Thumbnail for Wilt Disease | fusarium wilt treatment | bacterial wilt disease | nematodes control | Agriculture by Indian Organic Journey

Wilt Disease | fusarium wilt treatment | bacterial wilt disease | nematodes control | Agriculture

Indian Organic Journey

16m 56s3,063 words~16 min read
Auto-Generated

[0:00]दोस्तों अभी फसलों में विल्ट की समस्या बहुत ज्यादा देखने को मिल रही है। बिल्कुल स्वस्थ फसल, बिल्कुल हरी-भरी फसल एक दम से सूख रही है। मुरझा रही है। बहुत ज्यादा किसानों का नुकसान हो रहा है। तो ये विल्ट की समस्या क्या है? कितने टाइप से विल्ट की समस्या आती है? कौन-कौन सी फसलों में विल्ट की समस्या ज्यादा देखने को मिलेगी? यानी सेंसिटिव क्रॉप कौन-कौन सी है? उसके साथ ही इसकी पहचान क्या होती है? रासायनिक तरीके से आप कैसे कंट्रोल कर सकते हैं? और ऑर्गेनिक खेती कर रहे हैं तो आप विल्ट को कैसे कंट्रोल कर सकते हैं? पहले से ही क्या-क्या आपको सावधानी रखनी है? यानी कि पहले से आपको क्या-क्या कार्य करने हैं, जिससे कि आपके प्लॉट में विल्ट की समस्या देखने को ही नहीं मिले। बहुत ही इंपॉर्टेंट जानकारी इस वीडियो में शेयर करूंगी दोस्तों, विल्ट की समस्या सबसे खतरनाक होती है। क्योंकि एक बार अगर किसी भी क्रॉप में विल्ट का अटैक हो गया तो बार-बार आपकी अलग क्रॉप में भी सेम वही जगह पे अटैक देखने को मिल सकता है। तो इसको इफेक्टिव रूप से कंट्रोल करने के लिए सावधानियां बहुत ही जरूरी ध्यान रखना है। तो संपूर्ण जानकारी के लिए वीडियो के अंत तक जरूर बने रहें। दोस्तों, अगर विशेष तौर से आप सब्जी वर्गीय खेती करते हैं, ये वीडियो आपके लिए बहुत ज्यादा इंपोर्टेंट है। बिना स्किप किए कंप्लीट जरूर देखें। नमस्कार दोस्तों, मैं हूं अनीता सिंह आप देख रहे हैं आपका अपना YouTube चैनल इंडियन ऑर्गेनिक जर्नी। दोस्तों वीडियो शुरू होने से पहले चैनल को सब्सक्राइब जरूर कीजिए और बेल आइकॉन को प्रेस कीजिए ताकि इसी तरीके की नॉलेज फुल जानकारी आपको सबसे पहले मिलती रहे। सबसे पहले दोस्तों कि विल्ट की समस्या कितने टाइप की होती है? यानी कितने टाइप से आपकी फसल पे विल्ट की समस्या आ सकती है, इसका अटैक हो सकता है? तो फंगल विल्ट यानी कि फंगस के अटैक की वजह से विल्ट की समस्या हो सकती है और फंगस में भी स्पेशली फ्यूजेरियम फंगस का अटैक सबसे ज्यादा फसलों में देखने को मिलता है। सेकंड है बैक्टीरियल विल्ट, बैक्टीरिया के अटैक की वजह से विल्ट की समस्या आती है। इसकी अलग-अलग कई प्रजातियां होती हैं। लेकिन आप मेन रूप से समझिए कि ये बैक्टीरिया के अटैक की वजह से विल्ट की समस्या होती है। थर्ड है दोस्तों निमेटोड्स के अटैक की वजह से।

[2:08]अगर नेमाटोड का अटैक है तो आपकी फसल में विल्ट का अटैक होता है। अब दोस्तों कि विल्ट की समस्या को आप फसलों में कैसे पहचान कर सकते हैं? इसकी क्या पहचान होती है? तो पहचान के लिए पहले आप इसका कार्य समझिए कि विल्ट का अटैक होता है तो क्या रीजन होता है? किस तरीके से ये फंगस है या बैक्टीरिया है या नेमाटोड्स हैं कार्य करते हैं, जिसकी वजह से आपकी फसल खराब होती है? फंगस का अटैक होगा या फिर बैक्टीरिया का अटैक होगा जड़ों में होता है। निमेटोड्स का भी जड़ों में होता है। तो जड़ों से लेकर के ऊपर पत्तियों तक खाना पहुंचाने का कार्य पानी या भोजन या न्यूट्रिशन जो भी पौधे के ऊपर तक पहुंचाएगा वो पहुंचाया जाता है जाइलम वेसेल्स के थ्रू जाइलम वाहिकाएं यानी जाइलम आप नलियां कह सकते हैं। उनसे खाना ऊपर तक पहुंचाया जाता है। अब फंगस की वजह से अटैक होगा, फ्यूजेरियम फंगस का अटैक होगा तो फंगस जड़ों में लगती है, जड़ें गला देती हैं। और जो ये नलियां होती है जाइलम नलियां होती है, जाइलम वेसल्स होती है, इनको ये जड़ों से ऊपर तने की तरफ जैसे ये बढ़ेगा, इसका अटैक बढ़ेगा, इसका इंफेक्शन बढ़ेगा तो उनको जाइलम वेसल्स को ये ब्लॉक कर देती है। जिससे कि ऊपर पत्तियों तक खाना, पानी, न्यूट्रिशन कुछ भी नहीं पहुंच पाता है और पत्तियां सूखने लग जाती है। बैक्टीरिया की वजह से भी पहले जड़ों में अटैक होगा, जड़ें खराब हो जाती हैं। स्पेशली सबसे पहले वाइट रूट्स खराब होती हैं। आप उखाड़ कर के देखेंगे तो वाइट रूट पौधे में या तो गली हुई मिलेंगी या ब्राउन कलर की मिलेंगी या मिलेंगी ही नहीं, क्योंकि पूरी तरीके से जब अटैक होता है तो जड़ें बिल्कुल गल कर के खराब हो जाती है। तो ये इसका रीजन होता है। बैक्टीरिया का अटैक होगा तो बैक्टीरिया भी जाइलम वेसल्स पर अटैक करेगा। जाइलम वेसल्स को ब्लॉक कर देता है। इसी वजह से अगर बैक्टीरिया की वजह से और फंगस की वजह से अटैक है तो नई पत्तियों में सबसे पहले इसका कारण देखने को मिलेगा। नई पत्तियां अलसा जाती है, नीचे की तरफ बिल्कुल मुरझा जाएंगी और धीरे-धीरे सूखने लग जाती है और ऐसे कर के पूरा पौधा ही सूख जाता है और ये अटैक बहुत जल्दी होता है। और नेमाटोड की वजह से अगर जड़ों में अटैक है, निमेटोड का तो गांठें मिलेंगी आपको। और स्पेशली गांठें जड़ के अंदर मिलेंगी। जड़ के बाहर नहीं मिलेंगी दोस्तों इस चीज का आप जरूर ध्यान रखिए।

[4:27]निमेटोड का अटैक हमेशा रूट के अंदर होता है। रूट के अंदर गांठे होती है जिसे रूट से जो जाइलम वेसल्स होती है, वहीं से ये ब्लॉक कर देता है और वहां से खाना वगैरह पानी जो भी न्यूट्रिशन वगैरह वो पौधे में ऊपर तक नहीं पहुंच पाता है और पौधा सूखने लगता है। इसकी वजह से भी पौधा अलसा आता है शुरू में और फिर धीरे-धीरे पत्तियों पे सबसे पहले इसका सिम्टम्स देखने को मिलेगा। पत्तियां सूख जाती है अलसा जाती है और फिर उसकी शाखाएं और फिर धीरे-धीरे तनाव इस तरीके से सूख जाता है पौधा। विल्ट चाहे फंगस की वजह से हो रहा है, बैक्टीरिया की वजह से हो रहा है, निमेटोड्स की वजह से हो रहा है। सिम्टम्स सेम तरीके से आपको दिखा देगा ऊपर की साइड लेकिन रूट में अगर आप देखेंगे तो निमेटोड का गांठें दिखाई देंगी। बैक्टीरिया और फंगस का अगर अटैक है तो फिर आपको अलग तरीके से पहचान करना होगा। उसके लिए पहचान होगी दोस्तों आप जब भी पौधा सूख जाए तो पौधे को उखाड़िए और तने को थोड़ा सा तिरछा आप कट कर दीजिए। काट कर के एक कांच के गिलास में पानी ले लीजिए या फिर आप बड़ी बकेट में ले लीजिए ताकि अच्छे से आप उसको देख सकें। उस तने से अगर सफेद कलर का चिपचिपा गाढ़ा सा लिक्विड निकल रहा है और थोड़ी सी लंबे समय तक अगर निकल रहा है तो ये बैक्टीरियल विल्ट है, बैक्टीरिया के अटैक की वजह से होता है बैक्टीरिया के जो जीवाणु के रस होता है वो निकलता है। तो इस तरीके से आप पहचान कर सकते हैं और फंगस की वजह से अटैक है तो ये आपको चिपचिपा वाइट कलर का गाढ़ा सा ये लिक्विड नहीं निकलेगा। विल्ट की समस्या कौन-कौन सी फसलों में ज्यादा देखने को मिल सकती है? यानी ज्यादा अटैक विल्ट का कौन-कौन सी फसलों में होता है? तो विशेष तौर से सब्जी वर्गीय फसलों में इसका अटैक ज्यादा होता है। अभी की बात की जाए तो तरबूज खरबूज में हर साल किसानों का बहुत ज्यादा नुकसान होता है। तरबूज खरबूज के अलावा मिर्च, टमाटर, आलू, ककड़ी, खीरा, लौकी और कपास में भी इसका अटैक होता है। तो इन फसलों में ये बहुत ज्यादा सेंसिटिव है। इनमें विल्ट की समस्या सबसे ज्यादा देखने को मिलती है। अब दोस्तों कि विल्ट की समस्या अगर आप अपनी क्रॉप में देख रहे हैं तो इफेक्टिव रूप से आप कैसे कंट्रोल कर सकते हैं? ऑर्गेनिक और रासायनिक दोनों तरीके डिस्कस करूंगी। रासायनिक का दोस्तों मैं सबसे पहले डिस्कस करूंगी क्योंकि अटैक हो गया तो फिर रासायनिक तरीका ही आपको अपनाना है। रासायनिक में ही दवाएं आपको यूज करनी है। ऑर्गेनिक में आप प्रिवेंटिव यूज करेंगे तभी आपको रिजल्ट मिलेगा। तो वो मैं सावधानी में डिस्कस करूंगी। सबसे पहले अगर फंगस की वजह से अगर अटैक है तो तीन फंगीसाइड जो बहुत ही इफेक्टिव है विल्ट के लिए। इन फंगीसाइड की दोस्तों आपको ड्रेचिंग करनी है, क्योंकि ये जड़ों की समस्या है जड़ों में अटैक होता है। सिम्टम्स देखने को मिलेगा ऊपर लेकिन समस्या है जड़ की। तो इसलिए जड़ों में आपको इसको देना है। बेस्ट रिजल्ट मिलेगा आपको ड्रेचिंग करेंगे आप ड्रिप्स के भी बजाय अगर ड्रेचिंग करेंगे एक-एक पौधे में तभी आपको ज्यादा अच्छा रिजल्ट मिलेगा। रोको फंगीसाइड सबसे पहले आप लीजिए। अटैक होते ही तुरंत आप पहले इसकी ड्रेचिंग कीजिए। थायोफिनेट मिथाइल 70% पाउडर फॉर्म में आता है। अब दोस्तों थायोफिनेट मिथाइल रोको के अलावा और भी बहुत सारी कंपनियों का आने लग गया है तो आप उनका भी यूज कर सकते हैं।

[7:40]रोको नाम से ही आता है। और भी कंपनियों का अलग-अलग नाम से आता है। आप टेक्निकल कंटेन्ट ध्यान रखिए कि थायोफिनेट मिथाइल 70% पाउडर फॉर्म में आता है। उसकी आपको ड्रेचिंग करनी है। 1 केजी एक एकड़ में आपको यूज करना है। उसके बाद में अटैक अगर हो गया तो सबसे पहले आप इसकी ड्रेचिंग करेंगे। इसके बाद में नेक्स्ट आप इसी की ड्रेचिंग ना कर के दूसरे फंगीसाइड की ड्रेचिंग करेंगे लगभग 15 से 20 दिन बाद में। वो रहेगा दोस्तों आप बाविस्टिन फंगीसाइड ले सकते हैं या एलियट फंगीसाइड ले सकते हैं। तो बाविस्टिन फंगीसाइड में आता है कार्बेंडाजिम 50% ये भी पाउडर फॉर्म में आता है। इसका आप इस्तेमाल करेंगे 1 केजी 1 एकड़ के लिए और एलियट फंगीसाइड में आता है फोसेटाइल एलुमिनियम 80% ये भी पाउडर फॉर्म में आता है। ये बायर का आता है। ये भी आप 1 केजी 1 एकड़ के लिए यूज करेंगे ड्रेचिंग के लिए। रोको या फिर आप एलियट या फिर बाविस्टिन इन तीनों में से कोई सा भी एक फंगीसाइड की ड्रेचिंग करेंगे। उसके 15 से 20 दिन बाद में आप दूसरी ड्रेचिंग करेंगे। अटैक हो गया तो अटैक नहीं है तो प्रिवेंटिव में आप किसी भी एक फंगीसाइड का आप ड्रेचिंग कीजिए ताकि आपकी क्रॉप में अटैक नहीं हो। सेकंड है दोस्तों कि अगर बैक्टीरिया की वजह से अटैक है तो आपको सबसे बेस्ट यूज करना है। बै जो ऐसा फंगीसाइड जो कि फंगीसाइड का भी कार्य करें और बैक्टीरिया साइड का भी काम करे। ऐसे में दो ही सबसे बेस्ट है। धानुका कंपनी के आता है एक आता है कासु का बी नाम से, जिसमें आता है कासु का माइसिन 3% कासु का बी में और दूसरा आता है कोनी का फंगीसाइड जो भी ये भी फंगीसाइड और बैक्टीरिया साइड का कार्य करता है। इसमें आता है कासु का माइसिन 5% तो कासु का बी के बजाय अगर कोनी का मिल जाए तो ये बेस्ट है आप इसका यूज कर लीजिए क्योंकि इसमें कासु का माइसिन 5% है प्लस कॉपर ऑक्सीक्लोराइड भी आता है 45%। तो इन दोनों में से जो भी आपको मिल जाए वो यूज कर लीजिए। अटैक हो गया तो बेस्ट रहेगा कि आप कोनिका का यूज करें। कासु का भी ले सकते हैं आप 400ml लिक्विड फॉर्म में आता है एक एकड़ के लिए और कोनिका आप यूज कर सकते हैं 300 ग्राम एक एकड़ के लिए। ड्रेचिंग आपको करनी है। अगर विल्ट की समस्या निमेटोड के अटैक की वजह से हैं तो आपको प्रिवेंटिव में ही दवाएं यूज करनी है। अटैक होने के बाद में निमेटोड का अटैक अगर बहुत ज्यादा हो गया तो आप कोई भी दवाई यूज कर लीजिए कितनी भी महंगी कीजिए कंट्रोल करना बहुत ज्यादा मुश्किल है। कंट्रोल होता ही नहीं है विशेष तौर से सब्जी वर्गीय फसलों में कंट्रोल नहीं होता है। तो प्रिवेंटिव में ही आपको सबसे बेस्ट तरीका रहेगा कि जब भी आप नर्सरी से प्लांटेशन कर दें उसके 7 दिन बाद में ही आपको कोई भी निमेटिसाइड यूज करना है। अगर आप नर्सरी से प्लांटेशन नहीं किया है, डायरेक्ट प्लॉट में ही आपने सीड लगाए हैं तो जब भी फसल में तीन लीफ आ जाए, तीन पत्तियां आ जाए उसी टाइम आपको बेस्ट निमेटिसाइड आपको अपनी फसल में ड्रिप से ही आप चला दीजिए। ड्रेचिंग कर देंगे तो बहुत अच्छा है, अदर वाइज आप ड्रिप से ही चला देंगे तो निमेटोड का अटैक आपकी फसल में नहीं होगा। इसके लिए बेस्ट निमेटोड के लिए वेलम प्राइम बहुत अच्छा है क्योंकि वेलम प्राइम में टेक्निकल कंटेन्ट आता है फ्लूओपायरम 34.48% एससी फॉर्म में आता है। अब दोस्तों ये फ्लूओपायरम बायर के ही लूना एक्सपीरियंस फंगीसाइड में आता है टेबुकेनाजो के कॉम्बिनेशन में फ्लूओपायरम प्लस टेबुकेनाजो का कॉम्बिनेशन आता है बायर के लूना एक्सपीरियंस में। यानी कि ये एक फंगीसाइड का कार्य भी करता है। तो इसलिए आप बेस्ट रहेगा कि वेलम प्राइम अवेलेबल हो जाए थोड़ा सा महंगा जरूर है लेकिन इसका रिजल्ट बहुत अच्छा है। अन्य फंगस जनित डिजीज भी कंट्रोल होंगे उसके साथ-साथ निमेटोड को भी कंट्रोल कर लेगा। तो आप इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।

[11:24]250ml प्रिवेंटिव में आप 250ml एक एकड़ में आप ड्रिप से चला दीजिए या फिर आप ड्रेचिंग कर दीजिए। अगर वेलम प्राइम आपको अवेलेबल नहीं हो पा रहा है तो सेकंड ऑप्शन आपके लिए रहेगा अमा का निमेटिज ये भी बहुत अच्छा है। रिजल्ट बहुत अच्छा मिलता है। आप इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन प्रिवेंटिव में ही निमेटोड के लिए आपको दवाई यूज करनी है। आपको कोई सी भी यूज करें। पहले ही आप इसका इस्तेमाल कर लें। अब दोस्तों कि अगर आप ऑर्गेनिक खेती कर रहे हैं या फिर रासायनिक खेती कर रहे हैं तब भी एक ही कल्चर से आप अपनी क्रॉप में इन तीनों समस्याओं से बच सकते हैं। विल्ट की चाहे फंगस की वजह से अटैक हो रहा हो या फिर बैक्टीरिया की वजह से या निमेटोड्स की वजह से। एक ही कल्चर आप अपनी क्रॉप में चला कर के इस समस्या से बिल्कुल मुक्त हो सकते हैं। कल्चर क्या है दोस्तों ऑलरेडी मैं अपने वीडियो शेयर कर चुकी हूं दो-तीन वीडियो मेरा आ चुके हैं वो आप डिटेल से देख ले। इसमें अगर मैं शेयर करूं तो एक कल्चर आपको तैयार करना है वो है ट्राइकोडरमा लेना है लिक्विड फॉर्म वाले यूज करने दोस्तों। पाउडर फॉर्म में इसमें यूज नहीं करना है इस कल्चर में। क्योंकि लिक्विड फॉर्म वाले का रिजल्ट बहुत अच्छा मिलता है। ट्राइकोडरमा सूडोमोनास और थर्ड लेना है बाय निमेटोन। जिसमें पेसीलोमाइसिस लीला सिनास आता है तो इन तीनों का आपको कल्चर तैयार करना है। 200 लीटर पानी में 5-500ml ट्राइकोडरमा का 500ml सूडोमोनास 500ml बाय निमेटोन तीनों को आप डाल दीजिए। 2 केजी आप गुड़ डाल दीजिए। जब भी आप नर्सरी से प्लांटेशन कर रहे हैं या फिर सीड आपने डायरेक्ट लगाए तो सीड जर्मिनेट हो गए। उसी समय आप कल्चर तैयार कर लीजिए ताकि आगे कोई समस्या नहीं आए। प्रिवेंटिव ही आप ये कल्चर चला दें। ये कल्चर तैयार कीजिए। जैसे ही ये कल्चर 7 दिन 10 दिन में आप कभी भी चला सकते हैं इस कल्चर को। जैसे ही आप चलाएं अपनी क्रॉप में तो 20 लीटर की एक बाल्टी लीजिए। अलग से निकाल दीजिए। और जो बचा हुआ कल्चर है 180 लीटर पानी जो कल्चर बच गया 180 लीटर। इसमें आप दोस्तों एजिटोबैक्टर मिला सकते हैं, एनपीके कंसोर्टियम मिला सकते हैं। पीएसबी मिला सकते हैं, केएमबी मिला सकते हैं और इवन कि सरसों की खली भी मिला सकते हैं। न्यूट्रिशन अलग से पौधे को मिल जाएगा वो अलग है और ये खर्चा भी कम हो गया और ऑर्गेनिक तरीके से आपकी फसल भी स्वस्थ रहेगी। आपकी मिट्टी भी सही रहेगी।

[13:50]फंगस जनित रोग भी कंट्रोल होंगे और निमेटोड का भी कंट्रोल हो जाएगा। ये कल्चर आप चलाइए। आपकी क्रॉप में तीन बार इस कल्चर को आप तैयार कर के चला सकते हैं। 30-30 दिन के गैप से आप चलाएंगे। अब जो 20 लीटर आपने अलग से निकाल लिया था पीएसबी या केएमबी या फिर सरसों की खली कुछ भी मिलाने से पहले आपने जो निकाल लिया अलग से उसको आप फिर से इस 200 लीटर के टैंक में डाल दीजिए। पानी से फिल कर दीजिए। फिर से आप 2 केजी गुड़ डाल दीजिए। फिर से ये कल्चर तैयार हो गया। फिर से आप 30 दिन बाद में इस कल्चर को चला दीजिए। तीन बार आपने क्या यूज किया? 5-500ml सिर्फ तीन बोतल यूज किया आपने। बहुत ही कम खर्चा हुआ और विल्ट तीनों टाइप की आपकी कंट्रोल हो जाएगी। विल्ट की समस्या ही आपकी फसल में देखने को नहीं मिलेगी। ये कल्चर बहुत अच्छा है। सावधानी में क्या करना है दोस्तों? विल्ट की समस्या एक बार किसी भी रीजन से आ रही है। एक बार अटैक हो गया तो क्रॉप में बार-बार कई सालों तक अटैक देखने को मिलता है। तो इसके लिए सिर्फ आपको दो काम करने हैं। एक तो ये कल्चर चलाना है। सेकंड जैसे अभी फसलें मई-जून में आपके प्लॉट खाली हो जाएंगे। तो बारिश से पहले अपने खेत की जुताई कर देनी है। मई या जून मई में लास्ट तक तरबूज खरबूज की फसलें चलती है। तो जैसे ही प्लॉट खाली हो खेत की जुताई कर के छोड़ दीजिए। तेज गर्मी में तेज धूप में जितने भी हानिकारक बैक्टीरिया है, जीवाणु है, जितने भी हानिकारक फंगस है या निमेटोड्स हैं सब कंट्रोल हो जाएंगे। आपकी फसल में अटैक नहीं होगा सब मर जाएंगे। तो इस तरीके से आप अपनी फसल को स्वस्थ रखिए। प्रिवेंटिव काम कर के अपनी फसलों को बचाइए इन रोगों से। बारिश होगी जैसे ही आपने पहले जुताई कर दी, बारिश हुई तो दोस्तों बारिश का पानी बह के भी आपका दूसरा बाहर नहीं जाएगा। दूसरे के प्लॉट में नहीं जाएगा। पानी के साथ में जो फर्टिलाइजर वगैरह बह जाता है वो नुकसान नहीं होगा। साथ ही आपकी मिट्टी का उपजाऊपन बढ़ता है, क्योंकि वाटर होल्डिंग कैपेसिटी बढ़ती है। खरपतवार वगैरह के जैसे कोई सीड वगैरह वो भी खत्म हो जाते हैं। खरपतवार इससे बहुत ज्यादा नियंत्रित होती है तो इसलिए आप ये काम अपने प्लॉट में जरूर कर दें गर्मियों के समय में। दोस्तों विल्ट को कंट्रोल करने के लिए आपको प्रिवेंटिव में ही कार्य करने होते हैं जिससे कि ये समस्या आपके प्लॉट में आए ही नहीं और भी बहुत सारे कार्य हैं जैसे कि आपकी फसल में ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर ज्यादा से ज्यादा यूज कीजिए। न्यूट्रिशन की पूर्ति के लिए आप ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर ही यूज कीजिए। ज्यादा से ज्यादा हो सके। उसके साथ ही फसलों में वाटर मैनेजमेंट आप प्रॉपर तरीके से करें। पानी बहुत ज्यादा भी फसलों में नहीं चलाना है। नमी आप प्रॉपर तरीके से बनाए रखें लेकिन बहुत ज्यादा पानी का भराव फसलों के बीच में नहीं रहना चाहिए। इस चीज का भी आप जरूर ध्यान रखिए। आज की जानकारी दोस्तों कैसी लगी है कमेंट करके आप मुझे जरूर बताइए। कल्चर यूज कीजिए। ऑर्गेनिक की तरफ थोड़ा सा ज्यादा कार्य कीजिए। जानकारी अच्छी लगी है वीडियो को लाइक कीजिए। चैनल को सब्सक्राइब नहीं किया है तो प्लीज आप चैनल को सब्सक्राइब जरूर कीजिए ताकि मेरी सारी लेटेस्ट अपडेट आप तक सबसे पहले पहुंचती रहे और ज्यादा से ज्यादा किसान दोस्तों तक शेयर जरूर करें। धन्यवाद।

Need another transcript?

Paste any YouTube URL to get a clean transcript in seconds.

Get a Transcript