो हम जल्दी वापस आ जाएंगे। तुम्हारी मम्मा के भी आने से पहले। और फिर जुजू भी जुगनू की बातों में आ जाता है और वह जुगनू के साथ झरना देखने चला जाता है। वह दोनों उड़ते-उड़ते एक पेड़ पर बैठ जाते हैं। जुजू तुम यहां बैठो मैं अभी आता हूं। रास्ता देखकर कहीं हम गलत दिशा में तो नहीं आ गए। और जुगनू वहां से चला जाता है और जुजू वहीं एक पेड़ पर बैठ जाता है। जुजू को वहां बैठे काफी समय बीत गया था, लेकिन जुगनू अभी तक वापस नहीं आया था। दूसरी तरफ मीनू चिड़िया जब सूखा घास लेकर वापस आती है तो वहां बच्चों को ना देख बहुत परेशान हो जाती है। यह जुगनू और जुजू ना जाने कहां चले गए हैं। मैं उन्हें मना भी करके गई थी कि बाहर नहीं जाना। वह फिर भी चले गए। और फिर मीनू चिड़िया उन्हें ढूंढने चली जाती है। वह सारे जंगल में उन्हें ढूंढती है, लेकिन उसे बच्चे कहीं से भी नहीं मिलते। फिर वह जंगल से थोड़ा बाहर जाती है तो उसे एक पेड़ पर जुजू बैठा दिखाई देता है। वह जल्दी से उसके पास जाती है। जुजू जुगनू कहां है? मम्मा जुगनू पता नहीं कहां चला गया। मम्मा जुगनू मुझे जबरदस्ती अपने साथ लाया था। मैं उसके साथ नहीं आ रहा था। अब वह पता नहीं कहां चला गया है। मीनू चिड़िया बहुत परेशान थी। अब अंधेरा भी होने वाला था। वह जुगनू को कहां ढूंढती। वह उसी परेशानी में जुजू को साथ लेकर वापस आ जाती है। जब वापस आती है तो चमकीलो कवि पहले से आई होती है। मीनू तुम कहां चली गई थी। मैं तो कब से आई हुई हूं और यह जुगनू कहां है। मीनू तुम कुछ बोल क्यों नहीं रही। मेरा जुगनू कहां है? मीनू चिड़िया डरते-डरते चमकीलो कवी को सारी बात बता देती है। तुमने मेरे जुगनू के साथ क्या किया है? जुजू तुम मुझे बताओ तुम दोनों ने मेरे जुगनू के साथ क्या किया है? आंटी आप हमारा विश्वास करें। हमने जुगनू को बहुत ढूंढा है, लेकिन वह नहीं मिला हमें। मीनू ये तुमने मुझसे कौन सा बदरा लिया है। मैं तुम्हें छोडूंगी नहीं। अगर सुबह तक मेरा जुगनू ना मिला। और फिर ऐसे ही रात हो जाती है। मीनू चिड़िया और चमकीलो कवी दोनों ही अपने-अपने घोसले में जाग रही थी। अगर मेरा जुगनू ना मिला तो मीनू मैं तुमसे बदला जरूर लूंगी। तुमने मुझसे मेरा बेटा छीना। जो तकलीफ तुमने मुझे दी है। मैं भी तुम्हें यही तकलीफ दूंगी। मीनू चिड़िया भी सारी रात जागकर प्रार्थना करती है कि जुगनू मिल जाए। और फिर सुबह हो जाती है। मीनू चिड़िया सुबह होते ही जुगनू को ढूंढने चली जाती है। जबकि चमकीलो कवी मीनू के घोसले में जाकर जुजू को उठाकर जोर से नीचे फेंक देती है। जुजू का सर नीचे पड़े एक पत्थर पर लगता है और वह वहीं मर जाता है। अब पता चलेगा इस मीनू चिड़िया को जिस तकलीफ से मैं गुजर रही हूं। अब यह भी गुजरेगी उसी तकलीफ में। मीनू चिड़िया सारे जंगल में फिर से देखती है कि कहीं से उसे जुगनू मिल जाए। लेकिन उसे कहीं से भी जुगनू नहीं मिलता और वह नाराज होकर वापस लौट आती है। मीनू चिड़िया जब वापस अपने घोसले में आती है तो जुजू तो मरा पड़ा था और चमकीलो आराम से अपने घोसले में बैठी थी। चमकीलो, यह तुमने क्या कर दिया? मैंने तो तुम्हारे जुगनू को नहीं मारा। वह तो कहीं खो गया है। तुमने तो मेरे बेटे को मुझसे हमेशा हमेशा के लिए छीन लिया। तुम्हें तो यह आशा रहेगी कि कभी तो जुगनू तुम्हें मिल जाएगा। लेकिन तुमने तो मेरी सारी आशाएं ही खत्म कर दी। तुम मुझे मार देती, लेकिन मेरे मासूम बेटे पर तुम्हें जरा भी ध्यान आई। चमकीलो, मैं यह जंगल ही छोड़कर जा रही हूं। लेकिन यह प्रार्थना जरूर करती रहूंगी कि तुम्हें तुम्हारा बेटा जल्द से जल्द मिल जाए और तुम्हें यह एहसास हो कि तुमने मेरे साथ कितना गलत किया है। और मीनू चिड़िया तड़पती हुई वहां से चली जाती है और वह चमकीलो उसे तो बहुत शांति मिल रही थी। मीनू को ऐसा रोता देखकर मीनू चिड़िया दूसरे जंगल चली जाती है। रात भी होने वाली थी और मीनू चिड़िया एक पेड़ पर बैठ जाती है। मीनू चिड़िया को जो दुख आज मिला था वह इस दुनिया का सबसे बड़ा दुख था। वह बस अपने बेटे को याद करके रोए जा रही थी। अब रात भी बहुत गहरी हो चुकी थी और मीनू चिड़िया की सिसकियां पूरे जंगल में गूंज रही थी। मेरा बेटा कितना तड़पा होगा जब उस जालिम कवी ने उसे मारा होगा। काश काश समय फिर से वापस चला जाए और मैं अपने बेटे को कभी उस जालिम के पास छोड़कर ना जाऊं। काश ऐसा हो जाए। मीनू चिड़िया रो रही थी। फिर अचानक से उसे अपने सामने वाले पेड़ के पीछे किसी पक्षी की परछाई दिखाई देती है। मीनू को एकदम ऐसा लगा जैसे वह जुगनू कव्वा हो। मीनू चिड़िया तुरंत वहां जाती है। वहां तो सच में जुगनू कव्वा छुपा बैठा था। कौन है कौन है आप मुझे मत मारे। जुगनू मैं हूं मीनू और तुम यहां कैसे? आंटी मैं कल आपके जाने के बाद जुजू को जबरदस्ती अपने साथ ले आया। मैं जुजू को एक जगह बिठाकर खुद सैर करने चला गया। उड़ते-उड़ते मैं इस जंगल में आ गया। यहां पर एक चील मेरे पीछे लग गई और मैं यहां छुपकर बैठ गया। अब मुझे यहां से निकलने में डर लग रहा है। कहीं वह चील कहीं छुपी ना बैठी हो और वह मुझे खा ना जाए। जुगनू बेटा, आपको पता है हम कल से आपकी वजह से कितने परेशान हैं। तुम चलो मेरे साथ। मैं तुम्हें तुम्हारी मम्मा के पास छोड़कर आती हूं। और फिर मीनू चिड़िया उस छोटे कवे को अपने साथ लेकर चली जाती है। मम्मा मैं आ गया। मीनू आंटी मुझे ले आई। मेरा बच्चा तुम कहां चले गए थे? फिर जुगनू कव्वा अपनी मां को सारी बात बताता है। चमकीलो तो अब मीनू से नजरें नहीं मिला पा रही थी। मीनू आंटी जुजू कहां है? बेटा जुजू वहां चला गया है। यहां से कभी भी लौटकर नहीं आ सकता। ऐसा कहते हुए मीनू चिड़िया वहां से चली जाती है। मम्मा जुजू कहां चला गया है। हमें उसे ढूंढना चाहिए। और चमकीलो के पास अपने बेटे को जवाब देने के लिए कोई शब्द नहीं था।

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